अटल बिहारी वाजपेयी के समय लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के दूसरे सबसे बड़े नेता हुआ करते थे। 1990 में उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक की राम रथयात्रा शुरू की। उस दौर में राम मंदिर आंदोलन जिन कारणों से आम लोगों में व्यापक हो सका, उनमें एक आडवाणी की रथयात्रा भी थी।
राम मंदिर आंदोलन को केवल एक मंदिर आंदोलन के रूप में नहीं देखते थे। आडवाणी का मानना है कि राम मंदिर आंदोलन भारत के लोगों की राष्ट्रीयता और उनके स्वाभिमान से जुड़ा आंदोलन है।
रथयात्रा से राम मंदिर आंदोलन घर-घर में चर्चा का विषय बना। जनता में आंदोलन की लकप्रियता को भांप रहे आडवाणी जी ने तब बड़े स्पष्ट शब्दों में चेताया था कि ‘यदि सरकार ने राम जन्मभूमि पर टकराव का रास्ता अपनाया तो देश में ऐसा आंदोलन जन्म लेगा जो पहले कभी नहीं हुआ होगा।’
आडवाणी यह बात इसलिए कहते थे क्योंकि वह राम मंदिर आंदोलन को केवल एक मंदिर आंदोलन के रूप में नहीं देखते थे। आडवाणी का मानना है कि राम मंदिर आंदोलन भारत के लोगों की राष्ट्रीयता और उनके स्वाभिमान से जुड़ा आंदोलन है। वह कहते हैं कि राम भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। वह इसे सौभाग्य मानते हैं कि आंदोलन में उनकी भी एक भूमिका रही।

















