न्यायपालिका में जन विश्वास: CJI चंद्रचूड़ ने भूटान में की महत्वपूर्ण चर्चा
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न्यायपालिका में जन विश्वास: CJI चंद्रचूड़ ने भूटान में की महत्वपूर्ण चर्चा

न्यायाधीशों की भूमिका और सार्वजनिक विश्वास के महत्व पर जोर, भारत-भूटान न्यायिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चार समझौतों पर हस्ताक्षर।

Written byParulParul
Oct 12, 2024, 06:57 pm IST
inभारत

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने हाल ही में भूटान में एक व्याख्यान के दौरान न्यायपालिका में जन विश्वास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जिग्मे सिंग्ये वांगचुक व्याख्यान में कहा कि न्यायाधीश राजनीतिक नेताओं की तरह निर्वाचित नहीं होते लेकिन संविधान के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं। यह जिम्मेदारी न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता और वैधता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

चंद्रचूड़ ने न्यायाधीशों को “अनिर्वाचित और गैर-जवाबदेह” कहकर संबोधित करने वाली आलोचनाओं के संबंध में यह जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि यह दृष्टिकोण अक्सर सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए विवादास्पद निर्णयों से उत्पन्न होता है, जैसे कि 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉकों के अनियमित आवंटनों को रद्द करना। इन कार्रवाइयों के कारण कई बार न्यायालय पर निर्वाचितों पर नियंत्रण या हस्तक्षेपके आरोप लगाए जाते हैं।

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मुख्य न्यायाधीश ने समझाया कि निर्वाचित अधिकारी यह तय करते हैं कि संसाधनों का वितरण कैसे किया जाए, न्यायपालिका की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि यह वितरण निष्पक्ष और समान हो। उन्होंने कहा, “हम निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। जन विश्वास हमारे लिए अन्य सरकारी शाखाओं की तुलना में अलग तरीके से लागू होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए जन विश्वास प्राप्त करना चाहिए।

चंद्रचूड़ ने जन विश्वास की अवधारणा पर विस्तार बताते हुए कहा कि अदालतों को प्रभावी संस्थानों के रूप में देखा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जन विश्वास सिर्फ कानूनी मान्यता के बारे में नहीं है, यह अदालतों की नैतिक ताकत को भी दिखाता है। उन्होंने कहा, “जन विश्वास न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए केंद्रीय है, जो अपनी कार्यप्रणाली में सार्वजनिक राय से अलग रहती है। जैसा कि होना भी चाहिए।”

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चंद्रचूड़ ने यह भी बताया कि न्यायपालिका में संस्थागत विश्वास एक मजबूत संवैधानिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्वीकार किया कि न्यायाधीश सीधे तौर पर जनता के ट्रस्टी नहीं होते, लेकिन उनकी जिम्मेदारी होती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि संसाधनों का वितरण निष्पक्ष हो।

अपने दौरे के दौरान उन्होंने भूटान के मुख्य न्यायाधीश, ल्योंपो चोग्याल दागो रिग्दजिन से भी मुलाकात की। साथ ही, द्विपक्षीय न्यायिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों मुख्य न्यायाधीशों ने भारत और भूटान के बीच कानूनी सहयोग को बढ़ाने के लिए चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

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