17 सितंबर गणेश चतुर्थी पर विशेष - विघ्नहर्त्ता मंगलकर्त्ता श्रीगणेश
August 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

17 सितंबर गणेश चतुर्थी पर विशेष – विघ्नहर्त्ता मंगलकर्त्ता श्रीगणेश

Written byArchiveArchive
Sep 14, 2015, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 14 Sep 2015 11:30:30

प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पांच प्रमुख देवताओं का उल्लेख किया गया है, वे हैं- विष्णु, शिव, शक्ति, सूर्य और गणेश। इन्हें 'पंच देवता' भी कहा गया है। इन पांचों में भी सर्वाधिक प्रमुख और प्रथम पूजनीय हैं- गणेश। परिवार में सभी प्रकार के शुभ और मंगल कार्यों का प्रारंभ 'गणेश-पूजन' से किया जाता है। वे देवताओं में अग्रगण्य हैं। देवगुरु बृहस्पति भी सर्वपथम उन्हीं का पूजन करते हैं और दूसरी तरफ राक्षसों के गुरु शुक्राचार्य भी, नवग्रहाधिपति के रूप में सबसे पहले गणेश का ही स्मरण करते हैं। सभी प्रकार के संकटों से मुक्त रहने के लिए अधिकांश हिन्दू-परिवार अपने मकान के प्रवेश-द्वार पर गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं और नित्य प्रात: उनका पूजन करते हैं। किसी कार्य के श्रीगणेश का अर्थ ही गणेश-स्मरण के साथ उस कार्य को प्रारंभ करने का होता है। हिन्दुओं के सभी वर्गों में गणेश निर्विवाद रूप में सर्वाधिक लोकप्रिय और सम्माननीय देवता हैं। गणेश के व्यक्तित्व और उनकी अन्य विशेषताओं के आधार पर उन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता है। यथा गजानन, लम्बोदर, मोदकप्रिय, वक्रतुण्ड, शूपकर्ण, एकदन्त, सिन्दूर-वदन आदि। इनके प्राचीनतम नाम हैं- गणनायक और गणपति, जिनका अर्थ होता है समूह का नेता। गणपति शब्द का प्रयोग तो विश्व के आदिग्रंथ ऋग्वेद में भी अनेक बार हुआ है।
गणपति की अभ्यर्थना में ऋग्वेद के मंत्रसृष्टा ने यह मंत्र भी पढ़ा-
गणानांत्वा गणपति गुंग हवामहे…
ऋग्वेद में केवल गणपति शब्द का प्रयोग है, गणेश का नहीं। शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से गणपति और गणेश में कोई अन्तर नहीं है, लेकिन ऋग्वेद में यत्र-तत्र गणपति का संबोधन रुद्र और इन्द्र आदि देवताओं के लिए भी किया गया है। गणतंत्र के मुखिया के लिए सामान्य रूप में भी इस संबोधन का प्रयोग है। जहां तक गणेश का संबंध है, उन्हें गणपति के रूप में विशेषत: मारुतगण के साथ जोड़ा गया है। अतएव संभव है कि अतीत में मारुतों में ही गणेश की विशेष प्रतिष्ठा रही हो।
गणेश की आकृति विचित्र है। उनका सिर हाथी का है। आंखें, कान और मुंह भी वैसे ही हैं। बाहर निकला हुआ केवल एक दांत है, दूसरा टूटा हुआ है। शरीर का शेष भाग मनुष्यों के समान है, लेकिन भुजाएं चार हैं और टांगें अपेक्षाकृत काफी छोटी हैं। पेट काफी बड़ा है। उनकी चार भुजाओं में से एक में त्रिशूल, दूसरी में अक्षमाला, तीसरी में परशु और चौथी में लड्डू हैं। हाथ में लड़डू होने से वे मोदकप्रिय के रूप में जाने जाते हैं। ऋद्धि और सिद्धि उनकी दो पत्नियां हैं, जो सुख-संपत्ति की दाता हैं। उनका शरीर रक्त-वर्ण से रंगा हुआ है, जो उनके शूरवीर स्वरूप को प्रकट करता है।
प्रसंग है कि माता पार्वती की आज्ञा से जब बालक गणेश ने महादेव को माता के कक्ष में प्रवेश से रोका तो शिव अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश का मस्तक काट दिया। दु:खी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर गणेश के धड़ पर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।
गणेश का एक दांत टूटा हुआ है। इससे उनका एक नाम एकदन्त भी है। गणेश और परशुराम के बीच युद्ध छिड़ गया। परशुराम ने क्रुद्ध होकर शिव के द्वारा दिया हुआ परशु गणेश की तरफ फेंका। पिता का सम्मान करने की दृष्टि से गणेश ने उस परशु का विरोध नहीं किया और उसे अपने एक दांत पर झेल लिया। इससे उनका एक दांत टूट गया और वे एकदंत कहलाए।
मूषक को वाहन बनाने के संबंध में गणेश पुराण में कई कथाएं हैं। गणेश के मोदकप्रिय होने के बारे में मान्यता है कि एक बार देवताओं ने अमृत का लड्डू बनाकर पार्वती को भेंट किया और पार्वती ने वह लड्डू अपने पुत्र गणेश को दे दिया। मां का प्रसाद मानकर गणेश ने बड़े प्रेम से उस लड्डू को खाया। इससे गणेश को अमरता तो मिली ही, साथ ही उनका नाम भी मोदकप्रिय हो गया।
गणेश की प्रतिष्ठा संपूर्ण भारत में समान रूप में व्याप्त है। महाराष्ट्र में ये मंगलकारी देवता के रूप में और मंगलमूर्ति के नाम से विशेष लोकप्रिय हैं। दक्षिण में इनकी विशेष लोकप्रियता कला शिरोमणि के रूप में है तथा कोलकाता के संग्रहालयों में श्रीगणेश की नृत्य मुद्रा में आकर्षक मूर्तियां रखी हुई हैं। उड़ीसा और तमिलनाडु के अधिकांश गांवों में प्राय: प्रत्येक मार्ग पर पीपल के वृक्ष के नीचे गणेश की प्रतिमाएं मिलती हैं। गणेश की प्रतिमा के बिना हमारे यहां मंदिर भी अधूरे माने जाते ६ैं। बौद्ध धर्म के माध्यम से गणेश का विदेशों में भी पर्याप्त प्रसार हुआ है। चीन, तिब्बत, बर्मा, जावा, सुमात्रा, जापान, थाईलैंड, तुर्की आदि देशों में भी हमें गणेश की प्रतिमाएं तथा उनके मंदिर देखने को मिलते हैं।   -प्रो. योगेश चन्द्र शर्मा

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

क्या पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर असहज हुईं सोनिया गांधी? खरगे के साथ बातचीत का Video वायरल, BJP हमलावर

श्री कृष्णगोपाल जी ने दिल्ली में केशवकुंज में फहराया तिरंगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने केशवकुंज में किया ध्वजारोहण

कोलकाता स्थित संघ कार्यालय में तिरंगा फहराते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

स्वतंत्रता दिवस: संघ मुख्यालय में श्री मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- आजादी की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

Bharat Bhushan tiwari Fact check

फैक्ट चेक: झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पत्थरबाजी का दावा झूठा

Load More

ताज़ा समाचार

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

क्या पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर असहज हुईं सोनिया गांधी? खरगे के साथ बातचीत का Video वायरल, BJP हमलावर

श्री कृष्णगोपाल जी ने दिल्ली में केशवकुंज में फहराया तिरंगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने केशवकुंज में किया ध्वजारोहण

कोलकाता स्थित संघ कार्यालय में तिरंगा फहराते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

स्वतंत्रता दिवस: संघ मुख्यालय में श्री मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- आजादी की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

Bharat Bhushan tiwari Fact check

फैक्ट चेक: झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पत्थरबाजी का दावा झूठा

Income Tax filing

Explainer: विदेशी बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी व जेवरात का खुलासा: क्या है छोटे टैक्सपेयर्स के लिए CBDT की नई स्कीम?

लोकसभा में राहुल गांधी

राहुल गांधी लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से नदारद, भाजपा बोली- ये ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता

Pojk protest

PoJK में पाकिस्तान के अत्याचार के खिलाफ सुधनोटी, हजीरा मंढोल और ब्रुसेल्स में विरोध

PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण की मुख्य बातें: 2047 का लक्ष्य, आत्मनिर्भरता और तेज़ी से विकास पर ज़ोर

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies