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करनाल (हरियाणा) में 14 फरवरी को सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 822वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इसका आयोजन 'योद्धा स्मारक समिति, हरियाणा' द्वारा किया गया था। समारोह का शुभारंभ हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी एवं समिति के अध्यक्ष श्री दर्शनलाल जैन ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि भारत का अतीत स्वाभिमानी राष्ट्र का रहा है। भारत ने कभी किसी पर पहले हमला नहीं किया, पर हमलावरों को जवाब देने में कभी पीछे भी नहीं रहा। इस संस्कृति का बीजारोपण सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने किया था। बाद में इसका अनुसरण शिवाजी महाराज, गुरु गोबिन्द सिंह जी, महाराजा रणजीत सिंह, महाराणा प्रताप जैसे वीरों ने किया। वीरों का नाम लेने मात्र से ही शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगता है। कार्यक्रम में 'योद्धा स्मारक समिति, हरियाणा' ने उनके सामने एक मांग-पत्र भी रखा, जिसे उन्होंने हरियाणा सरकार को अग्रसारित कर दिया। मांग-पत्र में मुख्यत: सम्राट पृथ्वीराज चौहान का करनाल के पास तरावड़ी में स्मारक व कन्या महाविद्यालय बनाना, अन्य योद्धाओं व क्रांतिकारियों के स्मारक के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों के नाम विदेशी आक्रांताओं से बदल कर भारत के महान योद्धाओं और शहीदों के नाम पर रखना, वर्ष 326 बी़ सी. से वर्ष 1707 ई. तक के कालखंड को इतिहास की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना तथा पाकिस्तान स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान की कुल देवी के मन्दिर तक यात्रा की व्यवस्था करना, आदि मांगें हैं।
इससे पहले वीर रस के कवि गजेन्द्र सोलंकी ने प्रखर राष्ट्रवाद का शंख गुंजाया। इतिहासवेत्ता कुलदीपचन्द अग्निहोत्री ने कहा कि हमारे वीर योद्धाओं की अस्थियां आज भी विदेशों में हैं, उन्हें सम्मान देना बहुत आवश्यक है। विश्व हिन्दू परिषद् के महामंत्री श्री विनायक देशपांडे ने शूरवीर पृथ्वीराज चौहान को उस समय के विश्व का सर्वश्रेष्ठ योद्धा बताते हुए कहा कि उनका 11 वर्ष की आयु में राजतिलक हुआ, उन्होंने 27 वर्ष का जीवन जीया और 43 वर्ष की आयु में विदेशी धरती पर ही युद्ध के दौरान मृत्यु हुई। ऐसे शौर्यपूर्ण जीवन का सेकुलर इतिहासकारों ने निम्नस्तरीय मूल्यांकन किया और इतिहास के साथ अन्याय किया। समारोह में राज्यपाल ने डॉ़ संजीव शर्मा की पुस्तक 'संस्कृत साहित्य का विकास' का लोकार्पण भी किया। ल्ल प्रतिनिधि
इम्फाल में रानी मां गाइदिन्ल्यू की जन्मशती
मणिपुर की राजधानी इम्फाल में गत दिनों स्वतंत्रता सेनानी रानी मां गाइदिन्ल्यू की जन्मशती के उपलक्ष्य में एक समारोह आयोजित हुआ। समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह को सम्बोधित करते हुए श्रीमती मृदुला सिन्हा ने कहा कि रानी मां गाइदिन्ल्यू का पूरा जीवन तपस्या के समान था। उन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया था। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने समाज और देश की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताक्का ने सलाह दी कि सरकार रानी मां गाइदिन्ल्यू के नाम से 'स्त्री शक्ति सम्मान' शुरू करे। समारोह को वनवासी कल्याण आश्रम की उपाध्यक्ष डिकी डोमा, इतिहासकार प्रो. गंगमुमेई कामई, प्रो. बिमोला देवी, प्रो. लाबीलुंग गोलमेई और मणिपुर के महाराजा लिशेम्बा संजोबा ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर मणिपुरी लोकनृत्य भी प्रस्तुत किया गया, जिसकी लोगों ने बड़ी प्रशंसा की। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ताओं ने कड़ी मेहनत की। ल्ल प्रतिनिधि
'स्वाभिमानी और शक्तिशाली समाज बनाएं'
पिछले दिनों सहारनपुर (उ.प्र.) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ। इसमें सहारनपुर महानगर तथा बेहट और देवबंद जिले के छह हजार से अधिक स्वयंसेवक गणवेश में शामिल हुए। सबसे पहले ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद स्वयंसेवकों ने व्यायाम-योग का प्रदर्शन किया।
मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख श्री अजीत महापात्रा ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम एक ही परिवार के हैं और इसका अनुभव कराने के लिए संघ इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। इन कार्यक्रमों से स्वयंसेवक और अधिक ऊर्जा से कार्य करने की प्रेरणा पाते हैं। उन्होंने कहा कि आपस में बंटे होने के कारण ही हमारे पर आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया और हमें पराधीन कर दिया। काफी संघर्ष के बाद हमें स्वतंत्रता मिली है। इसको बनाए रखने के लिए हमें सदैव जागरूक रहने की जरूरत है। संघ शाखाओं के माध्यम से समाज को संगठित, समर्थ, स्वाभिमानी और शक्तिशाली बनाने का प्रयास कर रहा है।
इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक श्री धनीराम, प्रान्त कार्यवाह श्री फूल सिंह, क्षेत्रीय संघचालक डॉ. दर्शनलाल अरोड़ा, धर्म जागरण प्रमुख श्री ईश्वर दयाल सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे। -प्रतिनिधि











