अरविंद केजरीवाल को राहत नहीं, कल करना होगा सरेंडर, जानिये कोर्ट में क्या दी गई दलील
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अरविंद केजरीवाल को राहत नहीं, कल करना होगा सरेंडर, जानिये कोर्ट में क्या दी गई दलील

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले के आरोपित और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा 5 जून को फैसला सुनाएंगी।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 1, 2024, 07:24 pm IST
in दिल्ली
अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में किया गया है गिरफ्तार। (फाइल फोटो)

अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में किया गया है गिरफ्तार। (फाइल फोटो)

नई दिल्ली (हि.स.)। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी घोटाला मामले के आरोपित और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नियमित एवं अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने 5 जून को फैसला सुनाने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना होगा। ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी एसवी राजू मौजूद थे। केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन मौजूद थे। सुनवाई शुरू होते ही तुषार मेहता ने कहा कि क्या केजरीवाल सरेंडर करेंगे। केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि वे 2 जून को खुद 3 बजे सरेंडर करेंगे। केजरीवाल ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में गुमराह करने की कोशिश की है। वे खुद सरेंडर नहीं कर रहे हैं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सरेंडर कर रहे हैं।

राजू ने कहा कि केजरीवाल के सरेंडर नहीं करने की मांग सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2 जून को सरेंडर करने को कहा है। ऐसे में अंतरिम जमानत की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत एक जून तक की दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को नियमित जमानत दाखिल करने की छूट दी है। राजू ने कहा कि उनकी नियमित जमानत याचिका भी सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि कानून के मुताबिक वे अभी हिरासत में नहीं हैं। हिरासत में होने के बाद ही नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। राजू ने कहा कि केजरीवाल की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई तभी की जा सकती है जब वो हिरासत में हों। ऐसे में अगर केजरीवाल सरेंडर करते हैं तभी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हो सकती है।

राजू ने कहा कि अंतरिम जमानत हो या नियमित जमानत उसके लिए मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 45 की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। ऐसे में अंतरिम जमानत और नियमित जमानत याचिका दोनों सुनवाई योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जैसे संवैधानिक कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 42 के तहत विशेष अधिकार है लेकिन ट्रायल कोर्ट के विशेष अधिकार नहीं है कि वो इन याचिकाओं पर सुनवाई कर सके। मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 45 के तहत केजरीवाल को अंतरिम जमानत के लिए हाई कोर्ट जाना चाहिए। ट्रायल कोर्ट इसके लिए उचित फोरम नहीं है। केजरीवाल की याचिका में ये नहीं बताया गया है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत बढ़ाने के लिए जो याचिका दायर की थी, उसका खुलासा नहीं किया है। रजिस्ट्रार ने उनकी अर्जी स्वीकार नहीं कि इसे छिपाया गया है।

तुषार मेहता ने कहा कि सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है, क्या ट्रायल कोर्ट उसमें परिवर्तन कर सकता है। मेहता ने कहा कि केजरीवाल की मेडिकल आधार पर एक हफ्ते की अंतरिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ने अस्वीकार कर दिया और उसके बाद वो ट्रायल कोर्ट आए लेकिन ट्रायल कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस तथ्य को छिपाया गया। मेहता ने कहा कि एक तरफ केजरीवाल कह रहे हैं वे बीमार हैं दूसरी तरफ वे रोड शो और सभाएं कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उनका वजन 7 किलो घटा है और उन्हें कैंसर होने का खतरा है। ये सभी तथ्य बेबुनियाद हैं।

मेहता की दलील का हरिहरन ने विरोध करते हुए कहा कि सभी आरोप गलत हैं। जो तथ्य याचिका में दिए गए हैं उन पर संदेह नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही नियमित जमानत याचिका दायर की गई है। अंतरिम जमानत के मामले पर हरिहरन ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। हरिहरन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका दायर करने की छूट दी है, इस वजह से ट्रायल कोर्ट में नियमित जमानत याचिका दायर की गई है।

हरिहरन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अंतरिम जमानत देते हुए केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट जाने की अनुमति दी थी। केजरीवाल की तबीयत खराब है, जिसकी वजह से ट्रायल कोर्ट आना पड़ा है। केजरीवाल का शुगर लेवल घट-बढ़ रहा है। इसलिए उनका चेकअप कराना जरूरी है। केजरीवाल का कीटोन लेवल बढ़ गया है। स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह से वे अंतरिम जमानत बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, दूसरी कोई वजह नहीं है। हरिहरन ने कहा कि अगर केजरीवाल का टेस्ट कराए बिना जेल भेजा गया तो उनके जीवन को खतरा हो सकता है।

हरिहरन की दलील का जवाब देते हुए एसवी राजू ने कहा कि अंतरिम जमानत मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 45 के प्रावधान के तहत ही होनी चाहिए। राजू ने कहा कि केजरीवाल के टेस्ट के लिए कई दिनों की जरूरत नहीं है। ये कुछ घंटों का काम है। केजरीवाल ने कई सभाएं की हैं, रोड शो किए हैं। वे इन टेस्ट के लिए समय निकाल सकते थे। राजू ने केजरीवाल का वजन घटने के दावे को झूठा बताया। जब केजरीवाल जेल गए थे तो उनका वजन 64 किलोग्राम था, निकलते समय 65 किलोग्राम था। राजू ने कहा कि केजरीवाल को जो दवाई दी जा रही है वो शुगर कम करने वाली है। केजरीवाल ने अपने डॉक्टर से कीटोन लेवल बढ़ने की शिकायत कभी नहीं की। केजरीवाल जेल से निकलते ही रैलियां कर रहे हैं लेकिन उन्होंने 20 मई को डॉक्टर से कीटोन बढ़ने की शिकायत नहीं की। आपने 24 मई को डॉक्टर से शिकायत की ताकि अंतरिम जमानत के लिए जमीन तैयार की जा सके।

राजू ने कहा कि केजरीवाल को जेल के अंदर कोई बीमारी होती है तो उन्हें एम्स से लेकर दूसरे अस्पताल ले जाया जा सकता है। अगर किडनी में गड़बड़ी है तो ब्लड टेस्ट होना चाहिए। अगर गंभीर बीमारी है तो दूसरे डॉक्टरों से भी परामर्श लेना चाहिए। अगर केजरीवाल गंभीर रूप से बीमार होते तो वे इतनी रैलियां और चुनाव प्रचार नहीं कर रहे होते। वे बीमारी का बहाना बना रहे हैं।

तुषार मेहता ने कहा कि कानून की गरिमा का सवाल है। ये एक जिम्मेदारी का सवाल है। 25 मई को जानबूझ कर टेस्ट कराया, क्योंकि पता था कि चुनाव प्रचार खत्म होने वाला है। मेहता ने कहा कि केजरीवाल का ये दावा कि उनका वजन घटा है ये झूठा है, क्योंकि वजन बढ़ा है। कोई पक्षकार किसी सिस्टम का मजाक नहीं उड़ा सकता है। मेहता ने कहा कि 25 मई के बाद कोई टेस्ट नहीं कराया गया, उसी टेस्ट के भरोसे ये याचिका दायर की गई है।

कोर्ट ने हरिहरन से पूछा कि केजरीवाल को 7 दिनों की अंतरिम जमानत क्यों चाहिए जबकि राजू कह रहे हैं कि टेस्ट कुछ घंटों का है। तब हरिहरन ने कहा कि होल्टर टेस्ट में समय लगता है। हरिहरन ने कहा कि सभी पैरामीटर पूरा करने के बाद ही होल्टर टेस्ट किया जाता है। उसमें ज्यादा समय लगता है। इस पर मेहता और राजू ने कहा कि ये टेस्ट 25 मई से 1 जून तक किया जा सकता था। मेहता ने कहा कि अगर केजरीवाल की तरह कोई दूसरा पक्षकार भी कहे कि जेल नियमों को दरकिनार रखकर उन्हें चिकित्सा सुविधा दी जाए तो ये कानून का मजाक होगा।

कोर्ट ने 30 मई को केजरीवाल की अंतरिम और नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया था। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की सात दिन की अंतरिम जमानत के आवेदन को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा था कि चूंकि केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने पर फैसला पहले ही सुरक्षित रखा जा चुका है, इसलिए अंतरिम जमानत बढ़ाने की केजरीवाल की याचिका का मुख्य याचिका से कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट जाने की अनुमति भी दी है। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को केजरीवाल को 1 जून तक की अंतरिम जमानत देते हुए 2 जून को सरेंडर करने का आदेश दिया था।

Topics: अरविंद केजरीवालराऊज एवेन्यू कोर्टदिल्ली आबकारी नीतिदिल्ली शराब घोटालादिल्ली आबकारी घोटाला
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