कोविड के दौरान विदेशी मीडिया ने डर फैलाने में कसर नहीं छोड़ी, बीबीसी इसमें पहले नंबर पर रहा
August 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

कोविड के दौरान विदेशी मीडिया ने डर फैलाने में कसर नहीं छोड़ी, बीबीसी इसमें पहले नंबर पर रहा

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 4, 2021, 12:53 pm IST
inविश्व, दिल्ली

कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन के शीर्ष प्रकाशनों ने पिछले 14 महीनों में भारत में कोविड पर प्रकाशित 550 से अधिक लेखों के माध्यम से भ्रम और डर फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जब इस पर शोध करते हैं तो पाते हैं कि बीबीसी इसमें पहले नंबर पर रहा

मीडिया की नैतिकता यह कहती है कि महामारी या किसी भी आपदा काल
के समय पैनिक फ़ैलाने वाले और पूर्वाग्रह ग्रासित रिपोर्टिंग बचने की आवश्यकता है। विख्यात सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. जोनाथन डी क्विक ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक – ‘द एंड ऑफ एपिडेमिक्स’ में कहा है – “एक महामारी के समय डर, अफवाहें, साजिश, अविश्वास और चिंता एक साथ अस्तित्व रख सकते हैं। ” विशेषज्ञों ने भी व्यापक रूप से टिप्पणी की है कि इस महामारी के दौरान लोगों में घबराहट, संकट और चिंता उनके मानसिक स्वास्थ्य और कई मामलों में उनके ऑक्सीजन के स्तर पर भी भारी पड़ सकती है। जमाखोर भी ऐसी दहशत की स्थिति का अतिरिक्त फायदा उठाते हैं और कई जरूरी मेडिकल सप्लाई की कालाबाजारी करते हैं। हमारे विस्तृत हेडलाइंस शोध में विश्लेषण की गई पश्चिम के मीडिया घरानों की सुर्खियों में से 76 प्रतिशत भय पैदा करने वाली, अतिशयोक्तिपूर्ण, आलोचनात्मक और अविश्वास बढ़ाने वाली हैं। इन प्रमुख वैश्विक मीडिया घरानों ने रीडरशिप की खातिर और पश्चिम की मिथक श्रेष्ठता के कारण बुनियादी पत्रकारिता या नागरिक जिम्मेदारी से किनारा करना चुना है।

रिसर्च फ्रेमवर्क: हमने वेब सर्च के परिणामों के माध्यम से 6 वैश्विक प्रकाशनों -बीबीसी, द इकोनॉमिस्ट, द गार्डियन, वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन के भारत में 14 महीने की अवधि में उनके कोविड महामारी की कवरेज को देखा और उस पर शोध किया।

इस अवधि को दो भागों में विभाजित किया गया है – दूसरी कोविड लहर से पहले यानी मार्च’20 – मार्च’21 और दूसरी लहर के बाद, यानी अप्रैल’21। अध्ययन में 30 अप्रैल, 2021 तक के लेखों को देखा गया है। सभी शीर्षकों को इन 6 श्रेणियों के अंतर्गत आंका और चिह्नित किया गया है: डर पैदा करने वाली, अतिशयोक्तिपूर्ण, आलोचनात्मक, संदेह करने वाली, निष्पक्ष और प्रशंसनीय और फिर इनका विस्तार से विश्लेषण किया गया।

विस्तृत विश्लेषण
ये 6 वैश्विक मीडिया हाउस- बीबीसी, द इकोनॉमिस्ट, द गार्डियन, वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन ने 1 मार्च 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक भारत से संबंधित कोविड की कहानियों पर 552 लेख छापे। सरकारी स्वामित्व वाली यूके के न्यूज ब्रॉडकास्टर बीबीसी ने 274 कहानियों के साथ इस गुट का नेतृत्व किया, उसके बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने 91 कहानियां छापीं और वाशिंगटन पोस्ट ने 69 कहानियाँ। भारत पर प्रकाशित लेखों में लगभग 50% हिस्सेदारी के साथ बीबीसी अपने औपनिवेशिक आचरण की पुष्टि करता है जिसके तहत वह भारत पर टिप्पणी करना जारी रखे हुए है।

ग्राफ 1: वैश्विक प्रकाशनों द्वारा भारत पर मार्च’20 से अप्रैल 21 तक कोविड कहानियों का वितरण

जब हमने इन पश्चिमी प्रकाशनों द्वारा पिछले 14 महीनों में प्रकाशित इन 552 सुर्खियों को – ‘डर पैदा करने वाली’, अतिशयोक्तिपूर्ण, आलोचनात्मक, ‘संदेह करने वाली’, निष्पक्ष और प्रशंसनीय के तहत चिह्नित किया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे।

भले ही भारत ने पहली लहर में बहुत अच्छी तरह से प्रबंधन किया और इसे डब्ल्यूएचओ जैसे संस्था से प्रशंसा प्राप्त हुई, भले ही भारत प्रति मिलियन बहुत कम मृत्यु दर वाले देशों में से है, भले ही भारत उन कुछ देशों में से है जिन्होंने अपना खुद के टीका का आविष्कार किया लेकिन केवल इन वैश्विक मीडिया हॉउसों की सुर्खियों में 2% से भी कम हेडलाइंस में भारत के कोविड के प्रयास की प्रशंसा की गई है और 76 प्रतिशत सुर्खियां ‘डर पैदा करने वाली’, अतिशयोक्तिपूर्ण, आलोचनात्मक, ‘संदेह करने वाली’ हैं |

176 डर पैदा करने वाली, हाइपरबोलिक, क्रिटिकल, संदेह वाली हेडलाइन्स के साथ बीबीसी पक्षपातपूर्ण सुर्खियों की मात्रा में डर फैलाने वालों के चार्ट में सबसे ऊपर है। 96% पैनिक स्प्रेडिंग या मिस-लीडिंग हेडलाइन्स के साथ, द गार्डियन पक्षपाती सुर्खियों के कुल हिस्से में चार्ट में सबसे ऊपर है। WaPo और NYT की 88% सुर्खियां डर फैलाने वाली या गलत हैं। ये प्रकाशन शायद ही तथ्यात्मक रिपोर्टिंग में रुचि रखते हैं – इसलिए सिर्फ 22% सुर्खियों में निष्पक्ष रिपोर्टिंग हुई है।

ग्राफ 2: मार्च’20 से अप्रैल 21 तक वैश्विक प्रकाशनों द्वारा भारत पर कोविड कहानियों की सुर्खियों का विश्लेषण

जब हमने इन लेखों की मासिक दर का विश्लेषण किया तो हमने पाया कि पिछले 14 महीनों में लिखी गई कुल कहानियों में से, इन पश्चिमी प्रकाशनों ने 2021 के अप्रैल महीने में ही लगभग 40% कहानियों को प्रकाशित किया। अप्रैल 2021 से पहले बीबीसी की लगभग 60% सुर्खियां डर पैदा करने वाली या गलत थी, लेकिन अप्रैल’21 में बीबीसी ने 82% पैदा करने वाली या गलत सुर्खियां बनाईं। WaPo और CNN ने पिछले 14 महीनों में से सिर्फ अप्रैल’21 के महीने में भारत पर अपनी 50% से अधिक कहानियां कीं। जब भारत ने कोविड की दूसरी लहर का सामना कर रहा था तब ये पश्चिमी प्रकाशन डर फैलाने वाली हेडलाइंस गढ़ने में व्यस्त थे।

ग्राफ 3: वैश्विक प्रकाशनों द्वारा अप्रैल’21 और मार्च’20 से 13 महीने में भारत पर कोविड कहानियों का वितरण

डर पैदा करने वाली और गलत सुर्खियों के पैटर्न
इन छह पश्चिमी प्रकाशनों ने भारत में कोविड के कवरेज पर अपनी गलत सुर्खियों के माध्यम से लोगों में भय, दहशत और चिंता पैदा करने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया। आइए मैं आपको इन सुर्खियों में मिले विभिन्न पैटर्न के बारे में बताता हूं:

1) भारत में कोरोना को बड़ा दिखाई के लिए, प्रति दस लाख मामलों पर मानक का उपयोग न करना
बीबीसी, वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क ने बार-बार भारत में या किसी भारतीय शहर में कोविड मामलों की पूर्ण संख्या (बिना जनसँख्या का अनुपात लिए) का उपयोग करके इसे दुनिया में सबसे ख़राब हालात वाला देश घोषित किया। वे प्रति मिलियन जनसंख्या पर मामलों का संदर्भ लेने से बचते रहे । क्योंकि यदि कोई प्रति मिलियन मामलों को लेता है, तो भारत वैश्विक मानचित्र पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है। भारत दुनिया में दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के नाते, तो निश्चित रूप से उस अनुपात में भारत में केस भी ज्यादा होंगे | इस बात का पश्चिमी अख़बार प्रकाशनों ने चालाकी से इस्तेमाल किया । आइए कुछ उदाहरण देखें:

7 सितंबर 2020 को बीबीसी की हेडलाइन थी – “कोरोनावायरस: भारत ने कोविड -19 मामलों में ब्राजील को पछाड़ दिया”। बीबीसी ने बड़े आराम से इस तथ्य को भुला दिया कि ब्राजील की आबादी भारत की 1/6 है और उन्होंने दहशत फैलाने के लिए गलत तुलना करके अपना हेडलाइन गढ़ दी । इसी तरह 6 जून 2020 को द गार्डियन का शीर्षक था – “वैश्विक रिपोर्ट: भारत में कोविड -19 के कुल मामले इटली से आगे निकल गए” भारत की इटली के साथ तुलना करना बौद्धिक बेईमानी की पराकाष्टा है, क्योंक इटली की आबादी भारत की 1/23 वीं है।

27 अप्रैल, 2021 को वाशिंगटन पोस्ट की हेडलाइन थी – “भारत लगातार छठे दिन 300,000 नए कोविड -19 मामलों में साथ सबसे ऊपर है “। यहां जानबूझ कर WaPo ने प्रति मिलियन मैट्रिक्स के का उपयोग नहीं किया और भारत की बड़ी आबादी का लाभ उठाया ताकि शीर्षक को मोड़ा जा सके।

3 मई, 2021 को न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन थी – “कोविड -19: 24 घंटों में 312,000 से अधिक मामलों के साथ, भारत ने एक रिकॉर्ड बनाया”। इस शीर्षक के द्वारा भारत की बड़ी आबादी का फायदा उठाते हुए, भारत के कोरोना मामलों में से एक काल्पनिक ‘रिकॉर्ड’ बनाने की कोशिश की गई

28 जून, 2020 को बीबीसी की हेडलाइन में कहा गया – “कोरोनावायरस: भारत का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना दिल्ली “। दिल्ली को भारत का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए जून में ऐसा कोई अध्ययन नहीं हुआ था, लेकिन बीबीसी ने इस निराधार शीर्षक का आविष्कार किया।

6 अगस्त, 2020 को बीबीसी की हेडलाइन में कहा गया था – “कोरोनावायरस: भारत 20 लाख मामलों को पार करने वाला तीसरा देश बन गया”। डिनोमिनेटर में भारत की कुल जनसंख्या रखे बिना बीबीसी ने भारत से बड़ी जनसंख्या का फायदा उठाते हुए सनसनीखेज हेडलाइन बनाने की कोशिश की।

2) स्थानीय खबरों का राष्ट्रीय स्तर पर निष्कर्ष निकालना
कई सुर्खियों में इन विदेशी प्रकाशनों ने एक छोटी सी स्थानीय नकारात्मक घटना को लिया और इसे अखिल भारतीय मुद्दे की तरह प्रोजेक्ट किया । इस तरह के गलत शीर्षकों में भारत के दूसरे क्षेत्र के लोगों में दहशत और भय पैदा करने की क्षमता है, जिनका उस घटना से दूर दूर का वास्ता नहीं है।

कुछ उदहारण:

3 अप्रैल, 2020 को बीबीसी की हेडलाइन थी – “कोरोनावायरस: भारत के डॉक्टरों पर ‘थूका जा रहा है और हमला हो रहा है’। इस शीर्षक से बीबीसी ने अपने दो उल्लू सीधे किए – तब्लीगी जमात को मेडिकल स्टाफ के साथ उनके गैर-सभ्य व्यवहार से बचा लिया और यह मैसेज देना चाहा कि पूरे भारत में कोरोना मरीज़ डॉक्टरों पर थूक रहे हैं और हमला कर रहे हैं। एक बहुत जी भद्दा शीर्षक।
27 अप्रैल 2021 को न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन थी – “यह एक कटेस्ट्रोफी है” भारत में बीमारी हर जगह है”। भारत में 700 से अधिक जिले हैं और उन सभी में अलग-अलग सकारात्मकता दर और केस लोड हैं। लेकिन NYT के लिए बीमारी ‘हर जगह’ है।

3) अतिशयोक्तिपूर्ण अभिव्यक्तियों और शब्दावली का उपयोग करना
ये पश्चिमी प्रकाशन स्वस्थ लोगों में भी दहशत और चिंता फैलाने के लिए अक्सर अतिशयोक्तिपूर्ण विशेषणों का उपयोग करते हैं

30 मार्च 2020 को बीबीसी की हेडलाइन में लिखा है – “कोरोनावायरस: भारत में महामारी लॉकडाउन एक मानवीय त्रासदी में बदल गया”। भारत दुनिया का पहला देश था जिसने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कड़े लॉकडाउन की घोषणा की थी। इसके बाद लॉकडाउन एक वैश्विक मानदंड बन गया। लेकिन भारत के इस कदम को हतोत्साहित करने के लिए बीबीसी ने भारत में लॉकडाउन पर भ्रम पैदा करने के लिए ‘मानव त्रासदी’ जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया
4 मई 2020 को बीबीसी की एक और हेडलाइन थी – “कोरोनावायरस: कैसे कोविड -19 भारत के न्यूज़ रूम को तबाह कर रहा है”। भारतीय मीडिया न्यूज़ रूम में कुछ मामलों के आधार पर, बीबीसी ने यह प्रकट किया कि कोविड पूरे भारत में हर न्यूज़ रूम को ‘तबाह’ कर रहा है। हमारा विश्लेषण इस बात की पुष्टि करता है कि बीबीसी अपने भय-उत्प्रेरण और अतिशयोक्तिपूर्ण सुर्खियों से पैनिक सुपर-स्प्रेडर नंबर 1 है
2 मई को, वाशिंगटन पोस्ट ने गलत हेडलाइन पढ़ी – “मोदी की पार्टी महामारी के वोट के बीच प्रमुख राज्य चुनाव हार गई; भारत रिकॉर्ड मौतों को देखता है ”। जहां वास्तव में मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने असम में अपनी सरकार को बरकरार रखा, पुडुचेरी में पहली बार जीत हासिल की और अन्य तीन राज्यों में अपने वोट शेयर में उल्लेखनीय वृद्धि की। जो कोई भी अपने राजनैतिक ज्ञान अर्जन के लिए वापो पर भरोसा करता है, उसे हाल ही में संपन्न राज्य चुनावों की पूरी तरह से गलत तस्वीर मिल जाएगी

जिस तरह से बड़े वैश्विक मीडिया हाउस पक्षपात उत्पन्न करते हैं और कुछ विषयों पर जोर देते हैं और उन्हें कम आंकते हैं वह सब जानते हैं और यह निष्पक्ष पत्रकारिता के उनके दावे को उजागर करते हैं। आसानी से उस ढंग को देखा जा सकता है जिस तरह से सुर्खियों को तैयार किया जाता है, कल्पना को बनाया जाता है और शब्दों को चुनने का खेल खेला जाता है। सभी प्रकाशनों ने भारत में कोविड की कहानियों की रिपोर्ट करते समय अपनी सुर्खियों में ये अब स्पष्ट है की वैश्विक मीडिया हाउस पक्षपात करते हैं- कुछ खास विषयों पर जोर देते हैं, कुछ खास खबरों को काम आंकते हैं | अब सब जानते हैं की उनका निष्पक्ष पत्रकारिता का दवा खोकला है । आसानी से उस पैटर्न को देखा जा सकता है कि किस तरह से सुर्खियों को तैयार किया जाता है, काल्पनिक नैरेटिव को बनाया जाता है और शब्दों को चुनने का खेल खेला जाता है। सभी विदेशी प्रकाशनों ने भारत में कोविड की कहानियों की रिपोर्ट करते समय अपनी हेडलाइंस में दर का माहौल बनाने के लिए करने के लिए अक्सर ‘मानव त्रासदी’, विनाशक, ‘स्ट्रगलिंग टू सर्वाइव’, दुःस्वप्न, ‘नो एंड इन साइट’, ‘ब्रोक रिकॉर्ड’, ‘एवरी व्हेयर’, शैटरिंग और ऐसे कई शब्दों का इस्तेमाल किया है ।

यह भारतीय सरकारों और भारतीयों के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों की वास्तविक भूमिका और उनके अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष एजेंडे की जांच, निर्णय और उनपर कार्य करने का समय है। हमें लगातार समीक्षा करने की आवश्यकता होगी कि क्या ये विदेशी मीडिया हाउस हमारे लिए प्रासंगिक हैं और हजारों साल पुरानी सभ्यता के विकास में भागीदार हैं जो कि मानवता का 1/6 वां हिस्सा भी है या वे डर फैलाते हुए हानिकारक वायरस की तरह, हमें संक्रमित कर रहे हैं

– शांतनु गुप्ता
(लेखक और नीति टिप्पणीकार हैं )

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कलकत्ता हाई कोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तृणमूल सरकार के समय जारी OBC-A और B प्रमाणपत्र निरस्त, क्या होगा इसका असर ?

Vladimir Putin Stop war with ukraine on Easter

रूस नॉर्दर्न सी रूट पर भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाएगा, पुतिन ने किया बड़ा ऐलान

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की UAPA गवाह योजना को बताया परियों की कहानी, शाहिद खान केस में त्वरित सुनवाई का निर्देश

Iran Fansi Qiadi UN

खाड़ी संकट के बीच ईरान में 2026 की शुरुआत से अब तक 916 लोगों को दी गई फांसी, अगस्त में 15

आज का श्लोक : वयमेव करिष्यामो मातृभूमेः सुमंगलम्।

आज का राशिफल

13 अगस्त राशिफल: मेष से मीन तक जानें आज का दिन कैसा रहेगा?

Load More

ताज़ा समाचार

कलकत्ता हाई कोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तृणमूल सरकार के समय जारी OBC-A और B प्रमाणपत्र निरस्त, क्या होगा इसका असर ?

Vladimir Putin Stop war with ukraine on Easter

रूस नॉर्दर्न सी रूट पर भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाएगा, पुतिन ने किया बड़ा ऐलान

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की UAPA गवाह योजना को बताया परियों की कहानी, शाहिद खान केस में त्वरित सुनवाई का निर्देश

Iran Fansi Qiadi UN

खाड़ी संकट के बीच ईरान में 2026 की शुरुआत से अब तक 916 लोगों को दी गई फांसी, अगस्त में 15

आज का श्लोक : वयमेव करिष्यामो मातृभूमेः सुमंगलम्।

आज का राशिफल

13 अगस्त राशिफल: मेष से मीन तक जानें आज का दिन कैसा रहेगा?

आज का इतिहास

13 अगस्त का इतिहास: लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि

ईरान में हिजाब विरोध का प्रतीक बनी पुलिस की कथित यातना में मारी गई महसा अमीनी (फाइल चित्र)

ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी देने पर 32 देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

पूर्ण साक्षर राज्य बना उत्तराखंड, शिक्षा मंत्री जोशी ने सीएम धामी को दी बधाई

दलजीत सिंह कलसी और गुरमीत सिंह बुक्कनवाला

पंजाब की राजनीति में अलगाववादी चेहरे : खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पार्टी ने चुनावी मैदान में उतारे 2 आरोपी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies