खोल के कान, सुनें इरफान
September 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

खोल के कान, सुनें इरफान

सेकुलर इतिहासज्ञ प्रो. इरफान हबीब अगर अपनी मार्क्सवादी मानसिकता से बाहर आ सोचें तो पाएंगे कि अयोध्या, काशी, मथुरा में बात सिर्फमंदिर की नहीं है, बात है अपने सांस्कृतिक गौरव को फिर से जाग्रत करने की

Written byसन्त समीरसन्त समीर
Feb 22, 2024, 07:30 am IST
inभारत, विश्लेषण, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
अयोध्या में भव्य राम मंदिर और जाग्रत हिन्दू

अयोध्या में भव्य राम मंदिर और जाग्रत हिन्दू

आज काशी या मथुरा में एक बार फिर से भव्य मन्दिर का निर्माण होता है तो इस पर यह कहना सरासर गलत है कि ‘जो काम औरंगजेब ने किया वही काम अब आप करने जा रहे हैं, ऐसे में आप में और औरंगजेब में क्या अन्तर रह गया?’

सेकुलर इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब पक्के मार्क्सवादी हैं और मार्क्सवादियों को ‘इतिहास’ का विशेष खाद-पानी उपलब्ध कराते रहे हैं। किसी की विचारधारा कोई भी हो, अगर वह जिद की हद तक व्यक्तित्व पर प्रभावी होने लगे तो एक प्रकार का मानसिक रोग ही बन जाता है, विशेषकर मार्क्सवाद के संदर्भ में। वे बयान तो दे देते हैं लेकिन लगता है, वे ऐसा मानते हैं कि भारत की जनता इतनी भोली है कि उसके पीछे की उनकी असल मंशा नहीं समझ पाएगी!

अभी हाल में मथुरा और काशी पर इरफान हबीब ने एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘औरंगजेब ने काशी और मथुरा में हिन्दू मन्दिरों को ध्वस्त किया था और यह करके उसने गलत किया था। यह साबित करने के लिए किसी सर्वेक्षण या अदालत के आदेश की आवश्यकता नहीं है कि वाराणसी और मथुरा में मन्दिर तोड़े गए थे, क्योंकि इतिहास की किताबों में पहले ही इसका उल्लेख किया गया है।’ यहां तक तो हबीब ने ठीक ही कहा।

लेकिन उनके इसी बयान का अगला हिस्सा उनके मार्क्सवादी एजेंडे को साफ कर गया। प्रो. हबीब ने आगे कहा कि ‘औरंगजेब ने जो किया, उसे तीन सौ साल बाद दुरुस्त करने का औचित्य नहीं है।’ उनके कहे के हिसाब से गत तीन सौ साल से वहां पर ‘मस्जिद’ बनी हुई है। उनका कहना है कि ‘औरंगजेब ने भले ही वहां मन्दिरों की जगह मस्जिदें बनवाई हों; लेकिन अब उन्हें तोड़कर फिर से मन्दिर बनाना उचित नहीं है, वह भी तब, जबकि देश में संविधान लागू है।’ वे कहते हैं कि ‘जो काम औरंगजेब ने किया, वही काम अब आप करने जा रहे हैं, तो ऐसे में आप में और औरंगजेब में क्या अन्तर रह गया?’

प्रो. इरफान यह नहीं बताते कि अगर पहले की गई गलती को दुरुस्त किया जाए तो इसमें परेशानी क्या है? अगर मन्दिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद केवल इसलिए बनी रहने दी जाए कि वह तीन सौ साल पहले से बनी हुई है, तो सवाल है कि सदियों तक मस्जिद के नीचे मौजूद मन्दिर की पृष्ठभूमि पर क्या विस्मृति की धूल चढ़ा दी जाए? क्या सदियों पहले से मस्जिद की जगह मौजूद आस्था के मन्दिर की तुलना में एक कौम के स्वाभिमान को तोड़ने के लिए नफरत के भाव से बनाई गई मस्जिद के ढांचे को बड़ा मान लिया जाए? अगर सचमुच कहीं कोई गलती है, तो उसे दुरुस्त करने का औचित्य आखिर क्यों नहीं? अतीत की इतनी बड़ी घटना को ‘जो हुआ सो हुआ’ कहकर भुला देना क्या इतना आसान है?

‘औरंगजेब ने काशी और मथुरा में हिन्दू मन्दिरों को ध्वस्त किया था और यह करके उसने गलत किया था। यह साबित करने के लिए किसी सर्वेक्षण या अदालत के आदेश की आवश्यकता नहीं है कि वाराणसी और मथुरा में मन्दिर तोड़े गए थे, क्योंकि इतिहास की किताबों में पहले ही इसका उल्लेख किया गया है।’ – इरफान हबीब 

मुगलों द्वारा मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बना देना, एक इमारत को दूसरी इमारत में बदल देना भर नहीं था। यह दूसरी कौम की सम्पत्ति पर कब्जा कर लेना या उसे हड़प लेना तो था ही, बुतशिकन के अहंकारी भाव से दूसरी कौम के सांस्कृतिक और धार्मिक चिह्नों को मिटा देने का अभियान भी था। हो सकता है, कुछ लोगों को ‘रेसकोर्स रोड’ को ‘लोककल्याण मार्ग’ बना देना, ‘किंग्सवे’ को ‘राजपथ’ के अहंकार से नीचे उतार कर ‘कर्तव्य पथ’ में बदल देना, ‘इण्डियन पीनल कोड’ को ‘भारतीय न्याय संहिता’ बना देना, फैजाबाद को ‘अयोध्या’ का मूल नाम दे देना, ‘मुगल गार्डन’ को ‘अमृत उद्यान’ में रूपायित करना या कि इण्डिया गेट के पास किंग जार्ज पंचम की जगह नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की प्रतिमा लगा देना अखरे या गलत और अनौचित्यपूर्ण लगे, पर सच तो यह है कि जो कौम विरासत के गौरव पर ध्यान नहीं दे सकती, वह अपना आत्मसम्मान और स्वाभिमान भी नहीं बचा सकती। अतीत के गौरव पर इतराना अलग बात है, पर एक स्वाभिमानी कौम के लिए वह ऊर्जा का स्रोत भी होता है।

यदि आज काशी या मथुरा में एक बार फिर से भव्य मन्दिर का निर्माण होता है तो इस पर यह कहना सरासर गलत है कि ‘जो काम औरंगजेब ने किया वही काम अब आप करने जा रहे हैं, ऐसे में आप में और औरंगजेब में क्या अन्तर रह गया?’ अगर यह समझाना पड़े कि औरंगजेब के काम में और अब के काम में बुनियादी अन्तर है, तो यह समझदारों की समझदारी पर तरस खाने वाली बात होगी। ऐसा नहीं था कि हिन्दुओं ने मथुरा या काशी में किसी मस्जिद को तोड़कर मन्दिर बनाया हो और तब औरंगजेब ने मन्दिर को तोड़कर दुबारा मस्जिद बनाई हो। सचाई यह है कि मुगल अंग्रेजों से पहले अंग्रेजों की तरह ‘भारत को सभ्यता का पाठ’ पढ़ा रहे थे।

अयोध्या में आज अगर राम का मन्दिर बना है तो यह किसी तरह की नफरत के वशीभूत नहीं है, बल्कि धर्म के प्रति आस्था दर्शाने और संस्कृति के प्रतीक को पुनर्जीवन देने जैसा है। यह कितना जरूरी था, इसका एहसास प्रो. हबीब की मार्क्सवादी नास्तिक भावनाओं के सहारे सम्भव नहीं है। यह भी याद रखना चाहिए कि मुसलमानों की एक बड़ी संख्या ने इस विरासत को महत्व को समझा है और राम मन्दिर को भरपूर समर्थन दिया है।

भारत बहुभाषी और अनेक मतावलम्बियों का निवास स्थल है। आज वक्त इस्लाम के अनुयायियों के लिए अपना बड़ा दिल दिखाने का है। आखिर वे भी यहीं की मिट्टी में जन्मे हैं, राम-कृष्ण उनके भी पूर्वज हैं। उन्होंने मान्यताएं भले बदल ली हों, पर पूर्वजों की विरासत और गौरवबोध साझा हैं। इतिहास पर कितनी भी लीपापोती की जाए, पर मन्दिर विरोधियों को भी पता है कि मुगलों ने इस देश के एक-दो नहीं, हजारों मन्दिरों को तोड़ा। बुतशिकनी का यह मनोभाव अफगानिस्तान जैसे देश में आज भी देखा जा सकता है, जहां आए दिन अब तक बौद्धों-हिन्दुओं के बचे हुए चिह्नों को जमींदोज किया जा रहा है।

हिन्दू समुदाय तोड़े गए हजारों मन्दिरों में से अगर आस्था के केवल तीन सबसे महत्वपूर्ण केन्द्रों को मांग रहा है तो समभाव रखते हुए मुस्लिम समुदाय को भी सहयोग का हाथ बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए। आग्रहों-पूर्वग्रहों के वशीभूत क्रिया-प्रतिक्रिया अलग बात है, पर भारत संसार में अकेला ऐसा देश है, जहां का बहुसंख्यक समाज अपने ही आस्था केन्द्रों के लिए दशकों से अदालती लड़ाई लड़ रहा है। संसार के समस्त मुस्लिम राष्ट्रों का अतीत और वर्तमान देखिए और सोचिए कि बहुसंख्यक स्थिति में क्या मुस्लिम समुदाय अपने आस्था केन्द्रों के लिए इस तरह से अदालती लड़ाई लड़ने की जहमत उठाता?

‘औरंगजेब ने जो किया, उसे तीन सौ साल बाद दुरुस्त करने का औचित्य नहीं है।’ उनके कहे के हिसाब से गत तीन सौ साल से वहां पर ‘मस्जिद’ बनी हुई है। उनका कहना है कि ‘औरंगजेब ने भले ही वहां मन्दिरों की जगह मस्जिदें बनवाई हों; लेकिन अब उन्हें तोड़कर फिर से मन्दिर बनाना उचित नहीं है, वह भी तब, जबकि देश में संविधान लागू है।’ – प्रो. हबीब

मजहब से पहले मुल्क को रखने वाले कुछ मुसलमान भले ही ऐसा करने की बात करते, पर सबसे पहले वे ही रास्ते से हटाए जाते। जो लोग हिन्दुत्व के उभार से भयभीत हैं और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की दुहाई देते हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि यह ‘तहजीब’ अगर भारत में चरितार्थ हुई है तो वह यहां की जमीन या पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की वजह से नहीं हुई है, बल्कि ऐसा यहां के रहने वालों की मानसिकता की वजह से है। बहुसंख्यक समुदाय या कहें सनातनी समुदाय की मानसिकता सबके साथ मिल-जुलकर रहने की रही है, इसलिए यहां दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र फल-फूल रहा है।

आज विरासत के पुनर्जागरण का अभियान जारी है। सनातन संस्कृति यही है कि वह खुद से पहले दूसरों का ख्याल करती है। यह भारत की संस्कृति ही है कि यहां अपने मुंह में रोटी का निवाला डालने से पहले आस-पड़ोस का ध्यान रखा जाता है कि कहीं कोई भूखा तो नहीं। हिन्दू दिल खोलकर सहयोग करते हैं। जाने कितनों की हज यात्रा हिन्दुओं के दिए दान के सहारे सम्भव हुई है। सनातन संस्कृति की जरा भी समझ रखने वाला यह समझ सकता है कि भारत का हिन्दू समुदाय उदार चित्त वाला है। इसलिए वह अपने स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं कर सकता। अपने आस्था चिन्हों को अपमानित होते नहीं देख सकता।

प्रो. हबीब अगर अपनी सेकुलर मानसिकता से बाहर आकर सोचेंगे तो पाएंगे कि अयोध्या, काशी, मथुरा में बात सिर्फ मंदिर की नहीं है, बल्कि बात है अपने गौरव को नए जोश के साथ जाग्रत करते हुए अपने आराध्य के प्रति सर्वस्व समर्पण की।

Topics: कर्तव्य पथLokkalyan MargDuty PathRace Course RoadराजपथCultural and Religious SymbolsIndian Judicial CodeLesson of Civilization to Indiaamrit udyanRam-Krishnaमुगल गार्डनअमृत उद्यानलोककल्याण मार्गरेसकोर्स रोडभारत को सभ्यता का पाठ‘गंगा-जमुनी तहजीब’Mughal Garden
Share1
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Amrit Udyan

3 फरवरी से खुल रहा राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान, जानें कैसे करें मुफ्त टिकट बुकिंग?

Amrit Udyan

राष्ट्रपति भवन देखने का सुनहरा मौका: इस दिन से खुलेगा अमृत उद्यान, ऐसे करें फ्री बुकिंग

फिल्म ‘विभाजन की विभीषिका...’ का एक दृश्य 

‘विभाजन – विभीषिका’  का देशव्यापी प्रदर्शन 

जन सेवा के प्रति अटूट संकल्प का प्रतीक ‘कर्तव्य भवन’ : प्रधानमंत्री मोदी

Amrit Udyan

जानें कब खुलेगा अमृत उद्यान, जानें कब और कैसे बुक करें टिकट

Security of Republic Day in kartavya path

गणतंत्र दिवस: छावनी में तब्दील कर्तव्य पथ, 15000 पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान, AI से लैश 7000 CCTV, 6 लेयर सिक्योरिटी

Load More

ताज़ा समाचार

t20 match first time vande mataram

भारतीय क्रिकेट में ऐतिहासिक अध्याय: भारत-अफगानिस्तान टी20 मैच में पहली बार राष्ट्रगान के साथ गाया गया ‘वंदे मातरम्’

दुनिया ताकतवर को देखती है: गोटन में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- ‘व्यक्ति से लेकर राष्ट्र तक सामर्थ्य अनिवार्य है’

महराजगंज में RSS शताब्दी वर्ष पर भव्य युवा संवाद : दीपक विस्पुते जी ने युवाओं को दिया ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश

AP Aboobacker Fatwa Muslim Women Samastha Kerala Jam Eyyathul Ulama Panchjanya

“फतवा वापस नहीं होगा”: मुस्लिम महिलाओं पर दिए बयान पर कायम AP अबूबकर, जानिए जमीयतुल उलमा का बड़ा दावा!

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा जी और गुजरात मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार एवं GMDC के अध्यक्ष डॉ. हसमुख अधिया जी

Sabarmati Samvad 2026: “गुजरात कैसे बनेगा भारत का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन? डॉ. हसमुख अधिया जी ने बताई 2047 की पूरी रणनीति”

दुनिया डगमगाई, भारत संभला

Role of Spiritual Leaders in Nation Building Hindu Resurgence Panchjanya

राष्ट्र निर्माण और हिंदू पुनरुत्थान में आध्यात्मिक गुरुओं की भूमिका: जानिए कैसे मिलेगा ‘परम वैभव’!

9/11 बरसी: न्यूयॉर्क मेयर जोहरान मामदानी ने छेड़ा विक्टिमहुड का राग; हँसते हुए असंवेदनशील वीडियो पर बवाल!

प्राकृतिक आपदाएं दे रही हैं चेतावनी: विकास के साथ प्रकृति संरक्षण भी जरूरी, जानिए क्यों बढ़ रहा खतरा!

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

सार्वभौमिक स्पंदन: मानवता के रूप में हिंदुत्व

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies