#भीमा कोरेगांव : जमानत पर झूठ के सौदागर
June 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

#भीमा कोरेगांव : जमानत पर झूठ के सौदागर

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार दो आरोपितों वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को जमानत मिलने के बाद इकोसिस्टम सक्रिय हो उठा है। उसके निशाने पर जांच एजेंसियां और जमानत की शर्तें हैं। आरोपों को गंभीर बताये जाने और सशर्त जमानत के बावजूद यह जमात छद्म नैरेटिव गढ़ने में जुट गयी है।

Written byप्रशांत बाजपेईप्रशांत बाजपेई
Aug 8, 2023, 05:00 pm IST
in भारत, विश्लेषण, महाराष्ट्र
भीमा कोरेगांव में विजय स्तंभ के पास समारोह के लिए यूं जुटी थी भीड़ (फाइल फोटो)

भीमा कोरेगांव में विजय स्तंभ के पास समारोह के लिए यूं जुटी थी भीड़ (फाइल फोटो)

भारत के प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचना और प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंध रखना। 1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा-कोरेगांव में भड़कायी गयी हिंसा की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, माओवादी चेहरे सामने आते गये। मामला अदालत में है। गिरफ्तार आरोपियों में से दो, वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को जमानत मिली है।

आरोप बेहद गंभीर हैं। हिंसा भड़काना, भारत के प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचना और प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंध रखना। 1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा-कोरेगांव में भड़कायी गयी हिंसा की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, माओवादी चेहरे सामने आते गये। मामला अदालत में है। गिरफ्तार आरोपियों में से दो, वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को जमानत मिली है। जमानत की शर्तें कठोर हैं। उनका पासपोर्ट जमा करवाया गया है।

उन्हें महाराष्ट्र से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। उन्हें अपना मोबाइल हमेशा चार्ज और चालू रखना होगा। मोबाइल में लोकेशन हमेशा चालू रखनी होगी, और उसे एनआईए अधिकारी को देना होगा। जांच अधिकारी के सामने हर सप्ताह हाजिर होना होगा। अपने आस-पास लोगों को एकत्र नहीं कर सकेंगे। वे किसी अन्य आरोपी से संपर्क नहीं करेंगे… आदि। इकोसिस्टम जमानत की शर्तों पर निशाना लगा रहा है, और जांच एजेंसियों पर छद्म हमले कर रहा है। मीडिया ट्रायल जारी है—‘‘सबूत गढ़े गये हैं.. कंप्यूटर में प्लांट किये गये हैं.. एक्टिविस्टों को सरकार के खिलाफ बोलने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है..’’ वगैरह। शहरी नक्सलवाद की बंदूकें कई लक्ष्यों पर निशाने साध रही हैं।

छिपाया गया इतिहास

भीमा-कोरेगांव भी उनकी एक प्रयोगशाला बन गया है। आज भीमा-कोरेगांव एक एजेंडा है एक औजार है, और भटकाया गया इतिहास है। हमारे सरकारी पाठ्यक्रम, मीडिया और चर्चित साहित्य में ‘‘बांटो और राज करो’’ की ब्रिटिश नीति को हमेशा बहुत सीमित दायरे में पढ़ाया-बताया जाता रहा है। इसका संदर्भ केवल पाकिस्तान निर्माण के संदर्भ में लिया जाता है, वह भी कई तथ्यों को छिपाते और मरोड़ते हुए, जैसे-सर सैय्यद अहमद खां के अलगाववादी विचारों पर सफेदी पोतकर, खिलाफत आंदोलन की असलियत और मोपलाओं द्वारा भीषण हिंदू नरसंहार पर पर्दा डालते हुए, पाकिस्तान पर डॉ. भीमराव आंबेडकर के बेबाक विचारों को छिपाकर और वीर सावरकर के अछूतोद्धार के अथक प्रयासों की उपेक्षा करके, उन पर गढ़े हुए आरोपों का कीचड़ उछालकर। यह सब एक ही मकसद से किया जाता रहा है, वह है समाज सत्य न जानने पाये।

क्योंकि यदि लोग डॉ. आंबेडकर के विचारों को जान लेते हैं , तो ‘‘भीम-मीम’’ गठजोड़ की सियासत चलेगी नहीं। और हिंदुत्व के आग्रही सावरकर का छुआछूत खत्म करने का दशकों लंबा यज्ञ हिंदुत्व को ‘‘पिछड़ा-शोषक’’ बताने वाले एजेंडे के लिए घातक साबित होगा। यह तंत्र डॉ. आंबेडकर द्वारा ब्रिटिश शोषण को उजागर करने वाले शोध कार्य को छिपाता है, ताकि समाज के वंचित वर्ग में इस भ्रम को फैला सकें कि अंग्रेजों ने उनके भले के लिए काम किये, जबकि स्वाधीन भारत ने उनका शोषण किया। यह तंत्र इस बात को छिपाता है कि अंग्रेजों द्वारा पैदा किये गये अकालों में मरने वाले करोड़ों भारतीयों में बहुत बड़ा हिस्सा इसी वंचित वर्ग का था।

यही तंत्र ‘‘बांटो और राज करो’’ की ब्रिटिश नीति के बेहद घातक और वास्तविक पहलुओं को भी छिपाता है। इस ब्रिटिश नीति के सबसे बड़े लक्ष्य थे, हमारा जनजातीय समाज, अनुसूचित जातियों के हिंदू, पूर्वोत्तर भारत, पंजाब, और दक्षिण। अंग्रेजों ने सबसे ज्यादा काम, सबसे गहरे और व्यापक षड्यंत्र हिंदू समाज को बांटने के लिए किये। वे अचानक भारत पर आर्यों के आक्रमण और आर्य-द्रविड़ संघर्ष का सिद्धांत ले आए, और इसे आधार बनाकर समाज को तोड़ने के चौतरफा प्रयोग किये। दुर्भाग्य से देश से  ‘अंगरेजी राज’ जाने के बाद इस विरासत को वारिस मिल गये।

यह हुआ भीमा कोरेगांव में

  • 31 दिसंबर, 2017 –
    भीमा-कोरेगांव में यलगार परिषद का आयोजन, उत्तेजक भाषण दिये गये।
  •  1 जनवरी, 2018 –
    ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और मराठों की सेना में युद्ध में कथित विजय के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारी जमावड़ा, हिंसा, एक की मौत, कई घायल
  •  2 जनवरी, 2018 –
    शनिवारवाड़ा में हिंसा भड़काने के आरोप में शंभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे के विरुद्ध प्राथमिकी
  •  9 फरवरी, 2018 –
    भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया
  •  6 जून, 2018 –
    भीमा-कोरेगांव हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में प्रमुख दलित आंदोलनकारी सुधीर धवले, नागपुर विश्वविद्यालय की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष शोमा सेन, आंदोलनकारी महेश राउत और केरल निवासी रोना विल्सन गिरफ्तार
  •  28 अगस्त, 2018 –
    तेलुगु कवि वारवरा राव, आंदोलनकारी वर्नोन गोंसाल्वेस एवं अरुण फरेरा, मजदूर नेता सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा गिरफ्तार
  •  5 सितंबर, 2018 –
    महाराष्ट्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि गिरफ्तार कार्यकर्ताओं के सीपीआई (माओ) से संबंध के पुख्ता प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री की हत्या और देश में गृह युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के आरोप भी लगाये
  •  28 सितंबर, 2018 –
    सर्वोच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी में हस्तक्षेप करने और मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन से इनकार किया
  •  14 जनवरी, 2019 –
    यलगार परिषद कार्यक्रम के संबंध में कार्यकर्ता आनंद तेल्तुम्ब्डे के विरुद्ध प्राथमिकी को खारिज करने से सर्वोच्च न्यायालय का इनकार
  •  22 जनवरी, 2020 –
    महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे नीत नयी सरकार ने मामले में नये सिरे से जांच के आदेश दिये
  •  24 जनवरी, 2020-
    मामले की जांच पुणे पुलिस से एनआईए को हस्तांतरित, हस्तांतरण के वैधानिक आधारों को लेकर राजनीतिक हंगामा
  •  7 अक्तूबर, 2020 –
    एनआईए ने जनवरी, 2018 में दलितों के विरुद्ध हिंसा के पीछे ‘एक सुनियोजित रणनीति’ का दावा करते हुए पहला आरोपपत्र दाखिल किया
  •  21 मार्च, 2021 –
    एनआईए विशेष अदालत ने चिकित्सा आधार पर जमानत की स्टेन स्वामी की याचिका खारिज की
  •  20 अप्रैल, 2021 –
    वाशिंगटन पोस्ट ने शहरी नक्सली तत्वों के कंप्यूटर में सबूत डाले जाने का दावा करते हुए गिरफ्तारियों की वैधानिकता पर सवाल उठाये
  •  5 जुलाई, 2021 –
    स्टेन स्वामी की मृत्यु से हिरासत में उनके इलाज में लापरवाही पर हंगामा
  • 5 मई, 2022 –
    सर्वोच्च न्यायालय ने चिकित्सकीय आधार पर वारवरा राव को नियमित जमानत दी
  •  19 नवंबर, 2022 –
    स्वास्थ्य कारणों से गौतम नवलखा को तालोजा केंद्रीय कारागार से रिहा कर उनके घर में नजरबंद किया गया
  •  1 जुलाई, 2023 –
    महाराष्ट्र सरकार ने भीमा कोरेगांव जांच आयोग को एक और विस्तार दिया

भटकाया गया इतिहास

मराठों और अंग्रेजों के बीच कई युद्ध हुए, लेकिन चर्चा की जा रही है उनमें से एक की, भीमा-कोरेगांव की। विचित्र तर्क के अनुसार दूसरे सभी युद्ध स्वाधीनता संग्राम हैं, जबकि उनमें से एक, ‘दो जातियों के बीच हुआ युद्ध’। इस कुतर्क के चलते किसी दिन रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नानासाहब पेशवा के खिलाफ लड़ने वाली सभी ब्रिटिश रेजिमेंटों का जातीय विश्लेषण कर उसे ब्राह्मणों पर अमुक जाति की विजय बतलाया जाएगा। वीर कुंअर सिंह का बलिदान एक ठाकुर पर अमुक जाति की जीत होगी, और ऊदादेवी पासी और झलकारी बाई की वीरगति एक दलित स्त्री की पराजय, किसी अन्य जाति के हाथों।

तथ्य और सहजबोध (कॉमनसेंस) की बात है कि सभी जातियों के लोग ब्रिटिश सेना में थे। सभी जातियों के लोग ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लड़े, लेकिन सीधी सहज बातों को घुमाया जा सकता है। 1 जनवरी 1818 को भीमा-कोरेगांव नामक गांव के निकट पेशवा सेना और ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की झड़प हुई। इस युद्ध में लड़ने वाली पेशवा सेना और ब्रिटिश सेना, दोनों में अनेक जातियों के हिंदू थे। युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गये, घायल या गायब सैनिकों की संख्या 275 थी, जिनमें तीन (मारे गये) अंग्रेज अफसर-असिस्टेंट सर्जन विंगेट, लेफ्टिनेंट चिशोम और लेफ्टिनेंट पैटिसन थे।

इनमें मारे गये भारतीय मूल के सैनिकों में 22 महार, 16 मराठा, 8 राजपूत, 2 यहूदी और 2 मुस्लिम थे। पेशवा सेना से भी मराठा व अन्य जातियों के सैनिक कालकवलित हुए थे। युद्ध का कारण सर्वज्ञात है, ईस्ट इंडिया कंपनी की गिद्ध दृष्टि। स्पष्ट है कि ये दो जातियों के बीच का युद्ध नहीं था। लड़ने वालों के उद्देश्यों में जाति का भान भी नहीं था।

अब इस युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की तथाकथित विजय के तथ्यों पर दृष्टि डालते हैं। तत्कालीन ब्रिटिश सैनिक और इतिहासकार जेम्स ग्रांट डफ (1789-1858) अपनी किताब ‘‘दि हिस्ट्री आफ मराठाज, वॉल्यूम 3’’ , जो गूगल बुक्स पर आनलाइन पढने हेतु उपलब्ध है, में इस युद्ध के बाद के विवरण में है ‘‘कैप्टन स्टॉन्टन को लगा कि शत्रु (पेशवा सेना) पुणे के रास्ते में उसकी प्रतीक्षा कर रहा है। इसलिए जैसे ही अन्धेरा हुआ, वह जितने घायलों को साथ ले सकता था, उन्हें लेकर गांव (भीमा कोरेगांव) से पूना की ओर निकला और फिर (रास्ता बदलकर) सरूर की ओर निकल गया।’’

युद्ध के 14 महीने बाद, मार्च 1819 में, ब्रिटिश संसद की बहस में भीमा-कोरेगांव का जिक्र इन शब्दों में आया है— ‘‘अंत में, वे (ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना) न केवल बिना अपमानित हुए पीछे हटने में सफल रहे, बल्कि अपने घायलों को भी साथ लाये।’’ परन्तु बाद में अंग्रेजों ने यहां विजय स्तंभ बनवा दिया, और उसकी देखरेख महार जाति के एक व्यक्ति को सौंप दी। इस युद्ध में ब्रिटिश पक्ष से लड़े सैनिकों के बारे में दो बातें निश्चित रूप से कही जा सकती हैं, कि वे बहादुरी से लड़े, क्योंकि उनकी संख्या कम थी, दूसरा, वे उस सेना के लिए लड़ रहे थे, जिसमें वे नौकरी करते थे।

भीमा कोरेगांव के अपने एजेंडे को बल देने के लिए इस इकोसिस्टम के पास बस इतना तर्क है—
‘डॉ. आंबेडकर भीमा कोरेगांव का स्मारक देखने गये थे’।
इनके दुष्प्रचार को ध्वस्त करने के लिए डॉ. आंबेडकर का 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में दिया भाषण पर्याप्त है जिसमें उन्होंने कहा था कि—‘‘बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता की जड़ें गहरी नहीं होंगी..’’। एक और चेतावनी जो उन्होंने दी थी, वह भी स्मरणीय है— ‘‘मैं नहीं चाहता कि मेरे लोग कम्युनिज्म के प्रभाव में आ जाएं’’। 

घातक प्रयोग

इस इतिहास और अपने दस्तावेजों के विपरीत जाकर अंग्रेजों का बनाया ये स्मारक गतिविधियों का केंद्र बनता चला गया। आयोजन किये जाते रहे। फिर इसमें कूद पड़े शहरी नक्सली और इकोसिस्टम। इन लोगों ने इसे मीडिया और अकादमी जगत में चर्चित किया। वैमनस्य को भड़काने वाली व्याख्याएं कीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों को दबा दिया और समन्वयवादी आवाजों को दबाने के लिए दुष्प्रचार युद्ध छेड़ दिया। उनकी शैली और इतिहास में ये गलत भी नहीं माना जाता, बल्कि इसे युद्ध के तरीकों में गिना जाता है, और हिंसा तो कथित ‘‘क्रांति’’ के लिए आवश्यक है। इस सबका रक्तरंजित इतिहास है।

लेनिन ने एक बार अपने साथी कामरेडों को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘अपने विरोधी पर जो आरोप मढ़ना हो, मढ़ दो। उसे साबित करने का काम हमारा।’’ लेनिन और स्टालिन ने ये काम बखूबी किया और रूस में उन्हीं किसानों और कामगारों की लाशों के पहाड़ बनाये, जिनके नाम पर वे तानाशाही कर रहे थे। उधर चीन में माओ अपने इन पड़ोसी कामरेडों से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। माओ का कहना था, ‘‘सत्ता बंदूक की नली से निकलती है’’। माओ ने लाशों के ढेर को और ऊंचा किया। माओ चीन में ‘सांस्कृतिक क्रांति’ लेकर आये, और चीन की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और करोड़ों चीनी नागरिकों के जीवन का नाश किया।

1 जनवरी 1818 को भीमा-कोरेगांव के निकट पेशवा सेना से युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गये, घायल या गायब सैनिकों की संख्या 275 थी, जिनमें तीन (मारे गये) अंग्रेज अफसर- असिस्टेंट सर्जन विंगेट, लेफ्टिनेंट चिशोम और लेफ्टिनेंट पैटिसन थे।

अब भारत में इस तरह की तानाशाही वे आज तक नहीं ला सके, दुनिया ने भी इस गिरोह को नकार दिया है, इसलिए अराजकता और वर्गसंघर्ष के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ‘कल्चरल मार्क्सिज्म’ के प्रयोग सारे विश्व के लक्षित समाजों में शुरू किये गये। कल्चरल मार्क्सिज्म में कल्चर के अलावा सब कुछ है। ये पहचान आधारित असंतोष और संघर्ष भड़काने का वह प्रयोग है जिसमें जाति, नस्ल, भाषा, लिंग, रहन-सहन आदि को आधार बनाकर 1 जनवरी 2018 जैसे घातक प्रयोग किये जाते हैं।

भीमा कोरेगांव के अपने एजेंडे को बल देने के लिए इस इकोसिस्टम के पास बस इतना तर्क है— ‘डॉ. आंबेडकर भीमा कोरेगांव का स्मारक देखने गये थे’। इनके दुष्प्रचार को ध्वस्त करने के लिए डॉ. आंबेडकर का 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में दिया भाषण पर्याप्त है जिसमें उन्होंने कहा था कि— ‘‘बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता की जड़ें गहरी नहीं होंगी..’’। एक और चेतावनी जो उन्होंने दी थी, वह भी स्मरणीय है— ‘‘मैं नहीं चाहता कि मेरे लोग कम्युनिज्म के प्रभाव में आ जाएं’’। 

Topics: पूर्वोत्तर भारत‘बांटो और राज करो’भीमा कोरेगांवBhima Koregaonअंगरेजी राजऔर दक्षिणईस्ट इंडिया कंपनी की गिद्ध दृष्टिIndia Companyहिंदू समाजThe War Between the Two CastesहिंदूThe History of the MarathasपंजाबVolume 3
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न की बेअदबी का आरोप लगाया

पंजाब में लोकतंत्र या आम आदमी पार्टी की तानाशाही? चुनाव चिन्ह झाड़ू के अपमान का आरोप लगाकर युवक को भेजा जेल

पुस्तक का लोकार्पण करते हुए श्री भैयाजी जोशी। उनके दाएं हैं श्री रमेश पतंगे और अन्य अतिथि

‘हिंदुत्व को संप्रदाय की संकुचित सीमा में बैठाना ठीक नहीं’

maharashtra love jihad in ulhasnagar forced conversion accuses imran shaikh arrested

इमरान शेख ने विजय बनकर हिंदू महिला से की शादी, फिर कन्वर्जन, बुर्का पहनने और गौमांस खाने का बनाया दबाव

Christian conversion

उत्तराखंड: धर्मांतरण के कनेक्शन पंजाब से जुड़े? पुलिस प्रशासन कड़ी जोड़ने में लगा

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते श्री नरेंद्र ठाकुर और अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता

‘संघ का उद्देश्य है भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना’

माला (प्रतीकात्मक चित्र)

NEET 2026: सूरत में हिंदू छात्रा को तुलसी माला उतारने के लिए मजबूर किया, बाड़मेर में बुर्का पहने छात्रा को अनुमति

Load More

ताज़ा समाचार

ऑपरेशन डेल्टा हंट के बारे में मीडिया को जानकारी देते उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ गुजरात में ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’, 72 घंटे में 362 गिरफ्तार

कोर्ट का फैसला

‘प्राइड मंथ’ से पहले ऑस्ट्रेलिया से आया एक चौंकाने वाला फैसला

RSS Karyakarta Vikas Varg Kumar Mangalam Birla

नागपुर: RSS के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ का 4 जून को भव्य समापन, उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला होंगे मुख्य अतिथि

8 जून को इंडी गठबंधन की बैठक : अस्तित्व बचाने जुटेंगे 17 विपक्षी दल! क्या अंदरूनी कलह पर होगा मंथन!

former wipro employee alleges forced conversion

नासिक TCS के बाद Wipro में जबरन कन्वर्जन! पूर्व कर्मचारी ने किए चौंकाने वाले खुलासे, मुस्लिम सहकर्मी पर लगाए आरोप

supreme court

न्यायालय के आलोक में बेटी का अधिकार!

RSS Sangh Shiksha Varg Prayagraj Samajik Samrasata

125 गांव, हाथों में थैले और 5000 रोटियां: संघ शिक्षा वर्ग ने पेश की समरसता की मिसाल, घर-घर चूल्हों तक पहुंचा राष्ट्रवाद

ममता बनर्जी काे बड़ा झटका, पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत को विधानसभा अध्यक्ष ने दिया नेता प्रतिपक्ष का दर्जा

pithoragarh yakshavati river rejuvenation plantation drive 130 ta eco kumaon

विश्व पर्यावरण सप्ताह : सेना की इको टास्क फोर्स ने शुरू किया यक्षवती नदी पुनर्जीवन, नागरिकों ने दिखाई एकजुटता

न्यूयॉर्क के मेयर मामदानी ने तोड़ी परंपरा! इजरायल डे परेड का किया बहिष्कार, लोगों ने कहा- ‘चला रहे हैं इस्लामिक एजेंडा’

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies