विविध- ''राष्ट्रवाद को समझने से पहले राष्ट्र को समझें''
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विविध- ''राष्ट्रवाद को समझने से पहले राष्ट्र को समझें''

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Mar 27, 2017, 12:00 am IST
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दिंनाक: 27 Mar 2017 15:01:57

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग के तत्वावधान में  पिछले दिनों  मध्य प्रदेश के भोपाल में पाञ्चजन्य पाठक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लेखक एवं स्तंभकार श्री गुलरेज शेख ने 'राष्ट्र, राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी पत्रकारिता' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समझने के लिए सबसे पहले राष्ट्र की अवधारणा को समझना जरूरी होगा। राष्ट्र शब्द से राष्ट्रवाद बना है। राष्ट्र के बिना राष्ट्रवाद नहीं हो सकता। दुनिया में देश बहुत हैं, लेकिन राष्ट्र गिनती के हैं। देशों का निर्माण तो अब तक हो रहा है। देश को राष्ट्र समझने की भूल के कारण ही राष्ट्रवाद को लेकर लोगों की गलत धारणा बनी हुई है। राष्ट्र की समझ नहीं होने के कारण ही कुछ लोग पंथ, भाषा, जाति या फिर भूमि में राष्ट्र को ढूंढते हैं। श्री शेख ने कहा कि नक्शे पर कुछ रेखाएं खींचने से देश बनते हैं, राष्ट्र नहीं। राष्ट्र स्वाभाविक रूप से जन्म लेते हैं। जन, जमीन, भूमि और समय के मेल से राष्ट्र का जन्म होता है। एक लम्बी संस्कृति और सभ्यता से राष्ट्र का जन्म होता है। दो संस्कृतियों और सभ्यताओं के मेल से भी छोटे राष्ट्रों का जन्म होता है। जहां हिंदू संस्कृति का मिलन अरब से होता है, वहां फारस राष्ट्र का जन्म होता है, जो आज ईरान है। जहां हिंदू सभ्यता का मिलन चीन से होता है, वहां तिब्बत का जन्म होता है। भारत दुनिया का प्राचीन और बड़ा राष्ट्र है। इसलिए कुछ लोग भारत को देश समझने की भूल न करें।  
    -प्रतिनिधि

राष्ट्रीय हित का प्रहरी है पाञ्चजन्य
''पत्रकारिता जगत में प्रारम्भ से ही कम्युनिस्टों का वर्चस्व होने के कारण राष्ट्रीय विचार की अनदेखी की गई। एक पक्षीय पत्रकारिता के कारण राष्ट्रवाद के प्रति घृणा का वातावरण बनाया गया। जबकि पाञ्चजन्य ने सदैव प्रहरी की भूमिका में रहकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा की है और राष्ट्रीय पत्रकारिता की परंपरा को बढ़ाया है।''
गत दिनों मध्य प्रदेश के बनखेड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार विभाग द्वारा पाञ्चजन्य पाठक सम्मेलन के आयोजन के अवसर पर बोलते हुए लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता लोकेन्द्र सिंह ये विचार व्यक्त किए।   इस अवसर पर अनेक संगठनों के वरिष्ठ कार्यकर्ता, पाञ्चजन्य के प्रशंसक और स्थानीय लोग उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि देश के अनेक हिस्सों में पाञ्चजन्य के पाठक ऐसे सम्मेलन करते रहते हैं। 

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