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समाज में सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्रीय जनजीवन को पुन: संगठित एवं नई ऊर्जा से भरने का लक्ष्य लेकर, समाज के कुछ सेवा-भावी लोगों को साथ लेकर संघ के स्वयंसेवकों ने अनेक जन-संगठनों की शुरुआत की थी, जो राष्ट्रनिर्माण से जुड़े विभिन्न कायार्ें को अंजाम दे रहे हैं। अज्ञानता के कारण अक्सर इन संगठनों के बारे में भ्रांतियां फैलाई जाती हैं, परंतु सच यह है कि ये स्वायत्त संस्थाएं कभी संघ के अधीन नहीं रहीं, बल्कि संघ के प्रशिक्षित स्वयंसेवक इन संस्थाओं के जरिये समाज में समानता, हाशिये पर खड़े वर्गों के उत्थान, भारतीय मूल्यों को आत्मसात करने एवं जटिल मुद्दों के प्रति समझौतापूर्ण नजरिया अपनाने में मदद कर रहे हैं। प्रमुख संस्था के प्रति जिम्मेदारी के तौर पर उन्होंने संघ की अ.भा. प्रतिनिधि सभा में अपनी वार्षिक रपट प्रस्तुत की। 'संघ और कुछ नहीं, सिर्फ चरित्र निर्माण का कार्य करता है, बाकी सब स्वयंसेवक करते हैं', अगर किसी को इसका अर्थ समझना हो उन्हें राष्ट्रवादी संगठनों के लक्ष्य एवं पहुंच को समझना होगा।
समाज के कमजोर वर्ग की सेवा और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के लिए ये संगठन राजनीति, शिक्षा, सेवा, बौद्धिक, श्रम, अर्थ आदि क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रहे हैं। राजस्थान के नागौर में हाल में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में इन संगठनों ने अपने वार्षिक विकास से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
रा़ स्व़ संघ को अक्सर पुरुषवादी संगठन बताया जाता है, ऐसा जिसमें महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। संघ को महिलाविरोधी बताने वालों को इस तथ्य का पुन: आकलन करना होगा। ऐसे लोग अक्सर 'अन्य संघ' यानी 'राष्ट्र सेविका समिति' की शक्ति और कायार्ें के बारे में भूल जाते हैं। भारतीय महिलाओं में देश प्रेम के साथ राष्ट्रवाद की भावना का संचार करने के लिए राष्ट्र सेविका समिति देश भर में हिंदू महिलाओं को एकजुट करने का काम कर रही है। संघ की विचारधारा के अनुसार, सेविका समिति हर वर्ग की महिलाओं को साथ लाकर विभिन्न रचनात्मक कार्यों में जुटी है।
अभाविप और विहिप जैसे जाने-माने संगठन, जो जनता के साथ, जनता के लिए एवं जनता के बीच कार्य कर रहे हैं, सेवा आधारित संगठन हैं। ये जनता या मीडिया की चकाचौंध से दूर रह समाज के लिए कार्य करते हैं।
रा़ स्व़ संघ के द्वितीय सरसंघचालक प़ पू़ श्री गुरुजी व एस़ एस़ आप्टे द्वारा स्वामी चिन्मयानंद के साथ मिलकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की नींव रखी गई थी। संस्था ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी गहरी पकड़ बनाई है। गत एक वर्ष में विहिप की सबसे प्रमुख गतिविधि में उसकी स्थापना की स्वर्ण जयंती के कार्यक्रम रहे।
संघ के आधारभूत मूल विचार-पुरुषार्थ एवं राष्ट्रनिर्माण को शुरू से कार्यरूप देने में जुटी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) देश भर में विद्यार्थियों को एकजुट कर रही है। पिछले साल 1 अक्तूबर को अभाविप ने दिल्ली में वनवासी छात्र संसद का आयोजन किया था। इसमें 50 जिलों के 233 वनवासी छात्र शामिल हुए। इसी तरह, कन्या छात्र संसद एवं उत्तर-पूर्व युवा संसद का भी आयोजन किया गया। इसने नशे और व्यसन के खिलाफ अभियान की शुरुआत की।
अभाविप अकेली संस्था नहीं है जो शिक्षा के जरिये परिवर्तन लाने को प्रयासरत है। अंग्रेजों के समय से उधार ली गई शिक्षा प्रणाली में कमियां देखकर, विभिन्न संस्थाएं राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित हुईं और शिक्षा में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति से मेल बैठाते नवोत्थान की दिशा में काम कर रही हैं।
विद्या भारती ऐसा ही प्रयास करने वाली प्रमुख संस्थाओं में से है। यह मूलत: हमारे राष्ट्रीय विचारों और सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों को शिक्षा नीति तथा दर्शन में पिरोने का कार्य कर रही है। इस वर्ष विद्या भारती ने नई दिल्ली में प्रधानाचार्यों का सम्मेलन किया था। उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से उनके कार्य क्षेत्र में सामाजिक परिवर्तन लाने का आह्वान किया गया। इसके अलावा, मध्यप्रदेश के हरदा जिले की टिमरनी तहसील के चिप्पानेर गांव में वैदिक विद्यापीठम की शुरुआत की गई। भारतीय शिक्षण मंडल शिक्षा के जरिये देशप्रेम एवं राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने का काम कर रहा है। संस्था ने नई शिक्षा नीति बनाने के लिए चार लाख लोगों के अभिमत इकट्ठे किए हैं। संस्था की रिपोर्ट में बताया गया कि उप-कुलपतियों से लेकर प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों तक, पेशेवरों से लेकर किसानों और व्यवसायियों तक करीब 1़ 5 लाख लोगों ने अपने लिखित विचार दिए। ये सुझाव 4 फरवरी को सुब्रह्मण्यन समिति को सौंपे गए। इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ जैसी संस्था विशेषकर अध्यापक वर्ग में राष्ट्रवाद की भावना को बलवती करने का काम कर रही है तो क्रीड़ा भारती जैसी संस्था लोगों के बीच भारतीय खेलों को बढ़ावा दे रही है।
वैश्विक स्तर पर श्रमिक आंदोलनों और ट्रेड यूनियनों को कम्युनिस्टों की बपौती माना जाता रहा है। दत्तोपंत ठेंगडी के ओजस्वी नेतृत्व में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इस धारणा को गलत साबित कर दिखाया। भारत में मजदूर वर्ग के सबसे बड़े संगठन के तौर पर बीएमएस ने नए मानदंड स्थापित किए हैं। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, स्वर्ण जयंती उत्सव के अंतर्गत देश भर में यह कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है।
देश में सहकारिता अभियान को विकेंद्रीकृत एवं श्रम केंद्रित अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्रोत के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए, जो तेज रफ्तार एवं संतुलित आर्थिक विकास को सहयोग देगा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सहकार भारती देश के 425 जिलों में कार्यरत है। इतना ही नहीं यह अन्य 40 उपक्षेत्रों में भी सक्रिय है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही, किसान पिछली सरकारों की गलत नीतियों का शिकार रहे हैं। दत्तोपंत ठेंगडी द्वारा स्थापित भारतीय किसान संघ (बीकेएस) भारत के किसानों की ऐसी संस्था है जो उनके समग्र विकास की दिशा में काम कर रही है। भारत की सबसे बड़ी किसान संस्था, बीकेएस किसानों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्षरत है।
स्वदेशी का विचार लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर, अरविंद और महात्मा गांधी के प्रेरणादायी नेतृत्व में राष्ट्रव्यापी अभियान के साथ शुरू हुआ था। 1980 के दशक में स्वदेशी के व्यापक अभियान के साथ स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) की स्थापना हुई। पिछले साल, कई किसान संगठनों एवं नागरिक समूहों ने एसजेएम के नेतृत्व में जीएम सरसों की व्यावसायिक बिक्री का विरोध किया। देश के 8,000 नागरिकों ने भी एक हस्ताक्षर अभियान में इस शुरुआत का विरोध किया, वहीं भूमि अधिग्रहण एवं जीएम फसलों के खिलाफ पिछले वर्ष के अभियान संस्था के महत्वपूर्ण आयोजन रहे।
लघु उद्योग भारती ने खुद को भारत के छोटे व मझोले उद्योगों से जोड़े रखा है। यह छोटे उद्योगों के विकास को देश और उसके विकास का पूरक मानने वाली संस्था है। संस्था लघु उद्योगों (एसएसआई) के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। संस्था एसएसआई के लिए श्रम एवं पर्यावरण कानून बनाए जाने केके पक्ष में है।
दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई) महान स्वप्नद्रष्टा एवं समाजसेवी नानाजी देशमुख की कल्पना का मूर्त रूप है। 'एकात्म मानवतावाद' के सिद्घांत पर चलकर यह संस्था स्वास्थ्य, स्वच्छता, मूलभूत शिक्षा, स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण आदि क्षेत्रों के विकास मॉडल पर काम कर रही है। डीआरआई ने हाल में भारत सरकार को खादी क्षेत्र से जुड़ा एक श्वेतपत्र भी दिया है। नेहरू स्मारक, नई दिल्ली में दीनदयाल उपाध्याय के जीवन एवं कार्यों से जुड़ी एक प्रदर्शनी एवं वृत्तचित्र भी दिखाया गया। दीनदयाल जन्मशती आयोजनों के लिए भारत सरकार ने डीआरआई को 'नॉलेज पार्टनर' भी बनाया है।
भारत की अग्रणी सांस्कृतिक संस्था, संस्कार भारती से आज 20,000 कलाकार जुड़े हैं। राजा मानसिंह तोमर पर ग्वालियर में एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।
राष्ट्रीय सेवा भारती की देश भर में अनेकानेक गतिविधियां चल रही हैं। विभिन्न राज्यों में सेवा भारती सेवा संगम का आयोजन कर रही है। दिल्ली में 3 से 5 अप्रैल तक अखिल भारतीय सेवा संगम का आयोजन किया गया। उद्घाटन समारोह के अवसर पर पूज्य माता अमृतानंदमयी उपस्थित थीं। सेवा भारती के अंतर्गत गैर सरकारी संस्था एकल विद्यालय न्यास भारत के ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य कर रहा है। यह भारत में सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा अभियान है जिसकी पहुंच 57,717 गांवों तक है, जहां 10,00,000 से भी अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध हो रही है।
इसी तरह के लक्ष्य पर 'सक्षम' नामक संस्था भी कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य है दृष्टिहीन लोगों का सशक्तिकरण। सक्षम ने भारत को तीन वषार्ें में कॉर्नियल दृष्टिहीनता से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत 5 मार्च को संघ के दूसरे सरसंघचालक श्री गुरुजी की जयंती पर की गई थी। परियोजना को शुरू करने से पहले सक्षम ने पांच जिलों में इसका शुरुआती
अध्ययन भी किया।
सेवा-संस्कार आधारित, गैर-राजनीतिक, सामाजिक-सांस्कृतिक स्वैच्छिक संस्था के तौर पर भारत विकास परिषद 314 जिलों में कार्यरत है और यह अभी तक अक्षम लोगों को 2.37 लाख से अधिक कृत्रिम अंग उपलब्ध करा चुकी है। यह मानवीय कार्यों के आधार पर देश के विकास एवं विस्तार की दिशा में कार्य कर रही है। इसके लक्ष्य सांस्कृतिक, सामाजिक, अकादमिक, नैतिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक हैं जिनके जरिये यह देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का कार्य
करती है।
2002 में स्थापित आरोग्य भारती व्यक्तियों, समाज एवं सरकारी प्रयासों से स्वस्थ व प्रसन्न समाज के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। विभिन्न उपचार पद्धतियों के प्रति आदरभाव के साथ यह संस्था उन्हें एकजुट कर राष्ट्रहित में इस्तेमाल कर रही है। संस्था ने भारत को मधुमेह मुक्त करने से जुड़े अभियान की भी शुरुआत की है।
वनवासी कल्याण आश्रम (वीकेए) के गठन का मुख्य लक्ष्य हिंदू समाज और उसके वनवासी बंधुओं के बीच की खाई को सौहार्द तथा भरोसे के आधार पर पाटना है। संस्था ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस लक्ष्य को काफी हद तक पूरा करने में सफलता पाई है। वीकेए ने राष्ट्रीय स्तर पर कई आयोजन किए हैं। इनमें 7 से 9 अगस्त, 2015 तक गुवाहाटी में तीन दिवसीय बैठक उल्लेखनीय रही। इस बैठक का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि इसमें उत्तर-पूर्व भारत की अनुसूचित जनजातियों पर विजन डॉक्युमेंट पर विमर्श किया गया।
अखिल भारतीय सीमा जागरण देश की भू एवं समुद्री सीमाओं के निकट कार्य करने वाली संस्था है। इसकी वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल, महाराष्ट्र एवं आंध्र प्रदेश में मछुआरों के लिए स्वावलंबी समूहों की शुरुआत की गई। जैसा कि संघ के पूर्व सरकार्यवाह हो़ वे़ शेषाद्रि ने कहा था, ''संघ को अपने सपने को साकार करने की योजना की कई बार परीक्षा देनी पड़ी और हर बार वह सफल हुआ। इस बदलाव के प्रमुख उपकरण के तौर पर स्वयंसेवकों ने प्रत्येक नए क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य किया। समूचे राष्ट्र के पुनर्जागरण की इस योजना में किसी भी तरह से सर्वाधिकारवाद का कोई स्थान नहीं; विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कायार्ें को केंद्रीय नेतृत्व के तौर पर निर्देशित करने की भी संघ में कोई परंपरा नहीं है।'' निस्संदेह संघ प्रेरित संगठनों ने समाज के सभी वर्गों के लोगों के दिलों को छुआ है और यह राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की अपनी महान यात्रा जारी रखेगा।
समाजसमाजराष्ट्र सेविका समिति
स्थापना: 25 अक्तूबर 1936
45 देशों में काम। 185 तरुणी सम्मेलन आयोजित किए गए जिसमें 54,670 युवतियों ने भाग लिया।
सेवा भारती
स्थापना: 1979
सेवा संगम में 700 संस्थाओं के 3,050 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वर्ग के हिसाब से वर्तमान सेवा कार्य- शिक्षा 81,278, स्वास्थ्य-22,471, कुल-1,52,388
भारतीय मजदूर संघ
स्थापना: 23 जुलाई
1955, बीएमएस के 1,71,46,332 सदस्य हैं। 2012 से 2015 तक करीब 500 यूनियन पंजीकृत हुईं, 4 खण्डों में 'दत्तोपंत ठेंगडी जीवन दर्शन' प्रकाशित हुआ।
अ.भा. वि. परिषद
स्थापना-9 जुलाई
1949
6,945 कालेजों में 2,798 इकाइयां और 28,40,492 सदस्य। अभाविप ने 543 स्थानों पर 845 कार्यक्रम आयोजित किए जिनमें 3,58,818 छात्रों ने भाग लिया।
विश्व हिन्दू परिषद
स्थापना-29 अगस्त,1964
586 जिलों में सम्मेलन आयोजित किए गए। 48,651 लोगों को कन्वर्जन से बचाया गया। हिन्दू मित्र परिवार परियोजना के तहत 5,500 परिवारों को गोद लिया गया।
वनवासी कल्याण आश्रम
स्थापना-26
दिसंबर 1952
327 जिलों में काम। 2,836 वनवासी खिलाडि़यों ने 7वें राष्ट्रीय वनवासी खेल आयोजन में भाग लिया। रानी मां गाइदिन्ल्यू की जन्म शती मनाई गई।
संस्कार भारती
स्थपना-1981
46 प्रांतों में काम, 604 में संगठनात्मक इकाइयां हैं। 2015 में मुम्बई में भारतीय युवा कला शिविर आयोजित हुआ। अजमेर में अ.भा. साहित्य संगम हुआ।
सक्षम
स्थापना-25 जून 2008
36 प्रांतों में काम। उत्तर तमिलनाडु, आंध्र, जम्मू आदि में नई प्रांत समितियां गठित। तीन साल के अंदर भारत को कोर्निया जन्य अंधता से मुक्ति दिलाने
का लक्ष्य।
स्वदेशी जागरण मंच
स्थापना-22 नवम्बर 1991, 388 जिलों में मौजूगी। नए कदम-मेड बाइ भारत, भारत सोलर एनर्जी डेवलपमेंट फोरम और डिफेंस इनोवेटर्स एंड इंडस्ट्री एसोसिएशंस
विद्या भारती
स्थापना-1977, 585 प्रांतों में 12,364 स्कूल, 34,51,615 छात्र और 1,46,643 शिक्षक कार्यरत, 12,001 अनौपचारिक केन्द्र, 30 परियोजनाएं काम कर रही हैं। प्रधानाचार्य सम्मेलन में 1081 की सहभागिता।
क्रीड़ा भारती
स्थापना-1992
20 राज्यों के 1,369 खिलाडि़यों की सहभागिता। 295 स्थानों पर मनाया गया योग दिवस। दिसंबर 2015 में जयपुर में मनाया राष्ट्रीय खेल संगम।
आरोग्य भारती
स्थापना-2002
40 प्रांतों में कार्य, 2017 तक सभी जिलों में कार्य पहंुचाने का लक्ष्य। एसवीवाईएएसए के सहयोग से भारत को डायबिटीज मुक्त बनाने का लक्ष्य।
भारतीय किसान संघ
स्थापना-1978
21 लाख से अधिक सदस्य। किसान संघ की मांग पर केन्द्र सरकार ने शुरू की फसल बीमा योजना। मुख्य जोर खेती को लाभदायक बनाने पर।
लघु उद्योग भारती
स्थापना-1994
24 राज्यों के 331 जिलों में काम, लघु उद्योग के 'मायने' के लिए संघर्षरत। हर दो साल में भारतीय उद्योग मेला लगाया जाता है।
दीनदयाल शोध संस्थान
स्थापना-8 मार्च
1968, चित्रकूट के 118 गांवों में18 दो दिवसीय व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम किए। 271 बाल विस्तारकों ने 77 गांवों में 3,070 बच्चों से संपर्क कर प्रशिक्षित किया।
भारत विकास परिषद
स्थापना-1963
1,769 लोगों का पुनर्वसन कराया, 2.21 लाख लोगों को स्वास्थ्य गतिविधियों के लाभ दिलाए। 13,595 कृत्रिम अंग दिए गए। गुरु वंदन-छात्र अभिनंदन कार्यक्रमों में 10.40 लाख लोगों ने भाग लिया।
-गणेश कृष्णन आर.











