सरसंघचालक ने कहा, सर्वभक्षी ताकतों ने मार्क्स को भुला रखा है; एक दशक से शांत मणिपुर में अचानक आपसी फूट की आग कैसे लगी ?
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सरसंघचालक ने कहा, सर्वभक्षी ताकतों ने मार्क्स को भुला रखा है; एक दशक से शांत मणिपुर में अचानक आपसी फूट की आग कैसे लगी ?

आजकल इन सर्वभक्षी ताकतों के लोग अपने आपको सांस्कृतिक मार्क्सवादी या वोक (Woke) यानी जगे हुए कहते हैं । परंतु मार्क्स को भी उन्होंने 1920 दशक से ही भुला रखा है । विश्व की सभी सुव्यवस्था, मांगल्य, संस्कार, तथा संयम से उनका विरोध है ।

Written bySudhir Kumar PandeySudhir Kumar Pandey
Oct 24, 2023, 07:28 pm IST
inभारत, उत्तर प्रदेश, संघ @100
डॉ मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

डॉ मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 98 वें स्थापना दिवस और विजयादशमी के अवसर पर नागपुर के ऐतिहासिक रेशिम बाग मैदान में समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने समाज की समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शासन की ‘स्व’ आधारित युगानुकूल नीति, प्रशासन की तत्पर, सुसंगत व लोकाभिमुख कृति तथा समाज का मन, वचन, कर्म से सहयोग व समर्थन ही देश को परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

सरसंघचालक ने कहा कि समाज की सामूहिकता छिन्न-भिन्न होकर अलगाव व टकराव बढे, यह प्रयास भी बढ़ रहे हैं । अपने अज्ञान, अविवेक, परस्पर अविश्वास अथवा असावधानी के कारण समाज में कहीं-कहीं ऐसे अप्रत्याशित उपद्रव व फूट बढ़ती ही जाती दिखाई दे भी रही है । भारत के उत्थान का प्रयोजन विश्व-कल्याण ही रहा है । परन्तु इस उत्थान के स्वाभाविक परिणाम के नाते स्वार्थी, विभेदकारी तथा छल कपट के आधार पर अपने स्वार्थ का साधन करने वाली शक्तियाँ मर्यादित व नियंत्रित होती हैं, इसलिए उनके द्वारा निरंतर विरोध भी चलता है । यद्यपि यह शक्तियाँ किसी न किसी विचारधारा का आवरण ओढ़ लिया करती हैं, किसी मनलुभावन घोषणा अथवा लक्ष्य के लिए कार्यरत होने का छद्म रचती हैं, उनके वास्तविक उद्देश्य कुछ और ही होते हैं । प्रामाणिकता व निःस्वार्थ बुद्धि से काम करने वाले लोग किसी भी विचारधारा के हों, किसी भी तरह का कार्य करते हों, उनके लिए बाधा ही होते हैं ।

आजकल इन सर्वभक्षी ताकतों के लोग अपने आपको सांस्कृतिक मार्क्सवादी या वोक (Woke) यानी जगे हुए कहते हैं । परंतु मार्क्स को भी उन्होंने 1920 दशक से ही भुला रखा है । विश्व की सभी सुव्यवस्था, मांगल्य, संस्कार, तथा संयम से उनका विरोध है । मुठ्ठी भर लोगों का नियंत्रण सम्पूर्ण मानवजाति पर हो इसलिए अराजकता व स्वैराचरण का पुरस्कार, प्रचार व प्रसार वे करते हैं । माध्यमों तथा अकादमियों को हाथ में लेकर देशों की शिक्षा, संस्कार, राजनीति व सामाजिक वातावरण को भ्रम व भ्रष्टता का शिकार बनाना उनकी कार्यशैली है । ऐसे वातावरण में असत्य, विपर्यस्त तथा अतिरंजित वृत्त के द्वारा भय, भ्रम तथा द्वेष आसानी से फैलता है । आपसी झगड़ों में उलझकर असमंजस व दुर्बलता मे फंसा व टूटा हुआ समाज, अनायास ही इन सर्वत्र अपनी ही अधिसत्ता चाहने वाली विध्वंसकारी ताकतों का भक्ष्य बनता है । अपनी परम्परा में इस प्रकार किसी राष्ट्र की जनता में अनास्था, दिग्भ्रम व परस्पर द्वेष उत्पन्न करनेवाली कार्यप्रणाली को मंत्र विप्लव कहा जाता है ।

देश में राजनीतिक स्वार्थों के कारण राजनीतिक प्रतिस्पर्धी को पराजित करने के लिए ऐसी अवांछित शक्तियों के साथ गठबंधन करने का अविवेक है । समाज पहले से ही आत्मविस्मृत होकर अनेक प्रकार के भेदों से जर्जर होकर, स्वार्थों की घातक प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या व द्वेष में उलझा है । इसलिये इन आसुरी शक्तियों को समाज या राष्ट्र को तोड़ना चाहनेवाली अंदरूनी या बाहरी ताकतों का साथ भी मिलता है ।

मणिपुर की वर्तमान स्थिति को देखते हैं तो यह बात ध्यान में आती है । लगभग एक दशक से शांत मणिपुर में अचानक यह आपसी फूट की आग कैसे लग गई ? क्या हिंसा करनेवाले लोगों में सीमापार के अतिवादी भी थे? अपने अस्तित्व के भविष्य के प्रति आशंकित मणिपुरी मैतेयी समाज और कुकी समाज के इस आपसी संघर्ष को सांप्रदायिक रूप देने का प्रयास क्यों और किसके द्वारा हुआ? वर्षों से वहाँ पर सबकी समदृष्टि से सेवा करने में लगे संघ जैसे संगठन को बिना कारण इसमें घसीटने का प्रयास करने में किसका निहित स्वार्थ है ? इस सीमा क्षेत्र में नागाभूमि व मिजोरम के बीच स्थित मणिपुर में ऐसी अशांति व अस्थिरता का लाभ प्राप्त करने में किन विदेशी सत्ताओं को रुचि हो सकती है ? क्या इन घटनाओं की कारण परंपराओं में दक्षिण पूर्व एशिया की भू- राजनीति की भी कोई भूमिका है ? देश में मजबूत सरकार के होते हुए भी यह हिंसा किनके बलबूते इतने दिन बेरोकटोक चलती रही है ? गत 9 वर्षों से चल रही शान्ति की स्थिति को बरकरार रखना चाहने वाली राज्य सरकार होकर भी यह हिंसा क्यों भड़की और चलती रही ? आज की स्थिति में जब संघर्षरत दोनों पक्षों के लोग शांति चाह रहे हैं, उस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठता हुआ दिखते ही कोई हादसा करवा कर, फिर से विद्वेष व हिंसा भड़कानेवाली ताकतें कौनसी हैं ? इस समस्या के समाधान के लिए बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता रहेगी । इस हेतु जहां राजनैतिक इच्छाशक्ति, तदनुरूप सक्रियता एवं कुशलता समय की मांग है, वहीं इसके साथ-साथ दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति के कारण उत्पन्न परस्पर अविश्वास की खाई को पाटने में समाज के प्रबुद्ध नेतृत्व को भी एक विशेष भूमिका निभानी होगी । संघ के स्वयंसेवक तो समाज के स्तर पर निरंतर सबकी सेवा व राहतकार्य करते हुए समाज की सज्जनशक्ति का शांति के लिए आवाहन कर रहे हैं । सबको अपना मानकर, सब प्रकार की कीमत देते हुए समझाकर, सुरक्षित, व्यवस्थित, सद्भाव से परिपूर्ण और शान्त रखने के लिए ही संघ का प्रयास रहता है । इस भयंकर व उद्विग्न करनेवाली परिस्थिति में भी ठंडे दिमाग से हमारे कार्यकर्ताओं ने जिस प्रकार वहाँ सबकी संभाल के प्रयास किए उस पर तथा उन स्वयंसेवकों पर हमें गर्व है ।

उत्तर तो समाज की एकता से ही प्राप्त होना है

इस मंत्र विप्लव का सही उत्तर तो समाज की एकता से ही प्राप्त होना है । हर परिस्थिति में यह एकता का भान ही समाज के विवेक को जागृत रखनेवाली वस्तु है । संविधान में भी इस भावनिक एकता की प्राप्ति एक मार्गदर्शक तत्व के नाते उल्लेखित है । हर देश में इस एकता के भाव को पैदा करनेवाला अपना-अपना धरातल अलग-अलग रहता है । कहीं पर उस देश की भाषा, कहीं पर उस देश के निवासियों का समान पूजा या विश्वास, कहीं पर सबका समान व्यापारिक स्वार्थ, कहीं पर एक प्रबल केंद्रीय सत्ता बंधन देश के लोगों को एक सूत्र में बाँधकर रखता है । परंतु मानव निर्मित कृत्रिम आधारों पर अथवा समान स्वार्थ के आधार पर बनी हुई एकता की डोर टिकाऊ नहीं होती । हमारे देश में तो इतनी विविधता है कि इस देश का एक देश के नाते अस्तित्व समझने के लिए भी लोगों को समय लगता है । परंतु हमारा यह देश एक राष्ट्र के नाते, एक समाज के नाते, विश्व के इतिहास के सारे उतार चढ़ाव पार कर आज भी अपने भूतकाल के सूत्र से अविछिन्न सम्पर्क बनाए रखकर जीवित खड़ा है ।

“यूनान मिस्र रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाक़ी नामो निशां हमारा,
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा”

हमारे पूर्वजों ने अस्तित्व की एकता के सत्य का साक्षात्कार किया

भारत के बाहर के लोगों की बुद्धि चकित हो जाए, परंतु मन आकर्षित हो जाए ऐसी एकता की परंपरा हमारी विरासत में हमको मिली है । उसका रहस्य क्या है? नि:संशय वह हमारी सर्व समावेशक संस्कृति है । पूजा, परंपरा, भाषा, प्रान्त, जातिपाती इत्यादि भेदों से ऊपर उठकर, अपने कुटुंब से संपूर्ण विश्वकुटुंब तक आत्मीयता को विस्तार देनेवाली हमारी आचरण की व जीवन जीने की रीति है । हमारे पूर्वजों ने अस्तित्व की एकता के सत्य का साक्षात्कार किया । उसके फलस्वरूप शरीर, मन, बुद्धि की एक साथ उन्नति करते हुए तीनों को सुख देनेवाला, अर्थ, काम को साथ चलाकर मोक्ष की तरफ अग्रेसर करनेवाला धर्मतत्व उनको अवगत हुआ । उस प्रतीति के आधार पर उन्होंने धर्मतत्व के चार शाश्वत मूल्यों (सत्य, करुणा, शुचिता व तपस ) को आचरण में उतारनेवाली संस्कृति का विकास किया । चारों ओर से सुरक्षित तथा समृद्ध हमारी मातृभूमि के अन्न, जल, वायु के कारण ही यह संभव हुआ । इसलिए हमारी भारतभूमि को हमारे संस्कारों की अधिष्ठात्री माता मानकर उसकी हम भक्ति करते हैं । हाल ही में स्वतन्त्रता संग्राम के महापुरुषों का स्मरण अपनी स्वतंत्रता के 75 वे वर्ष के निमित्त हमने किया । हमारे धर्म, संस्कृति, समाज व देश की रक्षा, समय समय पर उनमें आवश्यक सुधार तथा उनके वैभव का संवर्धन जिन महापुरुषों के कारण हुआ, वे हमारे कर्तृत्व सम्पन्न पूर्वज हम सभी के गौरवनिधान हैं तथा अनुकरणीय हैं । हमारे देश में विद्यमान सभी भाषा, प्रान्त, पंथ, संप्रदाय, जाति, उपजाति इत्यादि विविधताओं को एक सूत्र में बाँधकर एक राष्ट्र के रूप में खड़ा करनेवाले यही तीन तत्व (मातृभूमि की भक्ति, पूर्वज गौरव, व सबकी समान संस्कृति) हमारी एकता का अक्षुण्ण सूत्र है ।

Topics: मणिपुर में आगराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघसरसंघचालकमोहन भागवतआरएसएसविजयादशमी उत्सवनागपुरमणिपुररेशिमबागमार्क्स
Sudhir Kumar Pandey
Sudhir Kumar Pandey
Experienced Media Professional | Digital Content Strategist | Editorial Leader | 20+ Years in Print, Digital & Broadcast Journalism. I am a passionate and result-driven editorial professional with over 20 years of experience across some of India’s most respected media houses, including Zee News, Dainik Jagran, Panchjanya, Way2News, and Aaj Samaj. Currently leading digital content at Panchjanya (Bharat Prakashan Limited). Throughout my career, I have successfully managed editorial teams, produced high-impact news series and special editions (Tarpan, Shiv Tatva, Mudda – Delhi-NCR), and contributed to both daily operations and long-term editorial planning. My expertise spans across political reporting, current affairs, cultural features, and public issue-driven journalism. I thrive in deadline-driven environments, enjoy mentoring teams, and am always exploring ways to innovate newsroom workflows with technology. Proficient in CMS platforms, Canva, InDesign, and content planning tools. Let’s connect if you’re interested in meaningful storytelling, content strategy, or media innovation. [Read more]
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