पाकिस्तान में रावलपिंडी की एक अदालत ने एक लड़की को ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुना दी। उसका 'कसूर' सिर्फ इतना था कि उसने फारुख से ऑनलाइन दोस्ती की थी, लेकिन बाद में वह दोस्ती खत्म कर दी। फारुख ने उस पर ईशनिंदा का मामला दायर कर दिया और अदालत ने सजा सुना दी।
यह अजीबोगरीब केस रावलपिंडी की गैरिसन शहर अदालत में चला था। 26 साल की उस लड़की अनिका अतीक के विरुद्ध मई 2020 में हसनत फारुख नाम के आदमी ने मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में उसने अनिका पर 'इस्लाम तथा पैगम्बर मोहम्मद के अपमान' का आरोप लगा दिया था। तब अनिका को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी लड़की को गत 19 जनवरी को अदालत ने मौत की सजा सुना दी।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार, 26 साल की अनिका की 2019 में फारुख से ऑनलाइन पहचान हुई थी। अनिका का कहना था कि बाद में उसने फारुख के साथ दोस्ती बनाए रखने से मना क्या किया, फारुख ने उससे बदला लेने की ठान ली और उस पर ईशनिंदा के आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया।
अनिका अतीक के विरुद्ध 2020 में फारुख नाम के आदमी ने मामला दर्ज कराया था। अपनी शिकायत में उसने अनिका पर 'इस्लाम तथा पैगम्बर मोहम्मद के अपमान' का आरोप लगा दिया था। इसी लड़की को गत 19 जनवरी को अदालत ने मौत की सजा सुना दी।
अनिका पर लगाए गए आरोपों के अनुसार, उसने 'व्हाट्सएप पर इस्लाम को अपमानित करते संदेश' भेजे थे। फारुख ने जब उस उन संदेशों को डिलीट करने को कहा, तो लड़की ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद फारुख ने जांच एजेंसी की साइबर अपराध शाखा में इसकी शिकायत कर दी। आरंभिक जांच में अनिका को अपराधी पाया गया। साइबर एजेंसी ने 13 मई 2021 को अनिका के विरुद्ध अदालत में मामला दायर किया। इस केस की सुनवाई के बाद रावलपिंडी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए उसे 24 साल कैद, 2 लाख रु. का जुर्माना और फांसी की सजा सुना दी है।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर, 2021 में पाकिस्तान के सियालकोट शहर में श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा कुमारा को मजहबी उन्मादियों की भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए जिन्दा जला दिया था। कुमारा वहां एक फैक्ट्री में मैनेजर थे। पिछले ही साल अगस्त में पंजाब सूबे के जिला रहीमयार खान में 8 साल के हिन्दू बच्चे को ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था।
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के नाम पर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं रह—रहकर होती रही हैं। अमेरिका की एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान में इस कानून की आड़ में हो रही अमानवीयता पर विस्तार प्रकाश डाला था। हालत इतनी खराब है कि जरा अल्पसंख्यक वर्ग के किसी व्यक्ति से आपसी विवाद हुआ नहीं कि उस पर इस कानून के तहत केस दर्ज करा दिया जाता है। पाकिस्तान की न्यायपालिका भी एकपक्षीय दृष्टि रखते हुए फौरन कड़ी सजा सुना देती है। इतना ही नहीं, आरोपित के पक्ष में खड़े होने वालों तक को कट्टरपंथी कहीं का नहीं छोड़ते।











