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उड़ान ऊंची, छलांग लंबी

अंतरिक्ष में बढ़ते कदमों के बूते एक वर्ष में भारत अंतरिक्ष में मानवयुक्त यान भेजने वाले चार देशों में शामिल हो जाएगा

Written by डॉ. शशांक द्विवेदी डॉ. शशांक द्विवेदी
Mar 8, 2024, 04:59 pm IST
inभारत, विश्लेषण, विज्ञान और तकनीक
अंतरिक्ष यात्री (बाएं से) ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला

अंतरिक्ष यात्री (बाएं से) ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला

हमारे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और राजनीतिक इच्छाशक्ति ने आज भारत को उस स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां वह विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका श्रीगणेश कर दिया है। गत 27 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष में देश के गगनयान के पहले मानवयुक्त मिशन पर जाने वाले चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा की। ये यात्री हैं-ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला। वर्तमान में ये सभी इस मिशन के लिए कठोर प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन यात्रियों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ये सिर्फ चार नाम या चार व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि ये 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों को अंतरिक्ष में ले जाने वाली चार शक्तियां हैं।’’

गगनयान मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की सैर कराई जाएगी। इसी साल मानव-रहित परीक्षण उड़ान होगी, जिसमें एक व्योममित्र रोबोट भेजा जाएगा। गगनयान मिशन तीन दिवसीय है। मिशन के लिए मानव को 400 किलोमीटर की पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।

ऐसे चुने गए अंतरिक्ष यात्री

अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए आवेदन करने वाले बहुत से टेस्ट पायलटों में से 12 को सितंबर, 2019 में बेंगलुरु में हुए पहले चरण के चयन में सफलता मिली। यह चयन भारतीय वायु सेना के अधीन कार्यरत इंस्टीट्यूट आफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) द्वारा किया गया था। कई चरणों के चयन के बाद आईएएम और इसरो ने अंतिम 4 यात्रियों को चुना। 2020 के प्रारंभ में इसरो ने चारों को शुरुआती प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा।

कोविड-19 के कारण इनका प्रशिक्षण कुछ देरी के बाद 2021 में पूरा हुआ। इन चारों ने रूस में 13 महीने तक कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब भारत में भी वैसा ही प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे नियमित रूप से उड़ान भरना जारी रखे हुए हैं। गगनयान मिशन के शुरुआती चरणों को 2024 तक पूरा किया जा सकता है। इसमें दो मानवरहित विमानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस मिशन की सफलता के बाद ही यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री

कैप्टन राकेश शर्मा अंतरिक्ष मे जाने वाले भारत के पहले व्यक्ति हैं। 1984 में इसरो और रूस के इंटरकॉस्मिक कार्यक्रम के एक संयुक्त अंतरिक्ष अभियान के अंतर्गत राकेश शर्मा आठ दिन तक अंतरिक्ष में रहे। राकेश उस समय भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर और विमान चालक थे। वहीं कल्पना चावला अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के जरिए अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। उनके अलावा सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में जाने वाली दूसरी भारतवंशी महिला हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा,

‘‘आज शिवशक्ति प्वाइंट पूरी दुनिया को भारतीय सामर्थ्य से परिचित करा रहा है। अब विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में हम सभी एक और ऐतिहासिक सफर के साक्षी बनने जा रहे हैं।’’ कुल मिलाकर गगनयान मिशन से अंतरिक्ष शोध-अनुसंधान, आर्थिक विकास, शिक्षा, तकनीकी विकास और युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने में सफलता मिलेगी।

क्यों खास है गगनयान?

गगनयान मिशन 2022 में ही शुरू होना था, लेकिन कोरोना महामारी और मिशन की जटिलताओं की वजह से इसमें देरी हुई। इसरो का गगनयान मिशन अगर सफल रहा है तो अमेरिका, चीन और पूर्ववर्ती सोवियत संघ के बाद भारत मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ानें संचालित करने वाला चौथा देश बन जाएगा। मिशन गगनयान का मकसद मानव रहित अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजकर उसे सुरक्षित वापस लाना है और अंतरिक्ष में मानव उड़ान के लिए जरूरी प्रौद्योगिकियों का विकास करना है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बनने की भारत की उपलब्धि का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज शिवशक्ति प्वाइंट पूरी दुनिया को भारतीय सामर्थ्य से परिचित करा रहा है। अब विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में हम सभी एक और ऐतिहासिक सफर के साक्षी बनने जा रहे हैं।’’ कुल मिलाकर गगनयान मिशन से अंतरिक्ष शोध-अनुसंधान, आर्थिक विकास, शिक्षा, तकनीकी विकास और युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने में सफलता मिलेगी।
(लेखक मेवाड़ विश्वविद्यालय में निदेशक और ‘टेक्निकल टुडे’ पत्रिका के संपादक हैं)

Topics: भारतीय वायु सेनाअंतरिक्ष यात्रीपाञ्चजन्य विशेषहमारे वैज्ञानिकगगनयानOur scientistsGaganyaanप्रधानमंत्री मोदीastronautsprime minister modiभारतीय वायुसेनाIndian Air Force
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