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गणेश कृष्णन आर.
इन दिनों लगता है, कन्नूर में उस दहकते सूरज के गुस्से को झलकाते कई सूरज चमक रहे हैं, जिसके पुत्र हैं मृत्यु के स्वामी माने जाने वाले यमराज। उस सूरज के ताप से जलती धरती पर लोग, जानवर और वनस्पति तप रहे हैं। इस अतिरिक्त सूरज के बारे में पता न होना इन दिनों और ज्यादा ताप बरसा रहा है, कन्नूर के वासी और आस-पास के इलाकों में मौत के देवों की उपस्थिति साफ दिखती है, जहां माकपा के कम्युनिस्ट यमराज की जगह लेते दिख रहे हैं, जो फरमान जारी करते हैं कि किसको जिंदा रहना चाहिए और किसको मरना चाहिए। यहां प्रस्तुत हैं असहिष्णुता की कुछ अनकही कहानियां, केरल में आज के 'यमराज' के शिकारों की जबानी।
बलिदान और त्याग की गाथा
केरल में स्वयंसेवकों की हत्या का सिलसिला 1969 में वडिक्कल रामाकृष्णन की हत्या से शुरू हुआ था। आज रामाकृष्णन के परिवार में उनकी पत्नी लीला हैं जो एक छोटे से घर में रामाकृष्णन के भाई के परिवार के साथ रहती हैं। उनके भाई सुमेश उन्हें याद करते हुए बताते हैं, ''वे मुश्किल से 26 वर्ष के थे जब कम्युनिस्ट पार्टी के गांव वडिक्कल में शाखा लगाने पर उनकी हत्या कर दी गई थी।''
लीला महज 19 वर्ष की थीं जब उनके पति की वामपंथियों ने हत्या कर दी थी। इस घटना को 47 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी वे अपनी पति की याद के सहारे जीवन काट रही हैं। वे कहती हैं, '' मेरे पति की मौत के बाद मुझे वोट देने का अधिकार मिला।'' आंखों में दर्द और भय मिश्रित दुख के साथ वे बताती हैं,''रामाकृष्णन परिवार का बहुत ध्यान रखने वाले व्यक्ति थे, वे ज्यादातर समय घर से बाहर अपने दोस्तों के साथ संघ कार्य करते हुए बिताते थे। वामपंथी विचारों और वामपंथी परिवारों के कितने ही लोगों को वे शाखा में लेकर गए। माकपा नेताओं के भड़कने का यही एक कारण था कि उन्होंने कम्युनिस्टों को संघ की तरफ आकर्षित किया था। इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई थी।
सुमेश ने अपने बड़े भाई को नहीं देखा क्योंकि वे उनकी हत्या के बाद पैदा हुए थे। वे रामाकृष्णन के पिता की दूसरी पत्नी की संतान हैं। वे अपने भाई की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए। वे कहते हैं,''हर कोई कहता है कि मेरे भाई बहुत ताकतवर व बहादुर थे। वह उस समय शाखा लगाते थे जबकि बहुत कम स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में भाग लेते थे। उनकी दृढ़ता व निष्ठा को देखते हुए बहुत से युवकों और प्रौढ़ों ने शाखा आना शुरू किया।'' सुमेश अपने भाई पर हुए बर्बर हमले के बारे में बताते हैं,''वे माकपा तत्वों द्वारा सताए गए एक कार्यकर्ता से मिलकर दोपहर के 3 बजे लौट रहे थे कि एक गुट ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। वह केरल के मार्शल आर्ट कलयरि पट्टू में माहिर थे। उन्होंने हमले का बखूबी सामना किया। लेकिन हमलावरों ने एक भारी पत्थर से उन पर वार किया और पेट में कुल्हाड़ी दे मारी। शोर सुनकर पिता जी वहां पहुंचे, उन्होंने देखा कि रामाकृष्णन खून से लथपथ थे। ''











