नैनीताल में वित्त आयोग की बड़ी बैठक : पर्यटन और उद्योग संगठनों ने रखीं विकास संबंधी अहम मांगें
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नैनीताल में वित्त आयोग की बड़ी बैठक : पर्यटन और उद्योग संगठनों ने रखीं विकास संबंधी अहम मांगें

नैनीताल में 16वें वित्त आयोग की बैठक में पर्यटन व उद्योग संगठनों ने बुनियादी ढांचे, सब्सिडी, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण पर अहम सुझाव रखे।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
May 21, 2025, 04:18 pm IST
in उत्तराखंड

नैनीताल । भारत के 16 वें वित्त आयोग ने नैनीताल के नमः होटल में पर्यटन क्षेत्र, उद्योग संघों और व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित की। आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में आयोग की सदस्य एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, सौम्या कांति घोष, सचिव ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव केके मिश्रा और संयुक्त निदेशक पी. अमरूथावर्षिनी उपस्थित थे। इस बैठक का उद्देश्य राज्य में आर्थिक विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करना तथा उनसे जुड़े सुझाव प्राप्त करना था।

पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी। होटल एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के वेद प्रकाश साह ने मसूरी, नैनीताल और अन्य पर्यटक स्थलों के आसपास बढ़ती जनसंख्या के कारण बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव को उजागर किया। उन्होंने मसूरी और नैनीताल को स्मार्ट और सतत हिल स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए एक समग्र मास्टर प्लान तैयार करने की सिफारिश की, जिसमें वर्षा जल संचयन, ठोस कचरा प्रबंधन, केबल कार जैसे पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधनों और PPP मोड में पार्किंग जैसी सुविधाओं को शामिल किया जाए। साथ ही, इन हिल स्टेशनों के इर्द-गिर्द पर्यटन सर्किट विकसित करने का भी सुझाव दिया गया, ताकि उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों में इन मॉडलों को दोहराया जा सके। उन्होंने स्थानीय वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण और पारंपरिक पर्यटन स्थलों से परे पर्यटन के विस्तार पर भी बल दिया।

नैनीताल होटल एसोसिएशन के दिग्विजय सिंह बिष्ट ने सड़क, रेल और हवाई संपर्क को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन पलायन को रोकने में सहायक हो सकता है और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए दो-लेन सड़कों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखंड की झीलों और प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए समर्पित धनराशि आवंटित करने का प्रस्ताव रखा।

एस्ट्रो-टूरिज्म क्षेत्र के राम आशीष राय ने उत्तराखंड में “नक्षत्र सभा” की सफलता का उल्लेख करते हुए भूतिया गांवों और दूरदराज क्षेत्रों को “डार्क नाइट” जोनों के रूप में संरक्षित करने का सुझाव दिया।

ट्रेक द हिमालयास के राकेश पंत ने रोमांचक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पारंपरिक धार्मिक ट्रेकिंग मार्गों के पुनरुद्धार और वन संरक्षण की बात कही। ओम कल्याण ग्रुप के सचिन त्यागी ने वैलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए PPP मोड में एक कौशल विकास अकादमी की स्थापना का सुझाव दिया।

टिहरी क्रूज के विजय सिंह बिष्ट ने पलायन रोकने में पर्यटन की भूमिका को रेखांकित किया और झीलों में क्रूज़ पर्यटन, पर्यटक स्थलों तक बाईपास रोड और दिल्ली से दूरस्थ क्षेत्रों तक रेलवे कनेक्टिविटी की मांग रखी।

उद्योग के प्रतिनिधि ने टैक्स हॉलिडे और संतुलित औद्योगिक विकास की आवश्यकता बताई। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ़ उत्तराखण्ड के प्रतिनिधि पंकज गुप्ता ने ब्लॉक स्तर पर कौशल संस्थानों की स्थापना, आपदा बीमा कोष और विनियमन में ढील जैसे सुझाव दिए। उन्होंने लॉजिस्टिक पार्क और आपदा-रोधी ढांचे के विकास की भी सिफारिश की।

कुमाऊँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि अशोक बंसल ने राज्य में औद्योगीकरण की उच्च लागत को उजागर करते हुए केंद्र सरकार की पुरानी सब्सिडी योजनाओं की बहाली, कर छूट और ₹5000 करोड़ के विशेष औद्योगिक फंड की मांग की। साथ ही एस॰ए॰एम॰यू के हरेंद्र गर्ग ने पहाड़ी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता में संशोधन, GST रिफंड की पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा संस्थानों के विकास पर जोर दिया।

CII के हर्षित गुप्ता ने नए औद्योगिक क्षेत्रों, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), DIC की पहुंच में विस्तार और आपदा प्रबंधन नीति में MSMEs को शामिल करने की सिफारिश की। वहीं लघु उद्योग भारती के  राहुल देवदंड ने “ग्रीन बोनस”, बजट में “हिल इंडेक्स” और पहाड़ी राज्यों के लिए एक अलग मंत्रालय की मांग की।

प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रतिनिधि, नवीन वर्मा ने हिमालय के संरक्षण हेतु विशेष आर्थिक पैकेज की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि हिमालयी नदियाँ भारत की जल व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन पर्यावरणीय असंतुलन के कारण उनका जल स्तर घट रहा है। इसके संरक्षण और अनुसंधान के लिए त्वरित आर्थिक सहायता आवश्यक है। नवीन वर्मा ने यह भी बताया कि उत्तराखंड के व्यापारी विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करते हैं, जहाँ प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे व्यापारियों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की गई। सीमावर्ती जिलों के व्यापारियों को परिवहन सब्सिडी तथा राज्य को पॉलिथीन मुक्त बनाने और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने हेतु विशेष पर्यावरणीय सहायता पैकेज की सिफारिश की गई।

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने सभी प्रतिभागियों को उनके महत्वपूर्ण सुझावों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कई सुझाव केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और सभी पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग 31 अक्टूबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। आयोग सीमित कर राजस्व के न्यायपूर्ण और संतुलित वितरण के लिए प्रतिबद्ध है और उत्तराखंड जैसे राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा।

बैठक में सचिव वित्त दिलीप 

जावलकर, सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत,अपर सचिव सोनिका, जिलाधिकारी नैनीताल वंदना,अपर सचिव हिमांशु खुराना, मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल अनामिका सहित पर्यटन एवं उद्योग व्यापार मंडल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक का संचालन महानिदेशक उद्योग प्रतीक जैन व अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद द्वारा किया गया।

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