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भरत बुट्टन
उद्यमी
एम. बी. ए. करके किसी बड़ी कंपनी में मोटी तन्ख्वाह पर नौकरी के बजाय भरत ने वेब डिजाइन की दुनिया में कदम रखा।
ने पीजीडीएवी कॉलेज से बी. कॉम. की पढ़ाई करने के बाद आईपी विश्वविद्यालय से फाइनेंस और अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में एम. बी. ए. किया। इससे पूर्व मैंने 'डोएक से ओ-लेवल' का कोर्स भी किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद छह माह के भीतर ही मैंने 23 वर्ष की आयु में अकेले ही नवम्बर, 2009 में 'जूम इन टू वेब' नामक कंपनी बनाकर वेबसाइट डिजाइनिंग का काम शुरू कर दिया।
इसके लिए मैंने माता-पिता से भी आर्थिक सहयोग नहीं लिया, बल्कि खुद ट्यूशन पढ़ाकर फंड जमा किया। आज ईस्ट ऑफ कैलाश में मेरे दफ्तर में मेरे सहित छह लोगों का स्टॉफ है और प्राइवेट कंपनियों से भी हमें खूब काम मिल रहा है। हमारे यहां वेबसाइट डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, डेवलपमेंट और मोबाइल एप्लीकेशन का काम होता है। हमारा सालाना करीब 15 लाख रुपए का टर्नओवर है।
दरअसल एम. बी. ए. की पढ़ाई करने के दौरान वर्ष 2008 में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी का दौर चल रहा था। साथ ही जिस कॉलेज से हम एम. बी. ए. कर रहे थे, उनकी तरफ से कोई प्लेसमेंट की व्यवस्था भी नहीं थी। मन में यह धारणा बन चुकी थी कि ऐसे में शायद नौकरी मुश्किल से मिल पाएगी तो क्यों न खुद अपना कारोबार शुरू किया जाए। उसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पढ़ाई करने के दौरान मैंने तय कर लिया था कि नौकरी नहीं करूंगा। हालांकि मेरे माता-पिता दोनों ही सरकारी कर्मचारी थे और कारोबार शुरू करने से पहले तक मेरे ऊपर नौकरी करने को लेकर काफी दबाव था। आज मेरे साथ एम. बी. ए. करने वाले साथियों और परिवार में मैं ही अकेला हूं जिसने अपना कारोबार शुरू किया, बाकी सभी सरकारी या निजी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं। आज मेरा रीयल एस्टेट, एक्सपोर्ट, मेडिकल, कंस्ट्रक्शन, ज्वैलरी और ई-कॉमर्स से जुड़ी कंपनियों से अनुबंध है।
कारोबार में कई बार नुकसान का सामना भी करना पड़ा, लेकिन यह सोचकर संतोष कर लिया कि नौकरी करने वाले दोस्त चाहे वेतन ज्यादा ले रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने काम जैसी स्वतंत्रता नहीं मिली हुई है। इसलिए यदि नुकसान भी हुआ तो उसकी आगे चलकर भरपाई भी हो गई। इस तरह कभी भी नकारात्मक विचारों को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया। मेरा प्रण था कि बेशक सफल होने में समय लगे, लेकिन किसी भी सूरत में किसी पर निर्भर नहीं होना है। कारोबार शुरू करने पर दोस्तों, परिवार और समाज के लोगों की मदद लेकर 'प्रमोशन' की और धीरे-धीरे काम मिलना शुरू हो गया। शुरुआत में स्वयं हाथ-पांव मारकर लोगों से संपर्क किया और फिर काम मिलने लगा। हालांकि काम शुरू करने से पहले मेरी इच्छा थी कि कोई साथी मिल जाए जिसके सहयोग से मेरा कारोबार खड़ा हो जाए, लेकिन संयोग से ऐसा न हो सका। फिर मुझे स्वयं ही इसकी पहल करनी पड़ी। शुरुआत में करीब छह माह तक मैंने घर से ही काम शुरू किया और बाद में ईस्ट ऑफ कैलाश में दफ्तर शुरू कर दिया।
इस कारोबार को शुरू करने के पीछे ट्यूशन में साथ पढ़ने वाले मित्र वैभव बजाज को श्रेय जाता है जिसे स्कूल के दौर से ही वेबसाइट डिजाइनिंग आती थी। उसे देखकर ही मैं प्रेरित हो गया और मेरे भीतर तभी से वेबसाइट डिजाइनिंग की रुचि बढ़ गई थी। इसके लिए मैंने काफी समय 'ऑनलाइन' भी जानकारी हासिल की। मेरा मानना है कि आपको जो काम अच्छा लगे जिसमें आपकी रुचि हो उसी को करना चाहिए।
निर्णायक मोड़
एम. बी. ए. करने के दौरान अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी का दौर चल रहा था। तभी मैंने निर्णय किया कि नौकरी नहीं कारोबार करूंगा।
प्रेरणा
ट्यूशन साथ पढ़ने वाले एक साथी को वेबसाइट डिजाइनिंग का शौक था। उसे देखकर ही मेरी इसमें रुचि बढ़ गई।
विजय मंत्र
मैंने अकेले ही कारोबार शुरू किया था और कभी नकारात्मक भावना को खुद पर हावी नहीं होने दिया। यही सफलता की कुंजी है।
संदेश
मेरा मानना है कि जिस भी कार्य में रुचि हो, उसे ही पूरे मन से करना चाहिए क्योंकि रुचि वाले कार्य को करने से निश्चित ही सफलता मिलेगी।प्रेरणा











