जब सारे रास्ते बंद हो जाएं, तब ईश्वर का शरण ही असली समाधान है
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होम जीवनशैली

जब सारे रास्ते बंद हो जाएं, तब ईश्वर का शरण ही असली समाधान है

आचार्य प्रेमानंद महाराज कहते हैं: जीवन में कभी निराश न हों, ईश्वर की शरण में आशा मिलती है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jun 18, 2025, 12:17 pm IST
inजीवनशैली
प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज

आचार्य प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जीवन में निराश होने की जरूरत नहीं है, यहां हर किसी के लिए जगह बची हुई है। यह वाक्य न केवल हमें दिलासा देता है, बल्कि यह एक गहरी आध्यात्मिक सच्चाई को भी उजागर करता है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, कितनी ही बार असफलता का सामना क्यों न करना पड़े, आशा और आस्था का दीपक बुझने नहीं देना चाहिए।

हर व्यक्ति के जीवन में एक ऐसा मोड़ आता है, जब उसे लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा। सारे प्रयास व्यर्थ लगते हैं, सपने टूटते हुए नजर आते हैं, और मन थक कर बैठ जाना चाहता है। लेकिन आचार्य जी कहते हैं जब सभी रास्ते बंद हो जाएं, जब मन थक जाए, और जीवन हारने लगे, तब ईश्वर की शरण में चले जाओ। वहीं से शुरू होता है सच्चा बल, वहीं से मिलती है नई ऊर्जा। ईश्वर की शक्ति अमोघ है अर्थात वह कभी व्यर्थ नहीं जाती। जब मनुष्य पूरे समर्पण और विश्वास के साथ प्रभु की शरण में आता है, तो वह एक ऐसी शक्ति से जुड़ता है जो संसार की हर बाधा को पार कर सकती है। यह शक्ति हमें भीतर से बदलती है, हमें अपने ही आत्मबल से परिचित कराती है और वहीं से शुरू होती है हमारी असली जीत।

इसलिए अगर जीवन में अंधकार छा जाए, तो डरिए नहीं। जान लीजिए कि अभी भी एक रास्ता बाकी है, एक स्थान बाकी है — और वह स्थान है ईश्वर की शरण। वहाँ न कोई अस्वीकृति होती है, न कोई हार। वहाँ केवल प्रेम है, विश्वास है, और अंततः विजय है। आइए, हम सब यह स्वीकार करें कि हार जीवन का अंत नहीं है, बल्कि एक सीख है, एक संकेत है कि अब समय आ गया है ईश्वर से जुड़ने का। जब तक जीवन है, तब तक आशा है। और जब तक प्रभु हैं, तब तक कोई भी हार अंतिम नहीं होती।

Topics: Acharya Premananda MaharajPremanand ji Maharaj ashramPremanand ji Maharaj ageप्रेमानंद महाराजआचार्य प्रेमानंद महाराज
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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