कांग्रेस राज में हिंदू उत्पीड़न/ पलायन : खून के आंसू रोती गुलाबी नगरी
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कांग्रेस राज में हिंदू उत्पीड़न/ पलायन : खून के आंसू रोती गुलाबी नगरी

कांग्रेस शासित राजस्थान की राजधानी जयपुर में जमीन जिहाद, लव जिहाद चरम पर है। हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। तुष्टीकरण की नीति के कारण हिंदुओं की कोई सुन नहीं रहा। पुराने जयपुर से 95 प्रतिशत हिंदू पलायन कर चुके हैं।

अरुण कुमार सिंहअश्वनी मिश्रWritten byअरुण कुमार सिंहandअश्वनी मिश्र
Oct 10, 2023, 02:00 pm IST
in भारत, विश्लेषण, राजस्थान
जयपुर के आमागढ़ ( दिल्ली रोड) में पहाड़ काटकर बनाई गई मस्जिद। इस तरह की मस्जिदें बड़ी संख्या में बन रही हैं

जयपुर के आमागढ़ ( दिल्ली रोड) में पहाड़ काटकर बनाई गई मस्जिद। इस तरह की मस्जिदें बड़ी संख्या में बन रही हैं

आज आई.एन.डी.आई. गठबंधन के नेता शोर मचा रहे हैं कि देश में नफरत बढ़ रही है। किसी भी भाजपा-शासित राज्य में एक छोटी-सी भी घटना हो जाए तो वह अंतरराष्ट्रीय सुर्खी बन जाती है। दूसरी ओर इन नेताओं को उन राज्यों की बड़ी घटनाएं भी नहीं दिखती हैं, जहां इनकी सरकारें हैं। कांग्रेस शासित राजस्थान की राजधानी जयपुर में जमीन जिहाद, लव जिहाद चरम पर है। हिंदुओं को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है। तुष्टीकरण की नीति के कारण हिंदुओं की कोई सुन नहीं रहा। पुराने जयपुर से 95 प्रतिशत हिंदू पलायन कर चुके हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वहां रह रहे हिंदुओं के दर्द को जानने और समझने के लिए अरुण कुमार सिंह एवं अश्वनी मिश्र जयपुर गए। पढ़िए वहां की गलियों से आंखों देखी रिपोर्ट

जयपुर की हालत बेहद गंभीर होती जा रही है। इसका ताजा उदाहरण 29 सितंबर की रात की एक घटना है। रात करीब 10.30 बजे जयपुर के सुभाष चौक पर मोटरसाइकिल पर सवार दो मुसलमान युवक टकरा गए। घटना के बाद दोनों एक-दूसरे को भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए लड़ने लगे। वहां खड़े कुछ लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। इतने में इकबाल नामक एक युवक, जिसके हाथ में लोहे की रॉड थी, समझाने वालों से उलझ गया और वह बुजुर्ग हिंदू मोहनलाल को मारने लगा। बुजुर्ग को छुड़ाने के लिए कुछ हिंदुओं ने इकबाल को भी पीटा। घटना के कुछ देर बाद पुलिस इकबाल को अस्पताल ले गई, जहां उसकी जान चली गई।

इस घटना के बाद जयपुर के मुसलमान रात में ही जमा हो गए। इन लोगों ने दूसरे दिन यानी 30 सितंबर की दोपहर तक जमकर उत्पात मचाया। बड़ी चौपड़ पर स्थित हिंदुओं की दुकानों में तोड़फोड़ की और देवी-देवताओं के चित्रों को अपमानित किया। पुलिस के सामने ही एक ओर मुसलमान भीड़ हिंदुओं की दुकानों को निशाना बना रही थी, तो दूसरी ओर कांग्रेस के दो विधायक रफीक खान और अमीन कागजी मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंच गए। इन लोगों ने सरकार पर ऐसा दबाव बनाया कि मृतक इकबाल के परिजन को 50,00,000 रु, संविदा पर सरकारी नौकरी और एक दुकान देने का फरमान जारी कर दिया गया। इसके बाद मुसलमानों की भीड़ बड़ी चौपड़ से हटी। अब प्रशासन हिंदुओं के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई कर रही है। हिंदुओं की एक बात भी नहीं सुनी जा रही है। सरकार के इस रवैये के विरोध में 4 अक्तूबर को हजारों हिंदुओं ने बड़ी चौपड़ पर महाधरना दिया और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसमें 36 सामाजिक संगठन और 100 व्यापार मंडल से जुड़े लोग शामिल हुए। इन लोगों ने एक स्वर से कहा कि राज्य सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति बंद करे।

सामाजिक कार्यकर्ता तारा सिंह मीणा कहते हैं, ‘‘मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति से जयपुर जिहादी शिकंजे में जा रहा है, विशेषकर पुराना जयपुर हिंदू-विहीन हो चुका है।’’ पुराना जयपुर चारदीवारी यानी परकोटे के अंदर है। इस परकोटे के पूरब में सूरजपोल गेट, पश्चिम में चांदपोल गेट, दक्षिण में सांगानेरी गेट, उत्तर में जोरावर सिंह गेट है। सांगानेरी गेट और जोरावर सिंह गेट के बीच में जलमहल की तरफ अजमेरी गेट भी है। सूरजपोल गेट से चांदपोल गेट के बीच में रामगंज चौपड़, बड़ी चौपड़ और छोटी चौपड़ पड़ती है। इस क्षेत्र को जयपुर का हृदय कहा जाता है। बड़ी चौपड़ पर हवामहल जैसे पर्यटन स्थल हैं। यहां देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। हवामहल से कुछ ही दूरी पर जयपुर के आराध्य गोविंद देव जी का मंदिर भी है। इस मंदिर के अलावा परकोटे के अंदर और 10 बड़े मंदिर हैं। इसलिए जयपुर के इस क्षेत्र को छोटी काशी कहा जाता है। पर अब यह क्षेत्र मजहबी उन्मादियों का केंद्र बन चुका है। यहां के सभी मंदिरों के आसपास हिंदुओं की आबादी बहुत ही कम रह गई है और कारोबार पर मुसलमानों का कब्जा हो चुका है।  यहां तक कि मंदिरों की जो दुकानें हैं, वे भी मुस्लिमों के कब्जे में हैं। रामगंज में 98 प्रतिशत मुसलमान बसे हैं।

जयपुर नगर निगम के पूर्व चेयरमैन और बदनपुरा वार्ड नंबर-89 से पार्षद रहे राजेश गुप्ता स्पष्ट रूप से कहते हैं, ‘‘रामगंज और उसके आसपास के क्षेत्रों में जमीन जिहाद चल रहा है। इसके पीछे पूरा मुसलमान समाज है, लेकिन कुछ लोगों को आगे करके यह खेल खेला जाता है। ये लोग पहले मुस्लिम आबादी से सटे किसी हिंदू की दुकान या मकान को लक्षित करते हैं और उसे किसी भी सूरत में खरीदते हैं। इसके लिए बाजार भाव से कई गुना अधिक पैसा दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि हिंदू की दुकान या मकान खरीदने के लिए मुसलमान आपस में चंदा करते हैं। किसी हिंदू की एक दुकान या मकान खरीदने के बाद ये लोग वहां ऐसी स्थिति पैदा कर देते हैं कि बाकी हिंदू संपत्ति बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। हिंदू की दुकान या मकान खरीदने के बाद ये लोग वहां मांस की दुकान खोलते हैं। वहीं मुर्गा-मुर्गी या बकरे काटते हैं। इनका खून बहकर किसी पड़ोसी हिंदू की दुकान के पास चला जाता है। उसे कभी साफ नहीं किया जाता है। इस कारण दिनभर मक्खियां मंडराती हैं और बदबू होती रहती है। कोई हिंदू विरोध करता है तो मिनटों में सैकड़ों की संख्या में मुसलमान जमा हो जाते हैं और हंगामा करने लगते हैं। फिर गंदगी के कारण धीरे-धीरे उस दुकान पर ग्राहक भी नहीं जाने लगते हैं। ऐसे में उसके पास दुकान या मकान बेचने के अलावा और कोई चारा नहीं रहता। खरीददार मुसलमान ही होते हैं और वे उसकी मजबूरी का पूरा फायदा उठाते हैं। 100 रु. की चीज वे 5 रु. में खरीदते हैं। इसके बाद तो उसके आसपास के सारे हिंदू मकान-दुकान बेचकर पलायन कर जाते हैं। इस कारण रामगंज, शास्त्री नगर जैसे कई मुहल्ले हिंदू-विहीन हो चुके हैं। यदि ऐसा ही रहा तो कुछ और इलाके हिंदू-विहीन हो जाएंगे।’’

सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जा

सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए शव दफनाए जा रहे हैं

जयपुर में प्रवेश करने से ठीक पहले दिल्ली-जयपुर रोड पर दाईं तरफ पहाड़ के साथ हजारों एकड़ सरकारी जमीन है। इसकी लंबाई लगभग चार किलोमीटर है। इस पर जगह-जगह शव दफनाए जा रहे हैं। इसका नाम रख दिया गया है-सड़वा कब्रिस्तान। इसके अंदर एक मस्जिद भी बना दी गई है। हजारों एकड़ इस सरकारी जमीन को बचाने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। उल्टे स्थानीय कांग्रेसी विधायक डॉ. महेश जोशी ने इस कब्रिस्तान के लिए पानी की व्यवस्था की है और बैठने के लिए जगह-जगह सीमेंट की बेंच बनवा दी है। तारा सिंह मीणा कहते हैं, ‘‘जयपुर के प्रवेश द्वार पर सरकार की शह पर हजारों एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा हो गया। आने वाले समय में यहां से अनेक चुनौतियां मिल सकती हैं। आवागमन को रोका जा सकता है।’’

पहले सुकून गया, फिर मकान

रामगंज स्थित शिकारियों की मोहरी के रहने वाले विकास प्रजापत की पीड़ा तो बहुत गहरी है। वे कहते हैं, ‘‘पहले यह इलाका हिंदू-बहुल था, लेकिन देखते ही देखते हिंदू यहां से पलायन को मजबूर हुए। घर-संपत्तियां बेचकर दूसरी जगह चले गए। अब हमारे यहां सिर्फ दो या तीन मकान ही हिंदुओं के बचे हैं। पहले जिन घरों में हिंदू रहते थे, अब वहां मुसलमान रहने लगे हैं। ये सभी जानबूझकर बचे-खुचे हिंदुओं के घरों के बाहर गंदगी फैलाते हैं, मांस खाकर छतों पर जूठन फेंकते हैं। बकरीद के दिन तो खुलेआम हिंदुओं के घरों के बाहर बकरी, भैंस काटते हैं। खून की धाराएं बहती हैं गली-मोहल्ले से। जब कोई ऐसा करने से उन्हें रोकता है तो पल भर में भीड़ इकट्ठी होकर झगड़ा करने लगती है, क्योंकि उन्हें पता है कि प्रशासन हिंदुओं की नहीं सुनता। यहां की स्थिति देखकर हमारे नाते-रिश्तेदार मेरे घर नहीं आते हैं। इसके अलावा एक साजिश के तहत गली-मोहल्ले में और सार्वजनिक स्थल पर मुस्लिम लड़के खड़े रहते हैं। ये लोग आने-जाने वाली हिंदू लड़कियों और महिलाओं को निशाना बनाते हैं। खुलेआम फब्तियां कसते हैं, लव जिहाद में फंसाने की कोशिश करते हैं।’’

मीठी कुई का रास्ता स्थित मंदिर परिसर में बंद पड़ा कुंआ। इस मंदिर की जमीन पर मदरसा बन गया है

जमीन जिहाद

मजहबी तत्व मंदिरों की जमीन पर भी कब्जा कर रहे हैं। जैसे श्री रामेश्वर महादेव मंदिर। यह मंदिर मीठी कुई (मीठा कुंआ) का रास्ता, जयपुर में है। मंदिर परिसर में एक कुंआ है, जिसका पानी बहुत ही मीठा होता था। अब यह कुंआ बंद पड़ा है। इस मंदिर और कुंए का निर्माण महाराजा माधव सिंह के समय हुआ था। स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी कुंए से राज दरबार में पानी जाता था। अब इस मंदिर की जमीन पर कब्जा हो चुका है। मंदिर से सटाकर राहत हुसैन नामक एक व्यक्ति घर बना रहा है, लेकिन स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि यह घर नहीं कुछ और है। इसे तारा सिंह मीणा स्पष्ट करते हुए कहते हैं, ‘‘कहा तो जा रहा है कि घर बन रहा है, लेकिन वास्तव में यह मदरसा है।’’

अब सवाल है कि एक हिंदू मोहल्ले में एक मंदिर के पास राहत हुसैन ने जमीन कैसे खरीद ली? इसका उत्तर स्थानीय निवासी और जयपुर नगर निगम में अग्निशमन अधिकारी रहे चंद्रमोहन पारीक ने दिया। उन्होंने बताया, ‘‘इस मंदिर की जमीन पर प्रभावशाली लोगों की नजर काफी समय से थी। एक ऐसे ही व्यक्ति थे भागचंद जैन। ये पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर के सहायक थे। उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर मंदिर की जमीन के एक हिस्से पर कब्जा किया। बाद में उसे अपने नाम करवा लिया और उस जमीन के आधार पर बैंक से कर्ज ले लिया। बरसों तक कर्ज वापस नहीं करने पर बैंक ने उस जमीन को नीलाम कर दिया और सबसे ऊंची बोली लगाकर राहत हुसैन ने उस जमीन को खरीद लिया।’’

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह जमीन जिहाद है, क्योंकि राहत हुसैन को जमीन खरीदने के लिए अनेक मुसलमानों ने पैसे दिए हैं। यानी इसके लिए चंदा लिया गया। कुछ समय पहले राहत हुसैन ने मंदिर की दीवार तोड़कर अपनी जमीन का दायरा बढ़ा लिया और निर्माण कार्य करने लगा। स्थानीय हिंदुओं ने विरोध किया। मामला अदालत तक गया। कुछ दिन काम रुका, पर अब फिर से वहां निर्माण होने लगा है। इस जमीन को बचाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले श्याम बाबू शर्मा कहते हैं, ‘‘एक मंदिर की जमीन पर मदरसा बन गया। मैंने रुकवाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बनने के बाद यहां से भी हिंदू पलायन करेंगे, क्योंकि इसीलिए इसे बनाया गया है।’’ बता दें कि बन रहे मदरसे की एक तरफ श्यामबाबू का घर है, तो दूसरी तरफ मंदिर। यही कारण है कि उन्हें भी उजड़ने का डर सता रहा है।

तत्कालेश्वरपुरी स्थित माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर। यहां से हिंदुओं के पलायन के बाद विद्यालय में पठन-पाठन बंद है। इन दिनों यहां छात्रावास चलता है, जिसमें दूरदराज के कुछ गरीब छात्र रहते हैं

कृष्णा कॉलोनी में मस्जिद

जमीन जिहाद के लिए हिंदू मोहल्लों में मस्जिदें भी बनाई जा रही हैं। इन दिनों कृष्णा कॉलोनी के प्लॉट नंबर 46 में एक मस्जिद बन रही है। नाम से पता ही चल रहा है कि यह कॉलोनी हिंदुओं की है और यहां कुल 253 घर हैं। आज से कुछ वर्ष पहले तक इस कॉलोनी में एक भी मुसलमान घर नहीं था। अब यहां के लगभग 150 घर मुसलमान खरीद चुके हैं। यानी यहां हिंदू अल्पसंख्यक हो गए। मकान नंबर 47 में रहने वाले बद्री विशाल जांगिड़ और कॉलोनी के अन्य हिंदू बेहद परेशान हैं। इन लोगों ने कई बार पुलिस और प्रशासन को लिखित में बताया कि किस तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। ऊपर से कुछ समय पहले स्थानीय पार्षद ने सड़क चौड़ी करने की आड़ में वहां के हिंदुओं के घरों को लक्षित करके तोड़फोड़ करवा दी।

विरोध में हिंदू धरने पर बैठ गए। साथ ही हिंदुओं ने अपने-अपने घर के बाहर ‘हिंदुओं का पलायन जारी : पार्षद और पार्षद पति अख्तर हुसैन और नगर निगम कर्मचारी और अधिकारी हैं जिम्मेदार’ के बोर्ड लगा दिए। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। हिंदुओं को बुलाया गया। लेकिन प्रशासन ने हिंदुओं की सुनने की जगह उन्हें यह कहकर डराया कि अभी इस तरह की बात करने का समय नहीं है। यही नहीं, प्रशासन ने कुछ हिंदुओं को यह भी नोटिस दिया, ‘‘इस मामले को छह महीने तक नहीं उठाएंगे। जो इसका पालन नहीं करेगा, उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’ यानी प्रशासन ने हिंदुओं को ही दबाने का प्रयास किया। बता दें कि कुछ ही महीने के अंदर राजस्थान विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। राज्य की कांग्रेस सरकार को लगता है कि इस तरह की खबरों से उसके विरुद्ध माहौल बन रहा है। इसलिए सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों के सहारे हिंदुओं को ही दबाया। सरकार के इस रवैए से जमीन जिहादियों के हौंसले बुलंद हैं। वे मनमाने तरीके से मस्जिद का निर्माण करा रहे हैं।

बता दें कि प्लॉट नंबर 46 को मोहम्मद मुस्तकीम (निवासी सी-276, भट्ठा बस्ती, शास्त्री नगर) ने खरीदा है। यहां उसने मकान बनाने के नाम पर निर्माण कार्य शुरू किया। बाद में पता चला कि वह मकान नहीं, मस्जिद बना रहा है। इसके बाद वहां के हिंदुओं ने विरोध किया। उनका कहना था कि जब 400 मीटर के दायरे में पहले से ही चार मस्जिदें हैं, फिर इसकी क्या जरूरत है? इसके बाद प्रशासन ने काम रोक दिया। फिर मुस्तकीम ने प्रशासन को स्टांप पेपर पर लिखकर दिया कि वह इस भूखंड पर कोई मजहबी स्थल नहीं बन रहा है, बल्कि आवासीय और गैराज हेतु निर्माण कार्य हो रहा है। लेकिन उसने भूखंड के बाहर लिखा है कि कोई भी व्यक्ति बिना इजाजत प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हिंदुओं का मानना है कि मुस्तकीम मस्जिद ही बना रहा है। प्लॉट नंबर 46 को लेकर आयकर विभाग ने भी नोटिस जारी किया है।

मंदिरों के पास मस्जिद

इतिहासकार बताते हैं कि जब मुगलों द्वारा वृंदावन और मथुरा में देव प्रतिमाओं को खंडित किया जाने लगा, तो राजस्थान के राजा ने उन्हें बचाने के लिए जयपुर लाया। इनमें से एक प्रमुख देव हैं श्री गोविंद देव जी। उनकी प्रतिमा को जयपुर ले आए और एक भव्य मंदिर बनाया गया, जिसका क्षेत्रफल लगभग पांच एकड़ है। श्री गोविंद देव जी को जयपुर का आराध्य देव माना जाता है। यही कारण है कि यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं। लेकिन इस मंदिर के आसपास भी मुस्लिम आबादी बढ़ गई है। यही नहीं, मंदिर से लगभग 30 मीटर की दूरी पर एक मस्जिद बन गई है। पहले यह छोटी थी। कोरोना काल में इसका आकार बढ़ाया गया। अब कुछ दिन पहले ही मस्जिद का एक द्वार मंदिर की ओर भी खोल दिया गया है, जबकि अदालत ने यहां किसी तरह के निर्माण पर रोक लगा रखी है। श्री गोविंद देव जी के अलावा पुराने जयपुर में तारकेश्वर जी के दो मंदिर हैं।

एक राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग के अंतर्गत है, तो दूसरा निजी है। ये दोनों आसपास ही हैं। इसके अलावा चांदपोल हनुमान जी का मंदिर, कल्याण जी का मंदिर, गोपीनाथ जी का मंदिर, सांगानेरी गेट वाले हनुमान जी का मंदिर, श्री रामचंद्र जी का मंदिर, सिद्धिविनायक मंदिर, लाडली जी का मंदिर, लक्ष्मीनारायण जी का (मंदिर बाई जी का मंदिर)। यह मंदिर बड़ी चौपड़ पर है। इस मंदिर के एक कोने पर कुछ वर्ष पहले ही कब्जा करके एक मजार बना दी गई थी। हिंदुओं के भारी विरोध के बाद उसे हटाया गया। हैरिटेज वार्ड नंबर 90 से पार्षद और प्रख्यात अधिवक्ता सुनील दत्ता कहते हैं, ‘‘ऐसा लगता है कि कुछ लोग जयपुर के मंदिरों को लावारिस मानकर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं।’’ स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि जितने भी ऐतिहासिक मंदिर हैं, उन पर राजस्थान सरकार का कब्जा है। इस कारण इन मंदिरों की दुर्दशा हो रही है। चाहे इस पर कोई कब्जा कर ले या आसपास मस्जिद बना दे, इससे सेकुलर सरकार को कोई मतलब नहीं है।

बता दें कि जयपुर में राज्य के देवस्थान विभाग के अंतर्गत 40 मंदिर हैं। इनमें से 10 मंदिर पुराने जयपुर में हैं। देवस्थान विभाग का कार्यालय श्री रामचंद्र जी मंदिर के परिसर में चलता है। आपने शायद ही कभी यह देखा होगा कि किसी मस्जिद या चर्च के अंदर कोई सरकारी कार्यालय चलता हो, लेकिन जयपुर में ऐसा हो रहा है। इसलिए जयपुर के हिंदू मांग कर रहे हैं कि सभी मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए।

सरकारी कब्जे में श्री रामचंद्र जी का मंदिर। मंदिर की अनेक दुकानें हैं, जिनके किराएदार अधिकतर मुसलमान हैं
राज्य सरकार की तुष्टीकरण नीति के विरोध में बड़ी चौपड़ पर महाधरना देते हिंदू

तत्कालेश्वरपुरी की हालत गंभीर

तत्कालेश्वरपुरी में विद्या भारती द्वारा संचालित माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर कभी इस इलाके का प्रतिष्ठित शिक्षा केंद्र था। कड़ी परीक्षा के बाद ही इसमें छात्रों का नामांकन होता था। अब इसका विशाल भवन विरान पड़ा है। इन दिनों यहां एक छात्रावास चलता है, जिसमें गरीब बच्चों को रखकर पढ़ाया जाता है। इसके अलावा वहां की सारी गतिविधियां बंद हैं, क्योंकि आसपास में रहने वाले हिंदू पलायन कर चुके हैं। विद्यालय के पीछे एक मैदान है, जिसमें पड़ोस के मुसलमान कचरा फेंकते हैं। इस कारण कई बार झगड़ा भी हो जाता है।

तत्कालेश्वरपुरी के रहने वाले हर्षवर्धन सैनी कहते हैं, ‘‘कभी यह क्षेत्र भी हिंदुओं का ही था। हमारे सभी रिश्तेदार भी यहीं रहते थे, लेकिन अब इस क्षेत्र में सिर्फ हमारा मकान बचा है। बाकी हिंदुओं ने जिहादी हरकतों से परेशान होकर मुसलमानों को अपने घर बेच दिए हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा, ‘‘जिस इलाके में ये घुसते हैं वहां शुरुआत में पचास मकान की इतनी कीमत दे देते हैं कि बाकी के हिंदू भी इनके हाथ अपने घर-मकान-दुकान बेचने में पल भर नहीं लगाते। जो जमीन 10,00,000 रु. की होती है, उसके ये 50,00,000 रु. देते हैं। जिन भी मकानों को मुसलमानों ने खरीदा है, वहां ये कारखाना चलाते हैं, जबकि यह इलाका रिहायशी है। यहां कारखाना नहीं चला सकते। सड़कों पर गंदगी करते हैं, हिंदुओं के घर-मकान पर कचरा फेंकते हैं, यहां तक कि बच्चों के डायपर आदि गंदी चीजें भी मेरे घर से लगे मंदिर के ऊपर फेंक देते हैं। जब हमने इसका विरोध किया तब कुछ हद तक यह हरकत कम हुई है। ये परेशान करने के लिए रात को एक-एक बजे तक सिलाई मशीनें चलाते हैं, रोको तो लड़ाई पर उतर आते हैं। पुलिस-प्रशासन भी हिंदुओं की नहीं सुनता।’’

मस्जिद से मिलता है पैसा

नितिन मुकेश डेरा बस्ती के निवासी हैं। बातचीत के दौरान उनकी डबडबाई आंखें और माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट बता रही थीं कि इलाके में हिंदुओं की क्या स्थिति है। वे कहते हैं, ‘‘डेरा बस्ती में कभी बंजारा समाज के लोग रहते थे। यहां लगभग 700 मकान हिंदुओं के थे, लेकिन धीरे-धीरे जयपुर के कुछ मुस्लिम ठेकेदारों ने मोटी रकम देकर हिंदुओं के कुछ घरों को खरीद लिया। इसके बाद स्थिति ऐसी बना दी गई कि आसपास के हिंदू औने-पौने दाम पर मकान-दुकान बेचकर पलायन कर गए।’’ उन्होंने यह भी बताया, ‘‘यही नहीं, खबर तो यहां तक है कि मस्जिदों से मुसलमानों को हिंदुओं के घरों को खरीदने के लिए पैसा दिया जाता है। मेरे परिचित में जयपुर के बाहर का एक मुसलमान है। कुछ समय पहले मेरे पास आया और कहा कि दो-तीन लाख रु. में रहने लायक घर दिला दो। बाद में पता चला कि कुछ मुसलमान उसे एक मस्जिद में ले गए। बाद में एक दिन मुझसे मिला तो कहने लगा कि अब मैं 10-15 लाख रु. तक का मकान ले सकता हूं। मैंने कहा कि दो दिन पहले तो तुम दो-तीन लाख रुपए का मकान लेने की बात कह रहे थे। अब अचानक इतने पैसे कहां से आ गए? उसने बताया कि एक भाई के नाम से मस्जिद से 4,00,000 रुपए मिल रहे हैं। मैंने अपने तीन भाइयों के नाम से 12,00,000 रुपए उठा लिए हैं। उन लोगों ने यह भी कहा कि आराम से जितना बन पड़े पैसा चुकता कर देना और यदि न हो सके तो उसके बदले 10-20 बोरी सीमेंट जकात के रूप में दे देना। आज इन भाइयों ने आधा दर्जन से अधिक हिंदुओं के मकान खरीद लिए हैं।’’

जौहरी बाजार स्थित श्री देवड़ी जी मंदिर के ऊपर कांग्रेस का कार्यालय। सरकारी कब्जे में रहने के कारण मंदिर की दुकानों और कमरों को कोई भी किराए पर ले लेता है। इस मंदिर की ज्यादातर दुकानें भी मुसलमानों के पास हैं

कोठी कोलियान के रहने वाले महेश कुमार बताते हैं, ‘‘कभी यह इलाका कोली बहुल हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे मुसलमानों ने इस क्षेत्र को चारों तरफ से घेर लिया। ये लोग हिंदुओं को परेशान करने के लिए सड़कों पर हुल्लड़बाजी करते हैं, बात-बात पर झगड़े करते हैं। मुसलमान बनने का दबाव डालते हैं। परेशान होकर कोली समाज के लोग यहां से पलायन कर रहे हैं। किसी एक हिंदू का घर बिकता है तो दूसरा पड़ोसी भी फौरन डर के चलते घर बेच देता है। इसी तरह से कोली समाज के लोग कुंडो की गुआड़ी में भी बड़ी संख्या में रहते थे, लेकिन आज वहां पांच-छह मकान ही बचे हैं। यहां एक बहुत पुराना राधा-कृष्ण का मंदिर है। आसपास में रहने वाले मुसलमान मंदिर में कचरा फेंकते हैं। मूर्तियां खंडित हो चुकी हैं। हिंदुओं के न रहने से वहां नियमित पूजा भी बंद है।’’

छोटी काशी में मजहबी उत्पात

रामगंज के सूरज बताते हैं, ‘‘इस इलाके में कट्टरपंथियों ने अराजकता मचा रखी है। लव जिहाद और जमीन जिहाद चरम पर है। आए दिन हिंदुओं के मकान बिक रहे हैं। जो जगह पहले बंजारा चौक के नाम से जानी जाती थी अब उसे पठान चौक बोला जाता है।’’ तारा सिंह मीणा शहर की खराब होती हालत पर बेहद आक्रोशित नजर आते हैं। वे बार-बार एक ही बात कहते हैं, ‘‘जयपुर को बचा लो। अगर नहीं जागे तो वह दिन दूर नहीं जब छोटी काशी में कोई हिंदू प्रवेश भी नहीं कर पाएगा। पुराने जयपुर में बहुत ही विकट स्थिति पैदा हो गई है। मस्जिद-मदरसों की भरमार हो रही है। गली-मोहल्लों में अजान का शोर चैन नहीं लेने देता। विरोध करने पर यहां की सरकार और प्रशासन हिंदुओं को ही परेशान करता है।’’

सच में, जयपुर में जो दिखा और वहां के लोगों ने जो बताया, उस पर किसी सेकुलर को विश्वास नहीं होगा। पुराने जयपुर के हिंदू तड़प रहे हैं। वे अपने भविष्य को लेकर बेहद चितिंत हैं। उनकी इस पीड़ा और चिंता को समझने की आवश्यकता है।

Topics: Congress ruleगुलाबी नगरीHindu oppressionकांग्रेस राजJaipur in the grip of Jihadiहिंदू उत्पीड़नJaipur Hindu-less‘मुस्लिम तुष्टीकरणश्री रामेश्वर महादेव मंदिरजयपुर जिहादी शिकंजे मेंजयपुर हिंदू-विहीनMosque near templesMuslim appeasementINDIमंदिरों के पास मस्जिदcrying tears of bloodआई.एन.डी.आई.Pink Cityखून के आंसू रोती
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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