दिल्ली सावधान : अराजक केजरीवाल, कर सकते हैं कोई नया बवाल
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दिल्ली सावधान : अराजक केजरीवाल, कर सकते हैं कोई नया बवाल

एक बार फिर यह डर है कि 31 मार्च को रैली के बाद खालिस्तान समर्थक कोई अराजकता की स्थिति रामलीला मैदान के अंदर पैदा ना करें। अरविन्द केजरीवाल के लोग वैसे भी दिल्ली में घटते जनाधार को देखकर परेशान हैं

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Mar 30, 2024, 05:48 pm IST
inभारत, विश्लेषण

पूरे जोर-शोर के साथ आम आदमी पार्टी के नेता यह प्रचार कर रहे थे कि 31 मार्च को रामलीला मैदान में इंडी गठबंधन की होने वाली रैली सीएम अरविन्द केजरीवाल की रिहाई के लिए हो रही है। कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेन्स करके बताया कि यह झूठ है। गिरफ्तार वे अकेले थोड़े ही ना हुए हैं। भ्रष्टाचार के मामले में इंडी गठबंधन के जिन-जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई है, गिरफ्तारी हुई है। उन सभी के लिए कल गठबंधन के नेता एकत्रित होंगे।

खिसकती हुई सत्ता

लगता है दिल्ली में केजरीवाल की खराब होती स्थिति का आंकलन कांग्रेस ने कर लिया है। संभव है कि दिल्ली के सीट बंटवारे पर वह एक बार पुनर्विचार करे क्योंकि केजरीवाल के जेल जाने के बाद कोई हलचल ना जमीन पर नजर आई और ना ही सोशल मीडिया पर। जिस जनमत पर सवाल होकर उन्होंने दिल्ली की सत्ता पाई थी, वह खिसकती हुई साफ दिखाई दे रही है। आम आदमी पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया पर डीपी बदलने के लिए आहवाहन किया गया था। पचास सौ लोगों से अधिक लोगों ने यह डीपी नहीं बदली होगी। जेल जाने के बाद उनके परिवार से मिलने इंडी गठबंधन का कोई बड़ा नेता नहीं आया। इस बीच सुनीता केजरीवाल ने तीन वीडियो जारी किए। जमीन पर उसका भी कोई खास असर होता नहीं दिखाई दिया। उलटा क्रातिकारियों से केजरीवाल की तुलना को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई।

केजरीवाल को आशीर्वाद

सुनीता केजरीवाल ने वीडियो संदेश के माध्यम से एक अभियान की घोषणा की। जिसे नाम दिया गया केजरीवाल को आशीर्वाद। दिल्ली की जनता ने इसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया। इसलिए संदेश भेजने के लिए एक वाट्सएप नंबर (8297324624) जो पार्टी की तरफ से जारी किया गया था। उसे बंद करना पड़ा। वाट्सएप पर लोग अरविन्द केजरीवाल की झूठ की पोल खोलने लगे। कई संदेश तो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। पार्टी की तरफ से जारी किए गए वाट्सएप नंबर पर कोई अरविन्द की शिकायत करता तो सुनीता केजरीवाल का धन्यवाद वाला संदेश जवाब में आता, जिसमें यह विश्वास दिलाया गया था कि आपका संदेश केजरीवाल तक पहुंचा दिया जाएगा। वे इसे पढ़ेंगे। जब यह बात दिल्ली वालों के बीच फैली की, सारे संदेश दिल्ली के मुख्यमंत्री पढ़ेंगे तो लोगों ने अपनी गली और मोहल्लों से जुड़ी समस्याएं लिख कर उन्हें भेजनी शुरू कर दी। इस तरह दिल्ली में जब पार्टी की भद्द पिटने लगी। उन्होंने संदेश भेजने की सार्वजनिक सुविधा स्थगित कर दी।

काठ की हांडी

कहते हैं कि ‘काठ की हांडी एक बार ही चढ़ती है, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए यह कहावत सच होती दिखाई दे रही है। अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी से ठीक पहले तक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता कुछ इस तरह पेश आ रहे थे कि उनकी गिरफ्तारी होते ही पूरे देश में अन्ना आंदोलन जैसा माहौल बन जाएगा लेकिन अरविन्द और सुनीता केजरीवाल इस बात को समझ नहीं पाए कि जनता अन्ना के लिए सड़क पर उतरी थी। अरविन्द ने धोखे से जनता का समर्थन लिया था। ‘हार की जीत’ कहानी की तरह बाबा भारती देखते रहे और डाकू खडग सिंह सत्ता के घोड़े पर छल से सवार होकर निकल पड़ा, दिल्ली जीतने। बाबा भारती चाहते तो धरना देते, शोर मचाते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कई रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि अन्ना को जहर देकर जान से मारने की कोशिश की गई। जिस अस्पताल ने और डॉक्टर ने यह कोशिश की। उनका नाम भी पब्लिक डोमेन में आया लेकिन बाबा भारती सबको माफ करते हुए अपने आश्रम लौट गए। किसी से कोई शिकायत नहीं की क्योंकि वे चाहते थे कि समाज का विश्वास आंदोलन में बचा रहे। कुछ छल करने वालों की वजह से देश के लोग परिवर्तन की लड़ाई लड़ने वालों को आंदोलनजीवी ना समझने लगें।

खड्ग सिंह का छल बार बार बाबा भारती के विश्वास को छलनी करता रहा। सबसे दुखी वे उस वक्त हुए जब एक शराब की बोतल के साथ दिल्ली में एक बोतल मुफ्त बांटी गई। बात-बात पर जनमत संग्रह का दावा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर लगा ही नहीं कि एक बार दिल्ली की जनता को पूछना चाहिए। शराब के मामले में चल रही जांच पर जब कार्रवाई हुई, इनके नेता गांधीजी की समाधि पर पहुंच गए। गांधीजी की हत्या एक बार गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को की थी लेकिन उन्हें रोज रोज दिल्ली में यहां के मुख्यमंत्री ने मारा है। अब तो आम आदमी पार्टी के कार्यालयों से गांधीजी की तस्वीर हटा दी गई है।

शीश महल अध्याय

दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने लिए शीश महल बना रहे थे, उस वक्त भी उन्होंने दिल्ली की जनता से नहीं पूछा। क्या उन्हें नहीं पता कि दिल्ली की बड़ी आबादी आज भी झुग्गियों में रहती है। उन्हें नहीं पता कि बड़ी आबादी के पास पीने का साफ पानी तक नहीं पहुंच रहा। केजरीवाल ने कहा था कि सरकारी मकान नहीं लेंगे। एक एक करके उन्होंने सारी सरकारी सुविधाएं ले ली। क्या यह सब दिल्ली की जनता नहीं देख रही? अपने बने बनाए घर को फिर थोड़ा और सुंदर बनाने पर उन्होंने लगभग 45 करोड़ सरकारी रुपए खर्च कर दिए। दिल्ली की आधी से अधिक आबादी पूरी जिन्दगी नौकरी करके भी इतना पैसा नहीं कमा पाती। जो उन्होंने अपने बने हुए घर को सजाने में खर्च कर दिए। उसके बाद भी उन्हें लगता है कि दिल्ली की जनता उन पर विश्वास कर रही है? दुनिया भर में मोहल्ला क्लिनिक का मुख्यमंत्री केजरीवाल ने प्रचार किया। जब दिल्ली को इस क्लिनिक की सबसे अधिक जरूरत थी, मोहल्ला क्लिनिकों पर ताला लगा हुआ था। क्या उस दौर को दिल्ली भूल सकती है।

रामलीला मैदान का झूठ

31 मार्च को रामलीला मैदान में विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता एकत्रित होंगे। जांच और सुरक्षा एजेन्सियों को इस समय सतर्क रहना चाहिए। जिस तरह खालिस्तान समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी के अच्छे संबंधों का खुलासा हुआ है। हो सकता है कि पार्टी के समर्थक बन कर खालिस्तान समर्थक रामलीला मैदान में प्रवेश करके, वहां अराजकता फैलाने की कोशिश करें। अधिक दिन नहीं हुए जब आंदोलन के नाम पर ही बड़ी संख्या में खालिस्तान समर्थक दिल्ली में घुसकर उत्पात मचाते रहे और लाल किले की सुरक्षा घेरे को तोड़कर उन्होंने मुंडेर पर निशान साहिब का झंडा फहराया था। यह झंडा कपास या रेशम के कपड़े से बनता है। इसे गुरुद्वारे के बाहर, एक ऊंचे स्थान पर फैहराया जाता है। झंडे पर तलवार, ढाल और कटार की तस्वीर होती है।

खालिस्तान समर्थक नहीं समझ पाए होंगे कि निशान साहिब का सम्मान इस तरह उन्होंने बढ़ाया नहीं। एक पवित्र ध्वज को अपनी गंदी राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए था। एक बार फिर यह डर है कि 31 मार्च को रैली के बाद खालिस्तान समर्थक कोई अराजकता की स्थिति मैदान के अंदर पैदा ना करें। अरविन्द केजरीवाल के लोग वैसे भी दिल्ली में घटते जनाधार को देखकर परेशान हैं। डर यही है कि चुनाव की तारीख पास आते-आते देश में ये लोग अराजकता की कोई नई मिसाल ना कायम कर दें। इसलिए सावधानी जरूरी है!

Topics: केजरीवाल का अगला कदमआम आदमी पार्टीकेजरीवाल का नया बवालAam Aadmi PartySheesh Mahal ChapterNational NewsSunita Kejriwalराष्ट्रीय समाचारKejriwal's next stepArvind KejriwalKejriwal's new ruckusअरविन्द केजरीवालरामलीला मैदानRamlila Maidanशीश महल अध्यायसुनीता केजरीवाल
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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