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नई दिल्ली श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर लुधियाना से पधारे 300 गुरुसिख संगत के जत्थों का स्वागत नई दिल्ली स्टेशन पर किया गया। इस यात्रा का नेतृत्व राष्ट्रीय सिख संगत की प्रेरणा से सचखण्ड श्री हजूर साहिब यात्रा जत्था कमेटी के चेयरमैन सरदार कुलदीप सिंह दीपा कर रहे थे। नई दिल्ली स्टेशन पर राष्ट्रीय सिख संगत के उपाध्यक्ष सरदार देवेन्द्र सिंह गुजराल, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन श्री अविनाश जायसवाल सहित कई पदाधिकारियों ने जत्थे का स्वागत किया। मार्ग में लंगर की व्यवस्था थी। राष्ट्रीय सिख संगत के पदाधिकारियों ने पिछले 7 वर्षों से चल रही इस यात्रा से सांझीवालता के संदेश को देश के कोने-कोने में पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इस यात्रा के माध्यम से युवा अपने विरसे (संस्कृति सभ्यता) की रक्षा के लिए संकल्पित होंगे। ल्ल प्रतिनिधि
समान नागरिक संहिता प्रासंगिक
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एन.राव ने कहा कि समान नागरिक संहिता डॉ. बी.आर. आंबेडकर के एक राष्ट्र की सोच को साकार कर सकती है। एक राष्ट्र, ''एक संस्कृति और राष्ट्रीय लक्ष्य के विषय में आंबेडकर के विचार'' विषय पर हैदराबाद में मुम्बई के समरसता अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित गोष्ठी में श्री राव मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
न्यायमूर्ति श्री राव ने याद दिलाया कि डॉ. आबंडेकर के अनुसार संविधान हमें वैयक्तिक धार्मिक कर्मकांड की अनुमति देता है लेकिन बाकी अन्य मुद्दों पर धार्मिक भेदभाव नही होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. आंबेडकर न तो हिन्दू विरोधी ही थे और न ही वे धर्म के खिलाफ थे, ये जरूर है कि सिद्धान्त पर आधारित धर्म के पक्षधर थे और उस जाति प्रथा के घोर विरोधी थे जो लोगों को आपस में बांटती है। डॉ. आंबेडकर लोकतांत्रिक हिन्दुत्व के पक्षधर थे जहां पुरोहितवाद को समूल उखाड़कर सभी जाति के लोगों को पुजारी बनने का अधिकार प्राप्त हो। उनका कहना था कि अंतरजातीय विवाहों और परस्पर सहभोज से इस विषमता को खत्म किया जा सकता है। इस विषय पर अपना बीज भाषण करते हुए श्री श्यामकांत हनुमतअत्रे ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने स्वयं छुआछुत का दंश झेला था, इसलिए हिन्दुत्व के प्रसार में इसे सबसे बड़ी बाधा कहा था।
डॉ. आंबेडकर ने समाज में दलित वर्ग के साथ हो रहे भेदभाव के विरुद्ध बहुत संघर्ष किया था। आंबेडकर उनके अधिकारों और न्याय के लिए लड़े और उन्होंने ही समान अवसर की उपलब्धता दिलाई। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टी.वी. नारायण राव का भी अभिनंदन किया गया। कई विश्वविद्यालयों से गोष्ठी में पधारे शिक्षाविदों ने सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर केन्द्रित शोध पत्र प्रस्तुत किए। ल्ल प्रतिनिधि











