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‘‘समाज के अपने बंधुओं की पीड़ा और वेदना को समझने के लिए मन को संवेदनशील होना चाहिए। सेवा कोई स्पर्धा का विषय नहीं है। किसने अधिक सेवा की, यह विचार करना निम्न स्तर की भावना है। सेवा आंकड़ों में गिनने की बात नहीं, अपितु अनुभूति का विषय है और इस विषय में हमें यह समझना होगा कि सेवा कभी भी योजना करके नहीं की जाती है। जब हम समाज की वेदना और पीड़ा को समझ लेते हैं, सेवा कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।’’ उक्त विचार राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश भैयाजी जोशी ने व्यक्त किये। वे गत दिनों भोपाल में राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सेवा विभाग की वेबसाइट ‘सेवागाथा’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। लोकार्पण कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, रा.स्व.संघ के मध्य भारत प्रांत के संघचालक श्री सतीश पिंपलीकर एवं सह प्रांत संघचालक श्री अशोक पाण्डे उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्री जोशी ने कहा कि अपने परिवार के किसी व्यक्ति की दुर्बलता को दूर करने के लिए विज्ञापन नहीं किया जाता। समाजरूपी परिवार के दुर्बल वर्गों के लिए भी यही भाव रखना चाहिए। सेवा पुण्य कार्य नहीं है, अपितु करणीय कार्य है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रा.स्व.संघ समाज के भीतर निष्काम भाव से सेवाकार्य कर रहा है। विद्याभारती, सेवाभारती, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ जैसे आनुषांगिक संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। (विसंकें, भोपाल)

‘अपनी शक्ति को पहचाने मातृशक्ति’
पिछले दिनों राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापिका लक्ष्मीबाई केलकर जी की 112वीं जयंती के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के दीनदयाल शोध संस्थान में ‘प्रबुद्ध भारत की संकल्पना’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्टÑ सेविका समिति की पूर्व संचालिका प्रमिला ताई ने कहा कि वन्दनीया मौसी जी का जन्म दिवस हम संकल्प दिवस के रूप में मनाते हैं। लेकिन इस वर्ष हम इसे समिति की बहनों द्वारा अपने परिवार तथा समाज को प्रबुद्ध करने के संकल्प के रूप में मना रहे हैं। सामाजिक-राजनीतिक प्रतिष्ठा, शिक्षा का स्तर तथा प्रकटीकरण के बोध का भान मातृशक्ति को हो, वं़ लक्ष्मीबाई केलकर (मौसी जी) के इस स्वप्न को उनके जन्म दिवस के अवसर पर हमको संकल्प लेकर पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि समिति की सेविकाएं पहचानें कि मैं कौन हूं? हमें सबसे पहले अपनी शक्तियों को पहचान कर समाज हित में कार्य करना होगा, यही प्रबुद्धता का प्रमाण है। समाज में जो कुछ भी गलत हो रहा है, उसके विरुद्ध स्वयं उठकर प्रश्न करें, गलत के विरुद्ध आवाज उठाए, यही प्रबुद्ध होना है। हर नारी मां की भांति सोच रखे तथा समाज के हित के लिए कार्य करे, तभी समाज भी जागरूक होगा। प्रतिनिधि










