हम सिख हिंदू ही हैं
August 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

हम सिख हिंदू ही हैं

गुरू गोबिंद सिंह ने देश के लोगों में नये साहस, बल और उत्साह का संचार करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की। जिसकी कमान खत्री, जाट, धोबी, नाई और कुम्हार जाति के पांच प्यारों को सौंपी थी।

Written byडॉ. सुरजीत सिंहडॉ. सुरजीत सिंह
Nov 25, 2024, 09:39 am IST
in विश्लेषण

सोशल मीडिया आदि के माध्यम से सिख-हिंदू अलगाववादी नरेटिव को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर प्रसारित किया जा रहा है। इस नरेटिव से वह लोग अधिक प्रभावित होते हैं जो गुरू ग्रंथ के सामने माथा तो अवश्य टेकते हैं परन्तु उनके पास गुरू की वाणी को समझने के लिए समय नहीं है। गुरू ज्ञान के समक्ष उपासना पद्धति और बाहरी चिन्ह कोई मायने नहीं रखते हैं, बल्कि यह वाणी तो हमें अपने आप से जोड़ती है। ब्रिटिश शासन के प्रभाव में 1898 में काहन सिंह नाभा ने उपासना पद्धति और बाहरी चिन्हों के आधार पर यह लिखा था कि ‘हम हिंदू नहीं है‘। काहन सिंह नाभा यदि गुरू गोबिंद सिंह के क्रांतिकारी बहुपक्षीय जीवन उद्देश्यों को निष्पक्ष तरीके से समझने का प्रयास करते तो शायद उन्हें यह पुस्तक लिखने की जरूरत ही नहीं पड़ती। 13 अप्रैल 1699 ई. तक सभी नौ गुरूओं की तरह गुरू गोबिंद सिंह भी एक श्रद्धावान हिन्दू थे।

औरंगजेब के समय देश जब सांप्रदायिकता की आंधी से घिरा हुआ था, उस समय पटना में पैदा होने वाली यह शख्सियत आनंदपुर के किले में बैठ कर यह विचार कर रही थी कि देश के लोगों को जाति-पात के बंधनों से मुक्त कर उनमें किस प्रकार से साहस का संचार किया जाए। हिंदू पंडितों की रक्षा के लिए अपने पिता गुरू तेग बहादुर के बलिदान के साथ-साथ उनके साथ शहीद हुए सतीदास, मतिदास और दयाला का बलिदान उन्हें यह समझने की प्रेरणा दे रहा था कि गुरू घर से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति जरूरत पड़ने पर देश हित में अपना बलिदान भी दे सकता है।

तत्कालीन समय की आवश्यकता को समझते हुए गुरू गोबिंद सिंह ने देश के लोगों में नये साहस, बल और उत्साह का संचार करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की। जिसकी कमान खत्री, जाट, धोबी, नाई और कुम्हार जाति के पांच प्यारों को सौंपी थी। समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों और नीची जातियों के हाथों में माला के साथ-साथ भाला पकड़ा कर एक निर्भय कौम में बदल दिया। कवि योद्धा गुरू गोबिंद सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ के रामावतार, कृष्णावतार, चण्डी की वार आदि का प्रत्येक छंद वीर रस से इतना ओतप्रोत है कि उसको पढ़ने और सुनने से ही व्यक्ति के खून का एक-एक कतरा फड़कने लगता है। यह सब उन्होंने इसलिए लिखा कि योद्धा को जंग में लड़ने की प्रेरणा को जुझारूपन में बदला जा सके।

गुरू गोबिंद सिंह ने निर्बल लोगों में युद्ध करने की मानसिकता को पैदा करने के बाद ही कहा कि ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊ……..।‘ अमृत छकने वाले हर एक व्यक्ति को कहा जाता है कि आज से आप गुरू के खालसा हो गए हो। आपकी पिछली जात-पात एवं वर्ण, गोत्र आदि सभी समाप्त हो गए हैं, अब आप केवल खालिस सिख हैं। जिसका मन नीवा और मत ऊंची होगी। गुरू गोविंद सिंह का उद्देश्य सिखों की एक ऐसी फौज खड़ी करना था जो हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तत्पर रहे।

यह लेख उनके लिए नहीं है जो गुरू ग्रंथ साहिब को पढ़ने के साथ-साथ समझने का प्रयास भी करते हैं। यह लेख उन लोगों के लिए है जो सिख होने के बावजूद गुरू ज्ञान की परंपरा से बहुत दूर चले गए हैं और सिखों को हिंदुओं से अलग मानते हैं।
आदि शंकराचार्य के बाद समाज में बढ़ते पाखंडों और कर्मकांडों की प्रतिक्रियास्वरूप भक्ति काल का उदय हुआ। जिसमें गुरू नानक भी एक प्रमुख सुधारक थे। गुरू नानक ने कोई धर्म नहीं चलाया था, बल्कि उन्होंने कबीरदास की तरह हिंदू धर्म की कुरीतियों से दूर करने का प्रयास करते हुए जीवन की शुद्धता पर बल दिया। भाई मनी सिंह अपनी पुस्तक ज्ञान रतनावली में लिखा है कि एक बार गुरू नानक से हाजी ने पूछा कि ‘हे फकीर, आप हिंदू है या मुसलमान।‘ गुरू नानक का जवाब था कि ‘मैं हिंदू और मुसलमानों दोनों को ही सही रास्ते पर लाने आया हूं।‘ भारतीय दर्शन और गुरू नानक बाणी में समानता अनेक पदों में दिखाई देती है।

एक नूर ते सभ जग उपजिया कउन भले कउ मंदे।
सभु को मीत हम आपन कीना हम सभना के साजन

एक पिता एकस के हम बारिक

6 गुरूओं, 15 भक्तों, 11 भाटों आदि की वाणी गुरू ग्रंथ साहिब में अंकित है, जिसमें 8344 बार हरि, 2533 बार राम, 475 बार गोविंद, 97 बार मुरारी शब्द आया है। जो यह स्पष्ट करती है कि गुरू ग्रंथ साहिब की ज्ञान-चिंतन परंपरा वैदिक परंपरा के काफी नजदीक है। गुरु ग्रन्थ साहिब की प्रमुख भाषा पंजाबी है इसके बावजूद मराठी, बंगला, संस्कृत, ब्रज, फारसी आदि भाषाओं का प्रयोग मिलता है। वास्तव में गुरू ग्रंथ साहिब की वाणी सत्य को अनुभव करने की है। जीवन की सच्चाई को खोजने की है। गुरू गंथ साहिब में भारतीय दर्शन में सृष्टि रचना का सिद्धांत त्रिदेव से जुड़ा हुआ है। ये तीनों सृष्टि के कर्ता-धर्ता-हर्ता हैं। गुरू ग्रंथ साहिब की सारी चिंतन शैली एक तरह से संसार की सारी रचना प्रक्रिया को एक संक्षिप्त व्याख्या करती है। दोनों की ज्ञान परंपरा एक है। दोनों की जड़े दार्शनिक हैं, तो फिर भारत की मिट्टी से उपजा सिख पंथ हिंदू धर्म से अलग कैसे हो सकता है।

सिखों का समाज में इतना मान सम्मान था कि लोग गर्व से अपने बड़े बेटे को सिख बनाते थे। यदि कोई हिंदू से सिख बनता था तो इसे समाज में फ़क्र की बात मानी जाती थी। समाज ने इसे कभी भी धर्म परिवर्तन नहीं माना। बदलते समय में आज धर्म परंपराओं को नए सिरे से समझने की जरूरत है। हर पंथ की अपनी एक अस्मिता होती है। जिसका सम्मान होना चाहिए। गुरू ग्रंथ साहिब का उद्देश्य सिख को एक आदर्श मानव बनाना है। गुरू ग्रंथ साहिब के अधूरे ज्ञान से ही अलगाववाद की अवधारणाएं पनपती है। इसी का लाभ लेकर ग्लोबल शक्तियां और विभाजनकारी राजनीति हिंदू-सिख एकता में दरार पैदा करने का लाभ लेने लगती हैं। भारत की शक्ति को कमजोर करने की एक साजिश रची जा रही है। जिसका सबसे ज्यादा नुकसान सिखों को ही होगा। 1984 की घटना में कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए हिंदू-सिखों में एक विभाजन रेखा खीचनें का प्रयास किया था। इसलिए आज गलत नरेटिव से सचेत रहने के साथ-साथ सिखों को समझना होगा कि हम सिख हिंदू ही है।

Topics: हिन्दूHindusसिखsikhsहिन्दू सिख एक हैंHindu Sikhs are oneअलगाववादSeparatism
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Jammu kashmir library terrorist

जम्मू कश्मीर-स्कूल लाइब्रेरी में आतंकियों का प्रचार: दो किताबें बैन, लेखक-प्रकाशक ब्लैकलिस्ट

विधान सभा चुनाव परिणाम : भविष्य में सतर्कता की एक गहरी दस्तक भी

भारत में काैन है अल्पसंख्यक!

करक जिले में श्री परमहंस जी महाराज समाधि मंदिर का यह हाल किया था मजहबी उन्मादियों ने (फाइल चित्र)

जिन्ना के देश में बदहाल हैं मंदिर और गुरुद्वारे, Voice of Minority की रिपोर्ट ने किया खुलासा, 98% जर्जर या कब्जे में

दिल्ली बम विस्फोट : कैंपस में कट्टरता की नर्सरी

ब्रिटिश-अफ्रीकी यूट्यूबर सेंजो न केवल धर्म का उपहास उड़ाते हुए मांस खा रहा था, बल्कि उसने वहां बैठी महिलाओं और अन्य भक्त कर्मचारियों को भी वह खाने की पेशकश की

लंदन इस्कॉन के रेस्टोरेंट में बेशर्मी से मांस खाने वाले के विरुद्ध लोगों का भड़का गुस्सा, अब दोषी मांग रहा माफी

Load More

ताज़ा समाचार

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

“5 अगस्त को पहली बार मीडिया के सामने आएंगी शेख हसीना”: दिल्ली में बांग्लादेश वापसी की रणनीति पर होंगे बड़े ऐलान!

Bangladesh Army New Cantonment Naikhongchhari Silkhali Base India Mizoram Border General Waker Uz Zaman Turkey Drone Panchjanya

भारत सीमा पर बांग्लादेश की बड़ी सैन्य घेराबंदी: नाइखोंगछारी में बना रहा छावनी, तैनात किए तुर्की से लिए हथियार!

British Museum 11th Century Maa Saraswati Vagdevi Idol Return Bhojshala Dhar Haryana Saraswati Board Panchjanya

लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से भारत वापस आएगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भोजशाला से जुड़ा है इतिहास!

CM Pushkar Singh Dhami Mahendra Bhatt Dehradun Dayitvdhari Meeting Panchjanya

देहरादून में बोले CM धामी- ‘दायित्वधारी सरकार और जनता के बीच सेतु’, समस्याओं के समाधान में निभाएं सक्रिय भूमिका!

VHP International Joint General Secretary Dr Surendra Jain Jodhpur Press Conference Waqf Board Scam Panchjanya

“सीमांत अतिक्रमण हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”: VHP ने की राजस्थान वक्फ बोर्ड CEO को हटाने की मांग, जानिए कारण

Ratnagiri Silent March Gen Z Samvidhan Samman Manch Maruti Mandir Ambedkar Statue

सनातन और सेना के अपमान पर भड़का आक्रोश: रत्नागिरी में Gen Z युवाओं ने निकाली विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’!

Dattatreya Hosabale RSS General Secretary NSE Mumbai Viksit Bharat Education Seminar Panchjanya

हम कोई फैक्ट्री नहीं, सभ्यता बना रहे हैं: मुंबई में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दिया विकसित भारत पर बड़ा संदेश

3 अगस्त का पंचांग

3 अगस्त का पंचांग: जानें ग्रह स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

विचार के नाम पर खाली, होठों पर बस गाली

विश्व मैत्री दिवस का मायाजाल और श्री रामचरितमानस में निहित मित्रधर्म का सन्देश

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies