Padma Shri : कोई पैरवीं नहीं, 50 साल की तपस्या को नमन, डॉ यशवंत सिंह कठोच को मिला पद्मश्री सम्मान
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Padma Shri : कोई पैरवीं नहीं, 50 साल की तपस्या को नमन, डॉ यशवंत सिंह कठोच को मिला पद्मश्री सम्मान

पद्मश्री सम्मान मिलने से प्रसन्न नजर आए डॉ यशवंत

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Jan 26, 2024, 10:51 am IST
inउत्तराखंड
डॉ यशवंत सिंह कठोच

डॉ यशवंत सिंह कठोच

पौड़ी गढ़वाल। जिला मुख्यालय के पास छोटे से घर पर सैकड़ों किताबों के बीच एक अध्ययन केंद्र में वर्षों से लिखने-पढ़ने वाले ड यशवंत सिंह कठोच को जब पद्मश्री सम्मान दिए जाने के जानकारी उनके मित्रजनों और परिजनों से मिली तो वह एक पल को हैरान हुए। बेहद खुश नजर आए डॉ यशवंत ने कहा कि ये कैसे हो गया, चलो जो हुआ अच्छा हुआ सरकार ने मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को ये सम्मान दिया।

जानकारी के मुताबिक डॉ यशवंत सिंह ने सम्मान को पाने के लिए अपनी तरफ से कोई आवेदन या पैरवी भी नहीं की, उनके मुताबिक किसी इष्ट मित्र ने आवेदन कर दिया होगा तो उसकी उन्हें जानकारी भी नहीं है।

डॉ कठोच ने 33 वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं। उनका जन्म 27 दिसंबर 1935 को हुआ, 1995 तक वे मासों गांव में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य रहे फिर पौड़ी जिला मुख्यालय के पास आकर बस गए। वह इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में लंबे समय से योगदान दे रहे हैं। उनको पद्मश्री दिए जाने पर इतिहासकारों, साहित्यकारों, शिक्षकों, लेखकों, लोक कलाकारों व संस्कृति कर्मियों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

डॉ कठोच पौड़ी जनपद के एकेश्वर विकासखंड स्थित मांसों गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने 1974 में आगरा विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति तथा पुरातत्व विषय में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 1978 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के गढ़वाल हिमालय के पुरातत्व पर शोध ग्रंथ प्रस्तुत किया और उन्हें डीफिल की उपाधि से नवाजा गया। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने 33 साल सेवाएं दीं। वर्ष 1995 में वह प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए।

डॉ कठोच भारतीय संस्कृति, इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में निरंतर शोध कर रहे हैं। वर्ष 1973 में स्थापित उत्तराखंड शोध संस्थान के संस्थापक सदस्य हैं। उनकी मध्य हिमालय का पुरातत्व, उत्तराखंड की सैन्य परंपरा, संस्कृति के पद-चिन्ह, मध्य हिमालय की कला: एक वास्तु शास्त्रीय अध्ययन, सिंह-भारती सहित 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जबकि इतिहास तथा संस्कृति पर निबंध और मध्य हिमालय के पुराभिलेख पुस्तकें भी जल्द ही प्रकाशित होने जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ यशवंत सिंह कठोच को पद्मश्री दिए जाने का केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि एक सामान्य शिक्षक और उत्तराखंड के विद्वान को सम्मानित करने की परंपरा नरेंद्र मोदी सरकार ने ही डाली है। डॉ यशवंत को उनकी तपस्या का फल मिला है, हमारी सरकार, उत्तराखंड की देवतुल्य जनता उन्हें बधाई देती है।

Topics: उत्तराखंड समाचारसीएम पुष्कर सिंह धामीPadma Shri Awardपद्मश्री सम्मानडॉ यशवंत सिंह कठोचPadmashree AwardDr. Yashwant Singh Katoch
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