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रोहिंग्या पर फंस गए Yunus, Myanmar के सत्ता विरोधी विद्रोही गुट ने Bangladesh से सटी आखिरी चौकी पर किया कब्ज़ा

विद्रोही अराकान लड़ाकों द्वारा आखिरी सीमा चौकी कब्ज़ा करने से राखीने राज्य के उत्तरी हिस्से पर उस गुट का नियंत्रण हो गया है। यह गुट इस क्षेत्र को स्वायत्त क्षेत्र के अंतर्गत लेना चाहता है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 16, 2024, 12:19 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
विद्रोही लड़ाका सेना (फाइल चित्र)

विद्रोही लड़ाका सेना (फाइल चित्र)

उल्लेखनीय है कि साल 2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को कुर्सी से हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। विद्रोही अराकान लड़ाकों के प्रवक्ता खिंग थुखा ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए कहा ​है कि उनके गुट ने माउंगडॉ में अंतिम बची सैन्य चौकी पर कब्जा किया है। चौकी की निगरानी कर रहे कमांडर ब्रिगेडियर जनरल थुरिन टुन को पकड़ लिया गया है।


बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के लिए म्यांमार से सटी सीमा से एक बड़ी चुनौती सामने आई है। समाचार प्राप्त हुआ है कि बांग्लादेश के राखीने प्रांत से लगती म्यांमार सीमा पर अब सैन्य सत्ता विरोधी गुट ने वहां से म्यांमार की सेना का वर्चस्व खत्म कर दिया है। यह विद्रोही गुट सबसे शक्तिशाली जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र गुटों में से एक माना जाता है। इसी ने रणनीतिक रूप से अहम म्यांमार के पश्चिमी शहर मौंगडॉ में अंतिम सेना चौकी पर कब्ज़ा करने का दावा किया है।

यह स्थिति बांग्लादेश के लिए चुनौती लेकर आई है। विद्रोही गुट के 271 किलोमीटर लंबी सीमा पर पूर्ण नियंत्रण होने से बांग्लादेश के राखीने प्रांत में मुख्य रूप से बसे रोहिंग्या मुस्लिमों पर संकट के बादल मंछराने लगे हैं। विद्रोही अराकान लड़ाकों द्वारा आखिरी सीमा चौकी कब्ज़ा करने से राखीने राज्य के उत्तरी हिस्से पर उस गुट का नियंत्रण हो गया है। यह गुट इस क्षेत्र को स्वायत्त क्षेत्र के अंतर्गत लेना चाहता है।

2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को कुर्सी से हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी

विशेषज्ञों के अनुसार, अब बांग्लादेश का राखीने क्षेत्र म्यांमार के राष्ट्रव्यापी गृहयुद्ध का केंद्र बिंदु बन गया है। लोकतंत्र समर्थक गुरिल्ला और स्वायत्तता की मांग करने वाले जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र गुट देश के सैन्य शासकों के विरुद्ध लड़ाई को और तेज करते जाने की स्थिति में आ गए हैं।

विद्रोहियों का म्यांमार के पश्चिमी शहर मौंगडॉ में अंतिम सेना चौकी पर कब्ज़ा

उल्लेखनीय है कि साल 2021 में म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को कुर्सी से हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। विद्रोही अराकान लड़ाकों के प्रवक्ता खिंग थुखा ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए कहा ​है कि उनके गुट ने माउंगडॉ में अंतिम बची सैन्य चौकी पर कब्जा किया है। चौकी की निगरानी कर रहे कमांडर ब्रिगेडियर जनरल थुरिन टुन को पकड़ लिया गया है।

म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले से लगभग 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित माउंगडॉ पिछले छह माह से ही अराकान लड़ाकों के हमलों के केन्द्र में रहा था। इस गुट ने इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश से सटे दो सीमान्त शहरों पलेतवा और बुथिदाउंग पर कब्ज़ा किया था।

गत वर्ष नवंबर में अराकान लड़ाकों ने राखीने के 17 उपनगरों में से 11 पर नियंत्रण हासिल कर लिया था। राखीने से सटा ऐन शहर, जहां से म्यांमार के पश्चिमी हिस्से पर रणनीतिक रूप से निगरानी रखी जाती है, वहां सैन्य मुख्यालय बना हुआ था, आज वहां अराकान लड़ाकों का लगभग संपूण कब्जा हो चुका है।

विद्रोही गुट की ओर से टेलीग्राम पर पोस्ट किए एक बयान में कहा गया है कि उसने सेना की पश्चिमी कमान को छोड़कर 30 से अधिक सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया है, जो राखीने और पड़ोसी चिन राज्य के दक्षिणी हिस्से के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी में देश के क्षेत्रीय जल को नियंत्रित करती है।

राखीने में पिछले दिनों चले संघर्ष में मुस्लिम रोहिंग्याओं के खिलाफ संगठित हिंसा के दोबारा शुरू होने की संभावनाएं बन गई हैं। इन्हीं रोहिंग्याओं को 2017 में बौद्धों के प्रतिकार के चलते भाग कर पड़ोसी बांग्लादेश में आना पड़ा था। राखीने राज्य में बहुसंख्यक बौद्ध राखीने जातीय समूह की सैन्य शाखा अराकान आर्मी बांग्लादेश तथा म्यांमार की सरकारों से स्वायत्तता चाहती है।

रोहिंग्या मुस्लिम दावा करते हैं कि वे कई पीढ़ियों से म्यांमार में रह रहे हैं, वहां के अधिकांश बौद्ध, जिनमें राखीने अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी शामिल हैं, उनका मानना है कि वे बांग्लादेश से अवैध रूप से पलायन करने वहां आ बसे हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों का बौद्धों के प्रति हिंसक बर्ताव इस हद तक बढ़ चुका था कि संगठित बौद्धों ने उन्हें देश से निकल जाने को मजबूर कर दिया। उसके बाद ये रोहिंग्या बांग्लादेश के रास्ते भारत के अनेक स्थानों पर अस्थायी कैंप बनाकर रह रहे हैं और यहां अपराध और अन्य गैरकानूनी काम करते हैं। देश की सेकुलर राज्य सरकारों ने वोट बैंक के लालच में इनके गैरकानूनी तरीके से आधार और वोटर कार्ड तक बनवा दिए हैं।

इस्लामवादी बांग्लादेश ने कॉक्स बाजार में इन रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए एक विशाल कच्ची कॉलोनी बनाई हुई है

म्यांमार और बांग्लादेश के बीच की सीमा नाफ़ नदी और बंगाल की खाड़ी के तट तक फैली हुई है। अराकान लड़ाकों का कहना है कि उन्होंने नाफ़ नदी के आर—पार जाना फिलहाल बंद करा दिया है, क्योंकि पुलिस और सेना से जुड़े स्थानीय मुसलमान नाव से बांग्लादेश भागने की कोशिश करते पाए गए थे।

अराकान लड़ाकों की ताजा कामयाबी बांग्लादेश की यूनुस सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित होने जा रही है। ठीक सीमा पर मौजूद इन सशस्त्र लड़ाकों से हिंसक रोहिंग्या मुस्लिमों की रक्षा करना और राखीने को बांग्लादेश का हिस्सा बनाए रखना यूनुस के लिए कड़ी परीक्षा जैसा होगा। इस्लामवादी बांग्लादेश ने कॉक्स बाजार में इन रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए एक विशाल कच्ची कॉलोनी बनाकर वहां बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई हुई हैं। बताया जाता है कि म्यांमार से भागे करीब 8 लाख रोहिंग्या मुस्लिम यहां बसे हुए हैं। यह स्थान एक प्रकार से दूसरे देशों में घुसपैठ करके, वहां अराजकता फैलाने के एक केन्द्र जैसा बन गया है।

Topics: रोहिंग्या मुस्लिमयूनुस सरकारअराकानMuslimarakaan rebelsRohingyacox bazaarम्यांमारBangladeshislamicfightmyanmarबांग्लादेश
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