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तकनीक का डिजिटल कुंभ

लगभग 4,000 हेक्टेयर में विकसित मेला क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन, यात्रियों की संख्या से लेकर सुरक्षा और श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा प्रदान करने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया जा रहा

Written byनागार्जुननागार्जुन
Jan 28, 2025, 12:17 pm IST
in विश्लेषण, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
महाकुंभ में पहली बार ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है

महाकुंभ में पहली बार ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है

उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ की सुरक्षा, इसके सुचारु संचालन तथा तीर्थयात्रियों की गिनती से लेकर लेन-देन और अन्य जानकारियां प्रदान करने के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग किया है। इसलिए इसे ‘डिजिटल कुंभ’ भी कहा जा रहा है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और एआई क्षमता से लैस कैमरों के अलावा एप, उन्नत ड्रोन और साइबर सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है। साइबर सुरक्षा के लिए मेला क्षेत्र में हेल्प डेस्क, पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। साथ ही, श्रद्धालुओं को साइबर ठगी के प्रति सचेत करने और जागरूक करने के लिए जगह-जगह पर डिस्प्ले लगाए गए हैं। साथ ही, एआई, फेसबुक, एक्स और गूगल का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है।
महाकुंभ में बड़ी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों का डेटा भी एकत्र किया जा रहा है। इसमें रियल टाइम डेटा विश्लेषण के अलावा अन्य स्रोतों से भी डेटा एकत्र कर उसका गहन विश्लेषण किया जाएगा। इस डेटा का उपयोग भीड़ के कुशल प्रबंधन में किया जाएगा। साथ ही, एआई की मदद से इसका उपयोग अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार, संभावित खतरों का तत्काल पता लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा दूसरे आयोजनों के सुरक्षित व कुशल आयोजनों में भी मददगार साबित होगा।

आईआईटी का सहयोग

डेटा एनालिटिक्स को महाकुंभ में आईटी बुनियादी ढांचे की रीढ़ कहा जा रहा है। पिछली घटनाओं के डेटा का विश्लेषण करके और रियल टाइम इनपुट को एकीकृत कर अधिकारी कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान लगा रहे हैं। पूर्वानुमानित मॉडल व्यस्त क्षेत्रों में भीड़भाड़ होने से पहले अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती में मददगार होता है, जबकि रियल टाइम डेटा तत्काल निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। महाकुंभ में रोजाना अनुमानित 2.5 टेराबाइट डेटा उत्पन्न हो रहा है। इससे भीड़ के व्यवहार और उसकी प्राथमिकताओं को पहचान कर भविष्य में किसी विशाल आयोजन का प्रबंधन किया जाएगा। महाकुंभ में सीसीटीवी के अलावा 24 एएनपीआर कैमरे, 40 वीएमसीडी, 100 स्मार्ट पार्किंग सिस्टम, भीड़ प्रबंधन और वाहन की गिनती के लिए एआई कंपोनेंट भी लगाए गए हैं।

इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) इलाहाबाद जैसे प्रमुख संस्थानों की सेवाएं ली जा रही हैं। ये संस्थान मेले से जुड़ी भीड़ के प्रबंधन, सुरक्षा और अन्य लॉजिस्टिक चुनौतियों का समाधान, एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से कर रहे हैं।

कुंभ मेले में तैनात बहु-आपदा प्रतिक्रिया वाहन पीड़ितों का पता लगाने वाले कैमरे के अलावा प्राकृतिक आपदा से लेकर सड़क दुर्घटना जैसी स्थितियों से निबटने में सक्षम उपकरणों से लैस है ताकि आपात स्थितियों से कुशलतापूर्वक निबटा जा सके। इसमें 10 से 20 टन की क्षमता वाला एक लिफ्टिंग बैग भी है, जो मलबे में दबे लोगों को बचाएगा। 1.5 टन वजनी वस्तुओं को उठाने और हटाने के लिए भी विशेष मशीनें लगी हैं। साथ ही, वाहन में मजबूत मलबे को काटने वाले उपकरण के अलावा लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग और जीवनरक्षक पेटी जैसे सुरक्षा उपकरण भी लगे हुए हैं। एक तापमान मापने वाला उपकरण आग की घटनाओं के दौरान सटीक तापमान माप कर इसकी उपयोगिता को और बढ़ाता है।

इतना ही नहीं, संगम में प्रदूषण न हो, इसके लिए भी तट पर रियल टाइम में जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है, ताकि तीर्थयात्री स्वच्छ जल में स्नान कर सकें। डिजिटल उपकरणों की मदद से न केवल संसाधनों की निगरानी की जा रही है, बल्कि उनका प्रबंधन भी किया जा रहा है। इसके अलावा, कार्बन उत्सर्जन कम हो, इसके लिए मेला क्षेत्र में सौर ऊर्जा स्टेशन और पर्यावरण अनुकूल डिजिटल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली भी लगाई गई है।

महाकुंभ में पहली बार ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है

ऐसे हो रही गिनती

एआई कैमरों से कुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों की गिनती की जा रही है। इसके लिए अलग से एक टीम गठित की गई है, जिसे ‘क्राउड असेसमेंट टीम’ नाम दिया गया है। यह टीम रियल टाइम के आधार पर महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की गिनती कर रही है। दरअसल, एआई कैमरे लोगों के चेहरे को स्कैन कर वहां मौजूद भीड़ के आधार पर एक-एक व्यक्ति की गिनती करते हैं कि कितने घंटे में कितने लाख लोग आए। मेला क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले 1,800 कैमरे लगाए गए हैं। इनमें शहर के भीतर 268 स्थानों पर 1,107 स्थायी कैमरे, जबकि मेला क्षेत्र में 200 स्थानों पर 744 अस्थायी एआई कैमरे लगाए गए हैं जो 360 डिग्री में देख सकते हैं। साथ ही, 100 से अधिक पार्किंग स्थलों पर भी 720 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, ड्रोन कैमरे की सहायता से भी तीर्थयात्रियों की गिनती की जा रही है।

ये ड्रोन कैमरे एक निश्चित क्षेत्र में भीड़ के घनत्व का आकलन कर लोगों की उपस्थिति का सटीक अनुमान लगाते हैं। इसी तरह, मेला क्षेत्र में पार्किंग, घाट और संगम तट तक पहुंचने वाले रास्तों पर 328 एआई कैमरे लगाए गए हैं, जो भीड़ को नियंत्रित करने में मदद कर रहे हैं। ये एआइ कैमरे प्रति मीटर ‘हेड काउंट’ कर लगातार नियंत्रण कक्ष को अलर्ट करते हैं। इसलिए जैसे ही किसी जगह क्षमता से अधिक लोगों की भीड़ एकत्रित होती है, सुरक्षाकर्मी तत्काल भीड़ को गतिमान कर देते हैं। कैमरों के जरिये लोगों पर निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसी) और नियंत्रण कक्ष के अलावा अरैल और झूंसी में निगरानी केंद्र भी बनाए गए हैं। खास बात यह है कि श्रद्धालुओं की बार-बार गिनती न हो, इसमें भी ये मददगार साबित हो रहे हैं।

चैटबॉट भटकने न देगा

महाकुंभ में यदि कोई भटक गया हो या रास्ता मालूम न हो या किसी अखाड़े, घाट या मठ-मंदिर में जाना चाहता हो, तो वह चैटबॉट से मदद मांग सकता है। इसे खासतौर से देश-विदेश से महाकुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए विकसित किया गया है। इसकी शुरुआती सफलता को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 12 करोड़ लोग इससे जुड़ेंगे। यह चैटबॉट 11 भाषाओं में लोगों को मेला क्षेत्र में भोजन, रास्ता, पार्किंग, वॉशरूम, चेंजिंग रूम और लॉकर सहित हर तरह की जानकारी उपलब्ध करा रहा है।

इसके अलावा, मेला क्षेत्र में जगह-जगह 50,000 क्यूआर कोड लगाए गए हैं। ये चार तरह के हैं। इनसे श्रद्धालुओं को छोटी-बड़ी हर तरह की जानकारी मिल रही है। जैसे-बिजली के खंभों पर लगे पीले क्यूआर कोड को स्कैन कर रास्ता भटकने वाले सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसे स्कैन करने पर फोन में एक फॉर्म आता है, जिसमें व्यक्ति अपना नाम, मोबाइल नंबर और खंभे पर लिखी संख्या भर कर जैसे ही सबमिट करता है, वैसे ही हेल्पलाइन नंबर से सहायता के लिए फोन आ जाता है। एआई कैमरों, चैटबॉट्स, क्यूआर कोड्स को आईसीसीसी से जोड़ा गया है, ताकि लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध हो। यही नहीं, सुरक्षा के लिए बने 17 उप-नियंत्रण कक्षों को आईसीसी से जोड़ा गया है। 1920 हेल्पलाइन सुविधा भी उपलब्ध है।

ड्रोन रोधी प्रणाली

पहली बार मेला परिसर में उच्च तकनीक वाली चार एंटी-ड्रोन प्रणाली लगाई गई है, जो अवांछित ड्रोनों को मार गिराने और निष्क्रिय करने में सक्षम है। यही नहीं, ड्रोन पानी के नीचे भी तीर्थयात्रियों की निगरानी करेगा। ये अत्याधुनिक अंडरवॉटर ड्रोन 100 मीटर तक गोता लगा सकते हैं। इन ड्रोनों का संचालन असीमित दूरी तक किया जा सकता है। ये पानी के भीतर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सटीक जानकारी देंगे। इसके अलावा, मेला क्षेत्र की हवाई सुरक्षा के लिए टेथर्ड ड्रोन भी तैनात किए गए हैं। इसकी कमान विशेषज्ञ टीम के पास होगी, जो एक सेकंड में अलर्ट मोड में आ सकती है। खास बात यह है कि टेथर्ड ड्रोन सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन सुनिश्चित करता है। यह ऊंचाई से हर ब्योरा चाहे बड़ा हो या छोटा, सभी को कैप्चर करता है। 24 घंटे हाई अलर्ट पर रहने के कारण यह किसी भी संदिग्ध ड्रोन को निष्क्रिय कर सकता है।

तीर्थयात्रियों के लिए आरएफआईडी-सक्षम (रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान) रिस्टबैंड भी उपलब्ध हैं, जो उनकी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये बैंड अधिकारियों को मेला क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर नजर रखने, भीड़ प्रबंधन के साथ आपात स्थिति की अधिक सटीक जानकारी भी देंगे। 2019 के कुंभ मेले में इस तकनीक का उपयोग किया गया था, जो भीड़ नियंत्रण और खोए हुए लोगों को मिलाने में बहुत कारगर साबित हुईथी

वीआर स्टॉल : वर्चुअल रियलिटी (वीआर) स्टॉल तीर्थयात्रियों को डिजिटल प्रारूप में पेशवाई जुलूस, गंगा आरती और शुभ स्नान दिवस जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का अनुभव प्रदान कर रहे हैं

ड्रोन शो : महाकुंभ में पहली बार ड्रोन शो का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 2,000 ड्रोन रात को आकाश में ‘प्रयाग महात्म्य’ और ‘समुद्र मंथन’ जैसे पौराणिक कथाओं पर आधारित शो से श्रद्धालुओं को अचंभित कर रहे हैं

डिजिटलीकृत भूमि आवंटन : ‘महाकुंभ भूमि और सुविधा आवंटन’ वेबसाइट पर 10,000 से अधिक संस्थानों के लिए निर्बाध आनलाइन बुकिंग और ट्रैकिंग की सुविधा है। ड्रोन सटीक डिजिटल रिकॉर्ड के लिए मानसून पूर्व और मानसून के बाद भूमि स्थलाकृति का सर्वेक्षण करता है

गूगल मैपिंग : जीआईएस-आधारित मानचित्र तीर्थयात्रियों का आपातकालीन सेवाओं, पुलिस स्टेशनों, पार्किंग क्षेत्रों, खाने-पीने की वस्तुएं, शौचालयों आदि जैसे सार्वजनिक उपयोगिताओं के स्थान के बारे में मार्गदर्शन करेंगे

रिमोट नियंत्रित जीवन रक्षक : रिमोट-नियंत्रित जीवन रक्षक आपात स्थिति में त्वरित बचाव सेवाएं प्रदान करेंगे, जिससे पानी में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी

इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) : यह आपात स्थिति के दौरान त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। मेला क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति या आपदा की स्थिति में वहां तैनात रिस्पांस टीम तुरंत सक्रिय हो जाएगी

महाकुंभ मीडिया सेंटर भी अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले बेहद पेशेवर कैमरे लगाए गए हैं, जो न केवल महाकुंभ की लाइव कवरेज कर रहे हैं, बल्कि हर दृश्य को इस तकनीक से रिकॉर्ड कर रहे हैं कि दूर बैठे लोग भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वास्तविक कुंभ का आनंद उठा रहे हैं

पुलिस एप

स्मार्ट पुलिसिंग के अलावा चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए पुलिस एप का भी उपयोग किया जा रहा है। इस पर प्रमुख स्थलों, मार्गों और पुलिस अधिकारियों के संपर्क विवरण सहित मेला क्षेत्र की पूरी जानकारी उपलब्ध है। इसे खासतौर से भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। आपात स्थिति में भी यह तत्काल सुविधा प्रदान करेगा। महाकुंभ में तैनात सभी पुलिसकर्मियों के सुरक्षित डेटा संग्रह के लिए भी एक एप है। यह किसी भी पुलिसकर्मी के चेहरे को स्कैन कर पूरा ब्योरा उपलब्ध कराता है। इसी से पुलिसकर्मियों की डिजिटल हाजिरी लगाई जा रही है।

मेला क्षेत्र में लगे क्यूआर कोड श्रद्धालुओं को हर तरह की जानकारी प्रदान कर रहे हैं

साइबर पुलिस स्टेशन

एआई के दुरुपयोग, डार्क वेब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों जैसे खतरों से निबटने के लिए मेला क्षेत्र में एक साइबर पुलिस स्टेशन भी स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को साइबर ठगी से बचाना है। साइबर सुरक्षा के लिए 56 साइबर योद्धाओं की टीम को तैनात किया गया है। ये फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफार्मों के जरिये ठगी करने वाले साइबर अपराध गिरोहों पर नजर रखेंगे। जागरूकता अभियानों के अलावा टेंट सिटी में 40 वेरिएबल मैसेजिंग डिस्प्ले और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम के जरिये जानकारी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

खोया-पाया केंद्र

एआई-संचालित कैमरे सुरक्षा ही नहीं, खोए हुए लोगों का पता लगाने में भी सहायता करेंगे। ‘चेहरा पहचान तकनीक’ के जरिए बिछड़े लोगों की पहचान की जाएगी। इसके लिए 10 डिजिटल ‘खोया-पाया केंद्र’ बनाए गए हैं, जो हर लापता व्यक्ति का विवरण तुरंत डिजिटल रूप से दर्ज करेंगे। एक बार पंजीकृत होने के बाद एआई-संचालित कैमरे गुमशुदा व्यक्ति की तलाश शुरू कर देंगे। इसमें लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी मदद ली जा रही है। प्रयागराज में प्रथम अमृत स्नान पर मेला प्रशासन ने 250 से अधिक बिछड़े लोगों को खोया-पाया केंद्र के जरिए परिजनों से मिलवाया।

कुंभ मेला मोबाइल एप

तीर्थयात्रियों को सूचित करने और सहज अनुभव सुनिश्चित करने के लिए कुंभ मेला मोबाइल एप उपलब्ध है, जो नेविगेशन सहायता, आपातकालीन संपर्क और अनुष्ठानों व घटनाओं पर लाइव अपडेट देगा। इसमें ‘खोया और पाया’ अनुभाग के अलावा आवास बुक करने या चिकित्सा सहायता जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि 15 लाख से अधिक लोग इसका उपयोग करेंगे। यह एप हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला जैसे बहुभाषी विकल्पों के साथ स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तीर्थयात्रियों के लिए सहायक होगा।

 

Topics: पाञ्चजन्य विशेषNatural DisasterIndian Institute of Technologyरियल टाइम डेटा विश्लेषणपर्यावरण अनुकूल डिजिटलReal Time Data AnalyticsEnvironment Friendly Digitalप्राकृतिक आपदाराष्ट्रीय सुरक्षाभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानNational security
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