अमदाबाद में आयोजित साबरमती संवाद कार्यक्रम के ‘विकसित भारत, विकसित गुजरात’ सत्र में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, ‘‘आज गुजरात को यदि विकास के उत्कृष्ट उदाहरण के तौर पर देखा जाता है तो उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच है। साबरमती नदी पर बना रिवरफ्रंट उनकी कर्मठता का उदाहरण है। 1960 में जब यह राज्य महाराष्ट्र से अलग हुआ तो यहां रेगिस्तान, पहाड़ियां और पानी की कमी वाले क्षेत्र थे। गुजरात की पहचान रण (रेगिस्तान), पहाड़ और अभाव—अकाल से पीड़ित प्रदेश के रूप में थी। यही नहीं, औद्योगिक विकास भी वापी से तापी तक ही सीमित था। लेकिन पिछले तीन दशक में गुजरात का विकास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुआ है।
प्रधानमंत्री बनने से पहले वे 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। जब कोई ‘वाइब्रेंट गुजरात समिट’ जैसे आयोजनों के बारे में सोच भी नहीं रहा था, तब मोदी जी ने इसे लागू किया। नीति संचालित राज्य और वाइब्रेंट गुजरात की सफलता के बाद गुजरात निवेश के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। 2047 के विकसित भारत के लिए जल संरक्षण, एक पेड़ मां के नाम और स्वच्छता गुजरात के लोगों का संस्कार बन चुके हैं।
दूरदराज के क्षेत्रों में सड़क, बुनियादी ढांचे, चौबीसों घंटे बिजली और पानी की आपूर्ति का सफल विकास हुआ है। गुजरात पानी, सड़क और 24 घंटे बिजली जैसी सुविधाओं के कारण देश में विकास का रोल मॉडल बन गया है। आज गुजरात उभरते सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में सबसे आगे रहने के लिए दृढ़ संकल्पित है। भारत में पहली सेमीकंडक्टर चिप गुजरात में बनाई जाएगी। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत—2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।’’

सत्र- पर्यावरण अनुकूल विकास
‘नवीकरणीय ऊर्जा में हम अग्रणी’
गुजरात के पर्यटन मंत्री मुलुभाई बेरा ने ‘पर्यावरण अनुकूल विकास’ मुद्दे पर कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा में गुजरात अग्रणी है। हम भारत के पहले राज्य हैं, जिसने सोलर पॉवर नीति लागू की है। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की इस यात्रा में गुजरात ने पर्यावरण को प्राथमिकता दी है। ग्रीन एनर्जी, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि के जरिए सतत विकास की दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। गुजरात के हर क्षेत्र में काम हो रहा है। गुजरात भारत का पहला राज्य है जिसने सोलर पॉवर नीति लागू की है। कच्छ, धोलेरा में सोलर पार्क हो या पवन ऊर्जा की बात हो, ऐसी परियोजनाएं राज्यभर में चल रही हैं। इन परियोजनाओं के कारण गुजरात हरित ऊर्जा का केंद्र बन गया है। राज्य में गिर जैसे कई अभ्यारण्य हैं। गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में गुजरात एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। बाकी के संरक्षित क्षेत्रों में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रीन स्टार्टअप्स, इको फ्रेंडली इनोवेशन के क्षेत्र में नए उद्यमियों को सरकार सहयोग कर रही है, उन्हें वित्तीय सहायता दी जा रही है। गुजरात में पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए इस तरह की नीतियों को अपनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे हम आर्थिक विकास के साथ ही पर्यावरण का संरक्षण भी कर रहे हैं।’’

सत्र- प्रगति की बात, प्रकृति के साथ
‘दूरदर्शी सोच से सब संभव’
सहकारिता मंत्री जगदीशभाई ईश्वरभाई पांचाल ने ‘प्रगति की बात, प्रकृति के साथ’ सत्र में कहा, ‘‘जब देश आजाद हुआ था तो अंग्रेजों ने भारत को एक उपनाम दिया था, ‘सपेरों का देश’। आज अमृत काल चल रहा है और भारत प्रगति की ओर बढ़ रहा है। अगर मैं 10 साल पहले की बात करूं तो जब भी किसी देश के प्रमुख हमारे यहां आते थे तो वे देश की राजधानी में ही आते थे। वहीं उनका स्वागत होता था। वहीं कार्यक्रम होता था और वहीं से वे वापस चले जाते थे। आज परिदृश्य बदल गया है। आज कोई विशिष्ट मेहमान भी सीधे देश के किसी राज्य में चला जाता है, यह हम सबने देखा है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच का नतीजा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। यह साबरमती संवाद है और यह देश के आजाद होने के बाद से हमारा विकास है।

आज भारत में पिन से लेकर प्लेन तक, ऐसी कोई भी चीज नहीं है जो गुजरात में न बनती हो। आज दुनिया भर में जितनी भी पीने के पानी की पाइप लाइन, गैस पाइपलाइन, तेल पाइपलाइन की आपूर्ति और निर्माण हो रहा है, उनमें से 60 प्रतिशत पाइप की आपूर्ति गुजरात से हो रही है। जिसमें कभी पानी नहीं दिखता था उसी साबरमती ने अपनी पूरी दिशा बदल दी। आज जो रिवर फ्रंट दुनिया का सबसे लंबा रिवर फ्रंट है, वह हिंदुस्तान के एक राज्य में है और वह है गुजरात।’’

















