पाकिस्तान के 'फेडरल बोर्ड रिवेन्यू' के पूर्व अध्यक्ष शब्बर जैदी ने यह कहकर देश के हुकमरानों को मुंह छिपाने लायक भी नहीं छोड़ा है कि पाकिस्तान दिवालिया हो चुका है। जैदी का आरोप है कि देश की इमरान सरकार जनता को सिर्फ झूठे दिलासे दे रही है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का यह कहना सही नहीं है कि सब ठीक है। यह कोरा झूठ है। जैदी ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में साफ कहा कि इकाई के तौर पर पाकिस्तान दिवालिया देश है। खाते की भाषा में हम इसे ऐसा ही कहते हैं।
देश के एक बड़े इकोनॉमिस्ट माने जाने वाले जैदी का कहना है कि 'हम भले ये कहते हों कि सब कुछ ठीक है, हम बदलाव लाएंगे। लेकिन ऐसा है नहीं। मुझे लगता है कि देश इस वक्त दिवालिया है।' उनके हिसाब से सरकार झूठ बोलती है कि सब कुछ ठीक है, सब अच्छे से चल रहा है।
जैदी ने यह बात हमदर्द विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कही। पाकिस्तान फेडरल बोर्ड रिवेन्यू के अध्यक्ष ने आगे कहा कि देश के सामने ये या वो करने की बातें सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है जो बस लोगों को धोखा देने जैसी है। जैदी की इन बातों से सरकार में बैठे लोगों का गुस्सा होना स्वाभाविक ही था। जैसे ही मीडिया के जरिए इसकी खबर राजनीतिज्ञों तक पहुंची, उनमें खलबली मच गई। हालत यह हो गई कि जैदी को ट्विटर पर सफाई देनी पड़ी। दरअसल उनका इस भाषण के वीडियो का एक अंश वायरल हो चुका था जिसकी वजह से उनका बताया सच बिना लाग—लपेट के सबके सामने आ गया था।
पाकिस्तान के 'फेडरल बोर्ड रिवेन्यू' के पूर्व अध्यक्ष शब्बर जैदी ने यह कहकर देश के हुकमरानों को मुंह छिपाने लायक भी नहीं छोड़ा है कि पाकिस्तान दिवालिया हो चुका है। जैदी का आरोप है कि देश की इमरान सरकार जनता को सिर्फ झूठे दिलासे दे रही है।
अपने कहे पर नेताओं की कथित आपत्तियों के बाद जैदी को ट्विटर पर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने लिखा कि उनके भाषण के तीन मिनट के अंश पर ही चर्चा की जा रही है। जबकि उन्होंने भाषण में आगे मुश्किल हालात के हल की भी बात कही है। लेकिन उस पर किसी का ध्यान नहीं गया।
उल्लेखनीय है कि एएनआई ने पिछले ही दिनों पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था पर एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में लिखा था कि पाकिस्तान अपने अब तक सबसे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इसे बाहरी वित्तीय व्यवस्थाओं के लिए 51.6 अरब डालर की जरूरत है जिससे कि वह अपने दो साल (2021-23) के वित्त वर्ष की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति कर सके। द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट बताती है कि पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में पाकिस्तान को 23.6 अरब डालर की आवश्यकता थी जो चालू वित्त वर्ष 2022-23 में 28 अरब डालर तक पहुंच गई है।











