सागर-मंथन : अपने धर्म की बात करना सांप्रदायिकता नहीं
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होम भारत

सागर-मंथन : अपने धर्म की बात करना सांप्रदायिकता नहीं

सागर मंथन के दूसरे सत्र का विषय था-‘नया आइडिया, नई उड़ान।’ इसे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने संबोधित किया। प्रस्तुत हैं उनके भाषण के प्रमुख अंश-

Written byनितिन गडकरीनितिन गडकरी
Dec 30, 2023, 03:42 pm IST
inभारत, धर्म-संस्कृति, गोवा, पाञ्चजन्य इवेंट
नितिन गडकरी

नितिन गडकरी

भारत माता को सुखी, समृद्ध, संपन्न और शक्तिशाली बनाना। गांव, गरीब, मजदूर और किसान का कल्याण करना। सामाजिक, आर्थिक समता की स्थापना करना। कोई भी देश जाति, पंथ, भाषा से बड़ा नहीं होता, बल्कि अपने गुणों से बड़ा होता है। ऐसे ही गुणों से युक्त समाज का निर्माण करना है।

हम सभी मिलकर जो कार्य कर रहे हैं उसका उद्देश्य है भारत माता को सुखी, समृद्ध, संपन्न और शक्तिशाली बनाना। गांव, गरीब, मजदूर और किसान का कल्याण करना। सामाजिक, आर्थिक समता की स्थापना करना। कोई भी देश जाति, पंथ, भाषा से बड़ा नहीं होता, बल्कि अपने गुणों से बड़ा होता है। ऐसे ही गुणों से युक्त समाज का निर्माण करना है। इसके साथ ही ज्ञान-विज्ञान, शोध, अपनी विरासत, संस्कृति और प्रगतिशील विचारों के समन्वय से भारत को महाशक्ति बनाना है, ताकि आने वाले पांच वर्ष के अंदर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाए। यह सपना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का।

प्रखर राष्ट्रभक्त अटल जी

हम सबके आदर्श और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे प्रखर राष्ट्रभक्त थे। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना चलाकर ग्रामीणों के जीवन में बदलाव किया। मेरा सौभाग्य है कि इस योजना को तैयार करने में मेरी भी भूमिका रही। इस योजना के कारण ही देश के 6,50,000 गांवों में से 4,50,000 गांवों तक सड़क पहुंच गई है। इससे वहां सुविधाएं बढ़ रही हैं। आवागमन के सुगम होने से रोजगार के अवसर और ग्रामीणों का जीवन स्तर बढ़ रहा है। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। गांवों के फल, फूल और सब्जियां शहरों तक जाने लगी हैं। किसान का कल्याण हुआ है। एक प्रकार से नया सामाजिक आर्थिक परिवर्तन हुआ है। यही सुशासन है।

आज हमारा आयुर्वेद, योग पूरी दुनिया में मशहूर हुआ है। पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है। हिंदुत्व एक जीवन-पद्धति है, विचार है, संस्कृति है, जो समाज को जोड़ती है। हमारी संस्कृति कहती है कि विश्व का कल्याण हो। धर्म कर्तव्य के साथ जुड़ा हुआ है। अपने धर्म के प्रति श्रद्धा रखना, उसकी बात करना सांप्रदायिकता नहीं है। हां, अस्पृश्यता, जातीयता का समूल नाश करके सामाजिक समरसता स्थापित करनी होगी। यही सुशासन है।

सर्वोत्तम सिद्धांत अंत्योदय, प्रखर राष्ट्रभक्त अटल जी, 

पंडित दीनदयाल जी ने अंत्योदय का सिद्धांत दिया है। अंत्योदय का मतलब है कि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति का भी विकास हो। जिसके पास रहने के लिए मकान नहीं है, उसे मकान मिले। जिसके पास खाने के लिए रोटी नहीं है, उसे अन्न मिले। जिसके शरीर पर कपड़े न हों, उन्हें कपड़े मिलें। यही हमारा उद्देश्य है। अंत्योदय का यही सिद्धांत विकास का सबसे उत्तम मार्ग है, क्योंकि इससे पहले जो रास्ते अपनाए गए, वे विफल रहे हैं।

आजादी के बाद साम्यवादी, समाजवादी और पूंजीवादी विकास मॉडल अपनाए गए। महात्मा गांधी स्वदेशी और स्वावलंबन पर जोर देते थे, लेकिन आजादी के बाद नेहरू जी ने कुछ और ही रास्ता अपना लिया। उन्होंने समाजवाद को आगे बढ़ाया। रूस की मदद से बड़े-बड़े उद्योग लगाए गए। यह धारणा बन गई कि सरकार ही सब कुछ करेगी। डॉ. राममनोहर लोहिया, मधु दंडवते, जॉर्ज फर्नांडीस जैसे नेता समाजवादी अर्थव्यवस्था की बात करते थे। इन्हीं नेताओं ने समाजवादी आंदोलन चलाया।

इस आंदोलन के कारण देश के अनेक राज्यों में समाजवादी सरकारें बनीं, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था भी विफल हो गई। पूंजीवादी व्यवस्था से भी लोगों का कल्याण नहीं हुआ। ऐसे ही साम्यवादी विचारधारा पूरी तरह विफल रही। इस विचारधारा की जड़ें चीन और रूस में रही हैं। एक समय था जब कोई युवा अपने आपको कम्युनिस्ट कहने में अभिमान महसूस करता था। इस विचारधारा का दावा था कि उसकी नीतियों से आर्थिक विषमता कम होगी, लेकिन यह और बढ़ गई। खुद चीन ने इस विचारधारा को छोड़ दिया है। चीन केवल इसके लाल झंडे का इस्तेमाल करता है। रूस ने भी साम्यवाद को त्याग दिया है।

अटल जी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना शुरू की। आज 4,50,000 गांवों तक सड़क पहुंच गई है। इससे ग्रामीणों का जीवन स्तर बढ़ रहा है। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। गांवों के फल, फूल और सब्जियां शहरों तक जाने लगी हैं। किसान का कल्याण हुआ है। एक प्रकार से नया सामाजिक आर्थिक परिवर्तन हुआ। यही सुशासन है

रोजगार निर्माण करना है

अब प्रश्न यह उठता है कि इन तीनों की विफलता के बाद अपने राष्ट्र को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनाने के लिए, विश्व गुरु बनाने के लिए, जिस आर्थिक मॉडल के आधार पर हम इस देश को बदलना चाहते हैं, उसके लिए हमारी नीतियां क्या हैं? पहली बात हम गरीबी दूर करना चाहते हैं। इसके लिए रोजगार निर्माण करना होगा। रोजगार के लिए हमें उद्योग, व्यापार को बढ़ावा देना होगा एवं खेती का विकास करना होगा। जब तक पंूजी का निवेश नहीं होगा, तब तक रोजगार निर्माण नहीं होगा। और इस निवेश के साथ ही पारिस्थितिकी और पर्यावरण के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगे बढ़ना होगा।

हमारे जीडीपी के विकास में 12-14 प्रतिशत कृषि क्षेत्र का, निर्माण उद्योग का 22-24 प्रतिशत एवं विभिन्न सेवा क्षेत्रों का 52-54 प्रतिशत योगदान है। 1947 में गांधी जी कहा करते थे कि हमारा देश गांवों में बसा हुआ है। उस समय 82-85 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती थी। आज 30 प्रतिशत आबादी गांव से शहर की ओर जा चुकी है। सुविधाओं के अभाव के कारण गांवों से पलायन हो रहा है। इसी कारण आर्थिक विषमता भी बढ़ी। यदि गरीब, किसान, मजदूर का कल्याण करना है तो जल, जमीन, जंगल और जानवर पर आधारित आर्थिक व्यवस्था को अपनाना होगा।

गोपालन को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की ऐसी नस्लें तैयार हो रही हैं, जो 30-40 लीटर दूध देने वाली होंगी। यदि ऐसा हुआ तो हमारे देश के किसान आत्महत्या क्यों करेंगे? ऐसे ही अपनी फसलों के बारे में भी सोचना होगा। हमारे देश में जो सोयाबीन तैयार होता है उसमें 49 प्रतिशत प्रोटीन है। हम सोयाबीन का केक निर्यात करते हैं। इससे सफेद रंग के सूअर खाते हैं और मोटे होते हैं और लोग उनका मांस खाते हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे यहां कुछ लोग कुपोषण से मर रहे हैं।

व्यक्ति निर्माण में लगा है संघ

डॉ. हेडगेवार जी कहते थे कि हमारे देश में स्वराज होना चाहिए। इससे पहले यह सोचना होगा कि इतने ताकतवर होने के बावजूद कुछ अंग्रेज हमारे यहां व्यापार करने आए और धीरे-धीरे हम गुलाम बन गए। इसका कारण क्या है? इसके लिए डॉ. हेडगेवार का कहना था कि हमारी सामाजिक व्यवस्था का केंद्र व्यक्ति है। एक-एक व्यक्ति को इकट्ठा करके समाज बनता है। अनेक समाज जब इकट्ठा होते हैं तो एक राष्ट्र बनता है। यही कारण है कि उन्होंने व्यक्ति का निर्माण करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।

जोड़ने वाली संस्कृति

आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण में अंतर है। आज हमारा आयुर्वेद, योग पूरी दुनिया में मशहूर हुआ है। पूरी दुनिया में योग दिवस मनाया जाता है। हिंदुत्व एक जीवन-पद्धति है, विचार है, संस्कृति है, जो समाज को जोड़ती है। हमारी संस्कृति कहती है कि विश्व का कल्याण हो। धर्म कर्तव्य के साथ जुड़ा हुआ है। अपने धर्म के प्रति श्रद्धा रखना, उसकी बात करना सांप्रदायिकता नहीं है। हां, अस्पृश्यता, जातीयता का समूल नाश करके सामाजिक समरसता स्थापित करनी होगी। यही सुशासन है।

तेल का विकल्प

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक श्री कुप्.सी. सुदर्शन मुझसे कहते थे कि नितिन आतंकवाद की समस्या क्यों है? मैंने उनसे कई बार कहा कि पेट्रोल, डीजल और जीवाश्म ईंधन के आयात में यह समस्या छिपी हुई है। जिन दिन तेल का आयात बंद होगा, विश्व में आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। अभी हम 16 लाख करोड़ रु. का तेल आयात करते हैं। इसे बंद करने पर यह पैसा भारत के गरीबों के घर में जाएगा।

मेरा मानना है कि जिस दिन भारत में पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं आएगी, उस दिन हमें नई स्वतंत्रता मिलेगी। पेट्रोल, डीजल के विकल्प के रूप में हमारी सरकार जैव ईंधन को सामने लाई है। अब अनेक किसान बांस, गन्ने इत्यादि से इथेनॉल बना रहे हैं। बजाज, टीवीएस और हीरो कंपनी ने स्कूटी और ऐसे आटो रिक्शा तैयार किए हैं, जो 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलते हैं। मेरे पास टोयटा गाड़ी है, जो 100 प्रतिशत इथेनॉल पर चलती है। इथेनॉल की कीमत 60 रुपए और पेट्रोल की कीमत 120 रुपए प्रति लीटर है। इथेनॉल से चलने वाली गाड़ी चलते हुए 7 प्रतिशत बिजली तैयार करती है और 40 प्रतिशत इथेनॉल पर चलती है।

इस तरह यदि हम पूरी तरह इथेनॉल पर आ जाएं तो पेट्रोल आयात करने की क्या जरूरत है? अब हाइड्रोजन से भी गाड़ी चलने लगी है, जिसका नाम मिरई है। मिरई का मतलब है भविष्य। हाइड्रोजन चार प्रकार के होते हैं- पहला पेट्रोलियम से निकलता है, दूसरा कोयले से बनता है, जिसको ब्लैक हाइड्रोजन कहते हैं। तीसरा हाइड्रोजन पानी से बनता है, जिसको ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं। पानी से हाइड्रोजन बनाने में इलेक्ट्रोलाइजर लगते हैं। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जहां इलेक्ट्रोलाइजर का निर्माण होता है और अमेरिका जाता है। एक किलो हाइड्रोजन के लिए 50 यूनिट ऊर्जा लगती है। अगर सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा तो इसकी कीमत 150 रु. हो जाएगी। आगे हाइड्रोजन का मूल्य 300 रुपए किलो तक जा सकता है। एक किलो हाइड्रोजन यानी 4 लीटर डीजल।

हमने तय किया है कि एक किलो हाइड्रोजन की कीमत एक डॉलर से नीचे लाएंगे। टाटा और अशोक लेलैंड ने अपने ट्रकों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अब कार और बसें भी हाइड्रोजन की आ रही हैं। पानी से हाइड्रोजन निकालने की अभी दो टेक्नोलॉजी हैं और इन पर भारत में काम हो रहा है। आयात को कम करना, निर्यात को बढ़ाना ही देशभक्ति है। इसमें लगभग 50,00,000 लोगों को रोजगार मिल सकता है। मैं आटोमोबाइल का भी मंत्री हूं। जब मोदी जी ने देश की बागडोर संभाली थी, उस समय आटोमोबाइल उद्योग 4 लाख करोड़ रु. का था। आज यह उद्योग साढ़े 12 लाख करोड़ का हो चुका है।

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है—

जब-जब इस धरा पर दुर्जनों की संख्या बढ़ती है, अत्याचार बढ़ता है, तब सज्जनों की रक्षा करने के लिए मैं अवतार लेता हूं। भारत का विचार केवल भारत का नहीं है। वह भारत के साथ ही दुनिया के कल्याण की कामना करता है। इसलिए भारत को सामर्थ्यवान और शक्तिशाली बनाना है। इसी में जगत की भलाई है।

इस उद्योग ने साढ़े 4 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है। यह राज्य सरकारों और भारत सरकार को सबसे ज्यादा जीएसटी देने वाला उद्योग है। हमारा यही उद्योग सबसे ज्यादा निर्यात करता है। आने वाले पांच वर्ष में इस उद्योग में भारत पहले स्थान पर आ जाएगा। आज चीन पहले, अमेरिका दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र की 260 परियोजनाओं पर मैं खुद काम कर रहा हूं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आत्मनिर्भर भारत बनाना है। गरीबी को दूर करना, राष्ट्र को सामर्थ्यवान बनाना है। कृषि, उद्योग, ढांचागत सुविधाएं, पानी, ऊर्जा, परिवहन, संचार को सुदृढ़ करना है।

मुंबई में 10,000 हजार वाटर टैक्सी तैयार होने वाली हैं। इनके माध्यम से मुुंबई की किसी भी दिशा से 17 मिनट में नए एयरपोर्ट तक पहुंचा जा सकता है। न कोई जाम, न कोई प्रदूषण। स्वदेशी, स्वावलंबन और स्वतंत्रता, इन तीनों बातों का विचार करते हुए एक आर्थिक मॉडल तैयार करना है। मेरा अनुमान है कि 2 साल के अंदर इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी पेट्रोल, डीजल की गाड़ियों की कीमत पर मिलने लगेंगी। जेसीबी इंग्लैंड की कंपनी है। मैंने इस कंपनी से इलेक्ट्रिक जेसीबी बनवाई है। इससे कंपनी को जबरदस्त फायदा हो रहा है। नई जेसीबी बनाने के आदेश मिल रहे हैं।

भारत बनेगा सामर्थ्यवान

हम हर क्षेत्र में सामर्थ्यवान बनने का प्रयास कर रहे हैं। भारत के सामर्थ्यवान बनने से ही विश्व में शांति स्थापित होगी। दुर्बल व्यक्ति चाहे शांति और अहिंसा की कितनी भी बातें कर ले, उसकी कोई नहीं सुनता। इसलिए हमें सामर्थ्यवान बनना है। हम सामर्थ्यवान और सशक्त अवश्य बनेंगे, लेकिन विस्तारवादी नहीं बनेंगे। हम पहले भी विस्तारवादी नहीं रहे हैं। इस कारण किसी भी देश के मन में यह शंका नहीं रही है कि हम घुस कर उसकी जमीन पर कब्जा करेंगे। लेकिन कुछ सामर्थ्यवान देश हैं, जिनकी करनी से लोग परेशान हैं। हमें विश्व में शांति स्थापित करनी है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है— जब-जब इस धरा पर दुर्जनों की संख्या बढ़ती है, अत्याचार बढ़ता है, तब सज्जनों की रक्षा करने के लिए मैं अवतार लेता हूं। भारत का विचार केवल भारत का नहीं है। वह भारत के साथ ही दुनिया के कल्याण की कामना करता है। इसलिए भारत को सामर्थ्यवान और शक्तिशाली बनाना है। इसी में जगत की भलाई है।

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