भारत ने दिया विश्व को सहिष्णुता का मंत्र
June 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

भारत ने दिया विश्व को सहिष्णुता का मंत्र

Written byArchiveArchive
Sep 18, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 18 Sep 2017 10:56:11


स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को भारतीय वैदिक ज्ञान परंपरा से अवगत कराया, पर दुर्भाग्य से हमारे देश में उसे भुला दिया गया। 11 सितंबर, 1893 को शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया उनका भाषण आज भी प्रासंगिक है और मौजूदा राजनीतिक वातावरण के प्रति सोचने के लिए प्रेरित करता है

  अनुराग ठाकुर
छ तिथियां इतनी महत्वपूर्ण बन जाती हैं कि वह आगे आने वाले समाज को न सिर्फ निरंतर प्रभावित करती रहती हैं, बल्कि आत्म अवलोकन एवं आत्म निरीक्षण करते हुए मानवता के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराती हैं। 11 सितंबर उन्हीं कुछ विशिष्ट तिथियों में से एक है। 1893 में इसी दिन स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था। कभी-कभी एक भाषण राष्टÑ और समाज की तस्वीर ही बदल देता है। विवेकानंद का भाषण ऐसा ही था, जिसने भारत के बारे में मिथ्या संकल्पना को तोड़ दिया जो पश्चिम ने गढ़ रखा थी। विवेकानंद के उस भाषण से भारतीय ज्ञान को वैश्विक स्वीकार्यता तो मिली ही, उन्होंने उसे सर्वोत्तम ज्ञान परंपरा के रूप में स्थापित करने का भी प्रयास किया जिसका मुख्य आधार सहिष्णुता थी। पर आजादी के बाद छद्म पंथनिरपेक्षता के कारण न सिर्फ उनके विचारों से जनमानस को दूर किया गया, बल्कि ज्ञान को भी पश्चिम के हवाले कर दिया गया। सत्य को थोड़े समय के लिए दबाया जा सकता है, पर समाप्त नहीं किया जा सकता। प्रखर वाणी एवं ओजस्वी चिंतन के कारण ‘आध्यात्मिक क्षेत्र के नेपोलियन’ एवं ‘विश्वात्मा की अनुपम संगीत रचना’ के रूप में विख्यात विवेकानंद का अमेरिका दौरा चुनौतीपूर्ण रहा। परंतु भारतीय ज्ञान पर अटूट विश्वास ने उन्हें अंतिम सिद्धि तक पहुंचा दिया।
विश्व धर्म सम्मेलन में शामिल होने के लिए विवेकानंद को औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला था। उन्होंने बस यह सुना था कि अमेरिका में एक विश्व धर्म सम्मेलन होने जा रहा है। उनकी इच्छा उसमें शामिल होने की थी। उन्हें विश्वास था कि सही समय पर वहां उपस्थित हो जाने से सभी कार्य सिद्ध हो जाएंगे। खेतड़ी नरेश द्वारा जहाज का टिकट और काफी जिद के बाद एक अंगरखा के साथ विवेकानंद 31 मई, 1893 को मुंबई से अमेरिका के लिए रवाना हुए। श्रीलंका, जापान होते हुए वह मध्य जुलाई में शिकागो पहुंचे। जब उन्हें मालूम हुआ कि सम्मेलन के लिए पंजीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी है तो उन्हें आघात लगा। साथ ही, सम्मेलन में भाग लेने के लिए मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था का परिचयपत्र भी जरूरी था। लिहाजा शिकागो से उन्होंने मद्रास के एक मान्य धार्मिक सभा से अपने लिए एक प्रमाणपत्र भेजने को कहा तो उत्तर मिला ‘शैतान को ठंड खाकर मरने दो।’ लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान हार्वर्ड के प्रोफेसर जे.एच. राइट ने कर दिया। बोस्टन की ट्रेन में विवेकानंद की उनसे भेंट हुई थी।

 

विश्ववंद्य विवेकानंद को समर्पित दो छंद

साधना का तेज, अनुशासन का आत्मबल
दिव्य योग दिखता हो आपकी विरक्ति में।
मन को निराशा के भंवर से निकाल दे जो,
क्षमता अपार ऐसी पौरुष की शक्ति में।
सारी दुनिया में गूंजे भारती का यशगान,
यूं करें कि राष्ट्रप्रेम जागे अभिव्यक्ति में।
ज्ञान और कर्म का स्वरूप लिए भारत के,
उतरें विवेकानंद हर एक व्यक्ति में।
कर्म एक का हो शेष बैठे रहें फल हेतु,
ऐसे कर्महीन हर व्यक्ति को जगाइए।
आप बनिये निमित्त देश व समाज हेतु,
पुरुषार्थ द्वारा आत्मशक्ति को बढ़ाइए।
एक ही विवेकानंद काफी नहीं यहां अब
आप बनिये स्वयं सब को बनाइए।
देश चाहता है आज स्वामीजी का कर्मयोग
अपने चरित्र में उतार के दिखाइये।
— राधाकांत पांडेय

11 सितंबर सम्मेलन शुरू हुआ। उसमें भारत के कई मत-पंथों के झंडाबरदार बैठे थे। इनमें ब्रह्म समाज के प्रतापचंद्र मजुमदार, ईश्वरवादियों के नागरकर, श्रीलंका के बौद्घ प्रतिनिधि धर्मपाल, जैन प्रतिनिधि गांधी, थियोसोफिकल सोसायटी के चक्रवर्ती आदि प्रमुख थे। रोमा रोलां के अनुसार विवेकानंद इन मठाधीशों के बीच उस सम्पूर्ण-भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जो वैदिक ज्ञान से सम्पूर्ण विश्व को अंधरे से उजाले की ओर लाने की क्षमता रखता है। किसी भी सभा को संबोधित करने का यह उनका पहला अनुभव था। करीब 7,000 श्रोताओं से भरे कक्ष में उनसे पूर्व सभी मठाधीशों ने अपने-अपने मत-पंथ पर व्याखान दिया। सभा में मौजूद अधिकांश श्रोता लगभग शुष्क हो चुके थे। आखिरकार उन्हें मौका मिल ही गया। संबोधन की शुरुआत उन्होंने ‘अमेरिका के मेरे भाइयो और बहनो’ से की तो सभा अचानक ऊर्जावान होकर करीब 2 मिनट तक करतल ध्वनि से अभिनंदन करती रही। उसके बाद उनके भाषण ने सिर्फ सम्मेलन की दशा और दिशा बदल दी, बल्कि सम्मेलन के अगले सत्र में दर्शकों के अनुरोध पर उन्होंने लगभग बारह बार नए ज्ञान के साथ सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य से दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उनकी दो बातें तो मौजूदा राजनीतिक माहौल को भी सोचने के लिए प्रेरित करती है। पहला भारतीय राष्टÑ की धार्मिक सहिष्णुता और दूसरा कन्वर्जन। विवेकानंद ने भाषण में हिन्दू धर्म एवं भारतीय समाज की धार्मिक सहिष्णुता को मुख्य आधार बनाया। उनके अनुसार यही सबसे प्रमुख गुण है जिसके कारण भारतीय सभ्यता अब तक चली आ रही है। लेकिन वर्तमान में संकुचित वैचारिक मानसिकता वाले लोगों ने समाज को असहिष्णु घोषित करने का बीड़ा उठा लिया है। इसका व्यापक एवं वैचारिक प्रत्युत्तर विवेकानंद के भाषण में मिलता है। उन्होंने कहा था- मुझे गर्व है कि मैं एक ऐसे धर्म से हूं, जिसने दुनिया को सहनशीलता का मंत्र दिया। भारत न सिर्फ सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास रखता है, बल्कि विश्व के सभी मत-पंथों को स्वीकार करता है। एक ऐसा देश जिसने सभी देशों और मत-पंथ के लोगों को शरण दिया। अभी तक भारत ने ही इस्रायल की स्मृतियां संजोकर रखी हैं, जबकि रोमनों ने उनके पवित्र स्थलों को आक्रमण कर खंडहर बना दिया। विवेकानंद के सहिष्णुता के तर्क को उस कालखंड में विश्व ने स्वीकार किया। लेकिन हम भारत के लोग ही उसे भूल गए। यही कारण है कि आज देश के तथाकथित बुद्घिजीवी एवं राजनीतिक दल सरकार का विरोध करने के चक्कर में भारत के मौलिक मूल्यों पर प्रश्न खड़ा करते हुए समाज को असहिष्णु घोषित कर देते हैं।
सहिष्णुता हमेशा से भारतीय समाज का अभिन्न अंग रही है, जिस आधार पर यहां ज्ञान, धर्म आदि विकसित होते रहे हैं। भारत को समझने के लिए पश्चिमी ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इस देश की ज्ञान परंपरा को पुन:स्थापित करने वाले विवेकानंद जैसे विचारों से देखने का प्रयत्न किया जाना चाहिए, जिससे स्वत: भारतीय समाज में सहिष्णुता दिखाई देगी।     (लेखक लोकसभा सांसद हैं)

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

प्रतीकात्मक तस्वीर

मौसम अपडेट: यूपी और बिहार में वज्रपात से 16 लोगों की मौत, 16 राज्यों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट

शताब्दी एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, जिस डिब्बे में सवार थे सरसंघचालक मोहन भागवत वहीं लगा पत्थर 

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

अमेरिका-ईरान युद्ध: ट्रंप का बड़ा ऐलान, हमने हमले रोके, शांति समझौता भी जल्द

आज का श्लोक : मन एवं मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः

आज का इतिहास

आज का इतिहास: इस दिन हुईं कई बड़ी उपलब्धियां, जानिए पूरा इतिहास

आज का राशिफल

आज का राशिफल: इन 5 राशियों पर रहेगी धनवर्षा, जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा शुक्रवार

Load More

ताज़ा समाचार

प्रतीकात्मक तस्वीर

मौसम अपडेट: यूपी और बिहार में वज्रपात से 16 लोगों की मौत, 16 राज्यों में आज आंधी-बारिश का अलर्ट

शताब्दी एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, जिस डिब्बे में सवार थे सरसंघचालक मोहन भागवत वहीं लगा पत्थर 

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

अमेरिका-ईरान युद्ध: ट्रंप का बड़ा ऐलान, हमने हमले रोके, शांति समझौता भी जल्द

आज का श्लोक : मन एवं मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः

आज का इतिहास

आज का इतिहास: इस दिन हुईं कई बड़ी उपलब्धियां, जानिए पूरा इतिहास

आज का राशिफल

आज का राशिफल: इन 5 राशियों पर रहेगी धनवर्षा, जानें आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा शुक्रवार

कोर्ट का फैसला

न्यायालय ने पूछा- छूटोगे तो क्या करोगे? अभियुक्त बोला- हत्या करूंगा! फिर जज ने सुनाई फांसी की सजा!

Social Media Double Standard Sejal Pawar 370 Biryani Controversy

कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता पड़ी भारी: NCW ने प्रणित मोरे-हिमांशु को भेजा समन

Three Language Formula NEP 2020 India Education System

मैकाले की कक्षा से बहुभाषी भारत तक: समझें त्रिभाषा सूत्र की प्रासंगिकता

Belfast Riots Ireland Sudanese Asylum Seeker Attack Stephen Social Media Ban

आयरलैंड में सूडानी शरणार्थी ने सरेआम रेता गला, भड़के दंगों के बीच नेताओं ने कहा- ‘X’ पर लगाओ बैन

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies