Operation Sindoor: पाकिस्तान को फिर से हराने के लिए रहें तैयार
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Operation Sindoor: पाकिस्तान को फिर से हराने के लिए रहें तैयार

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देकर पाकिस्तान को सबक सिखाया। ये आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति है।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
May 19, 2025, 11:13 am IST
inरक्षा, विश्लेषण

12 मई की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन हुआ। सेना की भाषा में सैन्य अभियान चरणों में किए जाते हैं, जो उद्देश्य, दुश्मन के केंद्रीकरण, उपलब्ध मारक क्षमता और अभियानों को पूरा करने के लिए रसद पर निर्भर करता है। हमें यह भी सिखाया जाता है कि किसी भी सैन्य अभियान में दुश्मन की पूर्ण हार सबसे महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, भारत को हराने के लिए तैयार रहना होगा।

एक अच्छे सैन्य कमांडर की तरह पीएम मोदी ने अपने संबोधन के माध्यम से पूरे ऑपरेशन सिंदूर को भारतीयों और वैश्विक समुदाय के लिए परिप्रेक्ष्य में रखा। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले को ‘आतंकवाद का सबसे बर्बर चेहरा’ करार दिया और कहा कि कैसे दुश्मन को अब हमारी महिलाओं के माथे से सिंदूर हटाने के परिणामों का एहसास हो गया है। पाकिस्तानी सेना की मानसिकता को जानते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियानों को केवल स्थगित रखा गया है और भारत भविष्य की कार्यवाही उनके व्यवहार पर निर्भर रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो संभवतः अमेरिका और वैश्विक समुदाय के लिए एक संकेत था। कुल मिलाकर, भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष में निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त किया और इस प्रकार ऑपरेशन सिंदूर का चरण 1 भारत के लिए पाकिस्तान पर एक सशक्त सैन्य और नैतिक जीत है।

भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए 6/7 मई की आधी रात के बाद पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइलों और ड्रोन से हवाई हमले किए। ऑपरेशन को उपयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था, जो नाम खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने सुझाया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 पर्यटकों, जिसमे ज्यादातर हिंदुओं की नृशंस और चयनात्मक हत्या के बाद, जवाबी कार्रवाई हमारी बहनों के लिए एक उचित प्रतिशोध थी, जिन्होंने बर्बर आतंकी हमले में अपने पतियों को खो दिया था। भारत ने 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया , जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल थे। भारत ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के अपने संकल्प को केवल पाकिस्तान के भीतर ज्ञात आतंकी स्थलों पर केंद्रित, नपे-तुले और गैर-उत्तेजक जवाबी कार्रवाई के साथ प्रदर्शित किया। भारत ने शुरुआती हमले में पाकिस्तान में किसी भी सैन्य सुविधा और नागरिक ठिकानों से बचकर काफी संयम का प्रदर्शन किया। बाद में भी, भारत ने नागरिक लक्ष्यों से परहेज किया। इस प्रकार, पाकिस्तान के ऊपर यह भारत की एक नैतिक जीत है।

भारत ने 10 मई की दोपहर को पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव (वास्तव में गोलीबारी रोकने और शत्रुतापूर्ण कार्यवाही को समाप्त करने की एक समझ) को स्वीकार कर लिया। सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने 10 मई को दोपहर 3.30 बजे अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और दोनों सेनाएं 10 मई को शाम 5.00 बजे से युद्धविराम के लिए सहमत हुईं। इस प्रकार, 22 अप्रैल को पहलगाम में प्रायोजित आतंकी हमले के माध्यम से पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया एक खूनी संघर्ष अचानक लेकिन एक न्यायसंगत अंत में आया। पाकिस्तान ने कुछ ही घंटों के भीतर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर दिया था, लेकिन 10 मई की रात से पाकिस्तान द्वारा इसका पालन हो रहा है। डीजीएमओ के बीच 12 मई की शाम को आखिरी बातचीत के परिणामस्वरूप गोलीबारी को रोकने और सीमाओं और एलओसी से सैनिकों की कमी पर सहमति बनी। केवल यह तथ्य कि भारतीय सैन्य बलों ने चार दिनों से भी कम समय में पाकिस्तानी सेना को अपने घुटनों पर ला दिया, हमारे वर्दीधारी बलों के लिए सबसे उत्कृष्ट जीत है।

इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor: पाकिस्तान के निशाने पर था स्वर्ण मंदिर, एयर डिफेंस ने ड्रोन, मिसाइलों को हवा में ही बना दिया राख

प्रधानमंत्री मोदी ने 13 मई को आदमपुर एयरबेस का दौरा किया और व्यक्तिगत रूप से भारतीय सैन्य बलों के प्रति राष्ट्र का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सैनिकों को औपचारिक रूप से संबोधित किया और उनसे कहा कि वे पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार रहें। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मई को जम्मू-कश्मीर और 16 मई को गुजरात में भुज एयरबेस का दौरा किया। सैनिकों के साथ बातचीत करते हुए, रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान जैसे अस्थिर राष्ट्र के पास परमाणु हथियारों की सुरक्षा के बारे में आशंका व्यक्त की। रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान में प्रमुख हवाई क्षेत्रों पर सटीक हमले के लिए स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइलों के जबरदस्त प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। संबंधित सेना प्रमुखों ने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए अग्रिम ठिकानों का  दौरा किया है। इस प्रकार हमारा नेतृत्व जानता है की पाकिस्तान कभी भी धोखा दे सकता है और हमारी सेनाओं को माकूल जवाबी कार्यवाही के लिए तैयार रहना होगा।

जाहिर तौर पर पाकिस्तान को संघर्ष विराम को स्वीकार करना पड़ा क्योंकि अगर और अधिक नुकसान होता तो उसकी पूरी युद्ध क्षमता खत्म हो जाती। पाकिस्तान ने यह भी पाया कि चीनी मिसाइलों और चीन द्वारा प्रदान किए गए वायु रक्षा कवर को भारतीय सैन्य बलों द्वारा आसानी से भेद दिया गया था। भारत ने पूरे 23 मिनट तक इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम को जाम कर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्रों और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को वांछित नुकसान पहुंचाया। चीनी और तुर्की दोनों देशों के ड्रोन भी भारतीय लक्ष्यों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सके। इसलिए, यह आशंका है की पाकिस्तान इस युद्ध विराम का उपयोग भारत के खिलाफ अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं में कमियों को पूरा करने में करेगा। हमारी गुप्तचर एजेंसी को पाकिस्तान की तैयारी पर पैनी नजर रखनी होगी।

भारतीय सशस्त्र बलों ने भी सैन्य परिचालन तैयारियों की समीक्षा की होगी और यदि कोई  कमजोरी है तो उसे दूर करना होगा। भारत को अतिरिक्त संसाधनों के साथ वायु रक्षा कवर को बढ़ाना पड़ सकता है। सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता और तालमेल ने अच्छी तरह से काम किया है और इस तरह के तालमेल को लंबी अवधि के संघर्ष के लिए जारी रखा जाना चाहिए। चीन के पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए आधिकारिक तौर पर प्रतिबद्ध होने के साथ, भारत को दो मोर्चों पर संघर्ष के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। जब पाकिस्तान आर्थिक और सैन्य दोनों रूप से अधिक तैयार होगा, तो परिचालन गतिशीलता और अधिक चुनौतीपूर्ण होने जा रही है। इस बीच, हमें त्रुटिरहित ढांचे के लिए हमारे रणनीतिक, प्रचालनात्मक और सामरिक आसूचना नेटवर्क को सुदृढ़ करना होगा।

भारत और सभी भारतीय पाकिस्तान पर शानदार जीत का जश्न मनाने के हकदार हैं। इस संघर्ष ने भारतीयों को ऐसा एकजुट किया है जैसा पहले कभी नहीं हुआ था। लेकिन हर उत्सव और उल्लास को अधिक सतर्क, जिम्मेवार और देशभक्त नागरिकों को भी तैयार करना चाहिए। मैं दृढ़ता से सिफारिश करता हूं कि नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल पूरे देश में हर महीने एक बार जारी रहनी चाहिए। राज्य और जिला प्रशासन, विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों को  किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर जासूसी के प्रयास और खतरे होंगे। जम्मू और कश्मीर प्रशासन को एलओसी के करीब रहने वाले लोगों की सुरक्षा आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी होना चाहिए। सरकार को नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की भर्ती जारी रखनी चाहिए। प्रादेशिक सेना के कर्मियों को कम से कम अगले दो वर्षों के लिए सन्निहित किया जाना चाहिए। अनिवार्य रूप से, सरकार को अगले दो वर्षों के लिए ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए और समय-समय पर स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सार्वजनिक और निजी रक्षा उद्योग की स्वदेशी क्षमताओं को उजागर कर भारी बढ़ावा दिया है। रक्षा उद्योग को युद्ध सामग्री को जल्दी से पूरा करने और पर्याप्त भंडार बनाने के लिए ओवरटाइम ड्राइव में काम करना होगा। कुछ रक्षा प्लेटफार्मों के महत्वपूर्ण अधिग्रहण को जल्दी से पूरा करना चाहिए। एलओसी पर और आईबी के पास सैनिकों की निरंतर उपस्थिति सशस्त्र बलों के युद्ध धीरज का परीक्षण करने जा रही है। भारतीय सेना को निकट भविष्य में और अधिक अग्निवीरों की भर्ती करनी पड़ सकती है। पाकिस्तान पर हमारी तकनीकी बढ़त तो ठीक है लेकिन भारत को दो मोर्चों पर संघर्ष के लिए जमीन पर अधिक सैनिकों की आवश्यकता होगी।

भारत ने अपनी धरती पर भविष्य में किसी भी आतंकवादी गतिविधि के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है । भारत ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति में संशोधन किया है। भारत ने अब स्पष्ट किया है कि राज्येतर तत्वों (Non State Actors) द्वारा आतंकवाद के किसी भी कृत्य को प्रायोजक देश की ओर से युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। लेकिन आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में आमूल बदलाव के लिए बड़े रक्षा सुधारों और अल्प सूचना पर युद्ध छेड़ने की क्षमता की आवश्यकता होगी। आने वाले समय में, इस नई नीति के बारे में भारतीय सैन्य बलों को विशेष तैयारी करनी होगी। अनिवार्य रूप से, नई नीति में बाहरी सुरक्षा के लिए मौजूदा सैन्य क्षमताओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए पुलिस/अर्धसैनिक बलों की समीक्षा की आवश्यकता होगी।

भारतीय नेतृत्व इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है और इस प्रकार पीएम मोदी ने  संकेत दिया है कि भारत द्वारा गोलीबारी की रोक केवल पाकिस्तानी लोगों के लाभ के लिए की गई है। अब भारत को आक्रामक तरीके से प्रधानमंत्री शरीफ प्रशासन को आईना दिखाना होगा और पाकिस्तानी सैन्य बलों की हकीकत को उनकी जनता के सामने लाना होगा। पाकिस्तान के लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि भारत के साथ भविष्य में किसी भी आतंकी हमले और सैन्य संघर्ष के और गंभीर परिणाम होंगे। मौजूदा शक्ति संरचना में फंसे होने के कारण, पाकिस्तान पर आंख मूंदकर भरोसा करना एक गलती होगी और भारत को निकट भविष्य में अपनी चौकसी बनाए रखनी होगी। मेरी सैन्य समझ मुझे बताती है कि भारत को ऑपरेशन सिंदूर के चरण 2 को और भी गंभीरता के साथ लॉन्च करने के लिए तैयार रहना होगा, ताकि पाकिस्तान को व्यापक रूप से हमेशा के लिए हराया जा सके। पूरे देश की तैयारी हमारी जीत का आगाज़ है। जय भारत!

Topics: पहलगाम आतंकी हमलाPahalgam Terror Attackऑपरेशन सिंदूरOperation Sindoornuclear blackmailPM Modi addressपीएम मोदी संबोधनभारतीय सेनाआतंकवाद नीतिIndian Armyपरमाणु ब्लैकमेलभारत-पाकिस्तानterrorism policyIndia-Pakistanmilitary strategyसैन्य रणनीति
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