अब नया वक्फ कानून, राष्ट्रपति ने किए हस्ताक्षर, मंत्रालय ने झूठ किए तार-तार
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अब नया वक्फ कानून, राष्ट्रपति ने विधेयक पर किए हस्ताक्षर, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने फैलाए जा रहे भ्रमों को किया दूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वक्फ संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर किए। अब वक्फ बोर्ड किसी की भी संपत्ति पर जबरन अपना दावा नहीं ठोक सकेगा। 

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 6, 2025, 03:01 pm IST
inभारत
द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अब वक्फ को लेकर नया कानून बन गया है। वक्फ बोर्ड किसी की भी संपत्ति पर जबरन अपना दावा नहीं ठोक सकेगा।

वक्फ में संशोधन को लेकर संयुक्त संसदीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने कई सिफारिशें की थीं। इसके बाद विधेयक घंटों की बहस के बाद लोकसभा में और फिर राज्यसभा में पारित हो गया। अब इस पर राष्ट्रपति ने अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।

वक्फ कानून को लेकर अभी भी कई सियासी दल भ्रम फैला रहे हैं। इस विधेयक के खिलाफ कुछ दल सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं। वहीं, इन सबके बीच केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने वक्फ कानून को लेकर फैलाए जा रहे भ्रमों को दूर किया है। मंत्रालय ने कुछ सवाल और उनके जवाब दिए हैं-

सवालः क्या वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी?

जवाबः वक्फ कानून, 1995 के लागू होने से पहले वक्फ कानून, 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है, तो वह स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक केवल बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता नियमों को स्पष्ट करता है। यह जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है, जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर वे वास्तव में सरकारी संपत्ति हैं। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं।

सवालः क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा?

जवाबः एक सर्वेक्षण होगा। विधेयक सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इस परिवर्तन का उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया को रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।

सवाल: क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे?

जवाब: नहीं, बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। विधेयक में केन्द्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर 2 गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता है, जिससे परिषद में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम 3 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन केन्द्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। अधिकांश सदस्य अभी भी मुस्लिम समुदाय से होंगे। इस बदलाव का उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

सवाल: क्या नए संशोधन के तहत मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी?

जवाब: कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह विधेयक केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है, जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। यह निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है, जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं।

सवाल: क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी?

जवाब: विधेयक जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है – खासकर अगर यह वास्तव में सरकारी संपत्ति हो सकती है – लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने को अधिकृत नहीं करता है।

सवाल: क्या यह विधेयक गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है?

जवाब: संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केन्द्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे, पदेन सदस्यों को छोड़कर, परिषद में अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम 3 गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं। इन सदस्यों को अतिरिक्त विशेषज्ञता और निगरानी के लिए जोड़ा जाता है। अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होते हैं, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहता है।

सवाल: क्या ऐतिहासिक वक्फ स्थलों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी?

जवाब: यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता है। इसका उद्देश्य इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी वाले दावों पर अंकुश लगाना है।

सवाल: क्या ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ प्रावधान को हटाने का मतलब यह है कि लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्‍म हो जाएंगी?

जवाब: इस प्रावधान को हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। हालांकि, उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है, जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। यह पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है, यह सुनिश्चित करके कि केवल औपचारिक रूप से वक्फ घोषित संपत्तियों को ही मान्यता दी जाती है – जिससे पारंपरिक वक्फ घोषणाओं का सम्मान करते हुए विवाद कम होते हैं। “उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ” से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है, क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है – भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो।

सवाल: क्या इस विधेयक का उद्देश्य समुदाय के अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने के अधिकार में हस्तक्षेप करना है?

जवाब: विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य रिकॉर्ड रखने में सुधार करना, कुप्रबंधन को कम करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह मुस्लिम समुदाय के अपनी धार्मिक संस्‍थाओं को दिए गए दान का प्रबंध करने के अधिकार को नहीं छीनता है बल्कि यह इन संपत्तियों को पारदर्शी और कुशलता से प्रबंधित करने की एक रूपरेखा पेश करता है।

 

 

Topics: नया वक्फ कानूनअल्पसंख्यक मंत्रालयराष्ट्रपतिवक्फ बोर्डद्रौपदी मुर्मुवक्फ कानून
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