वैचारिक दृष्टि - भारत में चिंतन का प्रवाह
August 9, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

वैचारिक दृष्टि – भारत में चिंतन का प्रवाह

Written byArchiveArchive
Dec 5, 2016, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 05 Dec 2016 17:26:59

-राजेन्द्र चड्ढा-

ष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 90 वर्ष लंबी साधना के फलस्वरूप आज राष्ट्र-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में  इससे प्रेरित अनेक संगठन विशाल रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि इन समस्त संगठनों के सम्मिलित प्रयासों के कारण हिन्दुत्व ने विशालतम कर्म-आंदोलन का रूप धारण कर लिया है। किन्तु बौद्धिक धरातल पर इस कर्म-आंदोलन के सामने अनेक चुनौतियां हैं-
1. उदात्त भारतीय जीवन मूल्यों के आधार पर राष्ट्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में युगानुकूल पुनर्रचना की दिशा व सूत्रों की खोज करना। 2.विघटनकारी प्रवृत्तियों को जन्म देने वाले प्रसारवादी मजहबों, विदेशी विचारधाराओं एवं सत्तालोलुप वोट राजनीति के वास्तविक चरित्र एवं गतिविधियों का देशवासियों को ज्ञान कराना तथा राष्ट्रीय एकता व सामाजिक समरसता का माहौल तैयार करना। 3. मैकाले और मार्क्स के भारतीय मानस पुत्रों तथा वोट राजनीति के बंदी राजनेताओं द्वारा फैलाये जा रहे दृष्टि-विभ्रम एवं अपप्रचार का प्रभावी उत्तर देना।
इन चुनौतियों का सामना करने की दृष्टि से अनेक राष्ट्रवादी बौद्धिक मंच एवं संस्थाएं पहले से ही देश के विभिन्न भागों में कार्यरत हैं। केरल स्थित भारतीय विचार केंद्रम, पंजाब से पंचनद, दिल्ली स्थित दीनदयाल शोध संस्थान और महाराष्ट्र का रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी इनमें प्रमुख हैं। इक्का-दुक्का संस्थानों से विचार मंथन की जो परंपरा शुरू हुई उसकी संस्था श्रंृखला अब बढ़ते-बढ़ते लगभग तीन दर्जन तक जा पहुंची है।
सबने यह अनुभव किया है कि बौद्धिक धरातल पर इन चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए इन स्वयंस्फूर्त, स्वतंत्र एवं स्वावलंबी संगठनों के प्रयासों में सुसूत्रता एवं समन्वय लाने की आवश्यकता है। इस दृष्टि से 11-12 जनवरी, 1987 को दिल्ली तथा 11-12 अप्रैल, 1987 को बंगलुरू में राष्ट्रवादी चिंतकों के दो सम्मेलन आयोजित किए गए। उनमें अभिव्यक्त विचारों एवं सुझावों की पृष्ठभूमि में आगे के कदमों पर विचार करने के लिए 29-30 दिसंबर,1987 को कोलकाता में एक छोटी सी प्रतिनिधि बैठक का आयोजन किया गया था। उस बैठक में चर्चा के पश्चात निर्णय हुआ कि विभिन्न राष्ट्रवादी बौद्धिक मंचों एवं संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु एक केंद्रीय प्रकोष्ठ का गठन किया जाए, जिसे पहचान की सुविधा के लिए 'प्रज्ञा भारती' कहा जाए। उस बैठक का सर्व सम्मत निष्कर्ष था कि प्रज्ञा भारती किसी संगठन विशेष का नाम न होकर देशव्यापी बौद्धिक आंदोलन का परिचय मात्र रहेगा। यह आंदोलन देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नाम-रूप वाले स्वतंत्र-स्वावलंबी संगठनों के माध्यम से कार्य करेगा। केंद्रीय प्रकोष्ठ के सदस्य इन संगठनों का मार्गदर्शन कर सकेंगे। केंद्रीय प्रकोष्ठ में 9 सदस्य रखे गए। देशभर में राष्ट्रवादी बौद्धिक गतिविधियां प्रारंभ करने की दृष्टि से 80 बौद्धिक केंद्रों का चयन किया गया।  
17 से 23 अप्रैल,1992 तक दिल्ली में एक 7 दिवसीय चिंतन सत्र का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय पुनर्रचना की दृष्टि से जीवन-दर्शन, समाज व्यवस्था, अर्थ रचना, शिक्षा पद्धति, राजनीतिक प्रणाली विज्ञान, टेक्नोलॉजी व स्वास्थ्य आदि विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार मंथन हुआ। इस विचार मंथन में प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं, विशेषज्ञों ने भाग लिया। उस समय यह अनुभव आया कि राष्ट्रीय पुनर्रचना के सूत्रों की खोज के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। इस प्रक्रिया में सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिकों, प्रशासकों, आध्यात्मिक विचारकों का सहभाग भी उतना ही आवश्यक है। इसके बाद भोपाल में एक बैठक हुई जिसमें डॉ. मुरली मनोहर जोशी के चिंतन सत्र के समय हुई चर्चा के आलोक में जीवन दर्शन विषय को लेख रूप देने का दायित्व सौंपा गया।  अभी 16-17 जुलाई, 1994 को महाराष्ट्र के जलगांव शहर में प्रज्ञा भारती आंदोलन से जुड़े बौद्धिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। यहां डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 'आधुनिक विज्ञान और भारतीय जीवन दर्शन' विषय पर अपना निबंध प्रस्तुत किया।
इस प्रक्रिया को सतत बनाए रखने के लिए प्रज्ञा प्रवाह प्रतिवर्ष अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित करता है। प्रज्ञा प्रवाह का अपने आप में विशिष्ट अनुभव है कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के उदद्ेश्य से किया जाने वाला कोई भी सार्थक और व्यावहारिक बौद्धिक प्रयास मात्र बुद्धि विलास नहीं हो सकता तथा इसके लिए यह आवश्यक है कि अपनी रीति से राष्ट्रनिर्माण के कार्य में लगी पांचों धाराओं (देखें बॉक्स) के बीच परस्पर विचार विनिमय हो। ये धाराएं हैं- विद्वज्जन, आधार स्तर के कार्यकर्ता, राजनीति में सक्रिय लोग, अधिकारी वर्ग एवं आध्यात्मिक चिंतक। प्रज्ञा प्रभाव ने इस दिशा में एक प्रयोग के रूप में दिल्ली में एक सात दिवसीय सामूहिक चर्चा आयोजित की। इस चर्चा में इन विभिन्न धाराओं के चुने हुए विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का लक्ष्य था अपने प्राचीन तथा समय की कसौटी पर खरे उतरे जीवन-दर्शन के आधार तथा साथ ही आधुनिक विज्ञान और प्रविधि के अनुरूप हमारे आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक पुनर्निर्माण के संबंध में समस्याओं का आकलन करना तथा मार्ग निर्देश स्थिर करना।
1- चिंतन बैठक(दिल्ली)-19-20 अप्रैल, 2013 को दिल्ली में सम्पन्न चिंतन बैठक में चर्चा में आया कि भारत के विचार तो श्रेष्ठ हैं लेकिन हमें उनका अध्ययन करना पड़ेगा। उनको वर्तमान संदर्भों में व्याख्यायित करना पड़ेगा। श्रृंखला में नए विचार को भारतीय अधिष्ठान के आधार पर विकसित करना पड़ेगा। केवल पुराना अच्छा है यह कहने से काम नहीं चलता। ये तीनों कार्य भारत की नई पीढ़ी को करने चाहिए। ये महर्षि अरविंद के शब्द हैं। श्री अरविंद के शब्दों को ध्यान रखते हुए कुछ वर्षों के अंतराल में अपने विचार परिवार के वरिष्ठ चिंतकों की बैठक प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित की जाती रही है। इनमें हमारा मूलभूत चिंतन, अब तक के कार्य की समीक्षा, वर्तमान चुनौतियां और भविष्य का मार्ग इत्यादि विषयों पर चिंतन होता है।
देश के बौद्धिक जगत में कार्यरत 15 स्थानों की 32 संस्थाएं प्रज्ञा प्रवाह से संबद्ध हैं। इनके द्वारा शोध-अनुसंधान, शिक्षा-विकास-संस्कार-सेवा से जुड़े कार्य तथा मूलभूत चिंतन, विभिन्न विषयों का अध्ययन तथा उन पर आधारित साहित्य का प्रकाशन इत्यादि कार्य संपन्न होते हैंं। इनके द्वारा व्याख्यान, सेमिनार, प्रशिक्षण इत्यादि कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। एकात्म दर्शन से संबंधित कार्यक्रम किए गए।16-18 अगस्त, 2014 को नागपुर में अ.भा. अभ्यास वर्ग आयोजित किया गया। अब तक कई स्थानों पर प्रांतीय अभ्यास वर्ग संपन्न हुए हैं। इनमें प्रमुख हैं, गुजरात, चित्तौड़, दक्षिण बंग, उत्कल, मध्य भारत, विदर्भ, केरल, छत्तीसगढ़।्र विभिन्न विद्वानों की सहभागिता के साथ अनेक राष्ट्रीय सेमिनारों का आयोजन किया जा चुका है। जैसे एर्णाकुलम (4-5 अप्रैल, 2015, विषय-एकात्म दर्शन-ए विजन फॉर बेेटर टुमारो), पटना  (11-12 अप्रैल, 2015, विषय-शासन-व्यवस्था), वाराणसी (2-3 मई,  2015, विषय- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद) और जयपुर (जुलाई/अगस्त, 2015, विषय-अर्थायाम)।
इसी कड़ी में 12 से 14 नवंबर तक कर्मशीलों का तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन लोकमंथन विधान सभा परिसर, भोपाल में आयोजित हुआ। आयोजन की विशेषता यह थी कि इसमें राष्ट्र निर्माण में कला, संस्कृति, मीडिया, इतिहास और साहित्य की भूमिका पर विमर्श किया गया। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति लोकमंथन का केंद्रीय विषय रहा। विद्वानों ने अपनी चर्चा में इस बात पर बल दिया कि समता, संवेदनात्मक प्रगति, सामाजिक न्याय, सौहार्द और सद्भाव की आकांक्षा राष्ट्रीयता के मूलमंत्र हैं।          लेखक प्रज्ञा भारती के राष्ट्रीय सह संयोजक हैं

सतत बौद्धिक अवदान में जुटीं 5धाराएं

विद्वज्जन-विषयों को खंगालने वाली विचारक शक्ति
आधार स्तर के कार्यकर्ता- बौद्धिक चर्चाओं को जमीनी स्तर पर उतारने वाला सजग, संपर्कशील तंत्र
राजनीति में सक्रिय लोग- विमर्श के वृहद सामाजिक-राजनीतिक प्रतिफलों को भांपने में सक्षम नेत्ृत्वकारी शक्ति
अधिकारी वर्ग-समाज और सत्ता, दोनों और सूचना-संवाद और बौद्धिक प्रभाव रखने वाले तंत्र के लोग
 आध्यात्मिक चिंतक- वृहद सामाजिक स्वीकार्यता। विचार की दार्शनिक व्याख्या में  सक्षम सर्व सम्माननीय शक्ति

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Karnataka news, Karnataka Crime, Crime in Karnataka, Mysuru news, Father murder son, Father killed son, Murder over mobile

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर को पाकिस्तानी एजेंट्स ने सोशल मीडिया पर हनीट्रैप किया, गिरफ्तार

Iran recloses strait of hormuz

होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने को लेकर ईरान ने रखी सख्त शर्तें, की ये मांग

आज का श्लोक : जीवप्राणौ हि राष्ट्रस्य सदाचारश्च संस्कृतिः

आज का राशिफल

Today’s Horoscope: रविवार को इन राशियों के लिए बनेंगे प्रगति के योग, जानें मेष से मीन तक का राशिफल

आज का इतिहास

9 अगस्त का इतिहास: परमाणु संधि से अग्नि-2 परीक्षण तक, भारत की अहम ऐतिहासिक घटनाएं

Madan Das Devi ABVP RSS Senior Leader Student Activism Legacy Panchjanya

आधुनिक छात्र राजनीति के मौन शिल्पकार : कॉरपोरेट करियर छोड़ ABVP को दिया जीवन, जानिए मदन दास देवी की अनसुनी कहानी!

Load More

ताज़ा समाचार

Karnataka news, Karnataka Crime, Crime in Karnataka, Mysuru news, Father murder son, Father killed son, Murder over mobile

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर को पाकिस्तानी एजेंट्स ने सोशल मीडिया पर हनीट्रैप किया, गिरफ्तार

Iran recloses strait of hormuz

होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने को लेकर ईरान ने रखी सख्त शर्तें, की ये मांग

आज का श्लोक : जीवप्राणौ हि राष्ट्रस्य सदाचारश्च संस्कृतिः

आज का राशिफल

Today’s Horoscope: रविवार को इन राशियों के लिए बनेंगे प्रगति के योग, जानें मेष से मीन तक का राशिफल

आज का इतिहास

9 अगस्त का इतिहास: परमाणु संधि से अग्नि-2 परीक्षण तक, भारत की अहम ऐतिहासिक घटनाएं

Madan Das Devi ABVP RSS Senior Leader Student Activism Legacy Panchjanya

आधुनिक छात्र राजनीति के मौन शिल्पकार : कॉरपोरेट करियर छोड़ ABVP को दिया जीवन, जानिए मदन दास देवी की अनसुनी कहानी!

UPI Rules

UPI से लेनदेन है फ्री, आम यूजर्स से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क : वित्त मंत्रालय

तरुण तेजपाल

तरुण तेजपाल को सजा और फेमिनिस्ट खेमे में चुप्पी

Bhagwant Mann Seeks Parole For Jagtar Singh Hawara Beant Singh Case Gulab Chand Kataria Panchjanya

पंजाब में सियासत गर्म : CM बेअंत सिंह के हत्यारे की पैरोल पर अड़े भगवंत मान, राज्यपाल को लिखी चिट्ठी!

Uttarakhand Teelu Routeli Award Pushkar Singh Dhami Aanganwadi Workers Felicitated Panchjanya

उत्तराखंड: तीलू रौतेली एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से मातृशक्ति हुई सम्मानित

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies