इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध में बुरी तरह से पिटने के बाद भी ईरान के इस्लामी शासकों की अक्ल ठिकाने नहीं आ रही है। हां, उस युद्ध का एक असर ये अवश्य हुआ कि ईरान के लोगों के अंदर सरकार के प्रति जो असंतोष है, उसके फूटने के डर से अब इस्लामवादी सरकार ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 2022 कि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए 47 वर्षीय ईरानी-कुर्द किसान रेजगर बेगजादेह बाबामिरी को एक नए आरोप में फांसी की सजा दे दी है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, बाबामिरी को राष्ट्रव्यापी “महिला, जीवन, स्वतंत्रता” विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। अब उनकी बेटी जीनो ने दावा किया है कि उनके पिता के खिलाफ सरकार ने एक नया आरोप जोड़ दिया है और वो है-सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की साजिश रचने का।
जीनों का आरोप है कि उनके पिता के खिलाफ पहले जिन मामलों में जांच चल रही थी, उसमें तो ये शामिल नहीं था। लेकिन, अचानक से उन पर अल्लाह के खिलाफ युद्ध, धरती पर भ्रष्टाचार, इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ दुष्प्रचार, शत्रुतापूर्ण समूहों के साथ सहयोग और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने जैसे कई आरोप जोड़कर मृत्युदंड सुना दिया गया।
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जबरन आरोप कबूल करवाया
जीनो का आरोप है कि उसके अब्बा को ईरान की पुलिस ने कस्टडी में रखकर प्रताड़ित किया। उन्हें मारा-पीटा, शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी, लंबे समय तक एकांतवास में रखा और नकली फांसी तक। जीनो कहती हैं कि उनके अब्बा ने इसी साल अप्रैल में जेल से ही एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने साथ किए गए अत्याचारों के बारे में बताया था। जीनो ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है।
इस साल 612 फांसी की सजा
नार्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के अनुसार, अक्टूबर 2025 में ईरान में कम से कम 98 लोगों को फांसी दी गई, जिससे 2025 में कुल 612 फांसी हो चुकी हैं – जो पिछले वर्ष की तुलना में 119% अधिक है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ईरान-इज़राइल संघर्ष के बाद दमन तेज हुआ है, जिसे अधिकारियों द्वारा असहमति को कुचलने और नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है। HR के निदेशक महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने कहा, “इस्लामिक गणराज्य कमजोर स्थिति में है और अपने लोगों को डराने के लिए फांसी का सहारा ले रही है।”

















