| दिंनाक: 22 Nov 2014 16:35:52 |
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विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी 20 के शिखर सम्मेलन में कालेधन के विरुद्घ सामूहिक पहल हेतु भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव को व्यापक समर्थन हमारी एक अभूतपूर्व अन्तरराष्ट्रीय सफलता है। आस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन नगर में हुए इस सम्मेलन में 16 नवम्बर को जी-20 समूह के देशों ने कालेधन के मसले पर भारत के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कर-सम्बन्धी सूचनाओं के विनिमय और पारदर्शिता के प्रस्ताव को मान लेने और साथ ही भारत सहित अन्य विकासशील देशों के धन-प्रेषण की लागत को भी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने के प्रस्ताव पर 'व्यावहारिक हल'निकालने पर सहमति, हमारे बढ़ते अन्तरराष्ट्रीय प्रभाव का परिचायक है। वस्तुत: कालेधन के विरुद्घ प्रभावी कार्यवाही के हमारे प्रयासों को फलदायी बनाने का यही एकमात्र उपयुक्त मंच सिद्घ हो सकता था, और प्रधानमंत्री मोदी ने उसका अत्यन्त समयोचित उपयोग किया है।
वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जी़ डी़ पी़) में जी-20 देशों का अंश आज 85 प्रतिशत है। इस प्रकार इन सभी देशों के बीच कालेधन पर बन रही अपूर्व वैश्विक सहमति भारत के लिये आज बहुत महत्व रखती है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तर्कपूर्ण दृढ़ता से कालेधन की समस्या से निपटने के लिए नए वैश्विक मानक और सूचनाओं के स्वतंत्र आदान-प्रदान पर समर्थन का आह्वान किया था, यह उसी का परिणाम था। शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कालेधन की समस्या से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए दुनियाभर के देशों के बीच बेहतर समन्वय से काम करने की आवश्यकता को अत्यन्त प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि नए मानकों से ही सभी देशों को विदेशों में छुपाकर रखे गए कालेधन से.. जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी और उसे देश में वापस लाया जा सकेगा। मोदी ने खासतौर से कर चोरों की पनाहगाह (टेक्स हेवन) माने जाने वाले देशों से पूर्व में हुई संधियों से जुड़े दायित्वों के उपरान्त भी 'कर' संबंधी सूचनाएं पारदर्शितापूर्वक देने का आग्रह करते हुये कहा कि भारत इस दिशा में हरसंभव तरीके से सहयोग करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव पर कि कर-पनाहगाह कहे जाने वाले इन कर-मुक्त क्षेत्राधिकार वाली छोटी-छोटी अर्थव्यवस्थाओं को किसी भी कम्पनी को पूर्ण कर-मुक्ति देने का अधिकार नहीं होना चाहिये। मोदी के इस प्रस्ताव पर हुई सहमति के बाद इस विषय पर अब अन्तिम अधिसूचना के बाद सभी कर-पनाहगाह कहे जाने वाले देशों को प्रत्येक कम्पनी पर करारोपण करना बाध्यकारी होगा।
कालेधन का मुद्दा हमारे देश में आज राजनीतिक रूप से भी बेहद संवदेनशील है। अपने चुनाव घोषणापत्र के अनुरूप सत्ता में आने के बाद, मोदी सरकार ने एक ही सप्ताह में सबसे पहला फैसला ही कालेधन की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का किया था। संप्रग सरकार तो सवार्ेच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बाद भी इसे दो वर्ष से टाल रही थी। प्रधानमंत्री ने कालेधन पर कार्यवाही की अपनी प्रतिबद्घता के आलोक में ही सीमा-पार कर चोरी और कर वंचना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूंजी और प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रवाह से कर चोरी और मुनाफे को दूसरे देशों में भेजने के जो नए अवसर खुले हैं, और उससे देशों के कर आधार में होने वाली कमी और मुनाफे के स्थानांतरण की समस्या का 'बीईपीएस प्रणाली' से, विकासशील और विकसित दोनों ही प्रकार के देशों की इस समस्या का समाधान होगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आज के समय में अन्तरराष्ट्रीय करारोपण कानूनों में लचीलापन न होने और अतीत में हुए दोहरेे कर से बचाव के समझौतों के कारण सूचनाओं का आदान-प्रदान अत्यन्त कठिन है। लेकिन अब इन समझौतों पर पुन: वार्ता भी सहज हो सकेगी। जी-20 की इस सहमति के बाद इसकी अंतिम अधिसूचना जारी हो जाने के बाद किसी भी कर-पनाहगाह के लिए, किसी भी कम्पनी को पूरी तरह से कर मुक्ति देना संभव नहीं होगा। यह प्रावधान भारत सहित अधिकतर जी-20 देशों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्व होगा क्योंकि अब तक लक्जमबर्ग जैसे कई कर पनाहदाता देश विशेष अधिसूचनाओं के माध्यम से अनेक कम्पनियों को पूरी तरह से कर मुक्त कर देते थे। इसके कारण ये कम्पनियां अपने मूल कारोबार वाले देश में कर चुकाने की अपेक्षा ऐसी कर पनाहगाहों को अपना विकल्प चुन लेती थीं और अपने मौलिक कारोबार वाले देश में कर चुकाने से पूरी तरह बच जाती थीं। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। इससेे भारत सहित कई देशों को अपना कर राजस्व बढ़ाने में सफलता मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कालेधन के मुद्दे को विश्व के सभी नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत में उठाते रहे हैं। इनमें जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता यथा ब्राजील के किल्मा रौजैक, चीन के शी जिनपिंग, रूस के व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के ज़ुमा के साथ बाहरी देशों में अघोषित आय पर चर्चा की थी। इस दूरदर्शितापूर्ण पूर्व भूमिका से ही मोदी को यह अपूर्व सफलता मिली है। -डा.भगवती प्रकाश शर्मा
(लेखक आर्थिक विषयों के विशेषज्ञ एवं पैसेपिक विश्वविद्यालय के उपकुलपति हैं)