ऑपरेशन कगार से टूटी नक्सलियों की कमर : डर के मारे संविधान की दुहाई दे रहे लाल आतंकी
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ऑपरेशन कगार से टूटी नक्सलियों की कमर : डर के मारे संविधान की दुहाई दे रहे लाल आतंकी

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमा पर ऑपरेशन कगार में 10 हजार सुरक्षाबलों की घेराबंदी से घबराए नक्सली अब युद्धविराम की भीख मांग रहे हैं। जानिए कैसे अब अंतिम सांसें गिन रहा है लाल आतंक

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 29, 2025, 03:56 pm IST
in भारत, छत्तीसगढ़

नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में और तेलंगाना सीमा पर चल रहे देश के अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन कगार’ ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। लगभग 10,000 सुरक्षाबलों की चक्रव्यूह जैसी घेराबंदी से नक्सली बुरी तरह घबरा गए हैं।

इसी घबराहट के चलते जी नक्सली बरसों से निर्दोष वनवासियों और सुरक्षाबलों का खून बहाते रहे, अब अपने लाल आतंक की जड़ें उखड़ती देखकर उस “संविधान” की दुहाई देने लगे हैं, जिसे उन्होंने कभी स्वीकार ही नहीं किया था।

बता दें नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने केंद्र और राज्य सरकारों के नाम एक के बाद एक नया पर्चा जारी जारी कर रहे हैं, इन पर्चों में बिना शर्त युद्धविराम और शांति वार्ता की गुहार लगाई गई है। नक्सलियों द्वारा जारी किए गए पर्चे में दावा किया गया है कि “ऑपरेशन कगार” के तहत सैकड़ों नक्सलियों और निर्दोष वनवासियों की हत्याएं हुई हैं।

लेकिन असलियत में लाल आतंकियों का यह आरोप खोखला भर है। जबकी सच्चाई यह है कि सुरक्षाबलों ने अपने नक्सल विरोधी अभियानों से वनवासी जनता को नक्सली आतंक से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया है।

बरहाल जो नक्सली संगठन कल तक बंदूक के बल पर सत्ता और क्षेत्र कब्जाने का सपना देखते थे, आज ‘ऑपरेशन कगार’ से अपनी खिसकती जमीन और बिखरते संगठन को बचाने के लिए शांति और संवैधानिक अधिकारों की बातें कर रहे हैं।

जारी किए गए पर्चे में युद्धविराम की मांग करते हुए नक्सलियों ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पीएलजीए बलों ने भी हथियार डाल दिए हैं।

बता दें कि सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन से नक्सली बुरी तरह टूट गए हैं, विशेषकर झारखंड के बोकारो में केंद्रीय कमेटी के शीर्ष नेता “कामरेड विवेक” समेत कई अन्य बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने के बाद नक्सलियों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। अब डर और हताशा में वे सरकार से गिड़गिड़ा रहे हैं कि “ऑपरेशन कगार” को रोका जाए और बातचीत का रास्ता अपनाया जाए।

मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश में नक्सलियों के उपर सुरक्षाबलों का अभूतपूर्व दबदबा बना हुआ है। कर्रेगुट्टा इलाके की नाकेबंदी कर नक्सलियों के गढ़ को चारों ओर से घेरा जा चुका है। कई महत्वपूर्ण नक्सली ठिकानों का सफाया किया जा चुका है जिसके चलते अब उनके नेता या तो ढेर हो रहे हैं या आत्मसमर्पण की गुहार लगा रहे हैं।

बरहाल नक्सलियों के इस अचानक ‘शांति प्रस्ताव’ को उनकी “रणनीतिक हार” के रूप में देखा जा रहा है रहे हैं। वर्षों से संविधान को ठुकराकर हिंसा का मार्ग अपनाने वाले नक्सली अब अपनी मौत सामने देखकर उसी संविधान का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। लेकिन देश की सरकार और सुरक्षाबल इस बार ठान चुके हैं — नक्सलवाद को जड़ से खत्म करके ही दम लेंगे।

Topics: नक्सली युद्ध विराम प्रस्तावMaoist CommitteePLGA OperationsNaxal Attack ChhattisgarhBijapur Naxal OperationTelangana Peace Talksनक्सल शांति वार्ताNaxal CeasefireBijapur Naxal AttackChhattisgarh Naxal Violenceनक्सल ऑपरेशन कगारOperation KagarNaxalite Peace Talks IndiaNaxal Pamphletछत्तीसगढ़ नक्सल अभियानKarregutta EncounterTelangana Naxal ActivityPeace Talks Appeal
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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