उरी और बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर भी कांग्रेस नेता ने मांगे मोदी सरकार से सबूत
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उरी और बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी कांग्रेस नेता ने मांगे मोदी सरकार से सबूत

भारतीय सेना 7 मई की रात को पाकिस्तान पर किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है।

Written byआर.पी. सिंहआर.पी. सिंह
May 7, 2025, 01:19 pm IST
in भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 निर्दोष पर्यटकों की मौत का बदला भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से शुरू कर दिया है। अभी तो मोदी सरकार ने पहला ही वार किया था कि देश में विपक्षी नेता बिलबिला उठे। अब कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सेना के इस ऑपरेशन पर सबूत मांगना शुरू कर दिया है। हालांकि ये कोई नई बात नहीं है। इसके पहले साल 2016 में उरी हमले के बाद भारतीय सेना ने पीओके में स्थित पाकिस्तान के आतंकी कैंपों के लांचिंग पैड को निशाना बनाया था। जबकि इसके बाद साल 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को एयरस्ट्राइक करके तबाह कर दिया था। भारतीय सेना के इन बदले के एक्शंस पर कांग्रेस ने सबूत मांगे थे। अब एक बार फिर कांग्रेस ने वही तुच्छ नीति अपनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर के भी सबूत मांगने शुरू कर दिए हैं।

भारतीय सेना 7 मई की रात को पाकिस्तान पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सबूत की मांग की है। उन्होंने जानना चाहा है कि क्या इस ऑपरेशन में वाकई किसी आतंकवादी की मौत हुई है। गौरतलब है कि भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर यह संयुक्त ऑपरेशन चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रडार पर खासतौर पर आतंकवादी संगठनों के शीर्ष नेता थे, जो इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य बने। राशिद अल्वी के बयान से एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि क्या सैन्य कार्रवाई के बाद सरकार को जनता और विपक्ष को विस्तृत जानकारी देनी चाहिए या नहीं, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई काफी नहीं है, जनता को जवाब देना भी जरूरी है। अल्वी ने कहा, “यह तो न्यूनतम है। हमारी फौज ने वही किया जो सरकार ने आदेश दिया। उन्हें जो टारगेट दिए गए थे, उन्होंने उन्हें पूरा किया।” हालांकि, उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “क्या वाकई चुन-चुन कर आतंकवादी मारे गए? क्या इस ऑपरेशन के बाद दोबारा कोई पहलगाम जैसी घटना नहीं होगी? क्योंकि हर कुछ दिन बाद कुछ न कुछ होता रहता है।” अल्वी का बयान ऐसे समय आया है जब सेना द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से इस ऑपरेशन को लेकर कोई विस्तृत जानकारी या सबूत अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। राशिद अल्वी के इस बयान ने एक बार फिर सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच संतुलन की बहस को हवा दे दी है।

“जो कहा था, क्या वह पूरा हुआ?” राशिद अल्वी का पीएम मोदी से सवाल

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल पूछा है। उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मौका है, और इस पर देश को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। अल्वी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने पहले कहा था कि हम आतंकियों की बची हुई जमीन खत्म कर देंगे, हम उनके आकाओं को खत्म कर देंगे। अगर ऐसा हुआ है, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन हम सिर्फ इतना जानना चाहते हैं कि जो आपने कहा था, क्या वह पूरी तरह से पूरा हो गया?” उनका यह बयान सरकार से पारदर्शिता और परिणामों को लेकर जवाबदेही की मांग भी करता है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद विपक्ष लगातार यह जानना चाहता है कि इसके नतीजे ज़मीनी स्तर पर कितने प्रभावी रहे हैं?

‘सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत दे सरकार’, कांग्रेस का फिर वही पुराना राग

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से सबूत मांगे हैं। ये कोई नई बात नहीं है इसके पहले भी जब-जब भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक की है तब-तब कांग्रेस ने सबूत मांगे हैं। इसके पहले पुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक में भारतीय जवानों ने पीओके में स्थित आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना ने 250 से 300 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया था। कांग्रेस ने इस स्ट्राइक के “परिणामस्वरूप कितने आतंकी मारे गए?” इस पर पारदर्शिता की मांग की थी।

कांग्रेस की तरफ से आए प्रमुख बयान

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल उन्होंने कहा था कि अगर एयर स्ट्राइक में इतनी बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए हैं, तो सरकार को सैटेलाइट तस्वीरें या अन्य साक्ष्य पेश करने चाहिए। वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर संदेह जताते हुए कहा था किइसे “air strike नहीं बल्कि aerial action” कहा था, जिससे विवाद और बढ़ गया था। वहीं पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि आखिरकार इस स्ट्राइक में कितने आतंकियों की हानि हुई थी।

बीजेपी और सरकार ने दिया था कांग्रेस को ये जवाब

केंद्र सरकार और बीजेपी ने कांग्रेस के इन सवालों पर जवाब देते हुए कहा था, ” कांग्रेस का ये बयान सेना का मनोबल गिराने” और “राजनीतिक फायदे के लिए सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाने” का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इसे राष्ट्रवाद बनाम विपक्ष की शंका के रूप में पेश किया। वहीं सेना और वायुसेना ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था, ‘भारतीय वायुसेना ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि उनका काम लक्ष्य को निशाना बनाना है, आतंकियों की संख्या का आकलन सरकार और खुफिया एजेंसियों का दायित्व है।’

उरी सर्जिकल स्ट्राइक पर भी काग्रेस ने मांगे थे सबूत

उरी सर्जिकल स्ट्राइक (2016) के बाद कांग्रेस ने सरकार से आधिकारिक सबूत मांगने की बात कही थी, जिससे यह पुष्टि हो सके कि वास्तव में स्ट्राइक हुई थी और उसका प्रभाव क्या रहा। उस समय केंद्र में बीजेपी की सरकार थी और भारतीय सेना ने यह दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के लॉन्च पैड्स को निशाना बनाकर सफलतापूर्वक सर्जिकल स्ट्राइक की।कांग्रेस का रुख यह था कि उन्होंने सेना की बहादुरी पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सरकार द्वारा स्ट्राइक के दावों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए थे। कुछ कांग्रेस नेताओं, जैसे संजय निरुपम और दिग्विजय सिंह, ने इस पर सार्वजनिक रूप से बयान दिए और साक्ष्य की मांग की थी, जिससे राजनीतिक बहस गर्म हो गई थी।

बीजेपी और सरकार का जवाब यह था कि इस तरह के ऑपरेशनों की गोपनीयता और रणनीतिक उद्देश्य होते हैं, और सेना के कार्यों पर सवाल उठाना कांग्रेस की ‘देशविरोधी’ मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कांग्रेस पर सेना का मनोबल गिराने का आरोप लगाया। इस विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राजनीति के दखल और ‘प्रूफ पॉलिटिक्स’ को लेकर देशभर में तीखी बहस छेड़ दी थी।

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