कोटद्वार, उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी केस में तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आज अदालत ने उम्र कैद की सजा सुना दी। तीन साल पुराने इस मामले पर उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश की नजरें कोर्ट के इस फैसले का इंतजार कर रही थीं।
सुनवाई के दौरान सुरक्षा के मद्देनज़र कोर्ट परिसर के 200 मीटर के दायरे को पुलिस ने सील कर दिया गया। सिर्फ वकील, केस से जुड़े पक्ष और जरूरी स्टाफ को ही अंदर जाने की अनुमति थी। पूरे शहर को छावनी में तब्दील किया गया था। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार कोर्ट की स्थानीय अदालत दोषियों को सजा का ऐलान कर दिया। अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है।
कोर्ट में सुनवाई जब चल रही थी, सैकड़ों लोग कोर्ट परिसर से कुछ दूरी पर नारेबाजी कर, दोषियों को फांसी की दिए जाने की मांग कर रहे थे। मुकदमा अपराध संख्या 1/22 धारा 302 /201/ 354 ए आईपीसी व 3(1)d अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम बनाम पुलकित आर्य आदि ( अंकिता भंडारी मर्डर केस) में माननीय न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोटद्वार महोदय द्वारा पहले अभियुक्त पुलकित आर्य को धारा 302 आईपीसी में कठोर आजीवन कारावास व ₹50000 जुर्माना, धारा 201 आईपीसी में 5 वर्ष कठोर कारावास 10000 रुपए जुर्माना धारा 354 ए आईपीसी में 2 वर्ष का कठोर कारावास ₹10000 जुर्माना व धारा 3(1)d आईटीपीए एक्ट में 5 वर्ष का कठोर कारावास वह ₹2000 जुर्माना की सजा सुनाई है

दूसरे अभियुक्त सौरभ भास्कर व अभियुक्त अंकित गुप्ता को धारा 302 आईपीसी में आजीवन कठोर कारावास व 50000 रुपए जुर्माना धारा 201 आईपीसी में 5 वर्ष कठोर कारावास व ₹10000 जुर्माना व 3(1)d आईटीपीए एक्ट में 5 वर्ष का कठोर कारावास व ₹2000 जुर्माना की सजा सुनाई है। इन सभी को पीड़िता के परिजनों को भी 4 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने का आदेश कोर्ट ने दिया है।
मामला क्या था?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी जिले की रहने वाली थीं और ऋषिकेश के वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। 18 सितंबर 2022 को रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता को चीला नहर में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी थी। अंकिता पर ग्राहकों को ‘विशेष सेवाएं’ देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उसने विरोध किया था। इस घटना के बाद पुलकित आर्य, जो भाजपा नेता विनोद आर्य का पुत्र हैं, को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
न्यायिक प्रक्रिया
इस मामले की सुनवाई लगभग दो साल आठ महीने तक चली, जिसमें अभियोजन पक्ष ने 47 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने अंतिम बहस सुनने के बाद आज 30 मई को सजा सुनाने की तारीख निर्धारित की थी।
इस मामले की राजनीतिक गलियारों में भी खासी चर्चा रही, राज्य की धामी सरकार ने घटना के तुरंत बाद से सख्त रुख अपनाए रखा और इस मामले में पीड़ित परिवार को हर वक्त सहायता के लिए सुलभ रखा हुआ था। सरकार ने पीड़िता के परिवार की इच्छा के अनुसार न्याय के लिए वरिष्ठ वकील उपलब्ध करवाए। स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़िता के परिवारजनों के साथ कई बार बातचीत भी की थी।
इस मामले में सजा होने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोर्ट ने आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है, इससे पीड़िता के परिजनों को इंसाफ मिला है। हमारी सरकार हमेशा अंकिता के परिजनों के खड़ी रही है।
सरकार का रुख
इस पूरे मामले में धामी सरकार ने न केवल संवेदनशीलता दिखाई, बल्कि विलंब के बजाय निर्णय की गति को चुना। घटना के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजना, SIT का गठन कर जांच को तेज़ और पारदर्शी बनाना, आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाना, 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार कराई।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक मदद दी, साथ ही अंकिता के भाई और पिता को सरकारी नौकरी देकर एक व्यावहारिक सहानुभूति का परिचय दिया। सरकार ने तीन बार वकील बदले ताकि केस में कोई कसर न रह जाए और सरकारी वकील की दमदार पैरवी से बार-बार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज होती रहीं।
यह फैसला बताता है कि मुख्यमंत्री धामी के राज में न कोई अपराधी बच सकता है, न ही कोई पीड़ित अकेला पड़ सकता है। उत्तराखंड की जनता आज भरोसे से कह सकती है कि उनकी सरकार उनके साथ है
इस फैसले से यह भी साबित हुआ कि धामी सरकार के राज में बेटियों की गरिमा और न्याय व्यवस्था दोनों सुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री ने साबित किया है कि वे न तो दबाव में झुकते हैं और न ही संवेदनाओं को अनसुना करते हैं। उन्होंने कहा था—“न्याय में देरी नहीं होगी और अपराधियों के लिए कोई रहम नहीं होगी”, और आज वही हुआ।

















