
ईरान पर इजरायली हमले के बाद के हालात
इजरायल ईरान युद्ध के बीच दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइलों की बौछार कर रहे हैं। इसी क्रम में एक बार फिर से इजरायली वायु सेना ने ईरान के मध्य भाग में मिसाइल भंडारण और प्रक्षेपण अवसंरचना स्थलों पर हमलों की एक श्रृंखला शुरू कर दी है। ये हमले ईरान के मध्य हिस्से के शहर कोम में किए गए हैं।
ईरान की मीडिया ने ही एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर दिखाया गया है कि कोम में एक अपार्टमेंट इमारत पर शनिवार की सुबह एक मिसाइल अटैक किया गया है। इसी के साथ ईरान में इजरायली हमलों से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 722 हो गया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बीते 8 दिन में ईरान पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 722 लोग मारे गए हैं और 2,546 घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में 285 नागरिक और 198 सैन्यकर्मी शामिल हैं, जबकि 239 अन्य की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि इजरायली हमले से ईरान के 31 प्रांतों में से 25 बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
दूसरी ओर ईरान इजरायली हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार मानता है और इसीलिए उसने अपने ही देश में रहने वाले अमेरिकी नागिरकों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इजरायली हमलों के बीच सैकड़ों की संख्या में अमेरिकी नागरिक जमीनी सीमाओं के जरिए देश छोड़कर चले गए हैं। वाशिंटन पोस्ट ने केबल के हवाले से कहा है कि फिलहाल अमेरिकी राजनयिक इन मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही अखबार ने इस बात का भी दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार के कारण अमेरिकियों पर खतरा मंडराने लगा है।
ईरान को इस बात का पूरा अंदाजा है कि इस वक्त ईरानी एयरस्पेस इजरायल के कंट्रोल में है। ऐसे में वह ईरान के किसी भी अवांक्षित प्लेन को मार गिरा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायली अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी कि वह यूरोपीय देशों के साथ बातचीत के लिए जिनेवा के लिए उड़ान भरने वाले हैं।
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान से शुक्रवार को पश्चिमी देशों के साथ वार्ता में शामिल होने और अपने यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को रोकने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि परमाणु शून्य संवर्धन, बैलिस्टिक मिसाइलों, ईरान की क्षमताओं को सीमित करने और मध्य पूर्व क्षेत्र को अस्थिर करने वाले आतंकी संगठनों की फंडिंग करने जैसे ठोस मुद्दों पर बातचीत के रास्ते पर वापस लौटने की आवश्यकता है। इस बीच ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी ने भी कहा है कि हम लोग ईरान के साथ चल रही बातचीत को जारी रखने के इच्छुक हैं।