संघ के 100 वर्ष पर चर्चा : संघ का लक्ष्य है सम्पूर्ण हिन्दू समाज को सक्षम बनाना - रवि कुमार
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संघ के 100 वर्ष पर चर्चा : संघ का लक्ष्य है सम्पूर्ण हिन्दू समाज को सक्षम बनाना – रवि कुमार

जयपुर में आयोजित ज्ञानम फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष की यात्रा पर चर्चा हुई। संघ प्रचारक और विशेष सम्पर्क टोली के सदस्य रवि कुमार, आरएसएस के राजस्थान क्षेत्र के संघचालक रमेश अग्रवाल, राजीव तुली चर्चा में शामिल हुए।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 4, 2023, 11:58 am IST
in संघ @100

राजस्थान के जयपुर में आयोजित ज्ञानम फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष की यात्रा पर चर्चा हुई। संघ प्रचारक और विशेष सम्पर्क टोली के सदस्य रवि कुमार, आरएसएस के राजस्थान क्षेत्र के संघचालक रमेश अग्रवाल, राजीव तुली चर्चा में शामिल हुए। इस दौरान संघ प्रचारक रवि कुमार ने कहा कि हमारा लक्ष्य है सम्पूर्ण हिन्दू समाज को सक्षम बनाना। जो भी चुनौतियां आएंगी, उनका साहस और जिम्मेदारी के साथ मुकाबला करेंगे। आगामी 20 वर्ष में ऐतिहासित कार्य होने हैं।

वहीं, कॉमन सीविल कोड पर रमेश अग्रवाल ने कहा कि विचारधारा को मनाने वाले सब लोग राम मंदिर का मुद्दा, कॉमन सीविल कोड, धारा 370 के बारे में चर्चा करते आ रहे हैं। जिस दिन राष्ट्रीय चेतना का स्तर आएगा, उस दिन ऐसी समस्याओं का सामाधान तत्काल होता जाएगा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे संघ का कार्य, ताकत और कद बढ़ा, वैसे-वैसे स्वार्थ पूर्ति करने वाले राष्ट्र विरोधियों ने अपने उदेश्य के पूरा होने में संघ को बाधक माना। लेकिन समाज के सहयोग और समर्थन से संघ आगे बढ़ता गया।

सवाल (रवि कुमार जी से)— संघ को 100 साल पूरे हो रहे हैं… संघ जो लक्ष्य लेकर चला था? क्या वो पूरे हो गए ?
उत्तर— हमारा लक्ष्य है सम्पूर्ण हिन्दू समाज को सक्षम बनाना और जो भी चुनौतियां सामने आएंगी, उनको साहस और जिम्मेदारी से निभाने के लिए समाज को तैयार करना। हिन्दू समाज की सबसे अधिक अपेक्षा राष्ट्रीय स्वयंसेवक से है, आगामी 20 वर्षो में अनेकों कार्य होने हैं। वैश्विक रूप से आगामी 20 वर्ष में ऐतिहासिक निर्णय होने हैं। संघ समाज में संगठन नहीं बनेगा, बल्कि समाज के द्वारा बनाया संगठन है। संघ के लिए आदर्श स्थिति वह है जब समाज पूर्ण रूप से संगठित हो जाए और इसमें संघ की भूमिका की चर्चा न हो। 100 वर्ष की यात्रा में वर्तमान स्थिति एक पड़ाव पार करने जैसी है और ऐसे और भी पड़ाव हमें पार करने हैं, परन्तु आगे भी बहुत लंबी यात्रा बाकी है।

उत्तर— (रमेश अग्रवाल) जब आरंभिक काल में संघ की उपेक्षा हुई, और जैसे-जैसे संघ के कार्य, ताकत और कद बढ़ा वैसे-वैसे स्वार्थ पूर्ति करने वाले राष्ट्र विरोधियों ने अपने उदेश्य के पूरा होने में संघ को बाधक माना और उन्होंने संघ का विरोध करना शुरू किया। ये कालखंड बहुत लंबा चला। उसके बाद संघ स्वंयसेवकों के परिश्रम के बल पर संघ समाज के बीच तेजी से पहुंचने लगा। समाज का सहयोग व समर्थन संघ को मिलने लगा ओर आज स्थितियां ऐसी हो गई हैं समाज संघ के कार्य को अच्छा बताने के साथ-साथ संघ के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है।

सवाल— संघ को 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं इसके बाद भी संघ ये दावा क्यों नहीं कर रहा है कि कन्वर्जन रुका है? ऐसा कहा जाता है जयपुर में संघ का अच्छा काम है उसके बाद भी यहां से 2 किलोमीटर दूर सांगानेर क्षेत्र में अभी कन्वर्जन का मामला सामने आया…संघ के इतने मजबूत क्षेत्र में कन्वर्जन हो क्यों रहा है?

उतर— (रमेश अग्रवाल)— राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ सभी समस्याओं का समाधान समाज के माध्यम से ही करता है, यह जो मतांतरण की समस्या है, वह बहुत प्रकार से होती है किसी प्रकार के लोभ लालच के कारण बढ़ा है। मतांतरण को रोकने के लिए समाज में व्यापक स्तर पर जागरुकता लानी होगी। संघ अब तक प्रयासरत है। उसी के कारण इस प्रकार की घटनाएं कम हो रही हैं।

सवाल— (राजीव तुली)— क्या आपको लगता है कि मतांतरण की समस्या गरीबी और बेरोजगारी के कारण हुई है? और संघ बेरोजगारी और गरीबी के कारण मतांतरण न हो इसके लिए क्या कर रहा है?

उत्तर—संघ का प्रमुख कार्य व्यक्ति निर्माण है और वह व्यक्ति इस तरह समस्याओं का निराकरण करने में सक्षम होता है। दिल्ली में समर्थ भारत के नाम से प्रकल्प शुरू किया है, जो रोजगार प्राप्त करने के लिए आवश्यक तकनीकी व पेशवर प्रशिक्षण देता है। भविष्य में ये मॉडल देशभर में विकसित किया जाएगा। बेरोजगारी समाप्त करना ये सरकार का काम नहीं है।

सवाल— क्या विश्व में हिन्दू मेधा के कारण भारत का पुराण वैभव लौट रहा है?

उत्तर— पहले मैं मतांतरण के बारे में बताता हूं, इंडोनेशिया में 40 साल तक सैन्य शासन रहा, लोकतंत्र आने के बाद पिछले 30 सालों में 10 हजार लोगों ने मुस्लिम पंथ छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया। इंडोनेशिया के राजघराने की पुत्री नाम सुने हो, वह भी 5 हजार लोगों को लेकर दो-तीन महीने पूर्व हिंदू धर्म में आई हैं। जावा की एक राजकुमारी 7 हज़ार लोगों को लेकर 2 साल पहले हिंदू धर्म में आई हैं, जबकि वहां न कोई धर्माचार्य है न कोई शंकराचार्य है। वहां हिंदू धर्म आगे बढ़ा है दुनिया में सभी ओर यूक्रेन और रूस के युद्ध की चर्चा है। युद्ध के हालातों में भी बड़े पैमाने पर यूक्रेन और रसिया के लोगों ने हिंदू धर्म अपनाया। एक भारतवंशी ऋषि सुनक वहां इंग्लैंड में प्रधानमंत्री बन गया। दुबई में स्वामीनारायण पंथ की ओर से एक मंदिर का निर्माण हुआ। वहां पर 5000 से ज्यादा दूसरे धर्म के लोगों ने दर्शन किए और सबसे पहले दर्शन करने वाले वहां के सुल्तान के परिवार के लोग थे। आबू धाबी में ही सुल्तान की मदद से स्वामीनारायण पंत द्वारा मंदिर निर्माणाधीन है। एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग जैसे कई वैश्विक हस्तियां भारतीय संस्कृति से जुड़ी रही हैं। उत्तराखंड के विश्वविख्यात नीम करौरी बाबा के आश्रम से वह प्रभावित रहे और नीम करोली बाबा से प्रेरणा लेने के बाद ही एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स ने एप्पल फोन का निर्माण प्रारंभ किया और युवा उद्यमी मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक सोशल मीडिया ऐप बनाकर ख्याति प्राप्त की। आज विदेश में कई बड़ी कम्पनियों के सीईओ भारतीय हैं। कई भारतीयों ने विदेशी कम्पनी खरीद रहे हैं…आने वाले 20 वर्ष में ईरान के करोड़ों लोग हिंदू धर्म अपनाएंगे। बलूचिस्तान, अफगानिस्तान के लोगों को हिंदू बना सकते हो, सनातन धर्म में विश्व को देने के लिए बहुत कुछ है जिससे प्रभावित होकर विश्व हिंदू राष्ट्र बन सकता है

सवाल- संघ के कार्यक्रमों में तो महिलाएं दिखाई देती हैं? क्या संघ के निर्णयों में भी उनकी सहमति सहभागिता है? सवाल रमेश जी से किया था, लेकिन पहले जवाब रवी कुमार जी ने दिया।

उत्तर—विदेश में कई शाखा प्रमुख महिलाएं हैं। अलग-अलग देशों में संविधान को ध्यान में रखकर चलता है। क्षेत्रीय संघ चालक डॉ रमेश अग्रवाल ने कहा कि संघ पुरुषों का संगठन है, 1936 में राष्ट्र सेविका समिति बनी, उसमें सभी पदों पर महिलाएं हैं। संघ के प्रचार, सम्पर्क और सेवा विभाग कुछ ऐसे भी संगठन हैं जिनमें महिलाएं दायित्व निभा रही हैं और निर्णय भी ले रही हैं।

रमेश अग्रवाल— राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1925 में पुरुषों के लिए इस संगठन की शुरुआत की थी, लेकिन 1936 में महिलाओं के लिए भी राष्ट्रीय सेविका समिति नाम का संगठन बना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पुरुष ही रहते हैं, लेकिन संघ के स्वयंसेवकों द्वारा विविध क्षेत्रों में बनाए गए संगठनों में मातृशक्ति रहती है। विविध संगठनों में महिलाएं भी दायित्व पर हैं और निर्णय भी लेती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क प्रचार और सेवा कार्य विभाग हैं जिनको समाज में विचरण करना है जो सीधा-सीधा संघ की शाखाओं में नहीं आ सकते उनके पास जाता है ऐसे तीनों ही कार्य विभागों की टोलियां में मातृशक्ति की सहभागिता है वह भी संघ के दायित्ववान कार्यकर्ता की तरह समाज के लोगों से मिलती है और संघ के बारे में जानकारी लेती है सीधा-सीधा आपको संघ की फ्रंट लाइन में महिलाएं नहीं दिखाई देती होंगी, लेकिन संघ की राष्ट्रीय सेविका समिति के फ्रंट लाइन पर महिलाएं ही हैं और जो विविध संगठन हैं उनमें भी फ्रंट लाइन पर महिलाएं ही हैं। लगभग 38 ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें संघ के स्वयंसेवक आज काम कर रहे हैं। वो चाहे विद्यार्थी क्षेत्र हो या फिर वनवासी क्षेत्र हो या फिर राजनीतिक क्षेत्र हो, सब क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी ले सकते हैं, महिला जहां निर्णय ले सकती है ऐसे दायित्वों पर काम कर रही हैं।

इस सवाल पर राजीव तुली— शाखा में महिलाएं नहीं हैं, लेकिन संघ में हैं, परंतु वह शाखा लगना भी महिलाओं के बिना संभव नहीं है। यह प्रश्न वैसा ही है कि भारतीय टीम की क्रिकेट कप्तान कभी महिला बनेगी क्या? क्रिकेट टीम को बने अभी 100 साल से ज्यादा हो गए। समाज चाहेगा तो संघ की टॉप लीडरशिप में महिलाएं शामिल होंगी, संघ जितना फ्लैक्सीबल और एडजस्टेबल कोई नहीं।

जनता का सवाल— संघ में अनुसूचित वर्ग के स्वयंसेवकों को बड़े पद पर दायित्व क्यों नहीं दिया जाता है? 

हमारे यहां जाति नहीं पूछी जाती है। हमने कभी खोजा नहीं, कभी प्रयास नहीं किया कि कौन किस जाती से आता है। तो इस कारण से हमें पता नहीं कौन किस जाति का है ? बड़ा दायित्व नहीं दिया जाता, मुझे नहीं लगता है ऐसा कहीं होगा, स्वयंसेवक काम करते-करते आगे बढ़ जाता है हम उसकी जाति पूछते ही नहीं है। आप सभी लोगों से कहूंगा एक बार संघ शिक्षा वर्ग में जाकर आओ, वहां पंगत में बैठने वाले की जाति नहीं मालूम, जो भोजन का वितरण कर रहा उसकी भी जाति नहीं मालूम, संघ का कोई भी स्तर ऐसा नहीं होगा, जिसमें अनुसूचित जाति जनजाति के लोग नहीं है।

राजीव तुली— संघ में दो चीजें स्थाई हैं एक भारत हिंदू राष्ट्र है और संघ हिंदू समाज के परम् वैभव के लिए काम कर रहा है। दूसरा समाज का गुरूर भगवा ध्वज है इसके अलावा संघ में सब कुछ बदल सकता है। जितना फैक्सीबल और अडलेबल संगठन संघ है उतना कोई ओर नहीं हो सकता है। किसी बात के लिए न नहीं है, एक समय था आप पुराने प्रचारकों के पास जाइये, बात कीजिए, संघ कार्यालय में कोई अखबार आता था तो वरिष्ठ प्रचारक उसको डांटता था, अखबार मंगाकर अपना समय और पैसा बर्बाद किया। आज संघ ने प्रचार विभाग बनाया ना। जो मीडिया में काम करने के लिए है।

सवाल- टूल किट गैंग और टुकड़े-टुकड़े गैंग संघ का क्यों विरोध करती है?

राजीव तुली— संघ किसी को अपना विरोधी नहीं मानता है, हम सर्वे श्याम विरोधेन काम करते हैं। संघ के अनुसार दुनिया में दो तरह के लोग हैं एक तो आज संघ में आ गये और एक जिनको भविष्य में संघ में आना है। जिस समय देश स्वंतत्र हुआ 1947 में तीन तरह की ​विचारधारा ने इस देश में जन्म लिया..पहली जिसने ये कहा वी आर नेशन इन द मैकिंग…दूसरी विचारधारा जिन्होंने कहा की कोई राष्ट्रीयता नहीं है ये 30—35 का ये समूह है। तीसरी ने कहा कि भारत एक राष्ट्र, प्राचीन राष्ट्र, हिन्दू राष्ट्र…बाकी की दो विचारधारा है वो विचारधारा के लेवल पर राजनीति के लिए तो आज विरोध करती है, लेकिन बंद कमरे में आकर कहती हैं कि देश इसलिए बचा हुआ है  क्योंकि आप लोग लगे हुए हो, इसलिए जब उनको हमारी विचारधारा सूट नहीं करेगी तो उसमें से टूल किट गैंग भी बनेगा, टुकड़े—टुकड़े गैंग भी बनेगा, जिहादी मानसिकता के भी बनेंगे। परन्तु अंत में एक उदाहरण और दे दूं…1989 डॉ हेडगेवार का जन्म शताब्दी वर्ष उस शताब्दी में संघ ने ऐसा तय किया कि देशभर में संघ प्रचारक जो अभी यह या ​पूर्व में रह चुके हैं, उन सब को नागपुर में बुलाया जाए जो संघ का मुख्यालय है। वहां सब प्रचारकों को बुलाया गया। मैं व्यवस्था में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन जा रहा था, आप कल्पना कीजिए 1989 में संघ के भगवे झंडे को स्वयंसेवकों के अलावा कोई भी स्वीकार नहीं करता था। उस कार्यक्रम में दत्तोपंत ने मंच से बोला जैसी 21वीं सदी आएगी ये सारे लाल झंडे आपको भगवे में बदलते नजर आएंगे। दत्तोपंत जी ने बताया जब मैं मंच उतरा तो स्वयंसेवकों ने पूछा आज आप ये क्या बोलकर आ गए, लेकिन आज हुआ न, आज लाल झंडा कहां दिखाई नहीं देता है।

सवाल— गोलवलकर यानी गुरुजी कहा करते थे संघ समाज में विलीन हो जाए। क्या वह स्थिति आ गई है?

उत्तर— आप आज संकल्प कर लीजिए, देखिए 1905 में इस देश में बंगाल का विभाजन स्वीकार नहीं किया था। मगर 3 पीढ़ी लगी। कई साल लगे देश का विभाजन स्वीकार कर लिया। जब अंग्रेजों ने अपनी शिक्षा व्यवस्था से पढ़े लिखे लोगों को यहां रूल करने के लिए भेजा। आप आज तय कर लीजिए अखंड भारत बनेगा, 3 पीढ़ी ओर लगेगी और अखंड भारत वैसा ही बनेगा जैसी कल्पना आप करोगे।

सवाल— (रवी कुमार जी से) —गुलामी के प्रतीक चिन्हों को हटाने से क्या तात्पर्य है? या इसके पीछे का क्या भाव है? यह आजादी के बाद से ही क्यों नहीं हटा दिया गया।

गुलामी के प्रतीक चिन्ह सभी स्वतंत्रत हुए देशों में हटाये गए, यूक्रेन जब सोवियत यूनियन से अलग हुआ तो वहां जितने भी स्टालिन के पुतले थे। 1972 स्टालिन के पुतले थे सभी को उन्होंने तोड़कर हटाया, हंगरी में देखा, एक-एक देश ने उनको उखाड़र फेंका…तो जब हमने गुलामी का चिन्ह विक्टोरिया टरमिनल जो मुंबई के स्टेशन का नाम था। उसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी मुंबई टरमिनल रखा ​इसमें क्या गलती है, ये तो सभी देशों में संभावित रूप से होता है धीरे-घीरे हो गया। स्वतंत्रता के बाद जितनी भी बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत में बनीं। हिंदुस्तान मिशन 2, हिन्दुस्तान एन्ट्री बायोटेक, पहले उन्होंने जो नाम रखा होगा धीरे-धीरे व्यवस्था तो बदल गई।

सवाल —(रमेश जी से) संघ समाज समाहित हो जाएगा तो उसका उद्देश्य पूर्ण हो जाएगा गोलवलकर जी ऐसा कहा करते थे?

उत्तर—  संघ यह समाज में अलग गुट नहीं है, समाज का संगठन है, वैसे ही काम करने का प्रयास संघ पिछले 97 वर्षों से कर रहा है। और संघ के जो प्रश्न हैं वो वास्तव में संघ के प्रश्न नहीं, वो समाज के प्रश्न हैं। लव जिहाद का प्रश्न है, मतांतरण का प्रश्न, पर्यावरण के प्रदूषण का प्रश्न है। देश में जहां कहीं भ्रष्टाचार दिखाई देता है, माता-बहनों के साथ अत्याचार या दुराचार की घटनाक्रम होती है, ऐसी सारी चुनौतियां, सारे प्रश्न समाज के सामने हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उदेश्य है कि हमारा समाज इतना समर्थ, इतना चेतवान, इतना समर्थयवान, ऐसा बने जो ऐसी सारी चुनौतियों को, सारी प्रकार की समस्याओं को स्वत: ठीक कर सके। उन चुनौतियों का सामना करते हुए उनका निराकरण करके और अपने वैभव पर सब प्रकार का वैभव, भौतिक वैभव और आध्यामिक वैभव है। हमने देखा ​है केवल भौतिक वैभव से समाज की उन्नति नहीं होती है। भारत में जो हिंदुत्व का विचार है विश्व कल्याण का मार्ग है, इस विचार के अनुरूप जीवन जीने वाला समाज खड़ा करना संघ का उद्देश्य है। संघ प्रोटो टाइप खड़ा करने में समर्थ हुआ है, लेकिन इसका विस्तार समाज में हुआ है। जिस दिन ये विस्तार और हो जाएगा, उस दिन संघ समाज में समाहित हो जाएगा। इसलिए संघ कभी भी संघ की जय हो, संघ जिन्दाबाद हो ऐसे नहीं बोलता है। संघ हमेशा भारत की जय ही बोलता है, जिस दिन भारत का ऐसा समाज बनेगा, उस दिन संघ समाज में विलन हो जाएगा।

सवाल —(रवि कुमार जी से)  —सामाजिक समरसता को आप कैसे देखते है? राजस्थान में कई घटानाएं ऐसी हो रही हैं?

इस के साथ दूसरा सवाल जनता से आया—अखंड भारत में तो ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान मुस्लिम देश आते हैं अगर अखंड होता है तो हिंन्दू आबादी 90 करोड़ होती है, फिर हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हो जाएंगे?

जब तक हम संस्कृति दृष्टि से सबको समाहित नहीं करेंगे, तब तक अखंड भारत हमारे लिए कड़वा सत्य रहेगा। सभी को मानना पड़ेगा भारत माता की जय, ये अफगानिस्तान में भी होगा, पाकिस्तान में भी होगा, बलूचिस्तान में भी होगा, लेकिन इसके लिए हम क्या कर सकते है? इसके लिए हमको उन देशों की भााषाओं को सीखना होगा। आप उनकी भाषा में कवाली बनाइए हरी सिंह नलवा के उपर उनको पसंद आएगी, उनके बच्चें गाने लगेंगे। यूट्यूब पर अपलोड़ कीजिए,उसके लिए कोई खर्चा भी नहीं होगा। ऐसे ही रामायण, महाभारत की छोटी-छोटी कहानियां जो उनके बच्चों के लिए उपयोगी होगा। उनकी भाषा में बनाइये। और तेजी से 20 साल में सब बदल जाएगा। ये घर में बैठकर आप कर सकते हो, इसके कारण आपको पैसा भी मिलेगा। कोई कठिन नहीं है इसलिए फ्रांसी भाषा, ईरानी भाषा सब सीखना होगा, उसमें हमारी संस्कृति को डालना होगा, दूसरी छोटी सी बात बताता हूं कुछ समय पहले मुझे बिरला ओडिटोरियम में 10 मिनट के लिए बोलने के लिए बुलाया था इसमें यहां सारे नेता बैठे थे, तो मैने पूछा क्या राजस्थान का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति बना है क्या? तो उन्होंने बताया कि भैरूसिंह शेखावत उपराष्ट्रपति बने थे। तो मैने उनको एक घटना बताई कि अमेरिका में एक राजस्थान आदमी उसने वहां की औरत से शादी की थी और उसको एक बच्चा हुआ..लेकिन बच्चे के जन्म के एक महीने पूर्व एक्सीडेंट में उसका निधन हो गया। अब बच्चे को वहां की महिला ने उसका नाम रखा विलयन उसको घर में बुलान के लिए उसका नाम दे दिया बिल….और 10 साल के बाद उस महिला ने दूसरा विवाह किया, फिर बच्चे को कहा तुम अपने असली पिता का नाम उसका सरनेम लेना चाहते हो या फिर अभी जिनसे अभी शादी की है उनका सरनेम लेना चाहते हो। उस बच्चे ने कहा मैं थोड़े दिन के बाद बताता हूं, ये नये जो पिता मिले हैं मैं इनके नाम से ही पहचाना जाऊंगा इसलिए उसने अपना नाम क्लिटन रखा। क्या समझ में आया आपको बिलन क्लिटन राजस्थान का था। बताइये कोई भी देश का राष्ट्रपति दिल्ली के बाद यहां एक नायला गांव में आकर एक दिन रहा, उसकी बेटी चेलसिया 1 महीना यहां घांघरा चुनरी पहनकर होली मना रही थी। जब मैं यह कहकर नीचे आकर बैठा तो मुख्यमंत्री ने मुझे बताया कि अटल जी ने मुझे बताया कि इनको उनके गांव तक लेकर जाओ। तो मैं ही उसको लेकर आयी यहां छोड़ी, मैंने कहा कि मंच से बताओ आपके लोग मेरे उपर विश्वास नहीं कर रहे हैं। यह घटना भी आपके आंखों के सामने हुई है। ऐसे घूमंतू लोग हजार साल पहले राजस्थान से दुनिया के कोने-कोने में गए हैं। जिनमें से एक ही बिलन क्लिटन। जब क्लिटन चुनाव में खड़ा था तो उसने अपना ये सब नहीं बताया था। इसलिए 20 साल तक ये सामने नहीं आया वो घुमंतू टाइप का राजस्थानी है। दुनिया के बड़े-बड़े नॉबल विजेताओं के आप नाम देखेंगे तो ये राजस्थान से होंगे। इसके पीछे कोई रिसर्च नहीं करता है। करने की जरूरत है। हमने भारत के बाहर के भारतीय को ले लिया तो हमारा जीडीपी कदम डबल और .इन घुमंतू लोग को ले लेंगे तो जीडीपी तीन गुना हो जाएगा। पांच टिलयन डॉलर की बात मत करो 15 टिलयन की बात करो।

सवाल— संघ आजकल संविधान पर बहुत ध्यान देने लगा है, सभी लोग संविधान पर चर्चा करने लगे हैं? इसके पीछे रहस्य क्या है? पूर्व में तिरंगा नहीं लगाने के आरोप भी आप पर लगाते रहे हैं?

जबाव- (राजीव तुली) एक तो कहते हैं कम्युनिस्ट, ये ​फ्लैग कोड रखकर आम आदमी को तिरंगे से दूर किसने किया। उन्होंने किया जिन्होंने तिरंगे के कलर्स की कॉपी मारकर अपना तिरंगा झंडा बना दिया। प्रश्न संघ से नहीं होना चाहिए? संघ ने तिरंगे की शान के लिए ऐसे-ऐसे काम किए। राज बाहू महाकाल गोवा को जब आजाद करवाने के लिए गए तो उनके सर में गोली लगी उनकी छाती में या ​पीठ पर नहीं लगी। जब गोवा पर पुर्तगालियों का राज इन लोगों ने समाप्त कर दिया। तो नेहरू नाराज हो गए और उन्होंने गोवा को भारत में शामिल नहीं किया। पहले संघ पत्राचार नहीं होता था जब से संघ प्रचार विभाग बना है ​पत्राचार होने लगा है। एक पुस्तक है संघ और स्वराज, आप वो पुस्तक मंगा लीजिएगा…संघ के स्वयंसेवकों ने तिरंगे के लिए क्या किया, संघ की स्थापना की डॉ हेडगेवार ने सरसंघचालक का दायित्व छोड़कर 10 महीने जेल में रहे हैं और बाद में जेल से छूटकर वापस आए तो मोतीलाल नेहरू और हकीम अजमल खान उनकी स्वागत की सभा में जाकर भाषण दिया क्योंकि कांग्रेस और कम्युनिस्ट भी तो हिंदू हैं।

सवाल—विरोधी आप पर आरोप लगाते हैं कि संघ का देश की आजादी में योगदान नहीं है ?

ऐसे आरोप लगाने वालों की बुद्वि पर तरस खाया जा सकता है। एक पुस्तक है नॉव इट कन भी टोल्ड़ वो किसी संघ के स्वयंसेवक नहीं लिखी थी। वो बीएन बाली ने लिखी है वो उस समय लाहौर विश्वविधालय के एचओडी थे। वो पुस्तक भी प्रभात प्रकाशन में छपी है। आप उसको मांग सकते हैं।

सवाल— कॉमन सीविल कोड पर संघ का क्या कहना है?

जवाब- (रमेश जी) – संघ के तीसरे सरसंघचालक बालासाहब जी से संघ की किसी एक सभा में कार्यकर्ता ने प्रश्न किया कि हम सब स्वयंसेवक और हमारी जैसी विचारधारा को मनाने वाले सब लोग राम मंदिर का मुद्दा, कॉमन सीविल कोड, अनुच्छेद 370 ऐसे विषय को बोलते-बोलते चले आ रहे हैं, एक पीढ़ी समाप्त हो गई, आखिर होगा क्या ? तो उनका उत्तर हम सबके लिए समझने के लिए जरूरी है? जिस दिन भारत के सामान्य व्यकित में राष्ट्रीय चेतना का एक स्तर आएगा। उस दिन ये समस्या का समाधान एक-एक करके होगा या फिर सबका एक साथ भी हो सकता है। ऐसा सब होने वाला है। हमने होते हुए हमारी आंखों के सामने देखा है बहुत सारे लोग कह रहे हैं। हम सौभाग्यशाली है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे सारे प्रयासों को हमारा उत्साहपूर्ण समर्थन व प्रोत्साहन मिलना चाहिए। ये चेतना जो जाग्रत हुई उसकी गुणवत्ता और बढ़नी चाहिए।

Topics: रमेश अग्रवालRSSराजीव तुलीGyanam FestivalसंघSanghराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघRavi KumarRashtriya Swayamsevak SanghRamesh Agarwalजयपुर समाचारRajeev TuliआरएसएसJaipur Newsज्ञानम फेस्टिवलरवि कुमार
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