यूपी से लेकर असम तक सर्वे पर मचा हंगामा, जानिए वक्फ एक्ट क्यों खत्म होना चाहिए?
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होम भारत

यूपी से लेकर असम तक सर्वे पर मचा हंगामा, जानिए वक्फ एक्ट क्यों खत्म होना चाहिए?

यूपी में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करवाया जा रहा है, साथ ही वक्फ की संपत्तियों का भी सर्वे जारी है। ऐसे ही असम में भी हिमंता सरकार मदरसों से मिले संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी के बाद एक्शन मोड में आ चुकी है। वहीं दिल्ली में वक्फ बोर्ड फंडिग घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान पुलिस की गिरफ्त में हैं। ऐसे में सवाल उठाता है आखिर ये वक्फ बोर्ड क्या है और इससे जुड़ा कानून क्या कहता है, तो जानिए विस्तार से....

Written byMasummba ChaurasiaMasummba Chaurasia
Sep 22, 2022, 02:02 pm IST
inभारत, दिल्ली
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

असम से लेकर उत्तर प्रदेश तक मदरसों और वक्फ बोर्ड के सर्वे को लेकर हंगामा मचा हुआ है। विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं। यूपी में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करवाया जा रहा है, साथ ही वक्फ की संपत्तियों का भी सर्वे जारी है। ऐसे ही असम में भी हिमंता सरकार मदरसों से मिले संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी के बाद एक्शन मोड में आ चुकी है। दिल्ली में वक्फ बोर्ड फंडिग घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान पुलिस की गिरफ्त में हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये वक्फ बोर्ड क्या है और इससे जुड़ा कानून क्या कहता है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि अंग्रजों ने जितने भी कानून बनाए, वो सब भारत को लूटने के लिए बनाया है या बांटने के लिए बनाया है। 1860 में इंडियन पीनल कोड बनाया। भारत को लूटने के लिए बनाया। 1861 में पुलिस एक्ट भनाया भारत को लूटने के लिए बनाया। 1863 में इंडोन्मेंट एक्ट बनाया मंत्रियों को कंट्रोल करके भारत को लूटने के लिए बनाया। 1872 में एंबियंस एक्ट बनाया भारत के लोगों को सजा देने के लिए, भारत के लोगों को धमकाने के लिए। लाइन डेफिनेशन एक्ट बनाया पूरे देश की लाइन को एक्योर कर लिया, उसको पूरे चर्च को दे दिया, पूरे देश में जहां-जहां सिविल लाइन चल रही, वो सभी उसी लाइन डेफिनेशन एक्ट में उसकी जमीन एक्योर की गई, ऐसे कितने कानून बनाए उन्होंने।

अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि नागालैंड में बंगाल फ्रंटियर एक्ट बना दिया, नॉर्थ इस्ट में जाना बंद कर दिया भारत के लोगों का जिससे वे वहां आराम से लूत कर सकें। ऐसे उन्होंने सारे कानून बनाए, 1937 में शरिया एक्ट बनाया, डिवाइड एंड रूल के लिए, मुसलमानों को अलग एक पहचान देने के लिए, 1947 से पहले बने सारे कानून बेबुनियाद हैं। देश को डिवाइड एंड रूल करने के लिए बनाए गए, लूटने और बांटने के लिए बनाए गए, लेकिन उसके बाद आजादी के बाद भी हमारी सरकारों ने बहुत सारे कानून लूटने और बांटने के लिए बनाए हैं। उदाहरण के लिए हिन्दू एक्ट बना केवल हिन्दुओं के लिए बना सबके लिए नहीं बना, जबकि संविधान कहता था समान नागरिक संहिता होनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि 1991 में पूजा स्थल कानून बनाया और पूजा स्थल कानून बनाकर गजनी, गोरी, बाबर, हुमायूं, तूगलक, अकबर के गलत कामों को वैधानिक कर दिया गया। यानि की मुगलों ने जितने भी मंदिर तोड़े थे, 1991 का कानून कहता है, केवल अयोध्या का मामला कोर्ट में चलेगा बाकी कोई मामला कोर्ट में चलेगा ही नहीं, यह पहला कानून हुआ कांग्रेस का 1991वें का जो पूरी तरह से डिवाइड एंड रूल के लिए बनाया गया था। दूसरा कानून 1992 में माइनॉरिटी कमीशन एक्ट बनाया, माइनॉरिटी कमीशन एक्ट बनाकर कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधे। पहला मुस्लिम को यहां पर अल्पसंख्यक का दर्जा दे दिया, दूसरा हिन्दुओं को आपस में बांट दिया। जो हिन्दू मैरिज एक्ट है या हिन्दुओं के लिर और भी कानून हैं वो केवल हिन्दुओं पर लागू नहीं होते हैं। जैन पर भी लागू होते हैं, बौद्ध पर भी लागू होते हैं, सिख पर भी लागू होते हैं, यानी कानून की नजर में हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख यह सब हिन्दू हैं, जो सच भी है, सिखपंथ की स्थापना सनातन धर्म से जुड़ी हुई है, हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए हुई। जैन संप्रदाय भी सनातन संप्रदाय से है, बौद्ध संप्रदाय भी सनातन संप्रदाय से हैं, तो यह सारे धर्म सनातन धर्म से ही संबंधित हैं, इसीलिए कानून की नजरों में भी जैन, सिख, बौद्ध धर्म भी हिन्दू कहलाते हैं, लेकिन 1992 में माइनॉरिटी कमीशन एक्ट बनाके कांग्रेस की सरकार ने जैन को माइनॉरिटी घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से हिन्दू हो गई मेजॉरिटी और जैन हो गया माइनॉरिटी, दोनों बंट गए आपस में सिख को माइनॉरिटी घोषित कर दिया, हिन्दू मेजोरिटी और सिख माइनॉरिटी इस तरह सिख भी बंट गए, बौद्ध को माइनॉरिटी घोषिट कर दिया तो हिन्दू मेजोरिटी यहां दोनों को आपस में बांट दिया गया।

इस तरह से 1992 में बने इस कानून ने मुस्लिम को माइनॉरिटी घोषित किया उन्हें स्पेशल दर्जा दे दिया। माइनॉरिटी डिफाइन किए बिना कि माइनॉरिटी कौन होगा, किस परसेंट में होगा, कुछ नहीं बताया गया। यह किस लेवल पर नेशनल, स्टेट लेवल, डिस्ट्रिक्ट लेवल पर माइनॉरिटी होगा, यह भी नहीं बताया गया। बस माइनॉरिटी कमीशन बना दिया गया और माइनॉरिटी डिक्लेयर कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि 1995 में वक्फ एक्ट, यह कानून 1991 के पूजा स्थल कानून, 1992 के माइनॉरिटी कमीशन एक्ट से भी ज्यादा खतरनाक रहा। इस कमीशन का एक्ट वफ्फ बोर्ड बना, इस काउंसिल में एक एमएलए जो मुस्लिम होगा, एक एमपी जो मुस्लिम होगा, एक आईएएस जो मुस्लिम होगा, एक टाउन प्लानर जो मुस्लिम होगा, एक एडवोकेट जो मुस्लिम होगा, स्कॉलर जो मुस्लिम होगा, मुतवल्ली जो मुस्लिम होगा। वहीं अगर अधिकार की बात करें तो किसी भी जमीन को बिना जांच-पड़ताल के बिना किसी एविडेंस के बिना किसी इंवेस्टिगेशन के वह नोटिस भेज कर जमीन को वफ्फ की जमीन कहलाने का अधिकार रखता है। वहीं, सच्चर कमेटी कहती है कि मुसलमानों की हालत बड़ी खराब है, बहुत बुरे हाल में हैं, गरीबी, भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी में जी रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ वफ्फ बोर्ड के पास डिफेंस और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी हो गई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुस्लिम अमीर हैं, तो इतने अमीर हैं कि उन्होंने आठ लाख एकड़ की जमीन दान दे दी तो वह इसका मतलब वह गरीब नहीं हैं।

अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी है। अगर टोटल में देखा जाए तो डिफेंस, रेलवे के बाद तीसरे नंबर पर वक्फ बोर्ड के पास प्रॉपर्टी है। जिसमें ज्यादातर जमीनें अवैध कब्जा की हुईं हैं, और यह अवैध कब्जा गांव की गोचर की जमीन है, जहां गाय और भैंस का चारागाह होता है, उस पर कब्जा कर वफ्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी बना दी गई। खेल के मैदान को वफ्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी बना दिया गया, सिंचाई विभाग की जमीन को वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी बना दिया गया, इसी तरह से ऊसर, बंजर जमीन को वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी बना दिया। वनवासी क्षेत्र के जंगलों को वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी डिक्लेयर कर दिया और तमिलनाडु में तो एक पूरे गांव को ही वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी डिक्लेयर कर दिया गया है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में संविधान होते हुए, अलग से कानून क्यों बनाया गया ? वफ्फ बोर्ड की तरह हिन्दू बोर्ड, जैन बोर्ड, सिख और बौद्ध बोर्ड नहीं है, फिर अलग से मुस्लिम बोर्ड क्यों? हिन्दुओं के पास भी मंदिर को मैनेज करने का कानून है, लेकिन उसमें बहुत अंतर है वफ्फ बोर्ड मस्जिद को मैनेज करने के लिए नहीं है। हिन्दू बोर्ड केवल मंदिर को मैनेज करने के लिए हैं। वक्फ बोर्ड जो आठ लाख एकड़ की संपंत्तियों पर कब्जा किए हुए बैठा है, वह पूरी तरह से मुस्लिम की नहीं है, उसमें आधे से ज्यादा प्रॉपर्टी या तो पब्लिक लैंड है, या तो हिन्दुओं की जमीन है। उसमें जंगल, पार्क, उसर, बंजर, गोचर, खेल का मैदान, पब्लिक लैंड पर कब्जा किए हुए है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए अगर कानून हो तो सबके लिए हो, कानून न हो तो किसी के लिए न हो । उन्होंने यह भी कहा कि अगर जो लोग कह रहे हैं, कि वक्फ बोर्ड सही है, तो इसी तरह का हिन्दुओं के लिए भी कानून बना दें। ऐसा क्यों हैं, कि एक ही कम्युनिटी को राइट है, कि वह नोटिस भी भेजे खाली भी कराए और बाकी कम्युनिटी के लिए कुछ नहीं, ऐसा क्यों ?

मठ, मंदिरों से पैसा लिया जा रहा है, चार लाख मठ मंदिर सरकार के कंट्रोल में हैं। एक भी दरगाह, एक भी मजार, चर्च सरकार के कंट्रोल में क्यों नहीं है। एक लाख करोड़ मठ मंदिरों से लिया जा रहा है, और मठ मंदिरों को यह अधिकार नहीं है, कि नोटिस भेजकर जमीन खाली करा लें। वहीं मजार, दरगाह, मस्जिद से एक रुपए भी नहीं आता है, और उसको यह अधिकार है, कि वह किसी को भी वफ्फ प्रॉपर्टी डिक्लेयर कर दे। वहीं उन्होंने वफ्फ बोर्ड के मेंम्बर्स को लेकर कहा कि उनका वेतन भत्ता, गाड़ी, बंगला कहां से आ रहा है? वह भी सबके टैक्स के पैसों से आ रहा है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, देश के बुद्धजीवियों से कहा कि यह समझना चाहिए, कि अगर इस देश में ऐसे पर्सनल लॉ बनाते रहेंगे, और एक-एक कम्युनिटी के लिए कानून बनाते रहेंगे, तो देश बर्बाद हो जाएगा, कुछ पॉलिटिकल पार्टियों को फायदा तो जरूर होगा, उन्हें सत्ता भी मिल जाएगी, लेकिन देश टुकड़ों में बंट जाएगा।

वक्फ ऐक्ट क्यों खत्म होना चाहिए?https://t.co/DbQ2UIVkTv

— Ashwini Upadhyay (@AshwiniUpadhyay) September 22, 2022

Topics: Ashwani Upadhyay released the videowhy the Waqf Act should endवकीलअश्वनी उपाध्यायसुप्रीम कोर्ट के वकील अश्वनी उपाध्यायअश्वनी उपाध्याय ने वीडियो किया रिलीजSupreme Courtवक्फ एक्ट क्यों खत्म होसुप्रीम कोर्टLawyerAshwani UpadhyaySupreme Court lawyer Ashwani Upadhyay
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