22 जनवरी को देश के उल्लास से दुखी आरफा शेरवानी जैसे कथित पत्रकार ने कहा- “जिस भारत को मैं जानती हूँ, वह मर गया!”
June 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम मत अभिमत

22 जनवरी को देश के उल्लास से दुखी आरफा शेरवानी जैसे कथित पत्रकार ने कहा- “जिस भारत को मैं जानती हूँ, वह मर गया!”

यह गैंग हमेशा ही भारत और हिन्दू भारत के विरुद्ध विषवमन करता रहा है और इस बार इसकी घृणा बहुत तेज है

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Jan 24, 2024, 08:16 pm IST
in मत अभिमत

22 जनवरी को जब पूरा देश ही नहीं, बल्कि समूचा विश्व आह्लादित हो रहा था। जो भी इस स्थान की महत्ता और इस मंदिर के सांस्कृतिक महत्व को समझता है, वह हर व्यक्ति एवं देश इस मंदिर के समर्थन में लिख रहा था और समझ रहा था कि आराध्य के जन्मस्थान को वापस पाने की प्रसन्नता क्या है। परन्तु उस समय भारत में बैठ कर एक वर्ग हमेशा के अनुसार हिन्दू संस्कृति के प्रति अपनी घृणा फैला रहा था।

 

यह गैंग हमेशा ही भारत और हिन्दू भारत के विरुद्ध विषवमन करता रहा है और इस बार इसकी घृणा बहुत तेज है। इस बार इसकी कुंठा अपनी हर सीमा पार करने को उतारू है, इस बार यह वर्ग जोर-जोर रो रहा है, इस बार यह वर्ग अपनी घृणा को संविधान के पीछे छिपा रहा है, मगर इसके बाद भी इसका असली चेहरा सामने आ रहा है। इसकी गुलामी मानसिकता एक बार फिर बाहर आई है। इस समूह में कम्युनिस्ट नेता आशी से लेकर कम्युनिस्ट प्रोपोगैंडा वेबसाईट की कथित पत्रकार आरफा शामिल हैं।

 

आरफा के दुःख का पारावार नहीं है। यह याद रखना चाहिए कि यह वही आरफा खानम शेरवानी हैं, जो खुद को बाबर की पहचान से जोड़कर रखना चाहती हैं और भारत की पहचान से बचतीं हैं और भारत से इस सीमा तक घृणा है कि भारतीय मूल के पसमांदा मुस्लिमों के हितों की बात पर जब बहस होती है तो वह बीच बहस से भाग जाती हैं। आरफा के लिए 22 जनवरी 2024 का दिन बहुत दुःख लेकर आया, क्योंकि उन्होंने कहा कि हम जिस भारत की कल्पना करते हैं, जिस भारत को कई सदियों से जानते आए थे, वह अब मर गया है।

https://twitter.com/khanumarfa/status/1749330731682374067?

ये कैसे लोग हैं? कहाँ से आते हैं जो भारत के सांस्कृतिक उत्थान वाले दिन को भारत के मरने की बात कह रहे हैं? ये लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि आज भारत ने फिर से सांस्कृतिक अंगड़ाई ली है। आरफा ने और कई और कथित लिबरल पत्रकारों ने 22 जनवरी को अपनी-अपनी सोशल मीडिया वाल पर भारत के संविधान की प्रति चिपकाई।

 

यह सत्य है कि एक लोकतांत्रिक देश में संविधान ही सर्वोपरि होता है, परन्तु आरफा जैसे लोग संविधान की उस प्रति से भी आकंठ घृणा से भरे हैं, जो मूल प्रति थी। उन्हें भारत के संविधान की तब तो याद आती है जब समाजवाद, पंथनिरपेक्ष जैसे शब्दों से भरी हुई प्रस्तावना उन्हें लोगों को बतानी होती है, परन्तु उन्हें भारत के संविधान की वह मूल प्रति याद नहीं आती है जिसमें प्रभु श्रीराम माता जानकी के साथ विद्यमान है। भारत की तो पहचान ही प्रभु श्रीराम हैं।

मगर आरफा जैसे लोगों को भारत के इस संविधान की सांस्कृतिक पहचान से घृणा है, तभी वह भारत के संविधान की बात तो करती हैं परन्तु उन शब्दों के साथ, जिन्हें आपातकाल के दौरान कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने सम्मिलित कर दिया था। परन्तु भारत का आम नागरिक संविधान का आदर करता है। भारत का हिन्दू संविधान का आदर करता है, तभी उसने पांच सौ वर्षों के संघर्ष को भारत का संविधान लागू होने के बाद संवैधानिक तरीके से जीता है। भारत की न्यायपालिका से उसने यह संघर्ष जीता है।

 

क्या भारत के हिन्दुओं को अपनी इस सांस्कृतिक जीत का उत्सव मनाने का भी अधिकार नहीं है? क्या पांच सौ वर्षों एवं असंख्य बलिदानों के बाद बने इस मंदिर के प्रति आदर व्यक्त करने का भी अधिकार हिन्दुओं को नहीं है? क्या भारत के हिन्दू अपनी उस पीड़ा को बहने भी नहीं दे सकते हैं जो उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी झेली है? यह पीड़ा चेतना की पीड़ा है, जिसे आरफा जैसे लोग नहीं समझ सकते क्योंकि भारत पुनर्जन्म की भूमि है। जहां जन्म लेने के लिए देवताओं में होड़ लगी रहती है, जहां स्वयं प्रभु अवतार लेते हैं। यह जन्मों के संचित पुण्यों की भूमि है और इन पुण्यों के महत्व को वही समझ सकता है जिसकी पहचान इस भूमि की हो, जो पसमांदा मुस्लिमों की अर्थात भारतीय मुस्लिमों की पीड़ा को ही समझने से इंकार कर दे, वह कभी भी चेतना की पीड़ा को नहीं समझ पाएगा क्योंकि उसके पास चेतना होगी ही नहीं!

 

आरफा को यह तकलीफ है कि टीवी समाचार पत्रों के एंकर्स तिलक क्यों लगाए हैं? बिंदी क्यों लगाए हैं? भगवा कुरते क्यों पहने हुए हैं आदि आदि! उनका कहना है कि उन्हें यह देखकर पीड़ा हो रही है, उनका दम जैसा घुट रहा है कि आखिर क्यों ऐसा लोग कर रहे हैं? उनका कहना है कि हिन्दी मीडिया तो हिन्दू मीडिया बन गया है। मगर यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह वही आरफा है जिन्हें कभी भी इस बात पर आपत्ति नहीं हुई कि आखिर मुस्लिम लड़कियां स्कूल में बुर्के आदि की लड़ाई क्यों लड़ रही हैं? वह आम मुस्लिम लड़कियों के लिए हिजाब, बुर्के को चॉइस बता सकती हैं, परन्तु श्रीराम मंदिर की कवरेज के लिए गयी महिला एंकर्स यदि अयोध्या की भूमि पर वहां की संस्कृति का पालन कर रही हैं तो आरफा जैसों को समस्या है।

 

आरफा अकेली नहीं है! आरफा जैसे कई हैं। आरफा जैसी कम्युनिस्ट आशी है जिसने लिखा कि 22 जनवरी, एक सेक्युलर देश का पतन! याद रखा जाएगा! सच में! याद सब रखा जाएगा! यह याद रखा जाएगा कि जब भारत अपने सांस्कृतिक जागरण के सबसे महत्वपूर्ण पायदान पर था, उस समय आरफा जैसे लोग भारत के मरने की बात कर रहे हैं, वैसे एक बात सत्य है कि औरंगजेब जैसों की पहचान वाला भारत कभी नहीं रहा था। बाबर की पहचान वाला भारत कभी नहीं रहा था क्योंकि उनके लिए यह भूमि भारत नहीं थी। उनके लिए यह भूमि हिन्दुस्तान थी। देश की सांस्कृतिक पहचान मिटाने वालों को इस भूमि ने स्वीकार नहीं किया है।

 

यह याद रखा जाएगा कि जब पूरा देस अपने आराध्य का उन क़दमों का पालन करने के बाद स्वागत कर रहा था, जो उसने संविधान का पालन करने के बाद प्राप्त हुए थे, तो आरफा जैसे गुलाम मानसिकता वाले लोग सहिष्णु भारत के उस अतिसहिष्णु वर्ग को उसी संविधान की दुहाई दे रहे थे! परन्तु संविधान में तो स्वयं वही प्रभु श्रीराम हैं, जिनके मंदिर का स्वागत 22 जनवरी 2024 को इस देश ने नम आँखों और रुंधे गले से किया था! 

Topics: आरफा शेरवानी की पीड़ाHinduहिंदू से दुखी आरफा शेरवानीअयोध्या समाचारराम मंदिर का उत्साहAyodhya NewsArfa Sherwaniराम मंदिरArfa Sherwani's sorrowRam MandirArfa Sherwani's painहिंदूArfa Sherwani sad with Hinduराम मंदिर अयोध्याenthusiasm of Ram Mandirram mandir ayodhyaआरफा शेरवानीआरफा शेरवानी का दुख
Share4TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

बिलाल सनातन धर्म अपनाकर बना विशाल

Ghar Wapsi: बकरे की कुर्बानी से परेशान था मुस्लिम युवक; अपनाया सनातन धर्म, बिलाल बना विशाल

पुस्तक का लोकार्पण करते हुए श्री भैयाजी जोशी। उनके दाएं हैं श्री रमेश पतंगे और अन्य अतिथि

‘हिंदुत्व को संप्रदाय की संकुचित सीमा में बैठाना ठीक नहीं’

विशाल ने किया घर वापसी

Ghar Wapsi: हमजा’ बनकर लौटा विशाल, गांव में शुद्धिकरण के बाद हुई हिंदू धर्म में वापसी

maharashtra love jihad in ulhasnagar forced conversion accuses imran shaikh arrested

इमरान शेख ने विजय बनकर हिंदू महिला से की शादी, फिर कन्वर्जन, बुर्का पहनने और गौमांस खाने का बनाया दबाव

प्रतीकात्मक चित्र

बंगाल: नखोदा मस्जिद के इमाम बोले, ‘गाय की कुर्बानी से पूरी तरह से बचें मुसलमान’

धार भोजशाला

राजा भोज से हाई कोर्ट तक… जानिए भोजशाला विवाद की अनसुनी कहानी

Load More

ताज़ा समाचार

पर्यावरण दिवस पर विशेष : प्रकृति ही परमात्मा

rss karyakarta vikas varg nagpur concludes kumar mangalam birla speech

“संघ का कार्य अभूतपूर्व है” : नागपुर में बोले कुमार मंगलम बिरला, ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ के समापन पर दिया बड़ा मंत्र

rss karyakarta vikas varg nagpur mohan-bhagwat speech kumar mangalam birla

“दुनिया को भारत की आवश्यकता है” : डॉ. मोहन भागवत जी

rss path sanchalan karyakarta vikas varg nirala nagar lucknow

लखनऊ: RSS के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग’ का भव्य पथ संचलन, घोष की धुन और कदमताल से दिखा अनुशासन का अद्भुत नजारा

विश्व पर्यावरण दिवस :- स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन : आज की सबसे बड़ी आवश्यकता

5 जून का पंचांग

5 जून पंचांग: किस समय करें शुभ कार्य, क्या कहती है ग्रहों की स्थिति?

Constitution expert Dr Subhash Kashyap passes away

संविधान विशेषज्ञ और पद्म भूषण डॉ. सुभाष कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन, संसदीय जगत में शोक की लहर

ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी: बड़े मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी, लिखा- बदला, बदला, बदला

bijnor umar international meat factory-sealed 168 crore assets attached in cow smuggling

बिजनौर: ‘फिश फूड’ की आड़ में गोतस्करी, अतीक अहमद की 168 करोड़ की मीट फैक्ट्री सील

बशीर बद्र (फाइल फोटो)

असली जमींदार कौन? भारत की मिट्टी पर अधिकार: कब्रों से या कर्तव्यों से?

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies