मुंबई 26/11 हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा भारत लाया जा रहा है। जल्द ही उसे ला रहा विशेष विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। इसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों का काफिला एयरपोर्ट पहुंच गया है। इस बीच पाकिस्तान ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर अभी से कन्नी काटनी शुरू कर दी है, जबकि मुंबई हमले में उसकी संलिप्तता उजागर हो चुकी है।
उसने तहव्वुर राणा से खुद को अलग करते हुए कहा कि उसने बीते दो दशक से पाकिस्तान के अपने दस्तावेजों को रिन्यू नहीं करवाया है। अब वह पूरी तरह से कनाडाई नागरिक है। लेकिन पाकिस्तान कितनी भी चाल चले, उसके हाथ निर्दोष भारतीयों और विदेशी मेहमानों के खून से रंगे हैं।
गौरतलब है कि इसी साल 12 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय अमेरिका के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने इस राणा के प्रत्यर्पण के मुद्दे को उठाया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकी राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी। लेकिन बाद में राणा इसके खिलाफ कोर्ट चला गया, हालांकि कोर्ट से झटका मिलने के बाद अब उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया है। जहां उसे न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।
पीड़ितों ने की फांसी की मांग
इस बीच मुंबई हमले के पीड़ितों ने भी राणा को फांसी देने की मांग की है। मोहम्मद तौफीक नाम के शख्स का कहना है कि तहव्वुर राणा जैसे आतंकियों को किसी भी तरह की सुविधा नहीं देनी चाहिए। इसे कसाब की तरह बिरयानी और आराम भी नहीं देना चाहिए। आतंकियों को सजा देने के लिए अलग से कानून बनाना चाहिए, ताकि इन्हें 2-3 माह के भीतर ही फांसी दी जा सके। इसी प्रकार इस हमले में अपना बलिदान देने वाले एसआरपीएफ कॉन्स्टेबल के पिता ने भी उसे फांसी की मांग की है।
कौन है तहव्वुर राणा
तहव्वुर हुसैन राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। ये पहले पाकिस्तानी सेना में कैप्टन की रैंक पर था। ये कनाडा में बिजनेस करता था। उसी के जरिए उसने डेविड कोलमैन हेडली को मुंबई की रेकी करने के लिए भेजा था। इसके बाद उसने इसके आंकड़े अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेजा, जिसके बाद आतंकी मुंबई में घुसे। 26/11 हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

















