Delhi Election 2025 : दिल्ली में पूर्वांचलियों की उपेक्षा बनेगी 'AAP' की हार का कारण..?
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Delhi Election 2025 : दिल्ली में पूर्वांचलियों की उपेक्षा बनेगी ‘AAP’ की हार का कारण..?

दिल्ली में 40% पूर्वांचली आबादी आम आदमी पार्टी सरकार से उपेक्षित महसूस कर रही है। यमुना की गंदगी, छठ पूजा की अव्यवस्था, और रोजगार योजनाओं की कमी ने समुदाय में आक्रोश बढ़ा दिया है। पढ़ें क्यों आगामी चुनाव AAP के लिए चुनौती बनेगे पूर्वांचली

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jan 28, 2025, 11:11 pm IST
in भारत, दिल्ली

दिल्ली, जिसे देश की राजधानी के रूप में जाना जाता है, यहां लगभग 40% आबादी पूर्वांचल से जुड़ी हुई है। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों से आए ये प्रवासी दिल्ली की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। घरों में काम करने वाली महिलाएं, दिहाड़ी मजदूर, ऑटो चालक, और छोटी दुकानों के मालिक—पूर्वांचली समुदाय हर क्षेत्र में योगदान दे रहा है। लेकिन इतने महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद, आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इस समुदाय की समस्याओं और जरूरतों को लगातार नजरअंदाज किया है।

आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने से पहले पूर्वांचलियों को बड़े-बड़े वादे किए गए। लेकिन सरकार बनने के बाद ये वादे केवल कागजों और नारों तक सीमित रह गए। केजरीवाल सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण पूर्वांचली समुदाय अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

दिल्ली सरकार के वादे और असलियत का फर्क

पूर्वांचलियों के लिए विशिष्ट योजनाओं की कमी
AAP ने चुनावी रैलियों में पूर्वांचलियों के विकास के लिए कई वादे किए थे, लेकिन सरकार ने कोई भी खास योजना लागू नहीं की।

  • उदाहरण के लिए उज्ज्वला योजना, जो गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देती है, दिल्ली में प्रभावी तरीके से लागू नहीं की गई। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इस योजना का व्यापक लाभ मिला।

स्वास्थ्य और शिक्षा में वादाखिलाफी

  • मोहल्ला क्लीनिक : स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार का दावा किया गया, लेकिन पूर्वांचल के प्रवासियों ने इस योजना को केवल प्रचार तक सीमित पाया। फर्जी टेस्ट और नकली दवाइयों के आरोपों ने इन क्लीनिक्स की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
  • शिक्षा क्षेत्र : सरकारी स्कूलों की स्थिति खस्ताहाल है। जो स्कूल बनाए गए, वे जरूरत से कम हैं। पूर्वांचली बच्चों को पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूलों में जाना पड़ता है, जो उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ डालता है।

रोजगार और कौशल विकास में घोर उपेक्षा

दिल्ली सरकार ने कौशल विकास और स्वरोजगार योजनाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

  • दिल्ली में संकल्प योजना जैसी योजनाएं सिर्फ नाम की बनकर रह गईं।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में दिल्ली में स्वरोजगार के लिए दी जाने वाली सहायता न्यूनतम रही है।
पूर्वांचलियों के लिए केंद्र सरकार की पहल

केंद्र सरकार ने पूर्वांचलियों के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, लेकिन दिल्ली में AAP सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ये योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाईं। उदाहरण के लिए “आयुष्मान भारत योजना” और “प्रधानमंत्री आवास योजना” के माध्यम से समझिए.

  • आयुष्मान भारत योजना : यह योजना गरीबों को 5 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा देती है। लेकिन केजरीवाल सरकार ने इसे दिल्ली में लागू करने से इनकार कर दिया, जिससे लाखों पूर्वांचली वंचित रह गए।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना : गरीबों को किफायती आवास देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना दिल्ली में नाममात्र की है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसका व्यापक लाभ मिल रहा है।
दिल्ली में पूर्वांचलियों की समस्याएं

राशन कार्ड और पहचान पत्र का मुद्दा

पूर्वांचलियों ने AAP सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने और उन्हें आधार कार्ड व अन्य पहचान पत्र देने में प्राथमिकता दी। इससे गरीब पूर्वांचली प्रवासी, जिनके दस्तावेज अधूरे हैं, वह सरकारी योजनाओं से वंचित हो गए।

असुरक्षित नौकरियां और अनिश्चित भविष्य

पूर्वांचल के प्रवासी दिहाड़ी मजदूरी और अस्थायी नौकरियों पर निर्भर हैं। दिल्ली सरकार ने रोजगार के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई। कई पूर्वांचली मज़दूरों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने उनके रोजगार को सुरक्षित करने के बजाय, अन्य बाहरी समूहों को प्राथमिकता दी।

गंदगी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

पूर्वांचली बहुल इलाकों, जैसे—त्रिलोकपुरी, संगम विहार और मंगोलपुरी, में टूटी सड़कों, गंदे पानी और सीवर की समस्याएं आम हैं।
केजरीवाल ने वादा किया था कि दिल्ली को “लंदन-पेरिस” जैसा बनाएंगे, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।

छठ पूजा पर अव्यवस्था और यमुना की गंदगी से पूर्वांचलियों में आक्रोश

प्रकृति से जुड़ा पर्व छठ पूजा, जो पूर्वांचलियों की आस्था और परंपरा का सबसे बड़ा पर्व है, हर साल दिल्ली में अव्यवस्थाओं और यमुना की गंदगी के कारण चर्चा में रहता है। जिसके पीछे की वजह यमुना नदी में जहरीले झाग और प्रदूषित पानी है। इसी जहरीले झाग और प्रदूषित पानी में छठ पर्व मानाने वाले पूर्वांचलियों को अर्घ्य देने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है। वही AAP सरकार के दावों के बावजूद, अस्थाई घाटों पर सफाई, रोशनी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।

वहीं यमुना की बदहाल स्थिति और जहरीला झाग केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि यह केजरीवाल सरकार की नीतियों और पूर्वांचली समुदाय के प्रति उनकी उदासीनता का प्रतीक है। पूर्वांचलियों का आरोप है कि सरकार ने उनकी धार्मिक भावनाओं और पर्व की अहमियत को नजरअंदाज किया है।

छठ पर्व के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई जहरीले झाग में अर्घ्य देने की तस्वीरों ने पूर्वांचली समाज के भीतर आम आदमी पार्टी शासित दिल्ली सरकार के प्रति आक्रोश और बढ़ा दिया है। इस मामले को न केवल केजरीवाल सरकार की विफलता माना जा रहा है, बल्कि इसे एक बड़े समुदाय की उपेक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

घुसपैठियों का समर्थन

पूर्वांचली समुदाय का मानना है कि केजरीवाल सरकार ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बसाने में मदद की। इससे न केवल दिल्ली की सुरक्षा खतरे में आई, बल्कि पूर्वांचलियों के अधिकार भी छीने गए।

पूर्वांचलियों का आक्रोश : “हमें वोट बैंक समझा गया”

पूर्वांचलियों का मानना है कि AAP ने उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। चुनाव से पहले झूठे वादे किए गए, लेकिन सरकार बनने के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया। पूर्वांचल समाज के नेता आरोप लगाते हैं कि AAP सरकार ने कभी उनके प्रतिनिधित्व को महत्व नहीं दिया। रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों की उपेक्षा ने उनके भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।

पूर्वांचली समुदाय दिल्ली की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था का मजबूत स्तंभ है। लेकिन AAP सरकार की नीतियों और योजनाओं ने इस वर्ग को ठगा हुआ महसूस कराया है। गंदगी, असुरक्षित नौकरी, और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे पूर्वांचलियों के भीतर गुस्से को जन्म दे रहे हैं। दिल्ली में आगामी चुनावों में पूर्वांचल समुदाय अहम भूमिका निभाएगा। इस बार केजरीवाल सरकार को उनके झूठे वादों और योजनाओं की विफलता का जवाब देना होगा।

बरहाल चुनावों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पूर्वांचली समुदाय AAP की विफलताओं को नजरअंदाज करेगा, या फिर ऐसे नेतृत्व की तलाश करेगा जो उनके कल्याण के लिए ईमानदारी से काम करे।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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