‘युद्ध नहीं, शांति के उपासक हैं हम’
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होम भारत

‘युद्ध नहीं, शांति के उपासक हैं हम’

गत 16 मार्च, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रसिद्ध एआई शोधकर्ता लेक्स फ्रिडमैन के साथ एक ऐतिहासिक बातचीत की, जो तीन घंटे से अधिक चली। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी प्रगति, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 25, 2025, 06:59 pm IST
in भारत, विश्लेषण, संघ @100, धर्म-संस्कृति, पॉडकास्ट

पॉडकास्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर एक प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे रा.स्व. संघ से जुड़ने का मौका मिला। संघ ने मुझे जीवन के संस्कार, अनुशासन और उद्देश्य दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में वे वडनगर में संघ की शाखा में जाते थे। वहां देशभक्ति के गीत सुनते थे। शाखा में तो खेल-कूद होता था लेकिन देशभक्ति के गीत भी होते थे, जो मन को छू जाते थे। संघ से उन्हें संस्कार मिले। संघ एक बहुत बड़ा संगठन है। उसके सौ साल पूरे होने जा रहे हैं। दुनिया में इतना बड़ा स्वयंसेवी संगठन कहीं नहीं हैं।

संघ में सिखाया जाता है कि देश ही सब कुछ है और जन सेवा ही प्रभु सेवा है। जो हमारे ऋषियों ने कहा, जो स्वामी विवेकानंद ने कहा, वही बातें संघ के लोग करते हैं। उस प्रेरणा से संघ के स्वयंसेवक काम करते हैं। उदाहरण के लिए स्वयंसेवकों ने सेवा भारती नाम का संगठन खड़ा किया, जो सेवा कार्य करता है। वह भी बिना कोई सरकारी मदद लिए। ऐसे सवा लाख सेवा कार्य सेवाभारती द्वारा देशभर में किए जाते हैं। सवा लाख एक छोटा नंबर नहीं है। संघ की प्रेरणा से ही वनवासी कल्याण आश्रम की शुरुआत की गई जो जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए काम करता है। ‘एकल अभियान’ के तहत 70,000 से अधिक एकल विद्यालय चलाए जाते हैं, जिनमें दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा दी जाती है। विद्या भारती के तहत चलाए जाने वाले 25,000 स्कूलों में 30 लाख बच्चे पढ़ते हैं।

संघ शिक्षा और मूल्यों को प्राथमिकता देता है, यह सुनिश्चित करता है कि विद्यार्थी जमीन से जुड़े रहें और समाज पर बोझ बनने से बचने के लिए कौशल सीखें। संघ समाज के हर वर्ग को जोड़ता है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या सामाजिक सेवा, स्वयंसेवक हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि संघ दुनिया का सबसे अनूठा संगठन है। यह सत्ता या राजनीति के लिए नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए काम करता है। इसकी तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती। संघ के स्वयंसेवक बिना शोर-शराबे के गांव-गांव तक पहुंचते हैं। आपातकाल के दौरान भी उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। संघ जीवन मूल्यों और समाज को सशक्त करने की बात सिखाता है। अनुशासन और समर्पण का भाव पैदा करता है। संघ आपको यह सिखाता है कि समाज की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यह उनके जीवन का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि संघ ने उन्हें संगठन की ताकत सिखाई। वहां से मिला अनुशासन उनके राजनीतिक जीवन में काम आया। संघ का प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर गहरा है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा संगठन है जो आपको जिम्मेदारी का अहसास कराता है। वे कहते हैं, ‘‘मैंने संघ में सीखा कि देश के लिए कुछ करना है, तो व्यक्तिगत हितों को पीछे छोड़ना पड़ता है। यही दृष्टिकोण उन्हें जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। संघ की शाखाएं मेरे लिए विद्यालय रहीं जहां मैंने नेतृत्व करना और सेवा करना सीखा। यह संगठन समाज को जाग्रत करने का माध्यम है।’’

प्रधानमंत्री मोदी के साथ लेक्स फ्रिडमैन

भारतीय परंपरा में एकता समाहित

भारत राष्ट्र के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की एक सांस्कृतिक पहचान और सभ्यता है, जो हजारों वर्ष पुरानी है। 100 से अधिक भाषाओं और हजारों बोलियों वाले भारत में हर 20 मील पर भाषा, रीति, रिवाज, भोजन और पहनावे की शैली बदल जाती है, लेकिन इतनी विविधता के बावजूद एक सामान्य सूत्र है जो देश को एकजुट करता है। यही हमारी ताकत है। भगवान राम की कथाएं पूरे भारत में सुनाई जाती हैं। उन्होंने उन कहानियों पर प्रकाश डाला जो पूरे भारत में गूंजती हैं। उन्होंने बताया कि कैसे भगवान राम से प्रेरित नाम गुजरात के रामभाई से लेकर तमिलनाडु के रामचंद्रन और महाराष्ट्र के रामभाऊ तक, हर क्षेत्र में पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सही अनूठा सांस्कृतिक बंधन भारत को एक सभ्यता के रूप में जोड़ता है। एकता की यह भावना भारतीय परंपराओं में गहरे समाहित है। जम्बूद्वीप से शुरू होकर कुलदेवता तक के समारोहों में ब्रह्मांड का आह्वान करने जैसी प्रथाएं अब भी भारत में जीवित हैं और पूरे भारत में प्रतिदिन इनका पालन होता है। भारत की एकता इसके सांस्कृतिक बंधनों में निहित है।

गांधी जी ने जगाया सामूहिकता का भाव

महात्मा गांधी के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जन्म गुजरात में हुआ और गांधी जी की तरह ही उनकी मातृभाषा भी गुजराती है। विदेश में वकील के रूप में बड़ा अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन को भारत के लोगों की सेवा में समर्पित करने का निर्णय लिया, जो कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों की गहरी भावना से प्रेरित था। गांधी जी के सिद्धांत और कार्य आज भी हर भारतीय को प्रभावित करते हैं। उनका प्रभाव आज भी भारतीय जीवन पर किसी न किसी रूप में दिखता है। और महात्मा गांधी जी ने जो बातें कहीं, उनको जीने का प्रयास भी किया। जैसे स्वच्छता, वे स्वच्छता के बड़े आग्रही थे, लेकिन वे खुद भी स्वच्छता करते थे। कहीं पर भी जाते थे तो स्वच्छता की चर्चा जरूर करते थे। भारत में आजादी के आंदोलन को इतना बड़ा जन आंदोलन गांधी जी ने ही बनाया। अंग्रेजों को कभी अंदाजा ही नहीं रहा होगा कि दांडी यात्रा में महज नमक बनाकर पूरे देश में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा, लेकिन गांधी जी ने यह कर दिखाया। गांधी जी ने सामूहिकता का भाव जगाया, जनशक्ति के सामर्थ्य को पहचाना।

उन्होंने रोजमर्रा के सामान्य कार्यों को भी आजादी के आंदोलन से जोड़ दिया। जैसे कोई झाड़ू भी लगा रहा होता तो कहते, यह तुम आजादी के लिए कर रहे हो, किसी को पढ़ा रहे हो, तो कहा जाता यह सब तुम आजादी के लिए कर रहे हो। चरखा कात रहे हो, खादी बना रहे हो तो तुम आजादी के लिए काम कर रहे हो। उन्होंने हर काम को आजादी से जोड़ दिया। इस कारण भारत के सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी लगने लगा कि मैं भी आजादी का सैनिक बन गया हूं। यह बहुत बड़ी बात थी। मेरे लिए यह आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मैं जो भी काम करता हूं, मेरी कोशिश रहती है कि उसे जन सामान्य को जोड़कर करूं। उस काम में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी हो। मैंने गांधी जी की एकता और लोगों की ताकत को पहचानने के आह्वान पर विचार किया जो आज भी गूंज रहा है

भारत सद्भाव का समर्थक

यूक्रेन-रूस युद्ध में शांति के मार्ग से जुड़े विषय पर उन्होंने कहा कि वे भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की भूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन महान आत्माओं की शिक्षाएं और कार्य पूरी तरह से शांति के लिए समर्पित थे। इसलिए जब भारत शांति की बात करता है तो दुनिया सुनती है। भारतीयों में संघर्ष के लिए कोई जगह नहीं है बल्कि वे सद्भाव का समर्थन करते हैं। इसलिए भारत हमेशा से सद्भाव का समर्थक है। भारतीय हमेशा शांति के लिए खड़े होते हैं और जहां भी संभव हो, शांति स्थापना का दायित्व लेते हैं। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति पुतिन के साथ इस बात पर बल देने के लिए बातचीत कर सकते हैं कि यह युद्ध का समय नहीं है और राष्ट्रपति जेलेंस्की को यह भी बता सकते हैं कि समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि चर्चाओं में दोनों पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि वे फलदायी हो सकें।

एआई को बनाएं सेवा का साधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भारत के भविष्य के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भारत की 140 करोड़ की विशाल और विविध जनसंख्या एआई को एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जो इसे वैश्विक स्तर पर अनूठा बनाता है। एआई भारत के बिना अधूरा है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि भारत वैश्विक एआई चर्चाओं में नेतृत्व कर सकता है, क्योंकि यहां का डेटा और सांस्कृतिक विविधता इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि एआई विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव ला सकता है। शिक्षा में यह व्यक्तिगत शिक्षण को संभव बनाकर हर छात्र की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर सकता है, जिससे डिजिटल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। स्वास्थ्य में यह रोगों का सटीक और त्वरित निदान कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं। कृषि में यह फसल प्रबंधन को आसान बनाकर किसानों को मौसम की भविष्यवाणी, मिट्टी की गुणवत्ता और बाजार मूल्य की जानकारी दे सकता है। हम चाहते हैं कि तकनीक हर किसान और छात्र तक पहुंचे। यह उनके जीवन को आसान बनाएगी, लेकिन इसके साथ नैतिकता का होना जरूरी है। एआई का प्रयोग मानवता की भलाई के लिए किया जाना चाहिए, न कि विनाश के लिए। यह एक हथियार नहीं, बल्कि सेवा का साधन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें तकनीक में आत्मनिर्भर बनना है। दुनिया को दिखाना है कि एआई मानवता के लिए कैसे काम कर सकता है।

हमारा दृष्टि है कि तकनीक और मानवीय मूल्य एक साथ चलें। भारत का डिजिटल ढांचा, जैसे यूपीआई और आधार, एआई के लिए मजबूत नींव तैयार कर रहा है। यूपीआई ने भुगतान प्रणाली को सरल और सुलभ बनाया है, जिससे गांवों में भी लोग डिजिटल लेन-देन कर रहे हैं। आधार ने पहचान को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। हमारा लक्ष्य तकनीक के लाभ को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है। इस हमने अंत्योदय के सिद्धांत से जोड़ा है। भारत की युवा शक्ति, जो तकनीक के प्रति उत्साही और सक्षम है, इसे और सशक्त बनाएगी। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल तकनीक का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि इसका निर्माता बनना है। हमारे पास डेटा है, प्रतिभा है, और एक ऐसी दृष्टि है जो दुनिया को रास्ता दिखा सकती है। एआई को सकारात्मक दिशा देना हमारा कर्तव्य है।

कौन हैं फ्रिडमैन

लेक्स फ्रिडमैन रूसी मूल के अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक और एक मशहूर एआई शोधकर्ता हैं। वे कैम्ब्रिज मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से जुड़े हैं। यहां वे ह्यूमन रोबोट से जुड़े विषयों पर शोध करते हैं। फ्रिडमैन का जन्म 15 अगस्त 1983 को ताजिकिस्तान में हुआ था। वे मास्को में पले-बढ़े।

फ्रीडमैन की शुरूआती पढ़ाई मास्को में ही हुई। साल 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद वे अपने परिवार के साथ शिकागो चले गए जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई की। कंप्यूटर साइंस में बीएससी और एमएससी करने के बाद लेक्स फ्रीडमैन ने इलेक्ट्रिक और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार लेने से पहले वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, अमेजॉन के फाउंडर जैफ बेजोस और मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग जैसी कई बड़ी हस्तियों का साक्षात्कार कर चुके हैं।

आत्मा की शक्ति ही सच्ची शक्ति

मोदी ने अध्यात्म को अपने जीवन का सबसे मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि कि मैंने साधु-संतों से मुलाकात की और एकांत में समय बिताया। वहां की शांति और प्रकृति की विशालता ने मुझे सिखाया कि सच्ची शक्ति भीतर से आती है। मैं गुफाओं में रहा, ध्यान किया, और साधु—संतों से जीवन के गहरे सवालों पर विशद चर्चाएं कीं। दो वर्ष वहां रहने के बाद मुझे समझ में आया कि जीवन का उद्देश्य केवल अपने लिए न होकर दूसरों की सेवा के लिए होना चाहिए। स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विवेकानंद जी ने कहा था कि आत्मा की शक्ति ही सच्ची शक्ति है। अध्यात्म मुझे धैर्य और संयम देता है। यह वह शक्ति है जो मुझे जनसेवा के लिए प्रेरित करती है। मोदी ने कहा कि हिमालय में साधु और संतों से मिली सीख आज भी उनके निर्णयों को प्रभावित करती है। मैंने वहां रहकर सीखा कि भीतर की स्थिरता ही असली बल है। आध्यात्मिकता एक जीवन दर्शन है। जब आप अपने भीतर शांति पाते हैं, तो बाहर की चुनौतियां छोटी लगने लगती हैं।

अनुशासन जरूरी

उपवास के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में कोई पूजा-पाठ पूजा पद्धति का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की पद्धति है। हमारे शास्त्रों में शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा, मनुष्यता को किस प्रकार से ऊंचाई पर ले जाना है, इसके बारे में बताया गया है। इसके लिए कुछ रास्ते, कुछ परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं। उसमें एक उपवास भी है, लेकिन उपवास ही सब कुछ नहीं है। अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है। यह जीवन को गढ़ने में भी काम आता है। उन्होंने कहा कि मैं उपवास के समय कितनी ही बाहर की गतिविधियां करूं, लेकिन अंतर्मन में खोया हुआ रहता हूं। इस दौरान मुझे अद्भुत अनुभूति होती है।

नवरात्र के नौ दिनों में उपवास रखने के दौरान मैं केवल पानी पीता हूं, और यह मुझे तनावमुक्त रखता है। यह मेरे जीवन का नियमित हिस्सा है, जो मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाला एक दर्शन है, जिसकी व्याख्या भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने की है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उपवास अनुशासन विकसित करने और अपने आप को आंतरिक तथा बाहरी रूप से संतुलित करने का एक साधन है। उपवास इंद्रियों की क्षमता को बढ़ाता है, उन्हें अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाता है। उपवास सोचने की प्रक्रिया को तेज करता है। नए दृष्टिकोण प्रदान करता है।

कठिनाइयां बनीं प्रेरणा

अपने प्रारंभिक जीवन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनका जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ। यह शहर 1400 के दशक के आसपास एक प्रमुख बौद्ध शिक्षा केंद्र भी रहा है जिसने चीनी दार्शनिक ह्वेन त्सांग जैसी हस्तियों को आकर्षित किया। उनके गांव में एक अनूठा वातावरण था, जहां बौद्ध, जैन और हिंदू परंपराएं सामंजस्यपूर्ण रूप से सह अस्तित्व में थीं। वडनगर में हर पत्थर और दीवार एक कहानी कहती है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर उत्खनन परियोजनाएं शुरू कीं जिसमें 2800 साल पुराने साक्ष्य सामने आए, जो शहर के निरंतर अस्तित्व को सिद्ध करते हैं। इन खोजों के चलते ही वडनगर में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय की स्थापना हो पाना संभव हो पाया। उन्होंने अपने बचपन के कुछ पहलुओं को भी साझा किया। मोदी ने कहा कि उन्होंने एक छोटे से घर में जीवन बिताया। वे अत्यधिक गरीबी में पले और बड़े हुए लेकिन उन्हें कभी भी गरीबी का बोझ महसूस नहीं हुआ, क्योंकि उनके पास तुलना करने का कोई आधार नहीं था। उन्होंने कहा बचपन में वह चाय की दुकान पर काम करते थे। मैंने कठिनाइयां देखीं, और वही मेरे लिए प्रेरणा बनीं। चाय बेचते वक्त मैंने लोगों को करीब से समझा। यह मेरे लिए एक जीवन पाठशाला थी। उन्होंने कहा कि जब मैं हिमालय पर गया था तो मैंने संन्यास लेने की सोची थी, लेकिन साधु—संतों से मिलकर समझ आया कि मेरा रास्ता सेवा का है। सत्ता मेरी चाह कभी नहीं रही। मेरा लक्ष्य हमेशा लोगों की जिंदगी बेहतर करना रहा है। मेरी यात्रा गरीबी से शुरू हुई। मैं एक साधारण व्यक्ति हूं। आज जहां हूं, देशवासियों के विश्वास और प्रेम के कारण हूं।

हमेशा सीखना जरूरी

युवाओं पर मोदी ने कहा कि मैं सभी युवाओं से कहना चाहता हूं कि जीवन में रात कितनी ही अंधेरी क्यों न हो, लेकिन वह रात ही है, सुबह होना तय होता है। हमें धैर्यवान बनने की जरूरत है। आत्मविश्वास बनाए रखने की जरूरत है। ईश्वर ने मुझे किसी काम के लिए भेजा है, यह भाव हमेशा मन में रखना चाहिए। मैं अकेला नहीं हूं, जिसने मुझे भेजा है, वह मेरे साथ है। यह एक अटूट विश्वास ईश्वर पर होना चाहिए। कठिनाइयां कसौटी पर परखने के लिए हैं न कि मुझे विफल करने के लिए। मैं तो हर संकट को, हर मुसीबत को हमेशा अवसर मानता हूं। मैं नौजवानों से भी यही कहूंगा कि धैर्य रखिए, शॉर्टकट नहीं चलता। जीवन में भीतर के विद्यार्थी को कभी मरने नहीं देना चाहिए, लगातार सीखते रहना चाहिए।

हमें हमेशा विश्वासघात मिला

पाकिस्तान के संबंध में मोदी ने कहा कि भारत ने शांति के लिए कई कदम उठाए। मेरे पहले शपथ ग्रहण में हमने उन्हें आमंत्रित किया। मैं लाहौर गया, लेकिन हर बार हमें धोखा मिला। आतंक का रास्ता अक्सर पाकिस्तान की ओर जाता है। उन्होंने ओसामा बिन लादेन का उदाहरण देकर बताया कि उसे पाकिस्तान ने शरण दी हुई थी। उन्होंने शांति को बढ़ावा देने के अपने व्यक्तिगत प्रयासों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा शांति के लिए पहल की, लेकिन जवाब में विश्वासघात मिला। उन्होंने कहा कि शांति के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता जरूरी है। भारत ने पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते चाहे, लेकिन आतंकवाद इसके आड़े आ गया। हम शांति चाहते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे

संतुलन होना जरूरी

चीन पर मोदी ने कहा कि 2020 में सीमा पर जो घटनाएं घटीं, उसके कारण हमारे बीच काफी दूरियां बन गई थीं। लेकिन अभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरा मिलना हुआ। अब स्थितियां ठीक हैं। हम लोग प्रयास कर रहे हैं कि धीरे-धीरे वह विश्वास और वह उत्साह और उमंग और ऊर्जा वापस आ जाए। हालांकि इसमें थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि बीच में पांच साल का अंतराल आ गया है। भारत शांति चाहता है। हम चाहते हैं कि हमारे संबंध स्थिर हों। वैश्विक शांति के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन जरूरी है। भारत और चीन की प्राचीन सभ्यताएं हैं। दोनों के बीच व्यापार और संस्कृति का पुराना नाता है। भारत-चीन के बीच में स्पर्धा होना स्वाभाविक है, स्पर्धा कोई गलत चीज नहीं है, लेकिन संघर्ष नहीं होना चाहिए। पड़ोसियों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन मतभेदों को विवादों में बदलने से रोकने की जरूरत है। बातचीत ही एक स्थिर और सहयोगी संबंध बनाने की कुंजी है

यूएन में सुधार आवश्यक

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे को पुराना बताया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना था, लेकिन आज की चुनौतियां अलग हैं। आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन इसके दायरे से बाहर हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूएन शांति स्थापित नहीं कर सका। इस तरह के संगठन को आज की जरूरत के हिसाब से ढलना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे संगठन में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए। यूएन को लोकतांत्रिक और समावेशी बनाना होगा। वर्तमान संरचना कुछ देशों के हितों तक सीमित है। सुधार से ही यह प्रभावी हो सकता है। यह भारत की वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।

दंगे और साजिश

मोदी ने गुजरात दंगों को राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल से पहले गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है। मेरे खिलाफ झूठी कहानियां गढ़ी गईं, लेकिन न्यायालयों में मुझे क्लीन चिट मिली। विरोधियों ने मुझे जेल भेजने की कोशिश की, लेकिन सच सामने आया। उन्होंने कहा कि यह उनके खिलाफ बदनाम करने की साजिश थी। न्यायपालिका ने सच उजागर कर दिया। यह मेरे लिए परीक्षा का समय था। गुजरात 2002 से अब 22 वर्ष तक शांतिपूर्ण ही रहा है। इसका श्रेय विकास और सभी के विश्वास और बेहतर शासन को जाता है।

मजबूत इरादों वाले हैं ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता विश्वास पर आधारित है। वे अपने दूसरे कार्यकाल में अधिक तैयार दिखते हैं। मेरे लिए ट्रम्प भाई एक साहसी और मजबूत इरादों वाले इंसान हैं। अपने फैसले वे खुद लेते हैं, किसी के दबाव में नहीं आते। 2019 का वो ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम मुझे याद है, ह्यूस्टन में स्टेडियम खचाखच भरा था। ट्रम्प मेरे भाषण के वक्त दर्शकों में बैठे थे। अमेरिका का राष्ट्रपति ऐसा करे, यह उनकी सादगी को दिखाता है। उनके सुरक्षाकर्मी हैरान थे जब मैंने कहा कि चलो, स्टेडियम का एक चक्कर लगाएं। वे मेरे साथ चल पड़े, बिना किसी हिचक के। पिछले साल उनके ऊपर हमला हुआ, गोली लगी, फिर भी वे डटे रहे। अमेरिका के लिए उनकी वफादारी देखने लायक थी। मोदी ने व्हाइट हाउस में पहली मुलाकात का जिक्र भी किया। इस बार वे पहले से ज्यादा तैयार हैं। रोडमैप साफ है। उनके पास मजबूत टीम है। उनके साथ मिलने का अनुभव हमेशा खास रहा, और आगे भी रहेगा। जैसे मेरे लिए मेरा देश सर्वोपरि है ऐसे ही उनके लिए उनका देश सर्वोपरि है। यह अच्छी बात है। उनके साथ मेरी बातचीत हमेशा सकारात्मक रही और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि ट्रम्प की नेतृत्व शैली अनोखी है। उनकी स्पष्टवादिता और दोस्ती का भाव भारत के लिए लाभकारी रहा। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। यह रिश्ता भविष्य में और मजबूत होगा।

भारत में क्रिकेट एक भावना

मोदी ने क्रिकेट को भारत की भावना बताया। उन्होंने कहा कि यह लोगों को जोड़ता है और युवाओं में उत्साह लाता है। हर घर में क्रिकेट बसता है। क्रिकेट टीमवर्क सिखाता है। यह भारत की वैश्विक पहचान का हिस्सा है।

फुटबॉल को प्रोत्साहित करना जरूरी

फुटबॉल पर मोदी ने कहा कि भारत में इसकी अपार संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर में यह खेल लोकप्रिय है। हमारी टीमें शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा। यह खेल शारीरिक और मानसिक विकास करता है। भारत इसमें चैंपियन बन सकता है।

साक्षात्कार के अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु

  •  डिजिटल इंडिया की सफलता: मोदी ने बताया कि डिजिटल इंडिया ने ग्रामीण भारत को तकनीक से जोड़ा और यह पहल समावेशी विकास का आधार बन रही है।
  •  स्वच्छता का महत्व: उन्होंने महात्मा गांधी के स्वच्छता संदेश को आज की जरूरत बताया। स्वच्छ भारत अभियान ने जन-जागरूकता बढ़ाई है।
  •  युवाओं की शक्ति: उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी तकनीक और नवाचार की धुरी है। वह देश को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रही है।
  •  जलवायु परिवर्तन: प्रधानमंत्री ने जलवायु संरक्षण के लिए भारत के प्रयासों पर जोर दिया। सौर ऊर्जा और हरित नीतियां इसका हिस्सा हैं।
  •  आत्मनिर्भर भारत: उन्होंने आत्मनिर्भरता को आर्थिक और सांस्कृतिक मजबूती का रास्ता कहा। यह वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत को सशक्त करेगा।
  •  शिक्षा में सुधार: उन्होंने शिक्षा को आधुनिक और समावेशी बनाने की बात की। नई शिक्षा नीति कौशल विकास पर केंद्रित है।
  •  महिलाओं का सशक्तिकरण: प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं की प्रगति को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। सरकारी योजनाएं उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं।
  •  सांस्कृतिक एकता: उन्होंने भारत की विविधता को इसकी ताकत और पहचान कहा। यह एकता देश को वैश्विक मंच पर चमकाती है।
  •  स्वास्थ्य सुधार: मोदी ने आयुष्मान भारत योजना को स्वास्थ्य क्रांति का हिस्सा बताया। यह गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देती है।
  •  वैश्विक शांति: प्रधानमंत्री ने शांति को भारत की विदेश नीति का मूल बताया।
Topics: भारत की सांस्कृतिक विरासतवैश्विक कूटनीतिमहात्मा गांराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजलवायु परिवर्तनआतंकवादस्वामी विवेकानंदपाञ्चजन्य विशेषतकनीकी प्रगति
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