पंजाब की चिट्ठी: ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष की ‘शल्यवाद’ रणनीति: क्या राष्ट्रहित से बड़ी हो गई राजनीति?
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पंजाब की चिट्ठी: ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष की ‘शल्यवाद’ रणनीति: क्या राष्ट्रहित से बड़ी हो गई राजनीति?

महाभारत संग्राम में एक सिद्धांत निकल कर आया ‘शल्यवाद।’ माद्रीपुत्र नकुल-सहदेव के मामा माद्रा (मद्रदेश) के राजा शल्य थे।

Written byराकेश सैनराकेश सैन
May 28, 2025, 02:39 pm IST
inभारत
Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर

महाभारत संग्राम में एक सिद्धांत निकल कर आया ‘शल्यवाद।’ माद्रीपुत्र नकुल-सहदेव के मामा माद्रा (मद्रदेश) के राजा शल्य थे। महाभारत में पाण्डवों के पक्ष में युद्ध करने आए शल्य का दिल अतिथि सत्कार से जीत कर दुर्योधन ने छल से उन्हें अपने खेमे में कर लिया। उन्होने कर्ण का सारथी बनना स्वीकार किया और कर्ण की मृत्यु के पश्चात् युद्ध के अंतिम दिन कौरव सेना का नेतृत्व भी किया और युधिष्ठिर के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए। वे कर्ण के सारथी तो बन गये किन्तु उन्होंने युधिष्ठिर को यह भी वचन दिया कि वे चाहे खड़े कौरव सेना के साथ दिखेंगे परन्तु युद्ध पाण्डवों के पक्ष में ही लड़ेंगे। इसके लिए उन्होंने अपने वचनों से कौरवों को ही हतोत्साहित करना शुरू किया। अपने ही लोगों का मनोबल तोडऩे की नीति ‘शल्यवाद’ कहाती है। वर्तमान में आपरेशन सिंदूर के बाद भारत का विपक्ष भी इसी शल्यवादी की नई परिभाषा लिखता दिखाई दे रहा है। भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए आपरेशन सिंदूर के दौरान विपक्षी दलों ने चाहे देश व सरकार के साथ एकजुटता जताने की बात कही परन्तु पूरे आपरेशन के दौरान विपक्षी नेताओं की कंटीली जिव्हा देश को मर्माहत करती रही।

‘आपरेशन सिंदूर ’ को लेकर सरकार को समर्थन देने वाली कांग्रेस ने ‘आपरेशन’ के स्थगित होने के बाद जो कुछ कहा है वह सबकुछ उसकी एकजुटता की प्रतिबद्धता के विपरीत दिखाई देता है। आपरेशन स्थगित होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने जो कहा है वह दुश्मन देश को सांत्वना देने वाला था। इसलिए वहां के मीडिया ने उसे हाथों हाथ लपका। खड्गे ने ‘ऑपरेशन सिंदूर ’ को एक छोटी-मोटी झड़प बताया वहीं राहुल गांधी ने विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री द्वारा ‘आपरेशन सिन्दूर’ को लेकर दिये बयानों पर पलटवार करते हुए जो कहा उससे उनकी अपनी और कांग्रेस पार्टी की छवि ही कमज़ोर हुई। कांग्रेस नेता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की एक कथित टिप्पणी को लेकर कहा कि यह ‘पाप’ है और ‘सिंदूर का सौदा’ है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा विदेश मंत्री को जवाब देना चाहिए। राहुल ने तो यहां तक पूछा कि हमने कितने भारतीय विमान गंवा दिए क्योंकि पाकिस्तान को पहले से पता था। उन्होंने कहा कि देश को सच जानने का पूरा हक है।

कांग्रेस और राहुल गांधी ने जयशंकर के एक बयान का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया है कि पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमलों से पहले, भारत सरकार ने पाकिस्तान को इस बारे में सूचित किया था।हालांकि, विदेश मंत्रालय ने ऐसे दावों का खंडन किया था कि विदेश मंत्री जयशंकर ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने से पहले पाकिस्तान को चेतावनी दी थी।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी ने विदेश मंत्री के बयान पर कुछ सवाल पूछे हैं। यह बहुत अहम है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अलग-अलग देशों में एक बात दोहराते रहे कि उन्होंने युद्ध रुकवाने के लिए मध्यस्थता की। ट्रंप ने एक बहुत खौफनाक बात यह भी बोली कि उन्होंने भारत को व्यापार रोकने की धमकी देकर युद्ध रुकवाया। यानी ‘सिन्दूर का सौदा’ होता रहा, प्रधानमंत्री चुप रहे। विदेश मंत्री के मुंह से एक शब्द नहीं निकल रहा है।

‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के स्थगित होने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र बीकानेर के पलाना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब हर आतंकी हमले की पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और यह कीमत पाकिस्तान की सेना और उसकी अर्थव्यवस्था चुकाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान के साथ न ट्रेड होगा, न टॉक, अब तो सिर्फ पीओके पर बात होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार पाकिस्तान को सीधे चेताया और भविष्य में आतंकी गतिविधियों पर आर-पार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने नाल एयरबेस को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी परन्तु वह इस एयरबेस को रत्तीभर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाया। पाकिस्तान एक बात भूल गया कि अब मां भारती का सेवक मोदी यहां सीना तानकर खड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मोदी का दिमाग ठंडा रहता है लेकिन लहू गर्म रहता है और अब तो मोदी की नसों में गर्म सिंदूर बह रहा है। उन्होंने साफ कहा कि भारतीयों के खून से खेलना पाकिस्तान को अब महंगा पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भावनाओं को स्वयं रचित कविता में किया-

जो सिंदूर मिटाने निकले थे,

उन्हें मिट्टी में मिलाया है।

जो हिंदुस्तान का लहू बहाते थे,

उनसे हर कतरे का हिसाब चुकाया है।

जो सोचते थे भारत चुप रहेगा,

आज वो घरों में दुबके पड़े हैं।

जो अपने हथियारों पर घमंड करते थे,

आज वो मलबे के ढेर में दबे हुए हैं।

यह शोध-प्रतिशोध का खेल नहीं,

यह न्याय का नया स्वरूप है।

यह ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ है।

यह सिर्फ आक्रोश नहीं है,

यह समर्थ भारत का रौद्र रूप है।

यह भारत का नया स्वरूप है।

पहले घर में घुसकर किया था वार,

अब सीधा सीने पर किया है प्रहार।

आतंक का फन कुचलने की,

यही नीति है, यही रीति है,

यही भारत है, नया भारत है।

मोदी ने बीकानेर में देशवासियों को संबोधित करते हुए जो कहा, उस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री से पूछा कि ‘आपका खून हमेशा कैमरे के सामने ही क्यों खौलता है?’ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी जी, हल्के भाषण देना बंद कीजिए। आपने भारत के सम्मान के साथ समझौता किया है। आपने ट्रंप के आगे झुककर भारत के हितों का त्याग क्यों किया? आतंकवाद पर पाकिस्तान के बयान का आपने भरोसा क्यों कर लिया? इससे पहले कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर फिल्मों की तरह खोखले डायलॉग का सहारा लिया है।

देश में एक तरफ सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जब विश्व का दौरा कर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तथा भारत की आतंकवाद के प्रति नीति और पाकिस्तान द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रति किये जा रहे दुष्प्रचार का जबाव देने निकले हुए हैं, ऐसे समय में देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस और उसके नेताओं के जो बयान आ रहे हैं वह देशहित में नहीं। यह विपक्ष की शल्यवादी नीति नहीं तो और क्या है? दुश्मन देश पाकिस्तान विपक्षी दलों के नेताओं विशेषतया कांग्रेस व उसके नेताओं द्वारा दिए बयानों को आधार बनाकर अपने हित में उनका प्रयोग कर रहा है। लगता है कि शायद कांग्रेस को यह आशंका है कि राजनीतिक रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता का श्रेय मोदी व उनके सहयोगी भाजपा लेगी पर क्या कांग्रेस यह बताने का प्रयास करेगी कि वे 1971 में पाकिस्तान पर हुई भारत की एतिहासिक जीत का श्रेय इंदिरा गांधी को क्यों देते रहे हैं? क्यों उसका इको सिस्टम श्री अटलबिहारी वाजपेयी के मुंह से इंदिरा को जबरन ‘दुर्गा’ कहलवाता रहा है? काठ की हाण्डी एक बार आंच पर चढ़ती है, बार-बार नहीं, शल्यवाद भी अब दोबारा चलने वाला नहीं है।

(डिस्क्लेमर: स्वतंत्र लेखन। यह लेखक के निजी विचार हैं; आवश्यक नहीं कि पाञ्चजन्य उनसे सहमत हो।)

Topics: ‘ऑपरेशन सिंदूरभारत-पाकिस्तान सीमा संघर्षराहुल गांधी बयानकांग्रेस और शल्यवादपाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमलासिंदूर का सौदाकांग्रेस की आलोचनाडोनाल्ड ट्रंपविदेश मंत्री एस जयशंकरशल्यवादमहाभारत युद्ध नीति
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