'शह' सुशासन और सियासी तूफान
August 11, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

'शह' सुशासन और सियासी तूफान

Written byArchiveArchive
Sep 19, 2016, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 19 Sep 2016 13:49:50

बिहार में शहाबुद्दीन के छूटने के बाद सियासी गलियारों में मचा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा। सुशासन का दंभ भरने वाली नीतीश सरकार माफिया के छूटने के बाद खामोश है

भागलपुर केंद्रीय कारागार से 11 सितम्बर को छूटे एक अपराधी के साथ लंबा काफिला, सैकड़ों की संख्या में गाडि़यों का हुजूम, अगुआई में कई मंत्री और सरकार में रसूख वाले लोग, सीवान की तरफ कूच करते हैं और बिहार सरकार के मुखिया को 'बेऔकात' बताकर लालू यादव को बिहार का नेता घोषित करते है। सुनने में ऐसा लग रहा है की कोई '1857 का संग्राम' का पाठ कर रहा है, लेकिन रुकिए यह कोई संघर्ष की कहानी नहीं अपितु एक अपराधी सैयद शहाबुद्दीन की सुनियोजित रिहाई का नजारा है। सैयद शहाबुद्दीन की इस रिहाई ने कई ऐसे प्रश्न खड़े किये हैं जिनका उत्तर समय रहते सत्ता में बैठे लोगों को ढूंढना होगा अन्यथा बिहार की बड़ी दुर्दशा होगी। न्यायिक प्रक्रिया की कमजोरी का फायदा उठा कर एक अन्यायी का छूट जाना एक बात होती है लेकिन अन्यायी द्वारा सत्ता का उपयोग करके पूरी की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को बौना बना देना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
शहाबुद्दीन 90 के दशक में आपराधिक पृष्ठभूमि से उठ कर राजनीति में अपने गुरु लालू यादव का साथ पा कर पूरे देश के लिए चर्चा का विषय बन चुके थे। दो बार बिहार विधानसभा में चुने जाने के अलावा वे राजद के टिकट पर सांसद बने। इस दौरान कई संगीन मामलों में नामजदगी और अपराध की पुष्टि भी हुई परन्तु राजनीतिक संरक्षण के कारण शहाबुद्दीन अपराध जगत के बेताज बादशाह के रूप में उभर आये। 2000 के दशक तक बिहार के सीवान जिले में शहाबुद्दीन ने अपनी समानांतर सरकार चलाई। हर दिन अपराध जगत के इस माफिया द्वारा अदालत लगाई जाती और अपने तरीके से मामलों का निपटारा किया जाता रहा।
आज इस बाहुबली की रिहाई को लेकर जहां एक ओर सरकार और न्यायपालिका के बीच सांठ-गांठ का आरोप लग रहा है, दूसरी ओर सीवान में आम लोगों के मन में माफिया के छूटने से खौफ पसरा हुआ है। अपने तीन बेटों की हत्या का दर्द झेल चुके और शहाबुद्दीन के खिलाफ लंबी कानून लड़ाई लड़ चुके चंदा बाबू और कलावती देवी फिर दहशत में हैं। कलावती रुंधे गले से कहती हैं, '' … अब फिर से यहां पहले जैसा ही माहौल हो जाएगा। हमारे तीनों बेटे मारे जा चुके हैं, हम आखिर सीवान छोड़कर कहां जाएंगे? हमारे 2 बेटों की मौत के बाद तीसरे की भी हत्या करवा दी गई। न्यायालय में शहाबुद्दीन ने खड़े होकर कहा था कि लड़के का ब्याह हो गया है, श्राद्ध भी करवा लेना। हमारा सबकुछ छीन            लिया गया।''
 गौरतलब है कि सीवान के इस परिवार में 6 लोग थे, लेकिन अब तीन ही बचे हैं। तीन जवान बेटों की हत्या कर दी गई लेकिन अब जो बुजुर्ग मां-बाप बचे हैं, उन्हें शहाबुद्ीन के छूटने के बाद फिर से अपनी जान का डर सताने लगा है। चंदा बाबू के तीनों बेटों की हत्या का आरोप शहाबुद्दीन पर है। 2 बेटों को अगवा करने के बाद तेजाब से नहलाकर मार दिया गया था जबकि तीसरा और सबसे बड़ा बेटा केस का चश्मदीद गवाह था, उसे भी माफिया ने सरेआम मार डाला था। अब चंदा बाबू, उनकी पत्नी और एक दिव्यांग बेटा बचा है। तीन जवान बेटों को गंवा चुके इस पिता को इंसाफ की उम्मीद थी लेकिन अब वह भी खत्म हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने जेल से रिहा राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन को राज्य बदर किए जाने की मांग करते हुए कहा कि शहाबुद्दीन और सुशासन साथ-साथ नहीं चल सकते। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शहाबुद्दीन पर जेल में रहते हुए हत्या की साजिश रचने, गवाहों को धमकाने का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या उनके जेल से बाहर रहते पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और राजीव रोशन हत्याकांड सहित अन्य मामलों का 'ट्रायल' संभव है?
सुशील मोदी ने शहाबुद्दीन को आतंक का पर्याय बताते हुए पूछा कि उनको भागलपुर से सीवान तक सैकड़ों गाडि़यों के काफिले के साथ जुलूस निकालने की अनुमति कैसे मिली? काफिले की सैकड़ों गाडि़यों से टोल नाकों पर टैक्स क्यों नहीं वसूला गया? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शहाबुद्दीन के 'आतंक के प्रदर्शन' पर सरकार अविलम्ब सख्ती से रोक लगाएगी?
वहीं दूसरी ओर राजद प्रमुख लालू यादव से  इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने शहाबुद्दीन का समर्थन किया और उनके द्वारा दिए गए बयानों के उपर टिप्पणी करते हुए कहा, ''शहाबुद्दीन ने कोई ऐसी बात नहीं कही है, उसने कहा कि लालू जी उसके नेता हैं। नीतीश जी को इसकी कोई तकलीफ नहीं है और इस बात का महागठबंधन की सरकार पर कोई असर नहीं पडे़गा।'' इससे पहले लालू के बेटे और सरकार में मंत्री तेजस्वी ने कहा था कि शहाबुद्दीन को न्यायालय ने    छोड़ा है, उनकी रिहाई में हमारी कोई भूमिका नहीं है। जबकि, शहाबुद्दीन ने नीतीश कुमार    को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री बताया था।    इसके साथ ही उनकी तुलना झारखंड के पूर्व सीएम से करते हुए कहा था कि नीतीश कोई जननेता नहीं हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत में सरकारी पक्ष को पूरी निष्ठा, जवाबदेही और गंभीरता से रखा गया है।  शहाबुद्दीन उनके लिए कोई अहमियत नहीं रखता। वैसे यह न्यायिक प्रक्रिया है और वे अदालत के आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक नीतीश ने जेडीयू के बड़े नेताओं के साथ इस मसले पर बातचीत की है। इसके साथ ही उस पर सीसीए भी लगाए जाने को लेकर चर्चा गर्म है। यदि ऐसा होता है तो शहाबुद्दीन फिर से जेल जा सकता है। अब जेडीयू के कुछ नेता भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं और बिहार में गठबंधन सरकार के नेताओं को 'गठबंधन धर्म' याद दिलाया जा रहा है।
बिहार में महागठबंधन पर राजद के बाहुबली नेता की रिहाई का असर दिखने लगा है।  उसके जमानत पर रिहा होने के बाद राज्य में सियासी बयानबाजी तेज है। दिलचस्प है कि विपक्ष के बाद अब बयानों के तीर महागठबंधन के अंदर भी चलने लगे हैं। नीतीश के खिलाफ रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान से भड़की कांग्रेस ने जहां साफ शब्दों में कह दिया है कि जिनको दिक्कत है वे गठबंधन छोड़ दें। वहीं लालू ने कहा है कि वह रघुवंश से सफाई मांगेंगे। असल में रघुवंश ने कहा कि महागठबंधन ने नीतीश कुमार को नेता चुना है लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से उन्हें पसंद नहीं करते है। कांग्रेस ने महागठबंधन में चल रही बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है,''जिसको रहना है रहे, जिसको जाना है जाए।'' कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सरकार में मंत्री अशोक चौधरी राजद नेता रघुवंश प्रसाद और शहाबुद्दीन द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर की गई टिप्पणी से बेहद खफा हैं। उनका कहना है कि अगर किसी को कोई समस्या है तो मिल बैठकर उसे सुलझाएं न कि मीडिया में बयानबाजी करके। शाहबुद्दीन की रिहाई के बाद बिहार में इस बात की चर्चा है कि इतने अपराध करने के बाद भी कानून की जंजीर से अपराधी कैसे बाहर निकल सकता है। हालांकि  इस राजद नेता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सियासी गलियारों से जो खबरें छनकर आ रही हैं उन पर विश्वास करें तो शहाबुद्दीन की जमानत के खिलाफ बिहार सरकार सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेगी और इस माफिया की जमानत को रद्द कराने की कोशिश करेगी। राज्य में मचे सियासी तूफान पर केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि बिहार में फिर से जंगल राज लौट आया है।
हर दिन अपहरण, हत्या की खबरें आ रही हैं। ऐसे समय में शहाबुदद्ीन को जमानत मिलना राज्य के लिए किसी भी हालत में ठीक नहीं है। उस प्रदेश सरकार की ढील की वजह से जमानत मिली है। बिहार की जनता में दहशत का वातावरण है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ''जब से महागठबंन की सरकार बनी है तब से अपराधी बेलगाम हो गए हैं। कानून को ताक पर धर दिया गया है। राजद, जदयू और कांग्रेस का गठबंधन स्वार्थ का महागठबंधन है। लेकिन शहाबुद्दीन की रिहाई ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर जरूर सवाल खड़े किये है? बिहार के लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि सरकार कैसा समाज चाहती है?
    डॉ. आतिश पाराशर

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

उत्तराखंड में आकस्मिक बाढ़ का खतरा

Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड के 12 जिलों में अगले 24 घंटे भारी, अचानक आ सकती है बाढ़

कोलंबिया में भूकंप ने मचाई तबाही

कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, भारी तबाही, कम से कम 70 की मौत

कॉकरोचों का समर्थन औऱ झारखंड आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह की चुप्पी, पीयूष मिश्रा ने पूछा- कौन हैं वो कुत्ते…?

MP Weather: बारिश-बाढ़ के बीच पुलिस का बड़ा रेस्क्यू अभियान, 98 लोगों की बचाई जान; भोपाल में टूटी डैम की दीवार

जेपीएससी भर्ती परीक्षा घोटाला: BJP ने कहा- कांग्रेस की सरकार जहां , भ्रष्टाचार-घोटाला वहां

झारखंड पेपर लीक का मामला बढ़ता जा रहा है।

झारखंड में जेपीएससी विवाद को कवर कर रहे पत्रकार अमन चोपड़ा पर FIR, छात्रों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

Load More

ताज़ा समाचार

उत्तराखंड में आकस्मिक बाढ़ का खतरा

Uttarakhand Weather Update : उत्तराखंड के 12 जिलों में अगले 24 घंटे भारी, अचानक आ सकती है बाढ़

कोलंबिया में भूकंप ने मचाई तबाही

कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, भारी तबाही, कम से कम 70 की मौत

कॉकरोचों का समर्थन औऱ झारखंड आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह की चुप्पी, पीयूष मिश्रा ने पूछा- कौन हैं वो कुत्ते…?

MP Weather: बारिश-बाढ़ के बीच पुलिस का बड़ा रेस्क्यू अभियान, 98 लोगों की बचाई जान; भोपाल में टूटी डैम की दीवार

जेपीएससी भर्ती परीक्षा घोटाला: BJP ने कहा- कांग्रेस की सरकार जहां , भ्रष्टाचार-घोटाला वहां

झारखंड पेपर लीक का मामला बढ़ता जा रहा है।

झारखंड में जेपीएससी विवाद को कवर कर रहे पत्रकार अमन चोपड़ा पर FIR, छात्रों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

वंदे मातरम

पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा ‘वंदे मातरम’, जानें क्या है खास तैयारी

Rajasthan Weather: झालावाड़ में 12 इंच बारिश, कई गांव जलमग्न; कोटा में बाढ़ के हालात

चमोली में बादल फटने से पुल ढह गया है

चमोली में बादल फटा, तिब्बत सीमा को जोड़ने वाला पुल बहा

निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री

संसद ने टैक्स बिल को मंजूरी दी, UPI लेनदेन रहेगा मुफ्त

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies