| दिंनाक: 23 May 2015 13:54:13 |
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गत एक दशक से भारत में आर्थिक अनिर्णय की स्थिति बनी हुई थी। देश बढ़ती मुद्रास्फीति, अनियंत्रित राजकोषीय व चालू खाता घाटे, कृषि उत्पादन में अस्थिरता और औद्योगिक उत्पादन व अवसंरचना विकास में निरन्तर गतिरोध का सामना कर रहा था। ऐसे में नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश को इन गतिरोधों से उबार कर एक ऐसे वितीय समावेषी विकास के मार्ग पर अग्रसर किया है, जो स्वाधीनता के बाद 66 वषोर्ेंे मंे भी सम्भव नहीं हुआ था। बैंकिंग, बीमा व पेन्शन जैसी आवश्यक वित्तीय सेवाओं से अब तक देश की 80 प्रतिशत जनसंख्या वंचित थी। समाज के ऐसे अपवंचित वर्ग के वितीय समावेश के लिये इतनी स्वल्प अवधि में 13़2 करोड़ बैंक खाते खुलवा लेना एक वैश्विक कीर्तिमान है। साथ ही इन खातों के माध्यम से 10,500 करोड़ रुपये तंत्र में समाविष्ट कर लेना एवं नाममात्र के प्रीमियम पर 6़ 5 करोड़ परिवारांे को बीमा व पेन्शन की सुरक्षा प्रदान करा देना दूसरा कीर्तिमान है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अधीन मात्र 12 रुपए के प्रीमियम पर दुर्घटना-मृत्यु पर 2 लाख रुपये का बीमा और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अधीन मात्र 330 रुपए अर्थात एक रुपया दैनिक से भी अल्प अंशदान पर सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये का बीमा देश के अल्प आय वर्ग के परिवारों के लिये सामाजिक सुरक्षा की अमोघ जीवन रेखा सिद्ध होगा। इसी प्रकार अटल पेन्शन योजना के अधीन असंगठित क्षेत्र में कार्यरत ऐसे सभी कार्मिकों को पेंशन प्रदान की जायेगी, जो अब तक किसी नियमित पेंशन योजना के लाभ के भागी नहीं हैं।
उधर वर्ष 2007 से ही देश में औसत खुदरा मूल्य वृद्धि दर 10़ 2 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बनी हुई थी। उसे एक ही वर्ष में आधे से कम यानी 4़9 प्रतिशत तक लाकर थोक मूल्य वृद्धि दर को ऋणात्मक कर (-)2़ 3 प्रतिशत पर ले आना भी अपने आप में कीर्तिमान है। मई 2014 मंे मोदी सरकार के गठन के समय खाद्य पदार्थों की वार्षिक मूल्य वृद्धि दर 9़ 5 प्रतिशत थी, और आलू की कीमतंे 31 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढ़ रही थीं। साथ ही मानसून के भी देश के दीर्घकालीन औसत मानसून से 12 प्रतिशत कमजोर होने से कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा था। सरकार ने ऐसे में जमाखोरों पर छापे डाले थे। जुलाई 2014 में ही देश के संचित भण्डारों से 1़ 5 करोड़ टन खाद्यान्न बाजार में उतारे थे और दिल्ली में कृषि उपज मण्डी कानून को शिथिल कर थोक मण्डी से बाहर भी किसानों को सीधे फल व सब्जी विक्रय के अधिकार दिये थे। इस प्रकार 7 वर्षों की निरंकुश मुद्रास्फीति को एक ही वर्ष में नियंत्रित कर दिया गया।
पिछले वर्ष अनेक कृषि उपजों का निर्यात घटा था, इससे किसान संकटग्रस्त होने लगे थे। सर्वाधिक प्रभाव कपास के किसानों पर हुआ था। तत्काल ही मोदी सरकार ने भारतीय कपास निगम को सक्रिय कर, कपास की 90 लाख गांठों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद कर किसानों को राहत दी और कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की सम्भावित आत्महत्या के दौर को रोकने में सफलता पायी थी। साथ ही सीमान्त कृषकों के लिये नाबार्ड में 25,000 करोड़ रु. के कोष की स्थापना भी महत्वपूर्ण है। देश के संघीय ढांचे की दृष्टि से स्वाधीनता के बाद से ही वित्तीय संसाधनों की कमी और केन्द्रीय सहायता की कड़ी शर्तों के कारण राज्यों का विकास व उनकी वित्तीय स्वायत्तता बाधित होती रही है। ऐसे में चौदहवंे वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप केन्द्र से राज्यांे को मिलने वाली करों की राशि का अंश 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर उस राशि के राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप आबंटन की भी स्वतंत्रता देकर हमारी संघीय व्यवस्था को और सशक्त किया है। कोयला खदानों की नीलामी से प्राप्त रॉयल्टी की राशि में भी राज्यों को हिस्सा देने से सम्बन्धित राज्यों को और अधिक संसाधन प्राप्त होंगे। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से भी विदित होता है कि विनिर्माण, खनन, विद्युत उत्पादन व अवसंरचना सहित सभी क्षेत्रों में उत्पादन वृद्वि दर बढ़़ी है। एक वर्ष पहले तक उत्पादन में गति हृ्रास की शिकार अर्थव्यवस्था आज 7़ 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त कर चीन तक को पीछे छोड़कर विश्व की सर्वाधिक दु्रत गति से बढ़ती हुयी अर्थव्यवस्था बन गई है। उद्यमिता विकास के लिये स्वतंत्र मंत्रालय, सूक्ष्म उद्यमों के लिये मुद्रा बैंक की स्थापना, अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों के लिये संस्थागत ऋण की पहल और कौशल विकास को सवार्ेच्च प्राथमिकता आदि से देश में उद्यम-विकास, रोजगार वृद्धि, औद्योगिक विकास व गरीबी उन्मूलन को गति मिलेगी। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में घरेलू उद्यमों को प्रोत्साहन, अनेक मामलों में स्व-प्रमाणीकरण, 10 अनुज्ञापनों या लाइसेंसों का एक ई-व्यवसाय पोर्टल में समावेश, औद्योगिक गलियारा प्रकल्प के गठन जैसे और भी अनगिनत कदम सरकार ने उठाये हैं। पिछली सरकार के अनिर्णय से लम्बित 700 खरब रुपये लागत की परियोजनाओं को अनुमोदन के साथ ही रेलवे के आधुनिकीकरण, वर्ष 2017 तक वर्तमान 11 किमी़ दैनिक से बढ़ाकर 30 किमी. सड़कों के निर्माण के लक्ष्य और नये प्रस्तावित अल्ट्रा मेगा पावर प्लाण्ट्स सहित अवसंरचना क्षेत्र के लिये किये गए सभी प्रावधान निवेश, उत्पादन व रोजगार संवर्धन को गति देंगे। साथ ही, विदेशी मुद्रा भण्डार 304 अरब डालर से 12 प्रतिशत बढ़कर 341 अरब डालर पर पहुंचा है। देश के पास विश्व की सर्वाधिक 16 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि, सर्वाधिक 5़ 9 करोड़ हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र, सर्वाधिक युवा जनसंख्या और सर्वाधिक अभियांत्रिकी स्नातक हैं। ऐसे में अब आवश्यकता यह भी है कि हम देश में विश्व स्तरीय उद्यमों, उत्पादों व ब्राण्डों का भी विकास करें, जिससे देश की प्रतिभा को देश के लिये कार्य करने के प्रचुर अवसर मिलें और वह विदेशी उद्यमों के लिये ही कार्य करने को बाध्य न हो ।
(लेखक पैसेफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति हैं।)