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हिन्दू और बौद्घ मतों के बंधुत्व पर अपने ओजस्वी उद्बोधन में 14वें परम पावन दलाई लामा ने स्वयं को अच्छा हिन्दू बताते हुए कहा कि हिन्दू और बौद्घ दोनों आध्यात्मिक भाई हैं। साथ ही, हिन्दू तंत्र और बुद्घ तंत्र में काफी समानतायें हैं। दलाई लामा ने आत्मा और अनात्मा के विषय को नितांत निजी आस्था का मामला बताया।
उन्होंने भारत के प्राचीन ज्ञान एवं पूर्ण विकसित दर्शन को आधुनिक विश्व के लिये अति प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह विश्व को एक समान मानव होने का बोध कराते हुए धार्मिक विश्वासों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान करने में पूर्ण समर्थ है। उन्होंने अहिंसा और धार्मिक समरसता के तत्वों को बहुत आवश्यक बताते हुए हिन्दू धर्म को बौद्ध मत का सहोदर बताया।











