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मेवात: खनन माफिया का दुस्साहस

मेवात क्षेत्र में मुस्लिम खनन माफिया बेखौफ अरावली पहाड़ियों का सफाया कर रहे हैं। वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। इन्हीं ने तावड़ू के डीएसपी सुरेंद्र सिंह की कुचल कर हत्या कर दी, ताकि पुलिस उनसे डर कर रहे

Written byमनोज ठाकुरमनोज ठाकुर
Aug 12, 2022, 05:11 pm IST
in भारत, विश्लेषण, हरियाणा
नूंह के पचगांव में मुस्लिम खनन माफिया ने डीएसपी सुरेंद्र सिंह (प्रकोष्ठ में) को डंपर से रौंद दिया

नूंह के पचगांव में मुस्लिम खनन माफिया ने डीएसपी सुरेंद्र सिंह (प्रकोष्ठ में) को डंपर से रौंद दिया

 

वन्य प्राणियों व पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। पूरे इलाके में मुस्लिम खनन माफिया सक्रिय हैं, जिन्हें न पुलिस का डर है और न शासन का। सरकारी उदासीनता के कारण भी अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। यह कहना है मेवात में पर्यावरण के लिए काम कर रहे ठाकुर वीरेंद्र सिंह का।

मेवात क्षेत्र में अरावली पहाड़ियां अवैध खनन की भेंट चढ़ रही हैं। इसके कारण क्षेत्र की जैव विविधता नष्ट हो रही है तथा वन्य प्राणियों व पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं। पूरे इलाके में मुस्लिम खनन माफिया सक्रिय हैं, जिन्हें न पुलिस का डर है और न शासन का। सरकारी उदासीनता के कारण भी अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। यह कहना है मेवात में पर्यावरण के लिए काम कर रहे ठाकुर वीरेंद्र सिंह का।

वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है और मुस्लिम समुदाय ने कानून को ताक पर रखा है। मजाल है कोई उनके काले कारनामों के बारे में मुंह भी खोल दे। यहां हर घर से कोई न कोई अवैध खनन से जुड़ा हुआ है। खनन माफिया द्वारा बेरोकटोक खुदाई की पुष्टि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी करती है। यहां मुसलमानों का आतंक इतना है कि उनके आगे पुलिसवालों की भी घिग्घी बंध जाती है। खनन माफिया कितना दुर्दांत हो चुका है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि 19 जुलाई को सरेआम डीएसपी सुरेंद्र सिंह को डंपर से रौंद दिया गया।

इस हत्याकांड में चार मुसलमान शामिल थे, जो अब सलाखों के पीछे हैं। मुख्य आरोपी शब्बीर उर्फ मित्तर टौरू (हरियाणा) का रहने वाला है, जो हत्याकांड को अंजाम देने के बाद राजस्थान में छुप गया था। दूसरा आरोपी इकरार गांव पचगांव का है। डीएसपी की निर्मम हत्या पचगांव में ही की गई थी। क्षेत्र में हर दिन इस तरह की घटनाएं होती हैं। माफिया पुलिसकर्मियों को धमका कर धड़ल्ले से ट्रक-डंपर से ढुलाई कर रहे हैं। हालांकि डीएसपी हत्याकांड के बाद पुलिस सख्त है। लेकिन समस्या यह है कि माफिया को कुछ राजनीतिक दलों का संरक्षण प्राप्त है।

कांग्रेस राज में खनन माफिया फले-फूले
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने पर गृह मंत्री अनिल विज ने पलटवार करते हुए कहा कि खनन माफिया उन्हीं के कार्यकाल में कांग्रेस सरकार की लचर नीतियों के कारण फले-फूले। हमारी सरकार सख्ती से उनसे निपट रही है, इसी कारण डीएसपी की जान गई। उन्होंने कहा कि 1 मार्च, 2005 को नूंह में अवैध खनन को लेकर छापेमारी के दौरान सिपाही राजेंद्र सिंह की मौत हुई और सिपाही रमेश चंद्र घायल हो गया था। 26 मई, 2006 को मेवात के तावड़ू में इसी तरह की कार्रवाई में सिपाही सतबीर की मृत्यु हुई, 2 नवंबर, 2011 को तावड़ू में ईएचसी ओमप्रकाश व ईएएसआई बीर सिंह घायल हुए। तावड़ू में ही 29 मार्च को 2013 में सिपाही पवन कुमार की मौत हुई और सिपाही विनोद कुमार घायल हो गया। लेकिन हुड्डा सरकार ने इन मामलों को अनसुलझा बताकर बंद कर दिया। विज ने कहा कि सूबे में किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है। मेवात में डीएसपी की हत्या पर पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। इस तरह की हरकत किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। यह कायरतापूर्ण हरकत है। इसके लिए जितनी फोर्स लगाने की जरूरत पड़ेगी, हम नहीं चूकेंगे। उन्होंने कहा कि हम खनन माफियाओं को किसी कीमत पर नहीं बख्शेंगे। हमारी सरकार में ऐसे अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलेगी।

खत्म हो रही जैवविविधता
केंद्रीय सशक्तिकरण समिति (सीईसी) ने अरावली क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2002 से पहले पट्टाधारकों ने अवैज्ञानिक तरीके से खनन किया। इससे अरावली की पहाड़ियों में जगह-जगह 10 मीटर गहरे गड्ढे बन गए हैं। कई जगहों पर तो 500 फीट तक पत्थर निकाले गए और उसे नियमानुसार मिट्टी से नहीं भरा गया। कुछ हिस्सों में तो खतरनाक कचरे भर दिए। इससे पूरे अरावली के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान होने लगा था। सीईसी ने राज्य सरकार को अरावली खनन क्षेत्र के पुनर्वास और पंजाब भू-परिरक्षण अधिनियम-1900 के अंतर्गत प्रतिबंधित वन क्षेत्र को खनन से अलग रखने का सुझाव दिया था। लेकिन राज्य खनन विभाग ने सीईसी की सिफारिशों को लागू करने में रुचि नहीं दिखाई, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने 2002 से 2009 के बीच अपने विभिन्न आदेशों में नूंह, गुरुग्राम और फरीदाबाद में खनन पर रोक लगा दिया।

वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि पूरे मेवात क्षेत्र की पहाड़ियों को खनन माफिया साफ कर दिया। इससे क्षेत्र में पर्यावरण असंतुलन गंभीर हो गया है और कई वन्य प्राणी विलुप्त हो गए हैं। माफिया हथियारों के दम पर लगातार दिन-रात यहां खनन कर रहे हैं। कोई इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे जान से मारने और परिवार तक को तबाह करने की धमकी दी जाती है।

वैध खनन से होने वाली काली कमाई का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों में किया जाता है। क्षेत्र के अधिकतर मुस्लिम युवा और बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे भी इन अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं। खनन जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल कर इनके मन में हिंदुओं के विरुद्ध जहर भरा जाता है। अगर कोई उनके विरुद्ध आवाज उठाता है तो उसे ये दुश्मन के तौर पर प्रचारित करते हैं।

कई पहाड़ियां हो गई लुप्त
अवैध खनन के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे मेवात निवासी सतबीर सिंह ने बताया कि अरावली की पहाड़ियां हिमालय से भी पुरानी हैं, लेकिन अवैध खनन के चलते कई पहाड़ियां विलुप्त हो गई और कई लुप्त होने की कगार पर हैं। स्वयंसेवी संस्था ‘अरावली बचाओ मुहिम’ के सदस्य ने बताया कि नूंह, गुरुग्राम और फरीदाबाद में 16 जगहों पर अवैध खनन के सबूत मिले थे। इनसके आधार पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में एक याचिका दाखिल की गई थी। एनजीटी ने सरकार को सर्वेक्षण कर तीन महीने के अंदर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। सरकार ने एक संयुक्त समिति बनाई है, जो तीनों जिलों में अवैध खनन के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही है। अभी समिति की जांच पूरी भी नहीं हुई कि माफिया ने डीएसपी की हत्या कर दी। पर्यावरणविदों का कहना है कि जिस तरह से यहां के पर्यावरणविद् अवैध खनन के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं, उससे माफिया बौखला गया है। डीएसपी की हत्या कर लोगों में दहशत फैलाना चाहता है। नूंह के हरपाल सिंह ने बताया कि अवैध खनन में लगे डंपर गांवों के बीच से तेज गति से गुजरते हैं। यदि कोई चालक को डंपर धीरे चलाने के लिए कहता है तो उसे धमकाया जाता है। ज्यादा विरोध करने वालों के साथ मारपीट की जाती है।

देश विरोधी गतिविधियां
ग्रामीणों का कहना है कि माफिया खनन के लिए डाइनामाइट का प्रयोग करते हैं। पुलिस ने कई बार इलाके में अवैध विस्फोटक पदार्थ को पकड़ा है। डायनामाइट के प्रयोग के कारण पहाड़ियां दरक रही हैं। इसके कारण भूमि का कटाव तो तेजी से हो ही रहा है, पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही नहीं, इन विस्फोटकों का प्रयोग वन्य प्राणियों के शिकार में भी हो रहा है। इस क्षेत्र में रहने वाले हिंदू हमेशा खौफ के साए में रहते हैं। उन्हें डर है कि मुसलमान विस्फोटकों का प्रयोग इलाके में दहशत फैलाने के लिए भी कर सकते हैं। इसलिए स्थानीय लोग पुलिस से उनके घरों की तलाशी लेने की मांग करते हैं। उनका कहना है कि अवैध खनन में लगे मुसलमानों के घरों से बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद हो सकते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से होने वाली काली कमाई का प्रयोग देश विरोधी गतिविधियों में किया जाता है। क्षेत्र के अधिकतर मुस्लिम युवा और बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे भी इन अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं। खनन जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल कर इनके मन में हिंदुओं के विरुद्ध जहर भरा जाता है। अगर कोई उनके विरुद्ध आवाज उठाता है तो उसे ये दुश्मन के तौर पर प्रचारित करते हैं। इस कारण इलाके के हिंदू, मुसलमानों के खिलाफ नहीं बोलते हैं। यहां के मुसलमान हर तरह के अपराध में शामिल हैं। ये बाकायदा एक गिरोह के तौर पर काम करते हैं, जिसमें केवल मुसलमानों को ही रखा जाता है। वे सरेआम गोकशी करते हैं। जो पहाड़ हमारी आस्था का प्रतीक हैं, उन्हें खत्म कर रहे हैं।

Topics: प्रजातियां विलुप्तखनन माफियाअवैध खननमेवात क्षेत्रदेश विरोधी गतिविधियांकांग्रेस राज में खनन माफिया
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