राजीव गांधी का सियासी खेल : श्री राम मंदिर शिलान्यास और 1989 का चुनावी झटका
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राजीव गांधी का सियासी खेल : श्री राम मंदिर शिलान्यास और 1989 का चुनावी झटका

राजीव गांधी ने हिंदुओं और मुसलमानों की नावों में एक साथ सवारी करने की कोशिश की। नतीजा: वो मंझधार में गिर पड़े।

Written byमनोज रघुवंशीमनोज रघुवंशी
Nov 11, 2024, 11:01 am IST
inभारत
राजीव गांधी की सियासी खेल

राजीव गांधी की सियासी खेल

नवंबर 9 से 11, 1989: राजीव गांधी ने हिंदुओं और मुसलमानों की नावों में एक साथ सवारी करने की कोशिश की। नतीजा: वो मंझधार में गिर पड़े। आज से पांच साल पहले, 9 नवम्बर को उच्चतम न्यायालय का निर्णय आया था कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि स्थल पर श्री राम जन्मभूमि मंदिर ही बनेगा। उस से 30 साल पहले, 9-11-1989 को, श्री राम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास हुआ था। वो शिलान्यास केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि राजनैतिक रूप से भी आधुनिक भारत के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एक चाल चली। उन्होंने एक साथ हिन्दू और मुस्लिम दोनों के साथ चालाकी करी, और मुंह के बल गिर पड़े। शिलान्यास से पहले राजीव गाँधी की औपचारिक ‘पोज़िशन’ ये थी कि ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ को शिलान्यास की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्यूंकि जिस ‘स्पॉट’ पर वो शिलान्यास करने जा रहे हैं, वो ‘स्पॉट’ विवादित है।

मुसलमान आश्वस्त थे कि राजीव गांधी शिलान्यास नहीं होने देंगे। इसलिए मुसलमानों ने कोई मोर्चाबंदी नहीं करी। हिन्दू पक्ष संकल्प-बद्ध था कि हम तो शिलान्यास वहीं करेंगे, और निर्धारित दिन और तय समय पर ही करेंगे।

जब शिलान्यास में लगभग 24 घंटे बचे थे, तब लखनऊ में एक अतिमहत्वूर्ण बैठक चल रही थी। उसी दौरान लखनऊ-फैजाबाद सड़क पर, बाराबंकी में, प्रशासन ने एक बैरियर लगा कर पत्रकारों को अयोध्या जाने से रोक दिया था। ये संवाददाता उस ही बाधा के चलते बाकी पत्रकारों के साथ रुका हुआ था। पत्रकार नहीं जानते थे कि लखनऊ में कोई बैठक चल रही है और उस बैठक में होने वाले निर्णय की वजह से उन के रास्ते की बाधा हटने वाली है।

लखनऊ की बैठक में ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ के नेतृत्व के साथ-साथ तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. डी. तिवारी मौजूद थे। ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ के वरिष्ठ, योगी आदित्यनाथ के गुरु, महंत अवैद्यनाथ और एस. सी. दीक्षित ने अपना निष्कर्ष सुना दिया, कि सरकार चाहे हाँ कहे या ना, हम शिलान्यास करने जा रहे हैं।

बूटा सिंह ने अपने सामने नक़्शे पर एक निगाह डाली और कहा कि सरकार शिलान्यास की अनुमति इसलिए नहीं दे सकती क्यूंकि जिस स्थल पर आप शिलान्यास करने जा रहे हैं, वो स्थल ही विवादित है। दीक्षित जी पहले उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक रह चुके थे। उन्होंने ऐलान किया कि अगर हम कोई ग़ैरकानूनी काम करने जा रहे हैं तो आप हम को गिरफ़्तार कर लीजिये।

कुछ ही पलों में बूटा सिंह ने दोबारा उस ही नक़्शे को देखा और बोले कि आप को गिरफ़्तार करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। आप जिस स्थल पर शिलान्यास करने जा रहे हैं, वो विवादित है ही नहीं। इस मीटिंग के तुरंत बाद बाराबंकी प्रशासन ने बैरियर हटा दिया और ये संवाददाता बाकी पत्रकारों के साथ फैजाबाद पहुंच गया। 9-11 को लगभग डेढ़ बजे दोपहर को शिलान्यास प्रारम्भ हुआ और अगले दिन सुबह लगभग साढ़े दस बजे तक चलता रहा। 9-11 की शाम को ये सुगबुगाहट सुनाई दी कि राजीव गांधी के पक्ष से ये श्रेय चाहा गया है कि देखो हम ने शिलान्यास करवा दिया।

अब ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ ने अगला कदम रखा। 11 नवम्बर, को विश्व हिन्दू परिषद् की ओर से लगभग 5,000 गेरुए-वस्त्र धारी अपने कंधों पर फावड़े वगैरह ले कर श्री राम जन्मभूमि मंदिर की और चल पड़े। उन का कहना था कि शिलान्यास हो जाने का मतलब है कि अब मंदिर निर्माण करना है। हम तुरंत मंदिर निर्माण करने के लिए जा रहे हैं। राजीव गांधी के हाथ-पांव फूल गए। राजीव गांधी ने तुरंत मुख्यमंत्री एन. डी. तिवारी से कह कर साधुओं को श्री राम जन्मभूमि स्थल तक पहुँचने से रोक दिया।

इस संवाददाता ने बाबरी मस्जिद के बुज़ुर्ग पक्षधर हाशिम अंसारी के घर पर जा कर उन के साथ साक्षात्कार किया। साक्षात्कार के बाद वो इस संवाददाता को गाडी तक छोड़ने आये। चलते चलते उन्होंने अपने मन की बात बताई। उन्होंने कहा कि इस ही राजीव गाँधी के नाना नेहरू के समय बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखी गयी थीं और ताला बंद कर दिया गया था। उस से पहले जो नमाज़ होती थी वो नमाज़ भी बंद करवा दी गयी थी। इस ही राजीव गाँधी ने 1 फरवरी 1986 को अपने मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह से कह कर ताला खुलवा दिया था। इस ही राजीव गाँधी ने आज शिलान्यास करवाया है। एक दिन यही राजीव गाँधी राम मंदिर बनवा देगा। हम इस राजीव गांधी को कभी माफ़ नहीं करेंगे। देखिएगा, इलेक्शन में ये साफ़ हो जायेगा।

इस संवाददाता ने जब हिन्दू पक्ष से साक्षात्कार किया तो उन्होंने कहा कि अच्छा-ख़ासा शिलान्यास हो गया था, और हम मंदिर बनाने जा रहे थे। इस राजीव गांधी ने हमारे पवित्र कार्य में बाधा डाल दी। हम इस को कभी क्षमा नहीं करेंगे। देखिएगा, ये इलेक्शन में जड़ से उखड़ जायेगा। एक पखवाड़े के बाद लोक सभा चुनाव थे। पिछले लोक सभा चुनाव में राजीव गांधी को 414 सीट मिली थी। लेकिन 1989 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस सिकुड़ के 197 सीट पर आ गयी, और भाजपा 2 सीट से बढ़ कर 89 सीट पहुँच गयी।

2 दिसंबर को विश्वनाथ प्रताप सिंह भाजपा के समर्थन से प्रधानमन्त्री बन गए। राजीव गांधी ने सोचा कि शिलान्यास से हिन्दू खुश होंगे, और राम मंदिर रोकने पर मुसलमान गदगद होंगे हुआ उल्टा। शिलान्यास होने से मुस्लिम वोट कट गया और मंदिर रुकने से हिन्दू वोट कट गया।

Topics: विश्व हिन्दू परिषदVishwa Hindu ParishadRam MandirRajiv Gandhiपाञ्चजन्य विशेषश्री राम जन्मभूमि स्थलRamjanmabhoomi disputeButa Singh and ND Tiwariरामजन्मभूमि विवादमंदिर का शिलान्यास
मनोज रघुवंशी
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